तो ए आर रहमान बने दिलीप को बॉलीवुड में सांप्रदायिकता से हुई शिकायत

‘ये मेरा भारत नहीं..’, अपने बयानों से लेकर हिंदी बोलने का विरोध करने तक, जानिए कब-कब विवादों में रहे रहमान
AR Rahman Controversies: ऑस्कर और गोल्डन ग्लोब जैसे अवॉर्ड जीतने वाले दिग्गद संगीतकार एआर रहमान इन दिनों विवादों में घिरे हुए हैं। लेकिन ये पहला मौका नहीं है, इससे पहले भी कई बार रहमान विवादों में रह चुके हैं। जानिए कब-कब विवादों रहे संगीतकार…

ये मेरा भारत नहीं..’, अपने बयानों से लेकर हिंदी बोलने का विरोध करने तक, जानिए कब-कब विवादों में रहे एक आर रहमान

दिग्गज संगीतकार व सिंगर एआर रहमान इन दिनों अपने संगीत या गानों से नहीं, बल्कि अपने बयानों से चर्चाओं में हैं। रहमान ने विक्की कौशल की ‘छावा’ को बांटने वाली फिल्म बताया। उनका कहना है कि बीते आठ साल से मैं महसूस कर रहा हूं कि इंडस्ट्री में टैलेंट के दम पर काम नहीं मिलता। म्यूजिक इंडस्ट्री की कमान ऐसे हाथों में है जो न क्रिएटिव हैं और ना ही क्रिएटिविटी समझते हैं। आस्था भी कम काम का कारण है। उन्होंने कहा कि म्यूजिक इंडस्ट्री अब सांप्रदायिक  हो रही है। बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए एक इंटरव्यू में एआर रहमान से पूछा गया था कि क्या उन्हें कभी बॉलीवुड में तमिल संगीतकार होने के कारण भेदभाव महसूस हुआ. इस पर उन्होंने कहा, ‘शायद मुझे कभी इसका एहसास नहीं हुआ. शायद भगवान ने इसे मुझसे छिपाए रखा, लेकिन मैंने ऐसा कुछ महसूस नहीं किया. पिछले आठ सालों में शायद, क्योंकि सत्ता में बदलाव आया है और अब ऐसे लोगों के पास ताकत है जो रचनात्मक नहीं हैं. यह एक सांप्रदायिक बात भी हो सकती है. लेकिन यह सीधे मेरे सामने नहीं आती.’उन्होंने आगे कहा कि कोई भी यह बात उनके चेहरे पर नहीं कहता. रहमान ने बताया, ‘मुझे यह चाइनीज व्हिस्पर्स’ (अफवाहों) से पता चलता है कि आपको बुक किया गया था, लेकिन म्यूजिक कंपनी ने आगे अपने पांच कंपोजर्स हायर कर लिये. मैं कहता हूं कि अच्छा है, मुझे अपने परिवार के साथ समय बिताने का ज्यादा मौका मिलता है. मैं काम की तलाश में नहीं हूं. मैं काम के पीछे नहीं भागना चाहता. चाहता हूं कि काम खुद मेरे पास आए. मेरी ईमानदारी के दम पर. जो मैं डिजर्व करता हूं, वही मुझे मिलता है.’
अब इंडस्ट्री से उनके बयानों पर प्रतिक्रियायें आ रही है। इसे लेकर अब राजनीतिक पारा भी हाई है। वैसे ये पहला मौका नहीं है, जब एआर रहमान ने बयानों से विवाद किये हों। इससे पहले भी वो कई बार विवाद कर चुके । जानें कब-कब और क्यों विवादों में घिरे एआर रहमान? AR Rahman Controversies From Communal Statement To Daughter Hijab And Statement On India
एआर रहमान – फोटो : सोशल मीडिया

यह मेरा भारत नहीं
साल 2017 में एआर रहमान तब विवादों में आए थे जब उन्होंने कहा था कि यह मेरा भारत नहीं है। साल 2017 में बेंगलूरू में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या पर एआर रहमान ने यह बयान दिया था। अपनी फिल्म ‘वन हार्टः द ए.आर. रहमान कन्सर्ट फिल्म’ के प्रीमियर पर गौरी लंकेश की हत्या पर  प्रतिक्रिया देते हुए रहमान ने कहा था, ‘मैं  इससे बहुत दुखी हूं। उम्मीद करता हूं कि इस तरह की घटनाएं भारत में न हों। ये घटनाएं भारत में होती हैं, तो यह मेरा भारत नहीं है। मैं चाहता हूं कि मेरा देश तरक्कीपसंद और नरमदिल हो।’  उनके बयान को लेकर काफी हंगामा हुआ था।

पैगंबर मुहम्मद पर बनी फिल्म में संगीत देने पर छिड़ा था विवाद
साल 2015 में संगीतकार एआर रहमान ईरानी निर्माता-निर्देशक माजिद मजीदी की पैगंबर मुहम्मद पर बनी फिल्म ‘मुहम्मद: मैसेंजर ऑफ गॉड’ में संगीत देने पर विवादों में आए थे। फिल्म में धुन बनाने पर एक तरफ जहां उन पर मुंबई की राजा अकादमी ने फतवा जारी किया था तो विश्व हिंदू परिषद ने रहमान से घर वापसी करने को कहा थी। इस पर रहमान को लेकर दो तरह की राय आई थी।AR Rahman Controversies From Communal Statement To Daughter Hijab And Statement On India

नीता अंबानी के साथ एआर रहमान की बेटियां और पत्नी – फोटो : सोशल मीडिया

एंकर को हिंदी बोलने पर रहमान ने रोका
एआर रहमान भाषा विवाद को लेकर भी चर्चाओं में रहे थे। फिल्म ’99 सॉन्ग्स’ के प्रमोशनल इवेंट में रहमान एंकर के हिंदी बोलने पर नाराज हुए थे।कार्यक्रम एंकर ने पहले तमिल में एआर रहमान का स्वागत किया और उसके तुरंत बाद ही वो हिंदी में  स्वागत करने लगी।  हिंदी बोलते ऐंकर को रहमान ने ट्रोल किया और स्टेज से नीचे उतर गए। तब लोग रहमान को ट्रोल करने लगे। बाद में रहमान ने सफाई दी कि, ‘ हम तीन भाषाओं में म्यूजिक लॉन्च कर रहे थे। हिंदी का पहले ही लॉन्च हो चुका था । यह तमिल भाषा का था। वहां स्टेज के कुछ नियम कायदे थे। हम तमिल ऑडियंस से बात कर रहे थे। इसलिए मैंने उनसे तमिल में बात करने को कहा।’

नकाब में बेटी की तस्वीर साझा कर विवादों में घिरे
2019 में संगीतकार अपनी बेटियों की सोशल मीडिया पर तस्वीर साझा करने पर विवादों में आ गए थे। दरअसल, रहमान ने नीता अंबानी के साथ अपनी बेटियों और पत्नी की तस्वीर साझा की। इसमें उनकी एक बेटी नकाब पहने थी। इसको लेकर रहमान लोगों के निशाने पर आए थे। कई इसे लेकर रहमान पर नाराज हुए और आजादी चुनने की बात कही। हालांकि, कुछ समर्थन में भी थे।

भाषा कभी रुकावट पैदा नहीं करती
एआर रहमान ने 2022 में भाषा विवाद पर जो कहा था उसकी तारीफ हुई थी। दरअसल, बॉलीवुड वर्सेज साउथ इंडस्ट्री  विवाद पर रहमान ने कहा था कि भाषा कभी भी रुकावट पैदा नहीं कर सकती।  जब बात म्यूजिक की आती है तो भाषा  रुकावट नहीं बननी चाहिए।AR Rahman Controversies From Communal Statement To Daughter Hijab And Statement On Indiaजानी मास्टर और एआर रहमान – फोटो : सोशल मीडिया

जब रहमान ने दी थी एकजुट रहने की सलाह
वहीं रहमान ने भारतीय एकजुटता की भी बात कही थी। एक किस्सा  साझा करते हुए रहमान ने कहा था कि मैं सात साल पहले मलेशिया गया था। वहां, एक चीनी सज्जन ने मुझसे कहा, ‘तुम भारत से हो?’ मुझे भारत पसंद है। मुझे उत्तर भारत बेहतर लगता है। वे अधिक निष्पक्ष हैं। उनकी फिल्में बहुत अधिक आकर्षक हैं। रहमान ने बताया कि उस सज्जन की टिप्पणियों ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया और आश्चर्य हुआ कि क्या उस व्यक्ति ने वास्तव में दक्षिण भारतीय फिल्में देखी थीं, उन्होंने ऐसा बयान क्यों दिया? ‘फिर मैंने पाया कि हमें जो करने की जरूरत है वह यह कि हम लोगों को सशक्त बनाकर उन्हें ऐसे चरित्र दें जो उन्हें सम्मान दें। यह महत्वपूर्ण बात दक्षिण भारतीय कर सकते हैं क्योंकि हम अपने रंग से प्यार करते हैं। दक्षिण भारत हो या उत्तर भारत वह पूरा भारत ही है।’

यौन उत्पीड़न के आरोपित के साथ काम करने पर हुई ट्रोलिंग
रहमान कोरियोग्राफर जानी मास्टर के साथ काम करने से भी विवादित हुए थे। जानी मास्टर पर नाबालिग लड़की के यौन उत्पीड़न के आरोप थे। तभी जानी मास्टर ने रहमान के साथ तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की जिसमें बताया गया था कि जानी ने रहमान के संगीत में बने फिल्म ‘पेद्दी’ का गाना ‘चकरी चकरी’ कोरियोग्राफ किया है। इससे रहमान लोगों के निशाने पर आए थे और उन्हें सोशल मीडिया पर भारी ट्रोल किया गया था।

एआर रहमान के ‘छावा’ को बांटने वाली फिल्म कहने पर भड़कीं कंगना, बोलीं- नफरत भरा..

ए.आर.रहमान के कमेंट्स पर बोलीं कंगना

एआर रहमान ने  ‘छावा’ को समाज को दो हिस्सों में बांटने वाला बताया. कंपोजर के इस बयान से एक्ट्रेस और सांसद कंगना रनौत निराश दिखीं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर स्टोरी पोस्ट करके रहमान के शब्द गलत बताये और कई चौंकाने वाले दावे भी किए.

कंगना ने लिखा, ‘प्रिय एआर रहमान जी, फिल्म इंडस्ट्री में मुझे बहुत ज्यादा पक्षपात और भेदभाव झेलना पड़ता है, सिर्फ इसलिए क्योंकि मैं केसरिया पार्टी समर्थक हूं. लेकिन सच कहूं तो, आपसे ज्यादा पक्षपाती और नफरत भरा आदमी मैंने नहीं देखा. मेरी बहुत चाहत थी कि अपनी डायरेक्ट की फिल्म इमरजेंसी की कहानी आपको सुनाऊं.’

रहमान पर भड़कीं कंगना (Photo: Instagram @kanganaranaut)

‘सुनाने की तो बात ही छोड़ो, आपने मुझसे मिलने तक से मना कर दिया. मुझे बताया गया कि आप किसी प्रोपगेंडा फिल्म में हिस्सा नहीं लेना चाहते. मजाक की बात ये है कि इमरजेंसी को सभी क्रिटिक्स ने मास्टरपीस कहा. विपक्षी पार्टियों के लीडर्स ने भी मुझे फैन लेटर भेजे, फिल्म की तारीफ की कि ये बहुत संतुलित और दयालु नजरिए से बनी है. लेकिन आप अपनी नफरत से अंधे हो गए हैं. मुझे आप पर अफसोस है.’

कंगना की फिल्म ‘इमरजेंसी’ साल 2025 में कई सारी परेशानियां झेल थिएटर्स में रिलीज हुई थी. फिल्म में सभी कलाकारों की एक्टिंग की बड़ी तारीफें हुईं. लेकिन बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई. वहीं, एआर रहमान ने जिस ‘छावा’ फिल्म में अपना म्यूजिक दिया, वो फिल्म वर्ल्डवाइड 800 करोड़ रुपये कमा गई.

अब एआर रहमान इंडिया की सबसे बड़ी फिल्म ‘रामायणम्’ में म्यूजिक देंगें. उनके साथ हॉलीवुड के मशहूर और दिग्गज कंपोजर हांस जिमर भी हैं, जिनके बैकग्राउंड स्कोर की पूरी दुनिया दीवानी है.

नहीं मिल रहा काम’, रहमान के बयान पर शान-शोभा डे ने किया रिएक्ट, बताया खतरनाक

म्यूजिक कम्पोजर एआर रहमान ने बॉलीवुड में काम न मिलने का दावे पर सिंगर शान ने भी रिएक्शन दिया है.

विवादों के घेरे में हैं एआर रहमान (Photo: Instagram/@singer_shaan/@arrahman)

एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में शान ने कहा कि म्यूजिक इंडस्ट्री में कोई सांप्रदायिक एंगल नहीं है और उन्होंने सबको ‘ज्यादा सोचने’ से मना किया. शान ने तर्क दिया कि ऐसे आरोप लगाने के बजाय अच्छा काम करें और अच्छा संगीत बनायें.

रहमान के कमेंट पर क्या बोले शान?

सिंगर शान ने कहा, ‘जब काम न मिलने की बात आती है, तो मैं आपके सामने खड़ा हूं. मैंने इतने सालों में इतना गाया है, फिर भी मुझे भी कभी-कभी काम नहीं मिलता. लेकिन मैं इसे पर्सनल नहीं लेता, क्योंकि यह अलग मामला है. हर किसी की अपनी सोच और अपनी पसंद होती है. अगर ऐसा कोई विषय होता, तो मुझे नहीं लगता कि संगीत में कोई सांप्रदायिक या अल्पसंख्यक एंगल है.’

AR Rahman Interview
छावा, रहमान और ‘बंटवारे’ की महान खोज

उन्होंने कहा, ‘संगीत ऐसे काम नहीं करता. ऐसा होता, तो पिछले 30 सालों के हमारे तीन सुपरस्टार्स, जिन्हें आप मुस्लिम भी कह सकते हैं, आगे नहीं बढ़ पाते.  लेकिन क्या उनके फैंस किसी से कम हैं? वे तो बढ़ते ही जा रहे हैं.”ऐसा नहीं है. अच्छा काम करो, अच्छा संगीत बनाओ, और इन चीजों को ज्यादा मत सोचो.

शान ने आगे समझाया कि प्रोड्यूसर गाने की जरूरत के अनुसार सिंगर चुनते हैं. उन्होंने कहा, ‘लोगों की अपनी राय होती है, और वे हमेशा बंटे रहेंगें. कोई नियम नहीं है कि सबकी एक ही राय होनी चाहिए. लेकिन इसे ज्यादा महत्व नहीं दें, क्योंकि हर गाने के पीछे एक विचार होता है.अपनी सोच के आधार पर कंपोजर या प्रोड्यूसर फैसला लेते हैं. कुछ लोग कहेंगे यह सही है, कुछ कहेंगे गलत. हमें इसमें क्यों उलझना है? इसमें उलझने से कोई फायदा नहीं.’

शोभा डे ने बताया खतरनाक

लेखिका शोभा डे ने भी रहमन की टिप्पणियों पर बात की है. उन्होंने  कहा, ‘यह एक बहुत खतरनाक टिप्पणी है. मुझे नहीं पता उन्होंने ऐसा क्यों कहा. यह आप उनसे ही पूछिए. लेकिन मैं पिछले 50 सालों से बॉलीवुड देख रही हूं.मैंने किसी जगह को किसी भी तरह की सांप्रदायिकता से मुक्त देखा है, तो वह बॉलीवुड है. प्रतिभा है, तो आपको मौका मिलेगा. प्रतिभा नहीं है, तो धर्म के आधार पर मौका मिलने का सवाल ही नहीं. वह जो कह रहे हैं, वह इतने सफल व्यक्ति हैं, इतने परिपक्व इंसान हैं,उन्हें ऐसा नहीं कहना चाहिए था. हो सकता है उनके अपने कारण हों. यह आपको उनसे ही पूछना पड़ेगा.’

जावेद अख़्तर बोले- कोई सांप्रदायिक वजह नहीं

एआर रहमान के दावे पर गीतकार जावेद अख़्तर ने कहा कि “मैं नहीं समझता कि इसमें कोई भी सांप्रदायिक मुद्दा है.”

इस मुद्दे पर एक सवाल के जवाब में गायक शंकर महादेवन ने कहा, “मैं यही कहूंगा कि जो आदमी गाना बनाता है और आदमी यह तय करता है कि ये गाना मैं लेकर जाऊं कि नहीं, इसकी मार्केटिंग करूं कि नहीं. वो दोनों अलग-अलग लोग होते हैं. जो ये तय करते हैं वो म्यूज़िक के फ़ील्ड से नहीं होते हैं.”

कई बॉलीवुड फ़िल्मों में यादगार संगीत देने वाले ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने बीबीसी के साथ एक विशेष साक्षात्कार में अपने अब तक के संगीत सफ़र, बदलते सिनेमा, आगे की योजनाओं और समाज के मौजूदा माहौल पर खुलकर बात की.

इस बातचीत में रहमान ने फ़िल्म इंटस्ट्री को लेकर कहा, “पिछले 8 सालों में शायद सत्ता का संतुलन बदल गया है और जो रचनात्मक नहीं हैं, वे फ़ैसले ले रहे हैं. शायद सांप्रदायिक बात भी रही हो, लेकिन मेरे सामने किसी ने नहीं कहा.”

हालाँकि उन्होंने स्वीकार किया कि अब उनके पास काम नहीं आता है.

उन्होंने आगे कहा, “हां कुछ-कुछ बातें कानों तक पहुंचीं. जैसे आपको बुक किया था लेकिन दूसरी म्यूज़िक कंपनी ने फ़िल्म फंड की और अपने संगीतकार ले आए. मैं कहता हूँ ठीक है, मैं आराम करूँगा, परिवार के साथ समय बिताऊँगा. मैं काम की तलाश में नहीं हूँ. मैं चाहता हूँ कि काम मेरे पास आए. मैं चाहता हूँ कि मेरी मेहनत और ईमानदारी मुझे चीज़ें दिलाए.”

एआर रहमान ने इस बातचीत में कहा, “लेकिन मैं इसको लेकर बहुत नहीं सोचता, क्योंकि मुझे नहीं लगता कि कुछ पर्सनल बात होती है. सबकी अपनी-अपनी सोच होती है, अपनी-अपनी पसंद होती है. हमें कितना काम मिलना चाहिए, ये हमारे हाथ में नहीं है.”

जावेद अख़्तर ने कहा कि छोटे-मोटे प्रोड्यूसर एआर रहमान के पास जाने से भी डरते हैं (फ़ाइल फ़ोटो)
समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में गीतकार जावेद अख़्तर ने एआर रहमान के दावे पर प्रतिक्रिया दी है.

उन्होंने कहा, “मुझे कभी ऐसा नहीं लगा. मैं मुंबई में सभी लोगों से मिलता हूँ. लोग उनका (एआर रहमान का) बहुत सम्मान करते हैं. हो सकता है कि लोग ये समझते हों कि अभी वो वेस्ट में ज़्यादा व्यस्त हो गए हैं. हो सकता है लोग समझते हों कि उनके प्रोग्राम बहुत बड़े-बड़े होते हैं, उसमें ज़्यादा समय जाता है.”

जावेद अख़्तर ने आगे कहा, “रहमान इतने बड़े आदमी हैं कि छोटे-मोटे प्रोड्यूसर उनके पास जाने से भी डरते हैं. लेकिन मैं नहीं समझता कि इसमें कोई भी कम्यूनल एलिमेंट है.”

नितेश तिवारी की आने वाली फ़िल्म ‘रामायण’ में उन्होंने एल्बम कम्पोज़ किया है. अलग धर्म से आने के बावजूद इस फ़िल्म के लिए म्यूज़िक कंपोज़ करने से जुड़े सवालों के भी उन्होंने जवाब दिए.

पिछले साल ‘छावा’ फ़िल्म आई थी जिसमें एआर रहमान ने संगीत दिया था. इस फ़िल्म को कई इतिहासकारों ने तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने वाला और विभाजनकारी बताया था. फ़िल्म रिलीज़ के समय महाराष्ट्र की कुछ जगहों पर हिंसा भड़क गई थी.

शान ने कहा- तीनों सुपरस्टार अल्पसंख्यक
शान के कहा कि काम तो उनको भी नहीं मिल रहा है
गायक शान ने भी फ़िल्म और म्यूज़िक इंडस्ट्री में किसी ‘सांप्रदायिक या अल्पसंख्यक पहलू’ के होने से इनकार किया है.

शान ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा, “जहां तक काम न मिलने की बात है तो मैं आपके सामने खड़ा हूं. मैंने इतने सालों में इतना कुछ गाया है, मुझे भी काम नहीं मिल रहा. मुझे नहीं लगता कि संगीत में कोई सांप्रदायिक या अल्पसंख्यक पहलू होता है. अगर ऐसी बात होती तो हमारे जो तीनों सुपरस्टार तीस साल से हैं, वे भी अल्पसंख्यक हैं लेकिन क्या उनके फैंस किसी से कम हैं? वे तो बढ़ते ही जा रहे हैं.”

शान ने कहा कि सभी को अच्छा काम करते रहना चाहिए और इन सब चीज़ों के बारे में नहीं सोचना चाहिए. उन्होंने एआर रहमान के काम की तारीफ़ भी की. उन्होंने कहा कि एआर रहमान एक कमाल के कंपोज़र हैं और उनका काम करने का एक अलग अंदाज़ है.

एआर रहमान ने कर दिया वादकों को रोजगार

हाल ही एक इंटरव्यू में बॉलीवुड में काम न मिलने के लिए सांप्रदायिक एंगल और बदलते पावर डायनेमिक्स को जिम्मेदार ठहराया, जिस पर बवाल मच गया। राजनीतिक गलियारों में रहमान के बयान ने हलचल मचा दी। वहीं एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में भी इस पर बात होने लगी। जावेद अख्तर से लेकर सिंगर शान समेत कई सेलेब्स ने एआर रहमान के बयान पर अपनी राय रखी। विवाद बढ़ा तो एआर रहमान ने अपने बयान पर एक वीडियो जारी कर सफाई दी। इसी बीच अब सिंगर अभिजीत भट्टाचार्य ने एआर रहमान पर निशाना साधा है। अभिजीत ने एआर रहमान पर बड़ा आरोप लगा दिया है। अभिजीत का कहना है कि फिल्मों में बजाने वाले म्यूजिशियंस आज रहमान की वजह से घर बैठे हैं। उन्होंने ही सबको बताया कि लैपटॉप में सब मिलेगा, म्यूजिशियंस की जरूरत नहीं।

अभिजीत भट्टाचार्य ने कहा है कि एआर रहमान की वजह से ज्यादातर म्यूजिशियंस के पास काम नहीं है। अभिजीत के मुताबिक, रहमान की वजह से और लोगों को सक्सेस मिली, पर म्यूजिशियंस को नहीं। खुद उन्होंने ही खूब पैसे कमाए और सबसे कहा कि सिर्फ मैं ही कमाऊंगा और म्यूजिशियंस की जरूरत नहीं है। सब लैपटॉप पर मिलेगा।

 

राजनीतिक गलियारों से प्रतिक्रिया
शायना एनसी

शिव सेना नेता शायना एनसी ने एआर रहमान के बयान पर कहा, “मुझे लगता है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि एआर रहमान इंडस्ट्री के सांप्रदायिक होने की बात कर रहे हैं. उन्हें हर तरह का मौक़ा मिला है और भारत की ख़ूबसूरती है, अनेकता में एकता है.”

“अगर कोई रास्ता बंद है तो हमें ज़रूर समझना चाहिए कि योग्यता से सारी बाधाओं को दूर किया जा सकता है और जब आपको अवसर मिलता है तो आप अपना टैलेंट दिखाते हैं. यही हमारे देश की महानता है कि हर किसी को एक समान प्राथमिकता दी जाती है.”

वहीं भजन गायक अनूप जलोटा ने एआर रहमान के दावे पर कहा, “ऐसा बिल्कुल नहीं है. सच ये है कि उन्होंने पाँच साल में पच्चीस साल का काम कर लिया. अब क्या किया जाए. बहुत काम किया है उन्होंने और बहुत अच्छा काम किया है. उनके लिए लोगों के दिल में बहुत इज़्ज़त है।

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सोशल मीडिया से

संगीतकार ए.आर. रहमान ने काम न मिलने का ठीकरा पावर शिफ्ट पर फोड़ कर उसमें साम्प्रदायिक दृष्टिकोण जोड़ दिया है। रहमान का करियर डी कम्पनी व खान्स के दौर में भरपूर अवसर के चलते फला-फूला, अब वे वहाबी मानसिकता के चलते हासिए पर हैं।

उनका यह कृत्य वहाबी, लेफ्ट-लिबरल गैंग की तरह पहले स्वयं को पीड़ित दिखाओ, फिर वातावरण को दोषी ठहराओ और अंत में साम्प्रदायिक रंग दे दो, ताकि भारत में हिन्दुओं की जगह मुस्लिमों को पीड़ित के रूप में स्थापित किया जा सकें। (आप इण्डिया,16 January, 2026)

उल्लेखनीय है कि एक बार श्री पिराईसूदन, तमिलनाडु के आदरणीय विख्यात कवि व तीन बार सर्वश्रेष्ठ गीतकार के अवार्ड विजेता, आस्कर विजेता ए.आर. रहमान के बुलावे पर उनके निवास पर पहुंचे।

परन्तु ए.आर. रहमान की कट्टरवादी जिहादन माँ करीमा बेगम ने पिराई सूदन को प्रवेश द्वार पर यह कहते हुए रोक दिया कि घर में प्रवेश से पूर्व माथे पर लगा तिलक और ललाट पर लगा चंदन हटाना होगा!

इसके पीछे दलील यह है कि तिलक, चंदन व सनातन चिन्हों के धारक के गृह-प्रवेश से रहमान का घर नापाक हो जाएगा और ईमान को क्षति पहुंचेगी!

पिराई सूदन जी अवाक रह गए! भावुक कवि का हृदय आसुओं से रो उठा, पर रहमान की माँ करीमा बेगम का दिल नहीं पसीजा। पिराई सूदन जी दरवाजे से बैरंग और अपमानित होकर लौटे…!

रहमान का परिवार जन्मना मोमिन नहीं है, पर एक मौलवी के लटको-झटकों के वशीभूत भ्रमित होकर दिलीप कुमार से अल्लाह रक्खा रहमान हो गए और माँ कस्तूरी शेखर से करीमा बेगम हो गई। बाप कैसे मरा, ‘अल्लाह’ जाने! पर परिवार ‘दीन’ का हो गया।

रहमान की बेटी उच्च शिक्षित होकर भी पूर्णतः ‘बुरका’ में लिपटी रहती है, जिसमे सिर्फ चश्मे से ढकी आंखे ही नुमाया होती हैं!

इस्लाम में घृणास्पद शब्द औरत (योनि) को गुलाम से बदतर समझा जाता है। वह घर में कैदी की तरह व बुरके में बंद रहकर खुली हवा को भी तरसती है। इस काले चोगे का नाम भी अजीब है। यह कपड़ा है तो ‘सर का’, नाम है ‘बुर का’। इसके सब के बावजूद आस्कर लेते समय रहमान ने फरमाया था कि – “मैंने बुराई के मुकाबले अच्छाई चुनी, पर बेवकूफ़ लोग तालियां बजाने लगे!” मूर्खों को यह समझ में नहीं आया कि ए.आर. रहमान का बुराई से तात्पर्य सनातन ‘धर्म’ और अच्छाई से इस्लाम ‘मजहब’ का था!

साभार : Shriî Jai Kishan Karnwal जी

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