पर्यावरण प्रभाव न्यूनतम रखने को इंजीनियरिंग संशोधन हुए भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश 4/6 लेन रोड परियोजना में
Bhaniyawala Jolly Grant Rishikesh Four Six Lane Project 5 Elephant Underpasses
30 मिनट में देहरादून से ऋषिकेश! भानियावाला-जॉलीग्रांट-ऋषिकेश परियोजना, 5 एलीफेंट अंडरपास भी
देहरादून में भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना लगभग 20 किलोमीटर लंबी 743 करोड़ की अनुमानित लागत से हाइब्रिड एन्युटी मोड के तहत बनाई जा रही है।
देहरादून में भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश परियोजना
20 किलोमीटर लंबी परियोजना 743 करोड़ की अनुमानित लागत
3.5 किलोमीटर लंबे 5 एलीफेंट कोरिडोर बनेंगे
देहरादून-भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश परियोजना
देहरादून : एनएचएआई ने उत्तराखंड में भानियावाला–जॉलीग्रांट–ऋषिकेश फोर/सिक्स लेन परियोजना (एनएच-07) पर काम शुरू कर दिया है। लगभग 20 किलोमीटर लंबी यह परियोजना 743 करोड़ की अनुमानित लागत से हाइब्रिड एन्युटी मोड में बनाई जा रही है। प्रस्तावित राजमार्ग में हाथियों के सुरक्षित आवागमन को 3.5 किलोमीटर लंबे 5 एलीफेंट कोरिडोर बनेंगें।
दावा है कि इस परियोजना से देहरादून, जॉलीग्रांट एयरपोर्ट और ऋषिकेश के बीच दूरी कम हो जाएगी। माना जा रहा है कि देहरादून से ऋषिकेश 30 मिनट में सफर पूरा हो जाएगा। हालांकि प्रोजेक्ट में पेड़ों को भी काटा जा रहा है, जिसको लेकर सामाजिक संगठनों ने इसका विरोध भी शुरू कर दिया है।
प्रतिदिन 18,456 गाड़ियां दौड़ रही
बताया गया कि वन क्षेत्र से गुजरने वाले मौजूदा दो-लेन मार्ग पर प्रतिदिन लगभग 18,456 गाड़ियां दौड़ रही हैं, जो 15,088 पैसेंजर कार यूनिट है। इस रूट पर चार धाम यात्रा के साथ ही जौलीग्रांट एयरपोर्ट से आने जाने वाले लोग भी सफर करते हैं जो कि भविष्य में ट्रैफिक की दृष्टि से नई चुनौतियां खड़ा कर सकता है जिससे जाम और सड़क दुर्घटनाओं की संभावना बनी रहती है। ऐसे में इस मार्ग का चौड़ीकरण किया जा रहा है।
754 पेड़ों का ट्रांसप्लांटेशन
पर्यावरण पर प्रभाव को न्यूनतम रखने के उद्देश्य से एनएचएआई ने परियोजना के डिजाइन में कई महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग संशोधन किए हैं। सामान्यतः राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए 60 मीटर राइट ऑफ वे निर्धारित होता है, लेकिन वन क्षेत्र में इसे घटाकर केवल 23 मीटर रखा गया है। इससे राजमार्ग की सुरक्षा संबंधी मानकों से समझौता किए बिना पेड़ों की कटाई को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट (FRI) द्वारा किए गए वैज्ञानिक आकलन के आधार पर 754 पेड़ों को ट्रांसप्लांटेशन के लिए चिन्हित किया गया है। इनका प्रतिरोपण आगामी मानसून के दौरान किया जाएगा।
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परियोजना की खास बातें
1 ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास
4 समर्पित एलीफेंट अंडरपास
ग्रीन गाइड हेज
साउंड बैरियर
एंटी-ग्लेयर स्क्रीन
वन्यजीव चेतावनी संकेतक
गति नियंत्रण (स्पीड कैल्मिंग) उपाय
निर्धारित ‘नो हॉर्न’ जोन
फोर-लेन सड़क परियोजना का विरोध भी शुरू
एलीफेंट कॉरिडोर से होकर प्रस्तावित ऋषिकेश–भानियावाला फोर-लेन सड़क परियोजना का विरोध भी शुरू हो गया है। समाजसेवी और वरिष्ठजनों ने पर्यावरण, कानून और जनसुरक्षा से जुड़े गंभीर सवालों को लेकर इसे निरस्त करने की मांग की है। एसडीसी के संस्थापक अनूप नौटियाल ने नेशनल हाईवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया तथा उत्तराखंड सरकार से पारिस्थितिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील एलीफेंट कॉरिडोर से होकर गुजरने वाली प्रस्तावित ऋषिकेश–भानियावाला फोर-लेन सड़क परियोजना पर पुनर्विचार करते हुए इसे निरस्त करने की मांग की है। अनूप नौटियाल ने प्रश्न उठाया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने पहली बार मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर वृक्ष कटान क्यों शुरू किया। नागरिकों का कहना है कि अगर काम को नहीं रोका गया तो आंदोलन भी तेज किया जाएगा।
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ऋषिकेश-भानियावाला फोरलेन हाईवे का काम रहेगा जारी, हाई कोर्ट से NHAI को मिली बड़ी राहत
By Kishore Joshi
Edited By: Sachin Sharma
Updated: Sat, 11 Jul 2026 06:15 AM (IST)
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उत्तराखंड हाई कोर्ट ने ऋषिकेश-भानियावाला फोर-लेन सड़क परियोजना में पेड़ों की कटाई को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के खिलाफ दायर अवमानना याचिका खारिज कर दी है।
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हाई कोर्ट से नेशनल हाइवे अथॉरिटी को बड़ी राहत, अवमानना याचिका खारिज
हाई कोर्ट से नेशनल हाइवे अथॉरिटी को बड़ी राहत, अवमानना याचिका खारिज
HighLights
हाई कोर्ट ने NHAI की अवमानना याचिका खारिज की।
ऋषिकेश-भानियावाला फोर-लेन परियोजना को मिली हरी झंडी।
पेड़ों की कटाई पर कोई अंतरिम रोक नहीं।
हाई कोर्ट ने पर्यावरणविदों की ओर से भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के प्रोजेक्ट डायरेक्टर के विरुद्ध दायर अवमानना याचिका निरस्त कर दी है।
याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि ऋषिकेश-भानियावाला फोर-लेन सड़क परियोजना को पेड़ों की कटाई कोर्ट के पुराने आदेशों का उल्लंघन है। न्यायाधीश न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की ओर से किसी भी अदालती आदेश की अवहेलना नहीं हुई है और अभी इस परियोजना पर कोई अंतरिम रोक या प्रतिबंध लागू नहीं है।
इससे पहले नौ जनवरी 2026 को ही कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी जनहित याचिका निस्तारित करते हुए कहा था कि बहुचर्चित ‘हाथी कॉरिडोर’ का विवाद सुप्रीम कोर्ट से पहले ही पूरी तरह तय किया जा चुका है। इसके बाद, जब 18 मार्च 2026 को एक स्पष्टीकरण याचिका दायर की गई, तब भी हाई कोर्ट ने साफ कर दिया था कि पेड़ों की कटाई पर पूर्व में लगाई गई अंतरिम रोक की अवधि कभी आगे नहीं बढ़ायी गयी थी। सीधा मतलब है कि परियोजना को रोकने के लिए कोई कानूनी आदेश अस्तित्व में नहीं था।
इस परियोजना के मार्ग में आने वाले कुल 4,639 पेड़ों को हटाने के लिए चिह्नित किया गया है। एनएचएआई ने कोर्ट को बताया था कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन साधते हुए कुल 754 पेड़ों को पूरी तरह काटने के बजाय वैज्ञानिक पद्धति से सुरक्षित रूप से दूसरी जगह प्रत्यारोपित (ट्रांसप्लांट) करेगा।
इसके अतिरिक्त, संवेदनशील वन्यजीव क्षेत्र होने के कारण हाईवे पर हाथियों और अन्य जानवरों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं । जिसके तहत एलीफेंट अंडरपास, प्राकृतिक हरी झाड़ियों की सुरक्षा दीवारें और विशेष वन्यजीव चेतावनी संकेतक लगाए जाएंगे।
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राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुसार, इन सभी सुरक्षा उपायों का खाका वन विभाग, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया और भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों के साथ मिलकर तैयार किया गया है और इसके लिए सभी आवश्यक वैधानिक अनुमतियां पहले ही प्राप्त की जा चुकी हैं। याचिका को खारिज किए जाने के बाद अब इस राष्ट्रीय राजमार्ग के निर्माण में आ रही अंतिम कानूनी बाधा भी पूरी तरह समाप्त हो गई है।

