40 वर्ष आयु बाद बन सकते हैं विवि प्रोफेसर ? प्रमोशन का जानें नियम

क्या 40 की उम्र के बाद यूनिवर्सिटी प्रोफेसर बन सकते हैं? प्रमोशन का क्या है नियम

University Professor Upper Age Limit and Eligibility Rules: क्या यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनने के लिए कोई अधिकतम उम्र सीमा होती है? जानिए UGC के नए नियम, असिस्टेंट प्रोफेसर से प्रोफेसर बनने की योग्यता, प्रमोशन का तरीका और रिटायरमेंट की उम्र से जुड़ी हर जरूरी बात.

नई दिल्ली (University Professor Upper Age Limit). यूनिवर्सिटी प्रोफेसर सबसे सम्मानित प्रोफेशन में से एक है. लाखों युवा अच्छी सैलरी, सम्मानजनक पद और रिसर्च वाले माहौल के लिए नेट और PhD की तैयारी में सालों लगा देते हैं. लेकिन अक्सर देर से पढ़ाई पूरी करने वाले या किसी अन्य प्रोफेशन से टीचिंग में आने की इच्छा रखने वाले उम्मीदवारों के मन में बड़ा सवाल उठता है- क्या यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर या प्रोफेसर बनने के लिए कोई अधिकतम उम्र सीमा होती है?

सरकारी नौकरी में अक्सर 30 या 35 साल की उम्र सीमा देखने को मिलती है. इसलिए कई लोगों को लगता है कि इस उम्र के बाद प्रोफेसर भी नहीं बना जा सकता. अगर आपके मन में भी उम्र को लेकर यही भ्रम बना हुआ है तो आज इसे खत्म कर लें. यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नियमों के अनुसार, डिग्री कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में रेगुलर प्रोफेसर की भर्ती के लिए उम्र का गणित सामान्य सरकारी नौकरी से बिल्कुल अलग है. जानिए प्रोफेसर बनने की उम्र, योग्यता और प्रमोशन के क्या नियम हैं.
क्या प्रोफेसर बनने के लिए अधिकतम आयु सीमा तय की गई है?
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) के नियमानुसार, सेंट्रल और स्टेट यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर डायरेक्ट भर्ती के लिए कोई अधिकतम उम्र सीमा तय नहीं है. आप 35, 40 या 45 साल की उम्र में भी पहली बार यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में जॉइन कर सकते हैं. शर्त बस इतनी है कि आप यूनिवर्सिटी के रिटायरमेंट नियमों (जो आमतौर पर 65 वर्ष है) से पहले आवेदन कर रहे हों.
JRF के लिए उम्र सीमा: जूनियर रिसर्च फेलोशिप (JRF) पाने के लिए अधिकतम उम्र 30 वर्ष (आरक्षित वर्गों और महिलाओं के लिए 5 साल की छूट) होती है. लेकिन केवल NET सर्टिफिकेट या असिस्टेंट प्रोफेसर की पात्रता के लिए कोई उम्र सीमा नहीं है.
स्टेट लोक सेवा आयोग (PSC): कुछ राज्यों के सरकारी डिग्री कॉलेज (जैसे राज्य सेवा आयोग से) में भर्ती के समय 38 से 40 वर्ष की सीमा रखी जाती है. लेकिन यूनिवर्सिटी (केंद्रीय या राज्य विश्वविद्यालय) में ऐसी कोई बंदिश नहीं होती.
प्रोफेसर बनने के लिए जरूरी योग्यता

यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर बनने का सफर 3 चरणों में आगे बढ़ता है:
असिस्टेंट प्रोफेसर (प्रारंभिक स्तर)
संबंधित विषय में न्यूनतम 55% अंकों के साथ मास्टर डिग्री (मास्टर स्तर पर SC/ST/OBC/PwD उम्मीदवारों को 5% की छूट).
UGC-NET, CSIR-NET या स्टेट लेवल के SET/SLET एग्जाम में पास होना अनिवार्य है.
अगर 2009 या 2016 के UGC रेगुलेशन के तहत रेगुलर मोड में PhD की है तो NET से छूट मिल सकती है.
एसोसिएट प्रोफेसर (मध्यम स्तर)
पीएचडी (PhD) अनिवार्य है.
असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर कम से कम 8 साल का टीचिंग/रिसर्च एक्सपीरियंस और कम से कम 7 अच्छे रिसर्च पेपर्स पब्लिश होने चाहिए.
प्रोफेसर (शीर्ष स्तर)
पीएचडी होना बेहद जरूरी है.
न्यूनतम 10 साल का टीचिंग या रिसर्च अनुभव होना चाहिए.
कम से कम 10 हाई क्वॉलिटी वाले रिसर्च पेपर पब्लिश होने चाहिए और सफलतापूर्वक PhD गाइड करने का अनुभव होना चाहिए.
प्रोफेसर के लिए प्रमोशन और रिटायरमेंट के नियम क्या हैं?
किसी भी यूनिवर्सिटी में प्रमोशन मुख्य रूप से करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के तहत होता है. अगर आप असिस्टेंट प्रोफेसर बनते हैं तो आपका करियर ग्राफ इस तरह का होता है:
प्रमोशन का जरिया: एकेडमिक परफॉर्मेंस इंडिकेटर (API) स्कोर और CAS नियमों के तहत असिस्टेंट प्रोफेसर (लेवल 10) से प्रमोट होकर असिस्टेंट प्रोफेसर (लेवल 11, 12), फिर एसोसिएट प्रोफेसर (लेवल 13A) और आखिरकार ‘फुल प्रोफेसर’ (लेवल 14) बनते हैं. इसमें रिसर्च, टीचिंग आवर्स और पब्लिकेशन का रोल अहम होता है.
रिटायरमेंट एज: केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की रिटायरमेंट की उम्र 65 वर्ष होती है.
री-अपॉइंटमेंट: रिटायरमेंट के बाद भी अगर प्रोफेसर की परफॉर्मेंस और सेहत अच्छी है तो यूनिवर्सिटी उन्हें 70 साल की उम्र तक री-अपॉइंटमेंट या ‘प्रोफेसर एमेरिटस’ (Professor Emeritus) के तौर पर पढ़ाने का मौका दे सकती है

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