तमिलनाडु में होती रहेगी गौहत्या,कांग्रेस नेता सिंघवी ने की सुको में पैरवी
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थलपति विजय सरकार की सुप्रीम कोर्ट में बड़ी जीत, तमिलनाडु में गो-हत्या पर बैन खत्म, कांग्रेस नेता ने की पैरवी
सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को स्थगित कर दिया है, जिसमें गो-हत्या पर रोक लगा दी गई थी। तमिलनाडु सरकार की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने गो-हत्या पर लगे बैन पर अंतरिम रोक लगा दी है।
नई दिल्ली: गो-हत्या पर सुप्रीम कोर्ट में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति सी जोसेफ विजय की सरकार को बड़ी जीत मिली है। सर्वोच्च अदालत ने प्रदेश में गो-हत्या पर मद्रास हाई कोर्ट की ओर से लगाए गए पूर्ण पाबंदी वाले आदेश पर रोक लगा दी है। मतलब, राज्य में अब गो-हत्या पर हाई कोर्ट के आदेश की वजह से बकरीद के समय लगा प्रतिबंध हट गया है।
सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता सोमवार को तमिलनाडु सरकार की ओर से दायर स्पेशल लीव पिटीशन पर नोटिस जारी करते हुए मद्रास हाई कोर्ट के आदेश पर अपना यह अंतरिम आदेश जारी किया है। तमिलनाडु की सी जोसेफ विजय सरकार ने प्रदेश में गाय और बछड़े की हत्या पर पूरी तरह से बैन लगाने के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
पहली नजर में आदेश में सुधार की जरूरत- सुप्रीम कोर्ट
लाइवलॉ की रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट ने पाया है कि मद्रास हाई कोर्ट का प्रदेश-व्यापी प्रतिबंध लगाने वाले आदेश के अंतिम पैराग्राफ में पहली नजर में ‘सुधार’ की जरूरत है। इस केस में तमिलनाडु सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की।
सु्प्रीम कोर्ट में तमिलनाडु सरकार की दलील
तमिलनाडु सरकार की ओर से अभिषेक मनु सिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि हाई कोर्ट का आदेश तमिलनाडु एनिमल प्रिजर्वेशन एक्ट,1958 का विरोधाभासी है।
इसके तहत सक्षम अधिकारी द्वारा जारी सर्टिफिकेट के आधार पर 10 साल से ज्यादा उम्र की वह गाय, जो कि काम में इस्तेमाल या बच्चा देने लायक नहीं हैं, उनकी हत्या की अनुमति है।
इस कानून के अलावा राज्य सरकार ने हाई कोर्ट के आदेश को प्रिवेंशन ऑफ क्रुअलिटी टू एनिमल्स एक्ट, 1960, प्रिवेंशन ऑफ क्रुअलिटी टू एनिमल्स (स्लाउटर हाउस) रूल्स, 2001, तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज एक्ट, 1998 और तमिलनाडु अर्बन लोकल बॉडीज रूल्स, 2023 के आधार पर भी चुनौती दी थी।
तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि पूर्ण पाबंदी का आदेश देकर मद्रास हाई कोर्ट ने वैधानिक कानून पर न्यायिक कानून थोप दिया है।
मद्रास हाई कोर्ट के आदेश में क्या था
मद्रास हाई कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने के बाद 27 मई, 2027 को बकरीद की पूर्व संध्या पर तमिलनाडु में गो-हत्या पर पूर्ण पाबंदी वाला आदेश जारी किया था।
हिंदू मक्कल कच्ची के महासचिव के सूर्या पारसनाथ की पीआईएल पर जस्टिस जीआर स्वामिनाथन और जस्टिस वी लक्ष्मीनारायण ने यह आदेश जारी किया था।
याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि ‘कुर्बानी’ सिर्फ तय स्थानों पर ही दी जाएं।
भारत में गौ हत्या का विषय एक अत्यधिक संवेदनशील और कानूनी रूप से जटिल मुद्दा है。संविधान के अनुच्छेद 48 में,राज्य गायों,बछड़ों और अन्य दुधारू पशुओं के संरक्षण और नस्ल सुधार के लिए कदम उठाने के लिए अधिकृत हैं。
कानून राज्यवार भिन्न हैं—राजस्थान,उत्तर प्रदेश, और गुजरात जैसे कई राज्यों में गौ हत्या पर पूर्ण प्रतिबंध है, जबकि पश्चिम बंगाल और असम में कुछ शर्तों के साथ इसकी अनुमति है。
प्रमुख राज्यों के कानून और स्थिति:पूर्ण प्रतिबंध: दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्यों में गाय और उसके वध (बैल व सांड सहित) पर पूरी तरह से रोक है。
शर्तों के साथ अनुमति: पश्चिम बंगाल में 14 वर्ष से अधिक उम्र की गाय और असम में 10 वर्ष से अधिक उम्र की गाय वध के लिए अनुमत हो सकती है。
कठोर सजा: इन कानूनों के उल्लंघन पर राज्यों ने कठोर कारावास और भारी अर्थदण्ड का प्रावधान किया है。
ताजा घटनाक्रम:
न्यायिक मामले: मद्रास हाईकोर्ट के एक निर्णय को लेकर तमिलनाडु सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंची, जहाँ राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के पूर्ण प्रतिबंध के निर्देश को कानूनी ढांचे के बाहर बताया है。सरकार केस जीत गई है।
राष्ट्रीय पशु की मांग: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक फैसले में केंद्र सरकार को गौ हत्या रोकने को गाय को ‘राष्ट्रीय पशु’ घोषित करने की सलाह दी थी。
