मत: आतंकवाद से युद्ध में अब नेतृत्व भूमिका में है भारत

Operation Sindoor:  Indias New Path Against Terrorism Global Front To Encircle Pakistan
आतंक से लड़ाई में भारत दिखा रहा नया रास्ता, सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के खिलाफ खोला मोर्चा
भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई को तेज करते हुए विश्व स्तर पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने की रणनीति अपनाई है। एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने 33 देशों का दौरा कर पाकिस्तान की भूमिका को उजागर किया और आतंकवाद को युद्ध घोषित करने की भारत की प्रतिबद्धता दोहराई

सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल की सातों टीमें विदेश से लौट चुकी हैं। हमारे यहां ऐसे कदमों की तुलना हमेशा अतीत की घटनाओं से होती रही है। इस बार भी कहा गया कि विदेश में प्रतिनिधिमंडल तो पहले भी भेजे गए हैं। मगर सवाल यह है कि क्या इतना बड़ा प्रतिनिधिमंडल 33 देश की यात्रा पर इतने कम समय में देश का पक्ष रखने के लिए पहले भेजा गया था? इसका जवाब है नहीं।

कूटनीतिक जीत : मगर इस कदम की कुछ हलकों में आलोचना भी हुई। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने तो इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 11 वर्षों की कूटनीति और विदेश नीति की विफलता का प्रतिबिंब बता डाला। लेकिन इन लोगों ने इसका खयाल नहीं किया कि पाकिस्तान के दो समर्थक देशों को छोड़कर भारत के विरुद्ध दुनिया से एक स्वर नहीं आया।

कांग्रेस की मंशा: पहलगाम हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर, उससे जुड़ी रक्षा व राजनयिक गतिविधियां, दूसरे देशों की प्रतिक्रिया और वैश्विक स्थिति को मिलाकर देखें तो निष्कर्ष वह नहीं है, जैसा देश में तात्कालिक तौर पर निकाला गया। इस मामले में कांग्रेस की कोशिश ऑपरेशन सिंदूर में भारत की क्षति को सामने लाने की रही। कांग्रेस यह भाव पैदा करना चाहती है कि ऑपरेशन सिंदूर में हमारा बहुत ज्यादा नुकसान हुआ है.

मोदी का लक्ष्य: लेकिन सच यही है कि कोई भी युद्ध बगैर नुकसान के नहीं लड़ा जा सकता। मुख्य बात संकल्प और उसे प्राप्त करने की है। प्रधानमंत्री मोदी का संकल्प साफ दिखता है- चाहे जितनी क्षति हो, कूटनीतिक, रक्षा एवं आर्थिक मोर्चे पर संपूर्ण चुनौतियों का सामना करते हुए आतंकवाद से मुक्ति हासिल करनी है। असल में, देश से ऐतिहासिक प्रतिनिधिमंडल भेजने की वजह यह थी कि भारत अपना रुख विश्व के सामने रखना चाहता था। भारत का मत बिल्कुल स्पष्ट है- आतंकवाद की हर घटना युद्ध मानी जाएगी। पाकिस्तान के मामले में प्रधानमंत्री ने साफ कर दिया है कि किसी भी आतंकवादी घटना को सत्ता और सेना की कार्रवाई माना जाएगा।

पाकिस्तान है जड़: विदेश गए प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तान के आंतरिक कलह, आतंकवाद की वैश्विक स्थिति, जम्मू-कश्मीर की संपूर्ण स्थिति को दुनिया के सामने रखा। उसने यह भी बताया कि पाक अधिकृत कश्मीर का एक हिस्सा पाकिस्तान ने चीन को दिया हुआ है। प्रतिनिधिमंडल ने यह जानकारी दी कि कई देशों में चल रहे आतंकवाद की जड़ें पाकिस्तान में हैं। इसलिए आतंकवाद विरोधी युद्ध पहले से ज्यादा कठिन और अपरिहार्य हो चुका है।

पश्चिम हुआ फेल: अमेरिकी नेतृत्व में नैटो और पश्चिमी देशों का आतंकवाद विरोधी युद्ध विफल हो चुका है। खुद अमेरिका, अफगानिस्तान से लेकर इराक, लीबिया, सीरिया से भाग चुका है। सीरिया में अमेरिका ने जिसे आतंकवादी घोषित कर रखा था, उसने सत्ता कब्जाने में उसकी मदद की। यही नहीं, राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप उससे हाथ मिलाते भी दिखे।

क्या है लक्ष्य: इन सबके बीच भारत ने इसमें पाकिस्तान जैसी एटमी ताकत के विरुद्ध कार्रवाई की। उसकी आर्थिक-कूटनीतिक घेरेबंदी कर भारत विश्वव्यापी आतंकवाद विरोधी युद्ध का नेतृत्व करता दिख रहा है। आज भारत का लक्ष्य आर्थिक व रक्षा क्षमताओं का विस्तार करते हुए आतंकवाद के वैश्विक केंद्र पाकिस्तान को इस स्थिति में लाना है, जिससे भविष्य में वह इसे प्रायोजित करने की अवस्था में न रहे। इसलिए प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री, गृह मंत्री, विदेश मंत्री सब पाक अधिकृत कश्मीर को हासिल करने का संकल्प दोहरा रहे हैं।

भारत की रणनीति: यह भी बहुआयामी नीति है। इसमें पाकिस्तान के भौगोलिक और राजनीतिक विखंडन की गति को तेज करने की रणनीति शामिल दिखती है। इसलिए जब प्रधानमंत्री ऑपरेशन सिंदूर को अखंड प्रतिज्ञा बताते हुए कहते हैं कि यह केवल स्थगित हुआ है, तो यह सिर्फ लोगों की भावनाओं का दोहन नहीं है। गहराई से देखें तो ऑपरेशन सिंदूर का लक्ष्य अंग्रेजी में ‘नो मोर पाकिस्तान’ यानी पाकिस्तान का विखंडन या इसके भौगोलिक एवं वर्तमान राजनीतिक अस्तित्व को खत्म करना दिखेगा।

पाकिस्तान में कलह: पहली नजर में यह अतिवादी नजरिया लग सकता है, लेकिन पाकिस्तान इस्लाम की जिस अवधारणा पर बना, उसमें अंतर्निहित दोष हैं। इस कारण वह कभी पूरी तरह शांत, स्थिर और एकजुट देश नहीं बन सका। बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में अहिंसक, हिंसक विखंडन अभियान चरम पर है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में भी सरकार-सेना को लेकर असंतोष है। बलूचिस्तान और सिंध में हिंसक-अहिंसक अभियान चलाने वाले भारत से मदद मांगते रहते हैं।

शांति नहीं चाहता पड़ोसी: वहीं, आतंकवादी घटनाओं में शामिल भारत में कई वांछित टेररिस्ट पाकिस्तान में मारे गए हैं, जबकि फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर ने हिंदुओं सहित अन्य पंथों के विरुद्ध नफरत और हिंसा को प्रोत्साहित करने की रणनीति अपनाई है। 1948 से अभी तक के अनुभव बताते हैं कि पाकिस्तान से किसी तरह के ईमानदार शांतिकारी कदमों को क्रियान्वित करने की उम्मीद आत्मघाती साबित होगी। इसीलिए भारत विश्व स्तर पर नए सिरे से आतंकवाद विरोधी युद्ध के नेतृत्व के लिए अपनी क्षमताओं का ध्यान रखते हुए अग्रसर हो चुका है। यह रास्ता न केवल पाकिस्तान और चीन के साथ समस्याओं के स्थायी समाधान का मार्ग प्रशस्त करेगा, बल्कि भारत की एकता अखंडता को भी सुरक्षित करेगा। इससे भारतीय सोच के अनुसार नई विश्व व्यवस्था की आधारभूमि बनेगी।

(लेखक अवधेश कुमार  वरिष्ठ पत्रकार और विचारक हैं)

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