पैसे लेकर प्रमोट क‍िया आपत्तिजनक कंटेंट, मार्क जुकरबर्ग ने मांगी माफी

मार्क जुकरबर्ग ने मांगी माफी, माना पैसे लेकर प्रमोट क‍िए थे कुछ खास तरह के कंटेंट

सरकार ने नकेल कसी तो फेसबुक-इंस्‍टाग्राम चलाने वाली कंपनी मेटा के माल‍िक ने माफी मांग ली. बुधवार को सरकार और META के अध‍िकार‍ियों में हुई बैठक में मेटा अध‍िकारियों ने सरकार को बताया क‍ि खुद जुकरबर्ग ने खेद जताया है.

चाइल्‍ड एब्‍यूज और कुछ खास तरह के कंटेंट प्रमोट करने पर फेसबुक-इंस्‍टाग्राम, व्‍हाट्सएप चलाने वाली कंपनी META के माल‍िक मार्क जुकरबर्ग ने सरकार से माफी मांग ली है. सरकारी सूत्रों ने बताया क‍ि बुधवार को मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कैपलन और कंपनी के कई बड़े अधिकारी आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के पास गये. सरकार ने साफ कह द‍िया क‍ि मनमानी नहीं चलने वाली है, आपको जवाब देना ही होगा. इसके बाद अध‍िकार‍ियों ने सरकार को बताया क‍ि बाल यौन शोषण सामग्री, डीपफेक कंटेंट और प्रधानमंत्री मोदी के वीडियो हटाने समेत प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई गंभीर गलत‍ियों पर खुद मार्क जुकरबर्ग ने खेद जताया है, माफी मांगी है. सरकार ने साफ कर दिया कि भारत में करोड़ों यूजर्स वाले प्लेटफॉर्म अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते और मनमाने तरीके से कंटेंट मॉडरेशन स्वीकार नहीं किया जाएगा.

प्रधान मंत्री मोदी का वीड‍ियो हटाने पर मार्क जुकरबर्ग ने मांगी माफी.

सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैठक में सरकार ने META को दो टूक संदेश दिया कि वह सिर्फ ‘इंटरमीडियरी’ नहीं है, क्योंकि उसका एल्गोरिदम तय करता है कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाया जाए. इसी वजह से आईटी एक्ट के तहत मिलने वाले ‘सेफ हार्बर’ का लाभ भी META को नहीं मिलेगा.
मेटा ने गलती भी मानी

सूत्रों का कहना है क‍ि META ने यह भी माना कि पैसे लेकर कंपनी ने कुछ तरह के कंटेंट को प्रमोट क‍िया था. कंपनी ने कहा क‍ि कुछ प्‍लेटफार्म पर ऐसा हुआ है. कंपनी के प्रतिनिधियों ने इस मुद्दे पर खेद जताया और प्लेटफॉर्म के संचालन में हुई जिन गलतियों का उन्होंने उल्लेख किया, उनके लिए माफी मांगी.  सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि भारत के कानूनों से ऊपर कोई डिजिटल प्लेटफॉर्म नहीं है और नियमों का उल्लंघन करने पर जवाबदेही तय की जाएगी.

PM मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा ने मांगी माफी, सरकार ने दिया था अल्टीमेटम

मप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पोस्ट फेसबुक से हटाने के मामले में Meta ने माफी मांग ली है. कंपनी के ग्लोबल अफेयर्स हेड जोएल कपलान ने IT मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर इस गलती पर खेद जताया.
प्रधानमंत्री की पोस्ट हटाने वाले मामले में मेटा ने माफी मांग ली है. मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर जोएल कपलान ने कहा है कि पीएम मोदी की पोस्ट को रोकने वाली गलती के लिए मैंने मेटा की ओर से मंत्री से माफी मांगी है.

मेटा के ग्लोबल अफेयर्स हेड जोएल कपलान के नेतृत्व में कंपनी की एक टीम ने केंद्रीय IT मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की. इससे पहले टीम ने IT सचिव एस. कृष्णन के साथ भी बैठक की.

चाइल्ड कंटेंट को लेकर भी मांगी माफी
सूत्रों के अनुसार, बैठक में मेटा ने अपने प्लेटफॉर्म पर कंटेंट मॉडरेशन से जुड़ी कुछ कमियां स्वीकार की. कंपनी ने बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट और डीपफेक से निपटने में चूक भी मानी. इसके अलावा मेटा अधिकारियों ने यह भी स्वीकार किया कि ‘कुछ खास तरह के कंटेंट को बढ़ावा देने को बड़ी रकम खर्च की गई थी.’ हालांकि इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई.

PM मोदी की पोस्ट हटाने पर उठा था विवाद
यह मामला तब सामने आया था जब 23 जुलाई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक फेसबुक पोस्ट कुछ समय को हटा दी गई थी. पोस्ट में उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए पेपर लीक पर कठोर कार्रवाई का वादा किया था। वीडियो पहले इंस्टाग्राम पर पोस्ट हुआ था और बाद में फेसबुक पर शेयर हुआ. विवाद बढ़ने पर मेटा ने पोस्ट  यथावत कर दी और कहा कि AI आधारित ऑटोमैटिक कंटेंट फिल्टर की तकनीकी गलती से पोस्ट हट गई थी.

सरकार ने मेटा से पूछे कई सवाल
सरकारी सूत्रों के अनुसार, बैठक में केंद्र सरकार ने मेटा से बच्चों के यौन शोषण वाले कंटेंट, डीपफेक, वेरिफाइड अकाउंट्स की सुरक्षा, एल्गोरिदम में संभावित पक्षपात और भारतीय कानूनों के पाल पर जवाब मांगा. सरकार ने कंपनी से यह भी कहा कि वह खुद को पूरी तरह निष्पक्ष ‘इंटरमीडियरी’ नहीं बता सकती, क्योंकि उसके एल्गोरिदम यह तय करते हैं कि किस यूजर को कौन-सा कंटेंट दिखाए या सुझाए. सरकार का तर्क था कि यदि कोई प्लेटफॉर्म सक्रिय रूप से कंटेंट की पहुंच तय करता है, तो उसे केवल थर्ड-पार्टी कंटेंट होस्ट करने वाला मंच नहीं माना जा सकता.

संसदीय समिति ने भी उठाया मुद्दा
संसद की स्थायी समिति ने भी प्रधानमंत्री की फेसबुक पोस्ट हटाए जाने के मामले में मार्क जुकरबर्ग से माफी मांगी. समिति ने पत्र भेजकर कहा कि अगर तीन दिनों में माफी नहीं मांगी गई, तो कंपनी को मिलने वाली कुछ कानूनी छूट और सुरक्षा पर पुनर्विचार हो सकता है. सरकार का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक तकनीकी गलती तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े सवाल भी उठते हैं.

सेफ हार्बर’ क्या है?

‘सेफ हार्बर’ आईटी एक्ट में मिलने वाली वह कानूनी सुरक्षा है, जिसके कारण फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स या यूट्यूब जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यूज़र्स द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए प्लेटफॉर्म को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता. यह सुरक्षा तभी मिलती है, जब प्लेटफॉर्म सिर्फ एक इंटरमीडियरी यानी माध्यम की भूमिका निभाए और कानून का पालन करे. लेकिन अगर कोई प्लेटफॉर्म खुद कंटेंट को चुनने, बढ़ावा देने, मॉडरेट करने या उसकी पहुंच तय करने में सक्रिय भूमिका निभाता है, तो सरकार यह तर्क दे सकती है कि उसे सेफ हार्बर का संरक्षण नहीं मिलना चाहिए और उस पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.

PM मोदी के वीडियो से लेकर CSAM तक… इन मामलों पर घिरी Meta
सरकार ने मेटा से उस समय जवाब मांगा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट किया गया एक वीडियो कुछ समय के लिए हटा दिया गया था.इसके अलावा, राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने भी मेटा के प्लेटफॉर्म पर कथित तौर पर बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) वाले विज्ञापनों के मामले में जांच शुरू की है.यह जांच एक मीडिया रिपोर्ट सामने आने के बाद शुरू हुई.फिलहाल, मेटा ने सरकार के इन दावों पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.

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