सबरीमाला मंदिर में ‘हलाल गुड़’ ! भगवान अयप्पा मंदिर में धार्मिक परंपरा पालन जरूरी: केरल हाई कोर्ट
Sabarimala Halal Jaggery Row Kerala Hc Directs Devaswom Board To Follow Temple Customs
सबरीमाला मंदिर में ‘हलाल गुड़’ विवाद ! भगवान अयप्पा मंदिर में धार्मिक परंपराओं का पालन जरूरी: केरल हाई कोर्ट
सबरीमाला का भगवान अयप्पा मंदिर केरल के पथानामथिट्टा जिले में स्थित लगभग 800 साल पुराना प्रसिद्ध हिंदू मंदिर है। पिछले दिनों यहां ‘हलाल गुड़’ की खरीदारी पर विवाद हो गया है।
नई दिल्ली 04 अक्टूबर जुड़ता : केरल के पश्चिमी घाट में स्थित सबरीमाला मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित एक प्राचीन और प्रसिद्ध हिंदू तीर्थ स्थल है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव और विष्णु के मोहिनी रूप के पुत्र भगवान अय्यप्पा ने महिषासुरिणि महर्षि का वध करने के बाद यहाँ ध्यान लगाया था। केरल के हिंदुओं में इस मंदिर को लेकर बड़ी आस्था है। लेकिन पिछले दिनों मंदिर के प्रसाद से जुड़ा एक विवाद कोर्ट तक पहुंचा। मामला था मंदिर प्रसादम में हलाल गुड़, जो मुस्लिमों की आस्था से जुड़ा है, उसके इस्तेमाल का। केरल हाई कोर्ट ने सबरीमाला मंदिर में प्रसाद और नैवेद्य तैयार करने के लिए खरीदी गई ‘हलाल प्रमाणित’ गुड़ की पैकेजिंग को लेकर दायर याचिका का निपटारा करते हुए ट्रावणकोर देवस्वम बोर्ड को कहा कि पूजा सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों के साथ साथ मंदिर में लागू धार्मिक रीति रिवाजों और आवश्यकताओं के अनुरूप होनी चाहिए। जानें पूरा मामला
Sabarimala Halal Jaggery Row Kerala HC
भगवान अयप्पा के प्रसाद में ‘हलाल गुड़’ का मामला, केरल HC ने कहा- परंपराओं का रखें ध्यान
मंदिर में ‘हलाल गुड़’ पहुंचा कैसे?
हाई कोर्ट के सामने रखी जानकारी के मुताबिक मंदिर के बोर्ड ने ई-टेंडर प्रक्रिया से गुड़ की बड़ी मात्रा खरीदने की प्रक्रिया अपनाई थी। महाराष्ट्र की कंपनी Vardhan Agro Processing Limited सबसे कम बोली लगाने वाली थी और उसे 19,96,034 किलोग्राम गुड़ पाउडर की आपूर्ति करनी थी। कंपनी कुछ पश्चिम एशियाई देशों में भी गुड़ निर्यात करती थी। कोर्ट के अनुसार इसी निर्यात कारोबार के कारण पैकेजिंग पर ‘हलाल प्रमाणन’ का निशान मौजूद था। मंदिर में प्रसाद के रुप में अरवणा और उन्नियप्पम जैसे व्यंजन भक्तों में खासे लोकप्रिय हैं जिनके लिए गुड़ की जरूरत होती है।
अरवणा और उन्नियप्पम जैसे प्रसाद की खास बात
मंदिर भगवान अयप्पा को समर्पित प्रमुख धार्मिक स्थल है और इसकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार और यहां विशिष्ट पूजा-पद्धतियां तथा अनुष्ठान प्रचलित हैं। यहां प्रसाद के रुप में अरवणा और उन्नियप्पम जैसे व्यंजन भक्तों में खासे लोकप्रिय हैं। अरवणा गुड़, चावल और घी से तैयार होने वाला पारंपरिक प्रसाद है, जबकि उन्नियप्पम चावल, गुड़ और अन्य सामग्री से बनाया जाता है। इन सामग्रियों की खरीद और प्रसाद तैयार करने की जिम्मेदारी मंदिर प्रशासनिक व्यवस्था के तहत ट्रावणकोर देवस्वम बोर्ड से जुड़ी है। इनके बनाने के लिए गुड़ की खरीदारी हुई थी।
विवाद की शुरुआत
दरअसल, यह मामला 2021 में एस.जे.आर. कुमार की ओर से दायर रिट याचिका से शुरू हुआ था। याचिकाकर्ता ने सबरीमाला मंदिर के प्रसिद्ध अरवणा और उन्नियप्पम जैसे प्रसाद तैयार करने में कथित तौर पर हलाल गुड़ की खरीदारी हुई है। उनका तर्क था कि हलाल प्रमाणन दूसरे धार्मिक समुदाय की धार्मिक मान्यताओं और प्रक्रियाओं से जुड़ा है, इसलिए ऐसे गुड़ को भगवान अयप्पा के नैवेद्यम् के लिए इस्तेमाल करना मंदिर की परंपराओं के विपरीत होगा। याचिका में केवल उच्च गुणवत्ता और ‘सात्विक’ सामग्री के इस्तेमाल की मांग भी की गई थी।
केरल हाई कोर्ट में सुनवाई और फैसला
हाई कोर्ट ने कहा कि आदर्श स्थिति में ट्रावणकोर देवस्वम बोर्ड को यह सुनिश्चित करने के लिए अधिक सावधानी बरतनी चाहिए थी कि सप्लायर द्वारा दी गई सामग्री पर ऐसे चिन्ह, मार्किंग या घोषणाएं न हों जिनसे मंदिर की धार्मिक परंपराओं के साथ टकराव की आशंका पैदा हो।
मामले में खाद्य सुरक्षा प्रयोगशाला की जांच रिपोर्ट भी हाई कोर्ट के सामने रखी गई थी। कोर्ट ने रिपोर्टों के आधार पर कहा कि आपूर्ति किए गए गुड़ की गुणवत्ता संतोषजनक थी और जांच में ऐसा कोई पदार्थ या तत्व नहीं मिला जो उसे प्रसाद बनाने के लिए अनुपयुक्त बनाता हो।
फिर केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच, जस्टिस राजा विजयराघवन वी. और जस्टिस के.वी. जयकुमार ने याचिका का निपटारा करते हुए बोर्ड को भविष्य में ‘due care and caution’ बरतने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ई-टेंडर दस्तावेजों में उपयुक्त और जरूरी शर्तें शामिल की जाएं ताकि नैवेद्य और प्रसाद बनाने के लिए खरीदी जाने वाली सामग्री निर्धारित गुणवत्ता मानकों तथा मंदिर की धार्मिक परंपराओं और आवश्यकताओं के अनुरूप हो।
फैसले के निहितार्थ
हालांकि केरल हाई कोर्ट ने अपने आदेश में यह नहीं कहा कि हर ‘हलाल प्रमाणित’ खाद्य सामग्री स्वतः ही सबरीमाला में इस्तेमाल के लिए कानूनी रूप से प्रतिबंधित है। सबरीमाला ‘हलाल गुड़’ विवाद में केरल हाई कोर्ट ने धार्मिक परंपराओं और खाद्य गुणवत्ता, दोनों पहलुओं को अलग अलग ध्यान में रखा।
यहां यह ध्यान देने वाली बात है कि याचिका में धार्मिक उपयुक्तता को लेकर आपत्ति थी, जबकि प्रयोगशाला जांच खाद्य गुणवत्ता से संबंधित थी और अदालत का आदेश उसी पर आधारित था।
अदालत ने पैकेजिंग पर मौजूद प्रमाणन और सामग्री की वास्तविक गुणवत्ता के सवालों को अलग-अलग देखा। इसी आधार पर कोर्ट ने भविष्य की खरीद प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और सावधानीपूर्ण बनाने पर जोर दिया।
भगवान अयप्पा (Lord Ayyappa) दक्षिण भारत के एक अत्यंत प्रसिद्ध और लोकप्रिय हिंदू देवता हैं। इन्हें ‘अय्यप्पन’, ‘शास्ता’ और ‘मणिकण्ठन’ के नाम से भी जाना जाता है।
- हरिहर पुत्र: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान अयप्पा की उत्पत्ति भगवान शिव और भगवान विष्णु के स्त्री रूप (मोहिनी अवतार) के मिलन से हुई थी, इसलिए उन्हें हरिहरपुत्र भी कहा जाता है।
- बचपन: उन्हें पन्तलम (Pandalam) राज्य के राजा राजशेखरन को एक नदी के किनारे मिले थे, जिन्होंने उनका नाम मणिकण्ठन रखा क्योंकि उनके गले में एक मणिक (रत्न) बंधा हुआ था।
- उद्देश्य: उनका जन्म महिषी नामक राक्षसी का वध करने के लिए हुआ था, जिसे वरदान था कि उसका अंत केवल शिव और विष्णु की संतान द्वारा ही हो सकता है।
- स्थान: यह मंदिर केरल के पेरियार टाइगर रिजर्व में 18 पहाड़ियों के बीच घने जंगलों में स्थित है। इसे सबरीमाला श्रीधर्मषष्ठ मंदिर के नाम से जाना जाता है।
- 18 पवित्र सीढ़ियां: मंदिर तक जाने के लिए भक्तों को 18 पवित्र सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं, जो मानव शरीर की इंद्रियों और गुणों का प्रतीक हैं।
- कठिन व्रत और नियम: दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले 41 दिनों तक कठिन ब्रह्मचर्य, सात्विक (शाकाहारी) भोजन और संयम का पालन करना होता है। भक्त सिर पर ‘इरुमुड़ी’ (पोटली) रखकर यात्रा करते हैं।
- मकर संक्रांति: मकर संक्रांति (मकर विलक्कू) के त्योहार पर सबरीमाला में विशेष ज्योति के दर्शन होते हैं, जिसका बहुत बड़ा धार्मिक महत्व है।


