JNU में आधी रात गुटीय हिंसा,फिर दिखे 2020 वाले नकाबपोश
JNU Violence: आधी रात क्यों सुलग उठा जेएनयू? VC के बयान से ABVP-लेफ्ट झड़प तक,जानें हिंसा की आंतरिक कथा
देहरादून 22 फरवरी 2026। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर तब देश भर में चर्चा में आ गया जब रविवार, 22 फरवरी 2026 की आधी रात जेएनयू कैंपस तब रणक्षेत्र में बदल गया, जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और वामपंथी छात्र संगठनों में भीषण झड़प हो गई।
लाठी-डंडों और पथराव के बीच कई छात्र गंभीर घायल हो गए हैं, जिससे पूरे कैंपस में भारी पुलिस बल लगाना पड़ा है। हिंसा में कई छात्र गंभीर घायल हुए हैं। घटना ने एक बार फिर कैंपस की सुरक्षा, अभिव्यक्ति की आजादी और प्रशासनिक भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पूरा मामला विश्वविद्यालय की कुलपति शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित (Shantishree Dhulipuri Pandit) के एक विवादित इंटरव्यू और छात्र संघ पदाधिकारियों के निष्कासन के बाद संघर्ष का है। देखते ही देखते साबरमती टी-पॉइंट से लेकर लाइब्रेरी तक का इलाका लेफ्ट बनाम राइट के जंग का मैदान बन गया। विस्तार से जानिए जेएनयू मामले में अब तक क्या-क्या हुआ…
JNU Campus Protest: कुलपति के बयान से कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
इस पूरे टकराव का कारण JNU कुलपति (Vice Chancellor) शांतिश्री धुलीपुडी पंडित का एक पॉडकास्ट इंटरव्यू है। करीब 52 मिनट के इस इंटरव्यू में कुलपति ने UGC की नई इक्विटी (Equity) नियमावली पर टिप्पणी करते हुए दलितों और अश्वेत समुदाय (Blacks) को लेकर ऐसे बयान दिए, जिन्हें छात्रों ने जातिवादी और अपमानजनक बताया।
कुलपति ने अपने पॉडकास्ट में कहा था- आप हमेशा पीड़ित बनकर आगे नहीं बढ़ सकते। यह अश्वेतों के लिए किया गया, वही चीज यहां दलितों के लिए लाई गई। छात्र संगठनों का आरोप है कि यह बयान न केवल असंवेदनशील है, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में जातिगत वर्चस्व भी दर्शाता है।
यह पूरा मामला यहीं नहीं रुका। हाल ही में JNUSU के पांच निर्वाचित पदाधिकारियों को कथित रूप से CCTV कैमरों में तोड़फोड़ के आरोप में दो सेमेस्टर के लिए निष्कासित (Rusticate) कर दिया गया और उन पर ₹20,000 का जुर्माना लगाया गया। वामपंथी छात्र संगठनों और JNUSU का कहना है कि यह कार्रवाई छात्र राजनीति को दबाने और असहमति की आवाज को कुचलने की कोशिश है।
JNU Midnight Violence: ‘समता जुलूस’ से हिंसा तक- आधी रात को कैंपस में क्या हुआ ?
रविवार रात करीब 12:30 बजे JNUSU और लेफ्ट संगठनों ने VC के इस्तीफे और निष्कासन आदेश वापस लेने की मांग को लेकर ‘समता मशाल जुलूस’ निकालने का ऐलान किया। मार्च साबरमती टी-पॉइंट से शुरू हुआ और ईस्ट गेट की ओर बढ़ा, जो कुलपति आवास के पास है। छात्रों का दावा है कि यह हाल के महीनों का सबसे बड़ा छात्र मार्च था इसी दौरान हालात बिगड़ गए और आधी रात को हिंसक झड़प, पत्थरबाजी और लाठीचार्ज होने लगा। रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच माहौल अचानक हिंसक हो गया।
वामपंथी संगठनों का आरोप है कि ABVP कार्यकर्ताओं ने मार्च कर रहे छात्रों पर हमला किया वहीं ABVP का दावा है कि लेफ्ट से जुड़े छात्रों ने लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों को निशाना बनाया। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में पत्थरबाजी, भगदड़ और लाठियों के इस्तेमाल के दृश्य दिख रहे हैं। कई छात्रों को सिर, हाथ और पीठ में गंभीर चोटें आईं।
JNU ABVP Left Clash: दोनों पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप
लेफ्ट और JNUSU का आरोप है कि प्रशासन ने छात्रों से संवाद करने के बजाय ABVP को भिड़ने की छूट दी जिससे निहत्थे छात्रों पर टारगेटेड हमला किया गया। यह हिंसा पूर्व नियोजित थी। ABVP का दावा है कि लाइब्रेरी में पढ़ रहे छात्रों पर हमला हुआ जो राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि कायरतापूर्ण हिंसा है।
JNU प्रशासन का बयान: छात्र धमकाये गये, लाइब्रेरी में जबरन घसीटा
JNU प्रशासन ने कहा है कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों ने कई अकादमिक इमारतें जबरन बंद कर दी। सेंट्रल लाइब्रेरी में घुसकर पढ़ाई कर रहे छात्रों को धमकाया गया और छात्रों को जबरन प्रदर्शन में शामिल होने को डराया और दबाव डाला गया।
प्रशासन के अनुसार,इसी के चलते 22 फरवरी रात कैंपस में दो छात्र समूह भिड गये, जिसे प्रशासन बेहद गंभीरता से ले रहा है। प्रशासन ने साफ कहा कि सार्वजनिक संपत्ति नष्ट करने और कैंपस के समावेशी वातावरण तोड़ने की कोई भी कोशिश सहन नही होगी।
विश्वविद्यालय की कुलपति की सफाई: मेरा बयान गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया
विवाद बढ़ने के बाद VC शांतिश्री धुलीपुडी पंडित ने सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका बयान संदर्भ से काटकर पेश किया गया। वे स्वयं OBC पृष्ठभूमि से हैं। उनकी टिप्पणी किसी समुदाय पर नहीं बल्कि वोकिज्म और इतिहास की गलत व्याख्या पर थी। निष्कासन पर उन्होंने कहा कि प्रशासन ने संयम बरता वरना कठोर कार्रवाई हो सकती थी।
JNUSU ने अब इस विषय पर राष्ट्रीय विरोध दिवस मनाने की घोषणा की है। छात्र संगठनों ने कहा है कि जब तक VC त्यागपत्र नहीं देतीं और निष्कासन आदेश वापस नहीं होता तब तक आंदोलन चलेगा। प्रदर्शन आगे बढ़ाते हुए छात्रों ने स्कूल ऑफ सोशल साइंसेज, लैंग्वेज, इंटरनेशनल स्टडीज, आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स और लॉ सेंटर में लॉकडाउन की भी चेतावनी दी है।
कैंपस में तनाव यथावत, प्रशासन खामोश
JNU में वैचारिक मतभेद अक्सर हिंसा का रूप ले लेते हैं लेकिन इस बार मामला कुलपति के सीधे बयानों से जुड़ा है। घटना के बाद से JNU कैंपस में भारी तनाव है। कई छात्र डरे हुए हैं और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। अब तक विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सवाल जो अब भी बाकी हैं क्या छात्रों पर कार्रवाई राजनीति से प्रेरित थी?
कैंपस में बार-बार हिंसा क्यों भड़कती है? छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा? इन सवालों के जवाब अभी बाकी हैं, लेकिन इतना तय है कि JNU एक बार फिर देश की राजनीति और बहस के केंद्र में आ गया है।
JNU में पहली बार नहीं सुलगी है हिंसा की चिंगारी, पांच साल पहले भी नकाबपोशों ने मचाया था आतंक
JNU Violence: जेएनयू एक बार फिर से हिंसा को लेकर चर्चा में है, इस बार देर रात निकाले गए एक मार्च के बाद हिंसा भड़क गई. यूनिवर्सिटी में ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले भी कैंपस में कई बार हिंसा की चिंगारी सुलगी है.
JNU Violence: जेएनयू में हिंसा का इतिहास
JNU Violence: दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी को पढ़ाई के अलावा तमाम मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखने के लिए भी जाना जाता है. देश में हुए कई बड़े आंदोलनों में जेएनयू के छात्रों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया. हालांकि यूनिवर्सिटी विवादों के चलते भी खूब चर्चा में रही है. अब एक बार फिर यहां अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और लेफ्ट संगठनों के बीच हिंसक झड़प हुई है, जिसमें कई छात्र घायल हो गए. ये पहली बार नहीं है जब जेएनयू में ऐसा कुछ हुआ हो, इससे पहले भी कई बार यूनिवर्सिटी में इस तरह का हंगामा मचा है. करीब 5 साल पहले जेएनयू में इसी तरह की हिंसा हुई थी, जिसमें कुछ नकाबपोश अंदर घुसे और छात्रों के साथ जमकर मारपीट हुई.
क्या है ताजा मामला?
इस मामले की शुरुआत JNU की कुलपति शांतिश्री धुलीपुड़ी पंडित के एक बयान से हुई, उनके एक पॉडकास्ट में यूजीसी नियमों को लेकर दिए गए कुछ बयानों को लेफ्ट दलों ने जातिवादी बताया. इसके बाद छात्र संघ पदाधिकारियों के सस्पेंशन ने मामले को और ज्यादा बढ़ा दिया और पूरा जेएनयू सुलगने लगा. इसे लेकर जेएनयू छात्र संघ की तरफ से एक बड़ा मार्च बुलाया गया और इसी दौरान ABVP और लेफ्ट के छात्र आपस में भिड़ गए.
जेएनयू में आधी रात को लाठी-डंडे चले और पत्थरबाजी होने लगी, जिससे कई छात्रों को चोट लगी और वो घायल हो गए. एबीवीपी का कहना है कि लेफ्ट छात्रों ने लाइब्रेरी में पढ़ रहे कुछ छात्रों पर हमला कर दिया, वहीं लेफ्ट छात्रों का आरोप है कि एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने मार्च कर रहे छात्रों पर हमला किया. इस पूरे बवाल के कई वीडियो भी सामने आए हैं, जिनमें हमला करने वाले कुछ लोग नकाब पहने हुए भी दिख रहे हैं.
जेएनयू में 2020 जैसी हिंसा
जेएनयू में हुई इस ताजा हिंसा के मामले ने 2020 में हुई हिंसा की याद दिलाई है. इस दौरान भी कुछ नकाबपोश देर रात कैंपस में घुस गए थे और जमकर हिंसा हुई थी. 5 जनवरी 2020 को जेएनयू के साबरमती और पेरियार हॉस्टल में ये हिंसा हुई थी. इसमें तत्कालीन JNUSU अध्यक्ष समेत 28 छात्र घायल हुए थे. इस दौरान भी कई वीडियो और तस्वीरें सामने आई थीं, जिनमें हाथों में डंडे और रॉड लिए नकाबपोश दिखाई दिए. ये हिंसा जेएनयू में फीस बढ़ोतरी को लेकर चल रहे प्रदर्शन के बीच हुई थी.
JNU में हिंसा की पूरी टाइमलाइन
1983 के दौर में जेएनयू में खूब हिंसा हुई, जिसके बाद पूरी यूनिवर्सिटी को बंद किया गया और छात्रों को जबरन हॉस्टलों से निकाला गया.
साल 2000 में जेएनयू में देश विरोधी नज्मों को लेकर खूब बवाल हुआ. वामपंथी दलों पर आरोप लगाया गया कि सेना के जवानों से भी इस दौरान मारपीट हुई.
2005 में तत्तकालीन पीएम मनमोहन सिंह के जेएनयू दौरे को लेकर खूब बवाल हुआ और उन्हें काले झंडे दिखाए गए. ईरान के खिलाफ अमेरिका का साथ देने के विरोध में ये सब हुआ.
साल 2016 में देश विरोधी नारों के चलते जेएनयू एक बार फिर चर्चा में आया. आरोप लगा कि आतंकी अफजल गुरु के समर्थन में नारे लगाए गए और इस मामले के चलते कैंपस में खूब हिंसा हुई. बाद में कई छात्रों को गिरफ्तार भी किया गया.
2019 में यूनिवर्सिटी की तरफ से कुछ नियम लाए गए, जिनमें फीस बढ़ोतरी और ड्रेस कोड जैसी चीजें थीं. इसे लेकर जेएनयू छात्रसंघ ने जमकर विरोध किया और कई दिनों तक हंगामा चलता रहा.
2020 में एनआरसी और सीएए को लेकर भी कैंपस का माहौल गर्म रहा, इस दौरान भी कई बार लेफ्ट और एबीवीपी के छात्र आमने-सामने नजर आए.

