कारगिल में GenZ की धमकी देने वाली श्रुति भड़ाना है कौन?

दीदी कश्मीर में सेना पर सवाल उठाती हैं।

दीदी 43 साल की होके खुद को Gen Z कहती हैं (दीदी को शायद कॉन्सेप्ट पता नहीं होगा ये जनरेशन वाला, बस पिछले कुछ दिनों से Gen Z का ट्रेंड देख के इन्हें लगा होगा कि जो शोर मचा के सिस्टम को गाली दे, उसे Gen Z कहते हैं)

दीदी गुस्से से कहती हैं “We are not tolerate this nonsense.” और आप को जान के आश्चर्य होगा कि ये दीदी ऑनलाइन ट्यूशन पढ़ाती हैं ~ अंग्रेजी और कम्युनिकेशन के।

दीदी का ऑनलाइन ट्यूटर प्रोफाइल है। दीदी की रेटिंग 2.8 है। उसका भी मुझे आश्चर्य है कि 2.8 भी कैसे मिली।

फोटो में दीदी के प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट है। एक अंग्रेजी और कम्युनिकेशन के ट्यूटर होते हुए आप प्रोफाइल को पढ़िए एक बार। 😂😂😂

दीदी को Curriculum की स्पेलिंग नहीं आती।

दीदी को Communication की स्पेलिंग नहीं आती।

दीदी को अंग्रेजी में Punctuation और Separators का कोई आईडिया नहीं है।

दीदी को एडजेक्टिव (Resilient) और नाउन (Self-confidence) के पैरेललिस्म का कोई अता पता नहीं है।

दीदी ने कभी इनकम टैक्स नहीं भरा है लेकिन दीदी इतना टैक्स देती हैं कि उस से मिली सैलरी से एक आर्मी ऑफिसर को इनकम टैक्स भरना पड़ जाता है।

दीदी की बहुत भद्द पिट चुकी है।

अब दीदी जल्दी ही सोशल मीडिया पर रोना धोना मचाएंगी। कहेंगी कि मुझे गाली पड़ रही हैं, परिवार के लिए भद्दी बात हो रही है, धमकी मिल रही है, बॉडी शेमिंग कर रहे हैं लोग, अंग्रेजी का मजाक उड़ा रहे हैं।

और फिर हम कहेंगे, दीदी आप तो Gen
Z हो। आपके जैसे GenZ वाली भीड़ ने ही तो जंतर मंतर पर गाली देने को, रिश्तों का मजाक उड़ाने को, परिवार पर फब्तियों को, मारने को, धमकियों को बिल्कुल नॉर्मल किया था।

तो एंजॉय दीदी!

Anurag Sharma

 

GenZ पर काकरोच अभिजीत दीपके के समाज पर पड़ रहे बुरे असर के बारे में एक कश्मीरी लड़की से की गई बात चीत का एक अंश।

सवाल – लेह श्रीनगर राज मार्ग पर उस दिन वहाँ आम लोगों और भारतीय सेना के बीच असल में क्या हुआ था?

कश्मीरी लड़की –

मैं वहाँ मौजूद थी। असल में, बहुत तेज़ बारिश हो रही थी और पहाड़ों से भूस्खलन (लैंडस्लाइड) का खतरा था। इसीलिए बारिश रुकने तक बैरिकेड्स लगाए गए थे और यह हमारी सुरक्षा के लिए ही था।

उस महिला के बारे में, मैं बात नहीं करना चाहती। उसने हमारी सेना को सिर्फ़ उनकी सैलरी तक की औक़ात तक में सीमित कर दिया।

वे सच में 5 से 10 डिग्री सेल्सियस तापमान में काम करते हैं, सिर्फ़ सैलरी के लिए नहीं। देश के लिये कुछ अपने लिये।

उस बकवासी – चिल्लाने वाली महिला ने यह भी कहा कि हम टैक्स देते हैं, तो ये सेना के जवान हमसे कैसे बड़े हो गए?

सच यह भी है कि उसके वॉलपेपर पर अभिजीत दिपके की तस्वीर थी, वही आदमी जो पिछले कई माहों से रोज़ पुलिस अधिकारियों का अपमान करता है, मुंबई और दिल्ली पुलिस की तुलना करता है ।

सबसे महत्त्व पूर्ण बात उसमें और उसके अनुगामियों में बड़ों के प्रति ज़रा भी सम्मान नहीं दिखायी पड़ा था , तब हम उससे और उसके अनुयायियों से आगे भी सेना तथा पुलिस के साथ अच्छे व्यवहार की उम्मीद कैसे कर सकते हैं ।

जो लोग दीपके तथा उसके अनुगामी जेन जी के एजेंडा को मानते हैं, वे सेना का सम्मान क्यों ही करेंगे? उस , समूह ने पुलिस और सेना को गत पूरे माह अपशब्द कहे।

अब आगे क्या कहें ?

अब तो यह नहीं लगता कि भारत वर्ष में क्या किसी और पेशे को बुरा-भला कहना बाकी रह गया है?

अभिजीत दिपके द्वारा अपने एजेंडा के लिए GenZ का ब्रेनवॉश करने के मुद्दे पर आवाज़ उठाने के लिए इस लड़की की हिम्मत की दाद देनी होगी।

अब इंतज़ार कीजिए कि वे लोग उस लड़की को भी ‘गोदी मीडिया’ का शीर्षक दे ही देंगे।
———
विद्या विनोद पाठक
दिनांक : २०.०८.२०२६

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *