विदेशों में खाता,
पवन खेड़ा के साथ कांग्रेस ने कर दिया खेल! असम पुलिस की रेड लेकिन पार्टी नेतृत्व चुप, क्या बलि का बकरा बना रही?
असम पुलिस ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर छापेमारी की है. यह कार्रवाई मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी पर लगाए गए पासपोर्ट विवाद के आरोपों बाद हुई है. जहां एक ओर पुलिस खेड़ा को ‘भागा” बता रही है, वहीं कांग्रेस बदले की राजनीति बता रही है. इस बीच पार्टी गलियारों में नेतृत्व की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं. खेड़ा समर्थक नाराज हैं कि पार्टी नेतृत्व ने इन आरोपों को हवा नहीं दी.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा (File Photo : PTI)
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अब राशन-पानी लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के पीछे पड़े हैं. कल असम पुलिस पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित घर पहुंची. पुलिस का कहना है कि खेड़ा घर पर नहीं मिले और उन्हें ढूंढने की कोशिश हो रही है. मामला मुख्यमंत्री की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा की लिखाई एफआईआर से जुड़ा है. इस पुलिसिया एक्शन से इतर कांग्रेस में भी सब कुछ ठीक नहीं दिख रहा है. सूत्रों के अनुसार पवन खेड़ा खेमे के नेता अपनी ही पार्टी के सीनियर लीडर्स से नाराज हैं. उनकी नाराजगी का कारण है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार पर लगाए गए आरोपों पर पार्टी नेतृत्व वैसी आक्रामकता नहीं दिखा रहा , जैसी दिखानी थी.
क्या पवन खेड़ा को पार्टी ने अकेला छोड़ दिया है?
पवन खेड़ा के करीबियों का मानना है कि उन्हें इस विवाद में ‘अकेला’ छोड़ दिया गया है. कम्युनिकेशन डिपार्टमेंट के कई वरिष्ठ नेताओं और महासचिवों ने मुख्यमंत्री सरमा के परिवार पर लगाए आरोपों को उस तरह से आगे नहीं बढ़ाया, जैसे खेड़ा ने उठाया था. खेड़ा ने आरोप लगाया था कि रिनिकी भुइयां सरमा के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं. पार्टी के एक वर्ग का कहना है कि जब खेड़ा पर पुलिस की कार्रवाई हो रही है, तब नेतृत्व की चुप्पी या धीमी प्रतिक्रिया सवाल खड़े करती है.
पुलिस पवन खेड़ा के घर से क्या मिला?
दिल्ली पुलिस के साथ पहुंची असम पुलिस की टीम ने खेड़ा के घर की तलाशी ली. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि खेड़ा वहां नहीं थे. पुलिस ने मीडिया को बताया कि घर से कुछ चीजें मिली हैं, लेकिन जांच के चलते उनकी जानकारी अभी बताई नहीं जा सकती. वहां मौजूद गार्ड और पड़ोसियों ने पुलिस पर कठोर व्यवहार का आरोप लगाया है. गार्ड के अनुसार उसे दवा लेने जाने से भी रोका गया. पुलिस का दावा है कि खेड़ा पूछताछ से बचने को भाग गए हैं.
दिल्ली में खेड़ा के घर से रवाना होते असम पुलिस के जवान. (PTI Photo)
हिमंता बिस्वा सरमा ने आरोपों पर क्या जवाब दिया?
असम के मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले को कांग्रेस का सोचा-समझा षडयंत्र बताया है. उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा के लगाए तीनों देशों के पासपोर्ट के दावे पूरी तरह झूठे हैं. उन देशों ने खुद ये दावे निरस्त कर दिये हैं. सरमा ने व्यंग्य किया कि खेड़ा अब भाग चुके और शायद वह हैदराबाद में छिपे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी और किसी को छोड़ा नहीं जाएगा.
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा (PTI Photo)
जयराम रमेश ने बदले की कार्रवाई बताया?
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने पवन खेड़ा का बचाव किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह विपक्ष की आवाज को दबाने का तरीका है. रमेश के अनुसार असम के मुख्यमंत्री चुनावी हार के डर से घबराए हैं और इसलिए पुलिस का इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, खेड़ा खेमे को लगता है कि सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट डालना काफी नहीं है. इस मामले में पार्टी को सड़क से लेकर सदन तक ज्यादा आक्रामक होने की जरूरत थी, जो फिलहाल गायब दिख रही है.
वी.पी.सिंह के पुत्र अजेय सिंह के खिलाफ सेंट किट्स फर्जीवाड़े में विफल,फिर भी असम के मुख्य मंत्री की पत्नी के खिलाफ कांग्रेस के फर्जी प्रपत्र तैयार
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कांग्रेस और उनके समर्थक गोदी मीडिया ने सन 1989 में वी.पी.सिंह के पुत्र अजेय सिंह पर यह झूठा आरोप लगाया था कि उन्होंने पिता वी.पी. सिंह के वित्त मंत्री रहते विदेशी बैंक में 31 करोड़ रुपए जमा किये ।
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तब प्रधान मंत्री राजीव गांधी पर लग रहे बोफोर्स घोटाले के आरोप काउंटर करने को सेंट किट्स जालसाजी गढ़ी गई। इंडिया टुडे के अनुसार उस जालसाजी की खबर को प्रचारित करने में संपादक एम.जे.अकबर ने भूमिका निभाई थी।(इंडिया टुडे-15 सितंबर 1989)। (मत भूलिए ,गोदी मीडिया हर दौर में रहा है।) हालांकि अकबर ने कहा था कि ‘‘मैंने इन तथ्यों की विश्वसनीयता जांचने को वह सब कुछ किया जो एक पत्रकार कर सकता है और उसे करना चाहिए।’’(पर क्या यह संयोग था कि एम.जे.अकबर इसके बाद 1989 में कांग्रेस के टिकट पर बिहार के किशनगंज से सांसद चुने गये ?)
सेंट किट्स फर्जी बैंक खाता जालसाजी प्रकरण में मुंह की खाने के बावजूद अब कांग्रेस ने असम के मुख्य मंत्री की पत्नी पर तीन देशों के पासपोर्ट रखने का झूठा आरोप लगाया है।साथ ही, पवन खेरा ने विदेशों में उनके पास संपत्ति होने का भी आरोप लगाया है।
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मौजूदा असम विधान सभा चुनाव प्रभावित करने को कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेरा ने आरोप लगाया है।
सेंट किट्स का फर्जीवाड़ा सन 1989 का लोक सभा चुनाव
कांग्रेस के पक्ष में प्रभावित नहीं कर पाया तो असम के मुख्य मंत्री के खिलाफ आरोप क्या कर पाएगा ,वह चुनाव बताएगा।
पर,कांग्रेस के बारे में यह कहा जा सकता है–‘‘मरता क्या न करता ??’’
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पवन खेरा के आरोपों के खिलाफ कड़ा रुख अपना मुख्य मंत्री हिमंता बिस्व सरमा और उनकी पत्नी ने इन आरोपों को मनगढ़ंत और राजनीति प्रेरित बताते हुए कहा है कि हम आपराधिक और दीवानी दोनों तरह के मानहानि मुकदमे कराएंगे।
यदि सरमा दंपति ने सचमुच मुकदमा कराया और उसे तार्किक परिणति तक पहुंचाया तो आगे कोई पवन खेडा ऐसा बखेडा करने की हिम्मत नहीं करेगा।
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वास्तव में देश में अदालतों के लचर रवैए से अपराधकर्ताओं और अनर्गल आरोप लगाने वालों का मनोबल बढ़ा रहता है।
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दो नमूने–
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1.-सेंट किट्स फर्जीवाड़ा के एक आरोपित चन्द्रा स्वामी को बरी करते हुए अदालत ने अक्तूबर, 2004 में कहा कि यह गड़बड़ी मुख्य रूप से न्यूयार्क में भारतीय वाणिज्य दूतावास के अधिकारियों के कारण हुई थी जिन्होंने उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना (अजेय सिंह के नाम के ) जाली बैंक दस्तावजों की पुष्टि की थी।
इस केस के एक आरोपित पी.वी.नरसिंह राव को कोर्ट ने 1997 में ही छोड़ दिया।तब वे विदेश मंत्री थे। अक्तूबर 2004 में केंद्र में कांग्रेस सरकार थी और 1997 में भी।
कोर्ट ने माना कि बैंक दस्तावेज का फर्जीकरण हुआ है।
(पर जिस तरह जेसिका लाल और पटना की बाॅबी की किसी ने हत्या नहीं की,उसी तरह सेंट किट्स फर्जीवाड़े का आदेश आसमान से किसी भूत-प्रेत ने न्यूयार्क स्थित वाणिज्य दूतावास को दे दिया होगा।)
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2.-पटना अरबन काॅपरेटिव बैंक घोटाले में मुख्य मंत्री डाॅक्टर जगन्नाथ मिश्र को छोडते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज बहरुल इस्लाम ने अपने जजमेंट में यह भी लिखा था–एक लोक अभियोजक अपने मुख्य मंत्री के खिलाफ निष्ठापूर्वक अभियोजन नहीं चला सकता क्योंकि वह उसी मुख्य मंत्री द्वारा नियुक्त है।इसलिए डॉक्टर मिश्र के खिलाफ केस चलाना न्यायिक प्रक्रिया का निरर्थक उपयोग है। जज ने कुछ अन्य आधार भी दिए थे।किंतु क्या यह आधार न्यायोचित था ?
यह जजमेंट अस्सी के दशक का था।तब केंद्र व राज्य में कांग्रेस की सरकारें थी।
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3.-सन 2004 की फरवरी में दिल्ली हाई कोर्ट के जज ने ,जिन्हें अवकाश ग्रहण के बाद मुख्य मंत्री शीला दीक्षित ने बड़ा पद दे दिया था,बोफोर्स घोटाले के आरोपित छोड़ दिये। अटल सरकार ने ,जो मई 2004 तक सत्तारूढ़ रही,बोफोर्स के इस मामले में अपील नहीं होने दी। बाद में मनमोहन सरकार को तो अपील करनी ही नहीं थी, की भी नहीं।
नेताओं व अधिकांश न्यायपालिका के लचर रुख से घोटालेबाजों को ,देशद्रोहियों को और पवन खेड़ा से फर्जी आरोप लगाने वालों का मनोबल बढ़ता है।
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और अंत में
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वी.पी.सिंह को बदनाम करने की कोशिश के बावजूद सन 1989 के लोक सभा चुनाव में कांग्रेस न तो राजीव गांधी की कुर्सी बचा पाई, न ही वी.पी.सिंह को प्रधान मंत्री बनने से रोक पाई।संभवतः असम में भी कांग्रेस का वही हश्र होगा।
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सुरेंद्र किशोर, 6 अप्रैल 2026
Cm Himanta Biswa Sarma Dubai Property Claims Fake Misinformation Assam Assembly Election 2026
दुबई प्रॉपर्टी के दावे फर्जी, फ्लैट्स के मालिक मोहम्मद अहमद और फातिमा सुलेमान हैं, असम के CM का बड़ा पलटवार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने ट्वीट किया कि हमने कांग्रेस के ‘फर्जी AI कैंपेन’ में जिन दो दुबई अपार्टमेंट्स का जिक्र आया था, उनके असली मालिकों का पता लगा लिया है। फ्लैट्स के मालिक मोहम्मद अहमद और फातिमा सुलेमान हैं। कांग्रेस ने ये प्रपत्र चुराए थे।
गुवाहाटी: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आज दुबई में अपने परिवार की प्रॉपर्टी स्वामित्व आरोप पूरी तरह से निरस्त कर दिये। उन्होंने इन दावों को ‘पूरी तरह से फर्जी’ बताते हुए इसे कांग्रेस का गलत जानकारी फैलाने वाला कैंपेन बताया। सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट की कि ऑनलाइन शेयर डॉक्यूमेंट्स, जिनमें कथित दुबई प्रॉपर्टी टाइटल डीड उनके परिवार से जुड़ी हुई दिखाई जा रही हैं, नकली हैं और उनमें कई कमियां हैं। उनके असली मालिकों का पता लगा लिया है। इन फ्लैट्स के मालिक मोहम्मद अहमद और फातिमा सुलेमान हैं। कांग्रेस ने ये प्रपत्र चुराए थे।
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा
दुबई प्रॉपर्टी टाइटल डीड भी झूठी निकली
असम मुख्यमंत्री सरमा ने लिखा कि कांग्रेस फेक एआई कैंपेन का एक और झूठ पकड़ा गया। दुबई प्रॉपर्टी टाइटल डीड भी झूठ निकली हैं, जिनमें बड़ी कमियां हैं और कोई असली रिकॉर्ड नहीं है। मुख्यमंत्री ने आगे लिखा कि दावों को सपोर्ट करने को कोई ऑफिशियल रिकॉर्ड नहीं है और लोगों से दुबई के ऑफिशियल लैंड रिकॉर्ड पोर्टल से स्वयं फैक्ट्स वेरिफाई करने को कहा। इस बारे में लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से गलत साबित हुए हैं।
सरमा ने कड़ी चेतावनी दी
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कड़ी चेतावनी दे लिखा कि जो लोग झूठी और बदनाम करने वाली जानकारी फैला रहे हैं, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। इस तरह उनके सभी झूठ पकड़े गए हैं। कानूनी कार्रवाई होगी।
क्या है विवाद?
विवाद असम में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी कांग्रेस के बीच चल रहे राजनीतिक टकराव में हुआ है। गौरव गोगोई और पवन खेड़ा समेत कांग्रेस नेताओं ने हाल में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के परिवार के कथित विदेशी एसेट्स और लिंक्स पर सवाल उठाए, जिसमें दुबई की प्रॉपर्टीज और विदेशी डॉक्यूमेंट्स के दावे भी शामिल हैं।
आरोपों को बताया बेबुनियाद
आरोप मुख्यमंत्री और उनके परिवार के सदस्यों ने साफ तौर पर नकार दिये है। इससे पहले हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी, रिनिकी भुयान सरमा ने भी किसी भी विदेशी बिजनेस इंटरेस्ट या एसेट्स के दावे निरस्त कर आरोप ‘निराधार बताये थे।
सबरीमाला संदर्भ मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस बी. वी. नागरत्ना ने सुप्रीम कोर्ट में अनुच्छेद 17 के लागू होने के सवाल पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी महिला को महीने के तीन दिनों तक “अछूत” मानना और चौथे दिन उसे अछूत न मानना तर्कसंगत नहीं है। जस्टिस नागरत्ना की टिप्पणी जस्टिस नागरत्ना ने कहा: “एक महिला को हर महीने तीन दिन अछूत नहीं माना जा सकता और चौथे दिन यह स्थिति खत्म नहीं हो सकती।” उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 17 ऐतिहासिक रूप से छुआछूत जैसी सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए बनाया गया था, इसलिए इसे सबरीमाला मामले में कैसे लागू किया जा सकता है, इस पर संदेह है। सॉलिसिटर जनरल का विरोध इस दौरान भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने 2018 के सबरीमाला फैसले में दी गई उस टिप्पणी का विरोध किया, जिसमें महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को “अछूत प्रथा” से जोड़ा गया था। उन्होंने कहा: “सबरीमाला के एक फैसले में कहा गया कि महिलाओं को अछूत की तरह ट्रीट किया जा रहा है—मुझे इस पर कड़ा आपत्ति है।” उन्होंने यह भी दोहराया कि भारत पश्चिमी समझ के अनुसार न तो पितृसत्तात्मक है और न ही जेंडर स्टीरियोटाइप वाला समाज। मासिक धर्म नहीं, आयु का आधार: SG तुषार मेहता ने स्पष्ट किया कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध मासिक धर्म (menstruation) के आधार पर नहीं, बल्कि एक निश्चित आयु वर्ग (10-50 वर्ष) के आधार पर है। उन्होंने कहा कि भगवान अयप्पा के अन्य मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश पर कोई रोक नहीं है और सबरीमाला एक “विशिष्ट” (sui generis) मंदिर है, जिसकी परंपराएं अलग हैं।
धार्मिक प्रथाओं का सम्मान
सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि धार्मिक संप्रदायों की परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे मज़ार या गुरुद्वारा जाने पर सिर ढकना होता है, वैसे ही कुछ धार्मिक प्रथाएं होती हैं जिन्हें व्यक्तिगत स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं कहा जा सकता। संविधान पीठ में सुनवाई जारी 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ इस मामले में व्यापक संवैधानिक सवालों पर सुनवाई कर रही है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल 2018 के फैसले के गुण-दोष पर नहीं, बल्कि बड़े संवैधानिक मुद्दों पर विचार करेगा। सॉलिसिटर जनरल ने अनुच्छेद 25 और अनुच्छेद 26 से जुड़े संविधान सभा के बहसों का भी हवाला देते हुए कहा कि “Essential Religious Practices” (आवश्यक धार्मिक प्रथाएं) तय करना अदालत का काम नहीं, बल्कि विधायिका का विषय है।
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