विज्ञान:भारतीय टेक्टोनिक प्लेट जा रही पाताल..तिब्बत नीचे दो हिस्सों में हो रही टूटन,वैज्ञानिकों ने चेताया
भारतीय टेक्टॉनिक प्लेट तिब्बत के नीचे दो हिस्सों में टूट रही है. इससे हिमालय में 8-9 तीव्रता के बड़े भूकंप, ज्वालामुखी फटने और बाढ़ का खतरा है. प्लेट का निचला हिस्सा पिघल रहा है. दरार 200-300 किलोमीटर लंबी है. इससे भारत-नेपाल-चीन प्रभावित होंगे. लाखों जीवन खतरे में आयेंगें.
ये भारत के भौगेलिक संरचना की थ्रीडी इमेज है, जिसे नासा वैज्ञानिकों ने बनाया है.
नई दिल्ली,31 जनवरी 2026 । पृथ्वी हमेशा गतिशील रहती है, अब वैज्ञानिकों ने एक चौंकाने वाली खोज की है. भारत की मुख्य टेक्टॉनिक प्लेट (इंडियन प्लेट) तिब्बत के नीचे दो हिस्सों में फट रही है. इससे भूकंप, ज्वालामुखी विस्फोट और बड़े भूगर्भीय बदलाव आशंकित हैं.अमेरिका की कोलोराडो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के नये अध्ययन में यह पता चला है. यह तेज हुआ,तो हिमालय क्षेत्र में लाखों लोगों का जीवन खतरे में होगा.
क्या हो रहा है? प्लेट टूटन कथा
पृथ्वी की ऊपरी सतह कई प्लेटों (टेक्टॉनिक प्लेट्स) में बंटी है, जो धीरे-धीरे गतिमान हैं. भारतीय प्लेट अफ्रीका से अलग होकर उत्तर की ओर बढ़ रही है. अब नया अनुसंधान बताता है कि यह प्लेट तिब्बत के नीचे 100 किलोमीटर गहराई पर दो हिस्सों में बंट रही है. ऊपरी हिस्सा हिमालय की ओर आ रहा है, जबकि निचला हिस्सा मंगोलिया की ओर जा रहा है.
नेचर जियोसाइंस जर्नल में छपे इस अध्ययन के अनुसार, यह प्रक्रिया 50 लाख साल पहले शुरू हुई, लेकिन अब तेज हो गई है. वैज्ञानिकों ने सिस्मिक वेव्स (भूकंप की लहरों) का अध्ययन किया, जो दिखाता है कि प्लेट के बीच में एक ‘रिफ्ट’ (फटाव) बन रहा है. यह फटाव 200-300 किलोमीटर लंबा है. अगर यह बढ़ा, तो तिब्बत का पठार और हिमालय की चोटियां बदल सकती हैं.
Indian Tectonic Plate Splitting
वैज्ञानिकों ने चेताया: बड़े खतरे सिर पर
अध्ययन प्रमुख वैज्ञानिक ब्रैडेन चाउ ने कहा कि यह प्लेट टूटना हिमालय निर्माण का नया चरण संभव है. इसमें 8 या 9 तीव्रता के बड़े भूकंप आ सकते हैं. कोलोराडो यूनिवर्सिटी की टीम ने 20 साल का डेटा विश्लेषण किया. उसके अनुसार तिब्बत के नीचे प्लेट का निचला हिस्सा पिघल रहा है, जैसे आइसक्रीम गर्मी में पिघलती है. इससे मैग्मा ऊपर आ सकता है, जिससे ज्वालामुखी पैदा होगा.
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI) के डॉक्टर आरके सिंह कहते हैं कि यह भारत को खतरा है. हिमालय पहले ही भूकंप संवेदन है. 2005 का कश्मीर भूकंप (7.6 तीव्रता) इसी प्लेट के कारण था. फटाव बढ़ा, तो दिल्ली, मुंबई जैसे शहरों तक झटके लगेंगें. अध्ययन के अनुसार,बदलाव में 10-20 लाख साल लगेंगें, लेकिन छोटे-छोटे भूकंप तत्काल बढ़ सकते हैं.
टेक्टॉनिक्स प्लेट क्रीड़ा
टेक्टॉनिक प्लेट्स पृथ्वी की बाहरी परत (क्रस्ट) के टुकड़े हैं, जो मैग्मा पर तैरते हैं.भारत की प्लेट हर साल 5 सेंटीमीटर उत्तर की ओर बढ़ती है.तिब्बत के नीचे यह ‘सबडक्शन’ (नीचे धंसने) के बजाय ‘रिफ्टिंग’ (टूटन) कर रही है.
Indian Tectonic Plate Splitting
कैसे पता चला? भूकंप की लहरें प्लेट से गुजरते हुए बदल जाती हैं. वैज्ञानिकों ने GPS डेटा और सैटेलाइट इमेज से देखा कि तिब्बत ऊंचा हो रहा है.
क्यों हो रहा? प्लेट का दबाव ज्यादा हो गया. ऊपरी हिस्सा हिमालय को उठा रहा है (हर साल 5 मिलीमीटर), लेकिन निचला हिस्सा फिसल नहीं पा रहा.
क्या होगा? फटाव से नई प्लेट्स बनेंगी, जो हिमालय को और ऊंचा या चपटा कर सकती हैं. प्रक्रिया धीमी है, लेकिन असर लंबा चलेगा.
आशंकित प्रभाव: जीवन पर क्या असर पड़ेगा?
भूकंप का खतरा: हिमालय बेल्ट में दुनिया के 80% बड़े भूकंप आते हैं. भारत, नेपाल, चीन में लाखों घर ढह सकते हैं. 2015 नेपाल भूकंप में 9,000 मौतें हुईं थीं.
ज्वालामुखी और बाढ़: मैग्मा ऊपर आने से नए ज्वालामुखी. ग्लेशियर पिघलने से गंगा-ब्रह्मपुत्र नदियां बाढ़ आएंगी.
मानव जीवन: 10 करोड़ से ज्यादा लोग हिमालय क्षेत्रवासी हैं. दिल्ली-NCR तक झटके. अर्थव्यवस्था को 1 लाख करोड़ की हानि.
पर्यावरण: हिमालय की जैव विविधता खतरे में. जलवायु बदलाव तेज होगा.
विशेषज्ञ कहते हैं कि यह प्राकृतिक है, लेकिन हमें तैयार रहना होगा. भूकंपरोधी इमारतें बनाएं. मॉनिटरिंग बढ़ाएं.
Indian Tectonic Plate Splitting
भारत क्या कर रहा है? तैयारी की दिशा
भारत सरकार ने GSI को और फंड दिए हैं. नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी (NCS) अब तिब्बत बॉर्डर पर 50 नए सेंसर लगाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि हिमालय हमारा खजाना है, इसे बचाना हमारा कर्तव्य है. चीन से डेटा शेयरिंग पर बात हो रही है, क्योंकि तिब्बत उसके कब्जे में है.
आगे क्या? आशा की किरण
वैज्ञानिक कहते हैं, यह बदलाव पृथ्वी का सामान्य चक्र है. लेकिन चेतावनी समय पर मिली है. अगर हम सतर्क रहे, तो नुकसान घटा सकते हैं. हिमालय की चोटियां कह रही हैं कि मैं बदल रहा हूं, लेकिन मजबूत रहूंगा. दुनिया के वैज्ञानिक अब इस पर नजर रखेंगें.

