एस जयशंकर का भयावह अलर्ट:

  1. भारत का कमजोर मानसून, अफ्रीका में सूखा… 5 करोड़ लोगों पर खतरा! एस जयशंकर का अलर्ट डराने वाला है

S Jaishankar Warning On Food Crisis: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने दुनिया में भयंकर फूड क्राइसिस की चेतावनी दी है. यूक्रेन-वेस्ट एशिया युद्ध, मजबूत अल नीनो और फर्टिलाइजर सप्लाई में रुकावट ने इस संकट को जन्म दिया है. भारत में कमजोर मानसून और चावल की बढ़ती कीमतें चुनौती बढ़ा रही हैं. अफ्रीका और साउथईस्ट एशिया में अकाल का खतरा है. ऐसे में भारत की फूड डिप्लोमेसी दुनिया को बचाने में अहम रोल निभा सकती है. पढ़ें, प्रोफेसर हिंडोल सेनगुप्ता का लेख.

हिंडोल सेनगुप्ता

जयशंकर की चेतावनी को हल्के में नहीं लिया जा सकता. वह बदलते जियोपॉलिटिकल हालात को ध्‍यान में रखते हुए अलर्ट कर रहे हैं.
जब दुनिया का कोई दिग्गज विदेश मंत्री ग्लोबल फूड संकट को लेकर चेतावनी दे, तो इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है. न्यूयॉर्क की प्रतिष्ठित एशिया सोसाइटी में बोलते हुए एस जयशंकर ने कहा, ‘आने वाले कुछ महीनों में दुनिया संभवतः एक बड़े फूड क्राइसिस का सामना कर सकती है’. उनकी इस चेतावनी के पीछे एक गहरा एनालिसिस छिपा है. उनके मुताबिक वर्तमान में दुनिया तीन बड़े झटकों का एक साथ सामना कर रही है.
पहला झटका यूक्रेन का लंबा खिंचता संघर्ष है.
दूसरा झटका वेस्ट एशिया का लगातार बढ़ता तनाव है.
तीसरा झटका मौसम से जुड़ा मजबूत अल नीनो का प्रभाव है.
इन तीनों संकटों ने मिलकर पूरी दुनिया में अनाज की सप्लाई चेन को तोड़ दिया है. फर्टिलाइजर की सप्लाई भी बुरी तरह बाधित हो चुकी है. इसका सबसे भयंकर असर ग्लोबल साउथ के विकासशील देशों पर पड़ रहा है. इसके अलावा एक चौथा और खामोश संकट भी काम कर रहा है. जब भी दुनिया में कोई युद्ध या संघर्ष होता है, तो निवेशक अपना पैसा निकाल लेते हैं. यह पैसा ग्लोबल साउथ से निकलकर सुरक्षित ठिकानों की तरफ चला जाता है. इसका सीधा मतलब यह है कि दुनिया एक साथ एनर्जी, फूड, फर्टिलाइजर और फाइनेंस के मोर्चे पर घिर चुकी है.

मौसम के आंकड़े इस समय सबसे ज्यादा डराने वाले संकेत दे रहे हैं. अमेरिका के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर ने अपनी नई रिपोर्ट में चौंकाने वाले फैक्ट्स सामने रखे हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक अल नीनो का प्रभाव अब लगातार मजबूत हो रहा है. उत्तरी गोलार्ध में साल 2026-27 की सर्दियों में इसके भयंकर रूप लेने की आशंका 90 प्रतिशत से अधिक  है.

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