उत्तराखंड SIR को लेकर उलझनें,तंत्र और राजनीतिक दलों को चुनौती
उत्तराखंड में SIR के हैरतअंगेज आंकड़े, एक ही व्यक्ति ने लगा दी 5000 आपत्तियां, घरों से लापता 40 हजार से ज्यादा लोग!
उत्तराखंड में SIR के दौरान ऐसे आंकड़े सामने आए हैं जिनको लेकर सबको हैरानी हो रही है.
देहरादून 24 अगस्त 2026 : उत्तराखंड में SIR (Special Intensive Revision) के दौरान कुछ ऐसे हैरतअंगेज आंकड़े सामने आए हैं, जो हर किसी को आश्चर्य में डाल रहे हैं. इसमें आपत्ति लगाने की संख्या से लेकर घरों से लापता लोगों तक की संख्या बेहद चौंकाने वाली है. हालात ये है कि अब इन आंकड़ों का वेरिफिकेशन करना निर्वाचन आयोग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है. जानिए उत्तराखंड में SIR के दौरान सामने आए दिलचस्प आंकड़ों की स्थिति. ईटीवी भारत की स्पेशल रिपोर्ट में…
उत्तराखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची को लेकर कुछ ऐसे आंकड़े सामने आ रहे हैं, जो हर किसी को सोचने पर मजबूर कर रहे हैं. यहां बात केवल आपत्तियों की संख्या की नहीं है, बल्कि एक ही शख्स द्वारा 5000 से ज्यादा लोगों के खिलाफ आपत्ति दर्ज कराने जैसे गंभीर मुद्दे की भी है.
उत्तराखंड में SIR के हैरतअंगेज आंकड़ों पर उठ रहे सवाल.
90 प्रतिशत से ज्यादा आपत्तियां मैदानी जिलों से: हैरानी की बात तो यह है कि कुल आपत्तियां में से 90 प्रतिशत से ज्यादा आपत्तियां मैदानी जिलों की हैं. प्रदेश में फॉर्म-10 के जरिए कुल 59,604 वास्तविक आपत्तियां दर्ज की गई हैं. इनमें सबसे बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं से जुड़ी हैं, जो सत्यापन के दौरान अपने घर पर नहीं मिले या स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं. ऐसे मामलों की संख्या 40,906 है. यानी कुल आपत्तियों का करीब 69 फीसदी हिस्सा इसी श्रेणी से संबंधित है.
निर्वाचन आयोग की रिपोर्ट: निर्वाचन आयोग की ओर से तैयार की गई विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में आपत्तियों के कारणों का अलग-अलग वर्गीकरण किया गया है. इसमें Absent/Permanently Shifted श्रेणी में 40,906 मामले दर्ज हुए हैं. इसके अलावा 2,575 मतदाताओं के स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट होने की अलग से शिकायत दर्ज की गई है. इसका मतलब यह है कि मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए हैं, जिनके वर्तमान पते पर संबंधित मतदाता उपलब्ध नहीं मिले.
40 हजार से ज्यादा नामों के सत्यापन की चुनौती: SIR का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाना है. ऐसे में 40,906 लोगों के घर पर नहीं मिलने या दूसरी जगह शिफ्ट होने की आपत्तियां निर्वाचन तंत्र के सामने बड़ी चुनौती हैं. इन मामलों में अब यह सत्यापित करना जरूरी होगा कि संबंधित मतदाता वास्तव में उसी विधानसभा क्षेत्र में निवास कर रहा है या नहीं. यदि मतदाता दूसरी जगह स्थायी रूप से जा चुका है, तो पुराने पते की मतदाता सूची में उसका नाम बने रहना भी सवाल खड़ा करता है. हालांकि इसमें निर्वाचन को यह भी देखना होगा की आपत्ति करने वाले आवेदक की सत्यता कितनी सटीक है, क्योंकि राजनीतिक षडयंत्र या नफा नुकसान का गणित भी ऐसी आपत्तियों के पीछे की वजह बन सकता है.
कांग्रेस पहले ही खड़े कर चुकी सवाल: इस मामले में कांग्रेस पहले ही आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. कांग्रेस नेता अमेंद्र बिष्ट का कहना है कि भाजपा के कार्यकर्ता, मुस्लिम वोटर या कांग्रेस से जुड़े वोटर को टारगेट करते हुए उनके खिलाफ आपत्तियां लग रहे हैं. ताकि उनका नाम मतदाता सूची से हट सके.
उधर केवल घर पर किसी व्यक्ति के नहीं मिलने को ही उसके नाम को हटाने का आधार नहीं माना जा सकता. सत्यापन के दौरान यह भी पता लगाना होगा कि वह अस्थायी रूप से बाहर है या वास्तव में स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुका है. ऐसे में 40 हजार से अधिक मामलों का दोबारा सत्यापन निर्वाचन अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण प्रक्रिया बन सकता है.
एक व्यक्ति ने अकेले दाखिल कर दीं 5,906 आपत्तियां: SIR के आंकड़ों में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला पहलू एक व्यक्ति की ओर से दाखिल की गई आपत्तियों की संख्या है. रिपोर्ट के मुताबिक राजेश तिवारी ने अकेले 5,906 आपत्तियां दर्ज की हैं, ये सभी आपत्तियां किच्छा विधानसभा क्षेत्र से संबंधित हैं. यानी प्रदेश में दर्ज कुल 59,604 वास्तविक आपत्तियों में करीब दस फीसदी आपत्तियां अकेले एक व्यक्ति के नाम से हैं.
किच्छा विधानसभा क्षेत्र में कुल 8,767 आपत्तियां दर्ज हुई हैं और यह प्रदेश में सबसे ज्यादा आपत्तियों वाला विधानसभा क्षेत्र है. इनमें राजेश तिवारी की 5,906 आपत्तियां शामिल हैं. इसका मतलब है कि किच्छा में दर्ज कुल आपत्तियों का बड़ा हिस्सा अकेले एक व्यक्ति की ओर से दाखिल किया गया.
कांग्रेस का आरोप: कांग्रेस पहले ही कह चुकी है कि राजेश तिवारी भाजपा के BLA वन के रूप में वहां काम देख रहे हैं जो जानबूझकर ऐसे लोगों के खिलाफ आपत्ति लगा रहे हैं, जो कांग्रेस के मतदाता के रूप में चिह्नित किए गए हैं. यह आंकड़ा इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि SIR में मतदाता सूची की शुद्धता के लिए आपत्तियां दर्ज कराने की व्यवस्था आम मतदाताओं और संबंधित पक्षों को दी गई है, लेकिन जब एक व्यक्ति की ओर से हजारों आपत्तियां दर्ज होती हैं, तो प्रत्येक आपत्ति की वास्तविकता और आधार का सत्यापन निर्वाचन मशीनरी के लिए अलग चुनौती बन जाता है.
किच्छा के बाद हल्द्वानी और जसपुर का नंबर: आपत्तियों की संख्या के लिहाज से किच्छा के बाद हल्द्वानी में 7,312 और जसपुर में 6,720 आवेदन दर्ज हुए हैं. इसके बाद काशीपुर में 5,704, रुद्रपुर में 4,958, गदरपुर में 4,785, झबरेड़ा में 2,333, सितारगंज में 1,612, बाजपुर में 1,475 और हरिद्वार ग्रामीण में 1,400 आपत्तियां दर्ज की गई हैं.
इस सूची से साफ है कि सबसे ज्यादा आपत्तियां प्रदेश के मैदानी और खासकर ऊधमसिंह नगर और हरिद्वार से जुड़े विधानसभा क्षेत्रों में सामने आई हैं. हालांकि पूरे प्रदेश में आपत्तियों के कारणों को देखें तो सबसे बड़ी चिंता अनुपस्थित या दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके मतदाताओं को लेकर है.
दूसरे स्थान पर Already Enrolled की आपत्तियां: रिपोर्ट में आपत्तियों के अन्य कारण भी सामने आए हैं. 14,358 आपत्तियां ऐसे मामलों में दर्ज की गई हैं, जहां संबंधित व्यक्ति पहले से ही मतदाता के रूप में नामांकित बताया गया है. इसके अलावा 2,575 मामलों में स्थायी रूप से शिफ्ट होने, 804 में मृत्यु, 143 में कम उम्र, 205 में भारतीय नागरिक नहीं होने और 607 मामलों में आपत्ति का कारण स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं किया गया है.
इन आंकड़ों को जोड़ने पर कुल वास्तविक आवेदन 59,604 दर्ज होते हैं. यानी मतदाता सूची में नामों की शुद्धता को लेकर सामने आई आपत्तियों का दायरा केवल घर पर मतदाता नहीं मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि डुप्लीकेट नाम, मृत्यु, उम्र और नागरिकता जैसे कारण भी इसमें शामिल हैं.
आपत्ति दर्ज कराने वालों में भी दिलचस्प आंकड़े: रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 3,233 आवेदन ऐसे हैं, जहां आपत्ति दर्ज कराने वाले व्यक्ति का नाम ही संबंधित सूची में दर्ज नाम के समान है. यह कुल वास्तविक आपत्तियों का 5.4 फीसदी है. यानी कुछ मामलों में मतदाता खुद अपने नाम से संबंधित आपत्ति दर्ज कर रहा है.
सबसे ज्यादा आपत्तियां दर्ज कराने वालों की सूची में राजेश तिवारी 5,906 आपत्तियों के साथ पहले स्थान पर हैं. दूसरे स्थान पर किशोर कुमार ने 824, चंकित हुरिया ने 680 और अमित कुमार पांडे ने 440 आपत्तियां दर्ज की हैं. इसके बाद एरो नाम से 329 और एरो नाम से ही 278 आपत्तियां दर्ज होने का उल्लेख है. राकेश ने 277, गोपी किशन ने 225, कृष्ण पाल राठी ने 215 और लतिका सिकदार ने 199 आपत्तियां दर्ज की हैं.
अब असली चुनौती आपत्तियों की जांच: दरअसल, 59,604 वास्तविक आपत्तियों में सबसे बड़ा हिस्सा ऐसे लोगों का है, जो सत्यापन के दौरान अपने पते पर नहीं मिले या दूसरी जगह जा चुके बताए गए हैं. वहीं, हजारों आपत्तियां एक ही व्यक्ति या सीमित संख्या में लोगों की ओर से दाखिल की गई हैं. ऐसे में अब केवल आपत्तियों की संख्या महत्वपूर्ण नहीं होगी, बल्कि प्रत्येक आपत्ति की वास्तविकता की जांच भी उतनी ही अहम होगी.
खासकर 40,906 अनुपस्थित या स्थायी रूप से शिफ्ट बताए गए मतदाताओं के मामले में यह तय करना होगा कि वे वास्तव में अपने पुराने पते से हट चुके हैं या सत्यापन के समय अस्थायी रूप से उपलब्ध नहीं थे. इसी सत्यापन के बाद तय होगा कि मतदाता सूची में किन नामों को बरकरार रखना है और किन नामों को नियमों के तहत हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ानी है.
SIR के इस चरण में सामने आए आंकड़े इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि ये केवल मतदाता सूची में संभावित गड़बड़ियों की तस्वीर नहीं दिखाते, बल्कि यह भी बताते हैं कि सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया में एक ही व्यक्ति द्वारा हजारों आपत्तियां दाखिल किए जाने जैसी परिस्थितियां भी सामने आ रही हैं. अब निर्वाचन आयोग के लिए चुनौती इन आंकड़ों को अंतिम सत्यापन तक पहुंचाने और हर आपत्ति की वास्तविकता सुनिश्चित करने की है.
इस मामले में निर्वाचन आयोग के ACEO विजय कुमार जोगदंडे कहते हैं कि
आपत्ति लगने से ही मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटता बल्कि इसके बाद आपत्ति दर्ज करने और इसके खिलाफ आपत्ति दर्ज की गई है, उन दोनों ही लोगों को अपनी बात रखनी होती है. इसके बाद ही आपत्तियों पर फैसला लिया जाता है.
-विजय कुमार जोगदंडे, ACEO, निर्वाचन आयोग-
बीजेपी ने उल्टा कांग्रेस को घेरा: उधर लगातार कांग्रेस के आक्रामक रुख के जवाब में भाजपा भी सामने आई है. भारतीय जनता पार्टी के नेता कहते हैं कि
कांग्रेस एक समाज विशेष को खुश करने के लिए SIR में गड़बड़ी के आरोप लगा रही है, जबकि निर्वाचन आयोग अपने स्तर पर इस पूरी प्रक्रिया को देख रहा है और नियमों के अनुसार ही इस पर काम किया जा रहा है.
-मथुरा दत्त जोशी, प्रदेश प्रवक्ता, भाजपा-

