पश्चिम बंगाल से कर्नाटक तक… सर्वाधिक ऋणग्रस्त भारत 10 राज्य,
पश्चिम बंगाल से कर्नाटक तक… सर्वाधिक ऋणग्रस्त भारत 10 राज्य
Top-10 Most Debt Stressed States: देश में ऋण के बोझ तले दबे सबसे बड़े राज्यों में पश्चिम बंगाल टॉप पर है और अपने रेवेन्यू का 42 प्रतिशत के आस-पास हिस्सा उसे सिर्फ ब्याज भुगतान में खर्च करना पड़ा है.
देश के कई बड़े राज्य रेवेन्यू का बड़ा हिस्सा ब्याज भुगतान पर कर रहे खर्च (Photo: ITG)
नई दिल्ली, 31 जनवरी 2026,भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) की रफ्तार तेज है और ये दुनिया में सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई इकोनॉमी में बना हुआ है. वर्ल्ड बैंक से लेकर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) तक ने इसका लोहा माना है. लेकिन तेजी से बढ़ते देश में, क्या आप जानते हैं कि कौन से राज्य सबसे ज्यादा ऋण में डूबे हुए हैं? तो भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों पर नजर डाल लें, जिनसे पता चलता है कि कई बड़े राज्यों को ऋण बोझ तले दबकर अपने रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा इनके ब्याज के भुगतान में खर्च करना पड़ता है.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के FY2025 के आंकड़ों से पता चलता है कि कई बड़े राज्यों में ऋण के ब्याज के भुगतान में उसके अपने टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू का 42% तक हिस्सा जाता है. इस तगड़े ब्याज भुगतान से इन राज्यों के पास सड़क, स्कूल, हेल्थ सर्विसेज और नए प्रोजेक्ट्स पर खर्च को पैसों की कमी हो जाती है. ऋण भार झेल रहे भारत के 10 टॉप राज्यों में पहले स्थान पर बंगाल और 10वें स्थान पर कर्नाटक है।सूची में चार भाजपा शासित राज्य है।
2024-25 के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु भारत का सर्वाधिक ऋणग्रस्त राज्य है, जिसका ऋण ₹8.34 लाख करोड़ से अधिक ,फिर उत्तर प्रदेश (₹7.7 लाख करोड़) और महाराष्ट्र (₹7.2 लाख करोड़) का स्थान रहा। बड़ी कल्याणकारी योजनाएं, बुनियादी ढांचे (Infrastructure) पर खर्च और राजस्व की कमी से राज्यों पर यह देनदारियां बढ़ी हैं।
सर्वाधिक ऋणग्रस्त राज्यों की सूची (2024-25):
तमिलनाडु: ₹8.34 लाख करोड़ से अधिक
उत्तर प्रदेश: ₹7.7 लाख करोड़
महाराष्ट्र: ₹7.2 लाख करोड़
पश्चिम बंगाल: ₹6.6 लाख करोड़
कर्नाटक: ₹6.0 लाख करोड़
राजस्थान: ₹5.6 लाख करोड़
आंध्र प्रदेश: ₹4.9 लाख करोड़
गुजरात: ₹4.7 लाख करोड़
केरल: ₹4.3 लाख करोड़
मध्य प्रदेश: ₹4.2 लाख करोड़
प्रमुख वित्तीय स्थिति (Highlights):
पंजाब: यद्यपि कुल ऋण में यह शीर्ष 10 में है, लेकिन जीडीपी के अनुपात में (लगभग 45-46%) यह सबसे अधिक तनावग्रस्त राज्यों में से एक है।
दक्षिण भारतीय राज्य: आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और केरल में भी ऋण स्थिति गंभीर है, जहां नागरिकों पर भी ऋण का बोझ अधिक है।
वृद्धि: पिछले कुछ वर्षों में, मध्य प्रदेश, कर्नाटक और तमिलनाडु में ऋण स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
1-पश्चिम बंगाल
वित्त वर्ष 2025 में पश्चिम बंगाल पर ब्याज भुगतान का बोझ अन्य राज्यों की तुलना में सबसे ज्यादा था. राज्य को टैक्स और नॉन टैक्स रेवेन्यू से 1.09 लाख करोड़ रुपये मिले थे, लेकिन सिर्फ ब्याज भुगतान पर 45 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए. इसका मतलब हुआ कि उसके राजस्व का 42% हिस्सा तो ब्याज चुकाने में ही चला गया.
2-3_पंजाब-बिहार
दूसरे पायदान पर पंजाब रहा, जिसने अर्जित रेवेन्यू का 34% हिस्सा ब्याज भुगतान करने में खर्च कर दिया. Punjab का राजस्व कलेक्शन 70,000 करोड़ रुपये था और इसने कर्ज के ब्याज भुगतान पर करीब 24,000 करोड़ रुपये खर्च किए. इसके बाद तीसरे नंबर पर Bihar का नाम आता है, जिसने 62,000 करोड़ रुपये के रेवेन्यू में से लगभग 21 हजार करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया और ये रेवेन्यू का 33% रहा.
4-5_केरल-तमिलनाडु
केरल ने FY2025 में 1.03 लाख करोड़ रुपये का रेवेन्यू कलेक्शन किया था और इसका 28% या करीब 29,000 करोड़ रुपये तो ब्याज के पेमेंट में ही चला गया. पांचवे नंबर पर तमिलनाडु रहा, जिसने अपने कलेक्शन में से 62,000 करोड़ रुपये या 28% का ब्याज पेमेंट किया था.
6-7-8_हरियाणा-राजस्थान और आंध्र प्रदेश
Top-10 ऋण तले दबे राज्यों में अगला नंबर हरियाणा का है और इसने 94,000 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाने के बाद इसमें से 27% या करीब 25,000 करोड़ रुपये का ब्याज भुगतान किया. सातवें पायदान पर राजस्थान था और राज्य ने 1.48 लाख करोड़ रुपये के राजस्व में से 38,000 करोड़ रुपये का ब्याज चुकाया. इसके अलावा आंध्र प्रदेश ने 1.2 लाख करोड़ रुपये के राजस्व पर 29 हजार करोड़ रुपये ब्याज भरा था.
9-10_मध्यप्रदेश-कर्नाटक
सूची में नौवें स्थान पर मध्य प्रदेश शामिल हैं और इसका वित्त वर्ष 2025 में टैक्स और नॉन-टैक्स रेवेन्यू 1.23 लाख करोड़ रुपये रहा था, जिसमें से ब्याज के भुगतान पर 27,000 करोड़ रुपये या कुल कलेक्शन का करीब 22% खर्च हुआ. इसमें 10वें स्थान पर कर्नाटक है, जिसका कलेक्शन 2.03 लाख करोड़ रुपये का था और ब्याज भुगतान 19% यानी 39,000 करोड़ रुपये रहा.
