देहरादून के पछवादून में 164 से अधिक इस्लामिक संरचनाएं चिन्हित, कई सरकारी भूमि पर, मुमं धामी के जांच के निर्देश

देहरादून 29 जून 2025 । उत्तराखंड,  उत्तर प्रदेश, हिमाचल और हरियाणा सीमा से लगे पछुवा देहरादून के विकास नगर परगना क्षेत्र में उत्तराखंड राज्य बनने के बाद से डेमोग्राफी के बदलाव के कई उदाहरण सामने आए है। सूत्रों के अनुसार धामी सरकार की कराई गई एक जांच में ये विषय उजागर हुआ है कि यहां बाहरी राज्यों से आई गैर हिन्दू आबादी ने न सिर्फ  पांव पसार लिए बल्कि इस्लामिक संरचनाएं भी खड़ी कर दी।
विकासनगर कालसी सहसपुर, सेलाकुई, प्रेम नगर क्षेत्र में ही 164 मस्जिद, मदरसे, ईदगाह, चिन्हित हुए हैं।

जानकारी के मुताबिक विकासनगर कालसी में 56 मस्जिदें ,7 ईदगाह,27 मदरसे, चिन्हित हुए है इनमें से 15 सरकारी भूमि पर कब्जे कर बनाए गए है। विकास नगर परगना क्षेत्र में सरकारी जमीनों पर मस्जिदें बना दी गई है। कुल्हाल में नई आशिया मस्जिद ग्राम समाज की जमीन पर बनी है,जबकि धौलातप्पड़ की क़ूबा मस्जिद वन विभाग की भूमि पर कब्जा करके बनाई गई है।

जानकारी के अनुसार ग्राम मटक माजरी की जामा मस्जिद सिंचाई विभाग की जमीन पर बनी हुई है।इसी ग्राम में रहीमी मस्जिद भी सिंचाई विभाग की भूमि पर अतिक्रमण करके बनाई गई है। इन धार्मिक संरचनाओं को आखिरकार किन किन अधिकारियों ने बनने दिया इस पर कोई सरकारी जांच नहीं हुई।

ग्राम कुंजा की ईदगाह मस्जिद भी 5 बिस्वा सिंचाई विभाग के नाले की भूमि पर अतिक्रमण करके बनाने का मामला सामने आया है।
ढकरानी की फातिमा तुज्झास मस्जिद भी सिंचाई विभाग की भूमि पर कब्जा करके बनाई गई है।यहीं इस्लामिया अरबिया मसीहुल उलूम मदरसा मस्जिद का एक हिस्सा शक्तिनगर सिंचाई विभाग की जमीन पर कब्जा कर इमारत खड़ी कर ली गई है।

ढकरानी का बड़ी ईदगाह, बाबूगढ़ का ईदगाह, जीवनगढ़ का ईदगाह, हरबर्टपुर का ईदगाह, कुँजा का ईदगाह, डॉक्टर गंज का ईदगाह भी सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे कर बनाए गए है। सेलाकुई में 10,सहसपुर में 84,प्रेम नगर में 09,में मस्जिद मदरसे ईदगाह बना दिए गए है। कुछ मजहबी संरचनाएं इतनी आलीशान है कि उन्हें देख कर आते जाते लोग यही चर्चा करते है कि आखिर इतनी फंडिंग इन्हें कहां से हो रही है?

इतनी बड़ी संख्या में इस्लामिक संरचनाएं केवल पछुवा देहरादून में है, अभी देहरादून जिले के अन्य क्षेत्रों में मस्जिद मदरसा ईदगाह की संख्या अलग है वो भी चौंकाने वाली है।

सरकारी भूमि पर कब्जा, फिर धार्मिक संरचना बना कर को वक्फ बोर्ड में चढ़ाने का षडयंत्र भी जानकारी में भी आया है। सरकारी भूमि पर कब्जे कर उक्त भूमि को वक्फ बोर्ड में चढ़ाने का खेल भी पिछले कुछ सालों से चल रहा है। कालसी वन प्रभाग में भूरे शाह की मजार और काठगोदाम में बनी वन विभाग की भूमि पर बनी अवैध मजार इसका उदाहरण है।

संपत्तियों की जांच सर्वे का काम शुरू : डा. पराग मधुकर धकाते 

अल्पसंख्यक मंत्रालय के विशेष सचिव डॉ पराग ने बताया कि वक्फ संपत्तियों की जांच के अलावा राज्य में कितनी मस्जिद मजारे मदरसे है इसकी सर्वे जांच की शुरू कराई जा रही है।

सीएम धामी का बयान

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि सरकारी भूमि पर कब्जा कर अवैध रूप से बनाई गई मस्जिद मदरसे मजारों के भूमि स्वामित्व की जांच कराई जाएगी ताकि वस्तुस्थिति का पता चल सके।

Tags:Unauthorized Religious Structures Uttarakhandसरकारी जमीन पर मजारMasjid Madarsa Land Disputeदेहरादून मस्जिद जांचउत्तराखंड वक्फ भूमि विवादमस्जिद मदरसा अतिक्रमणधामी सरकार मुस्लिम संरचना जांचवक्फ बोर्ड सरकारी जमीनकालसी मस्जिद विवादUttarakhand Mosque SurveyDehradun Islamic Encroachment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *