CAA विरोधी दिल्ली दंगे:IBअफसर अंकित हत्या में ताहिर,नाजिम,कासिम,अनस,जावेद दोषी
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दिल्ली दंगाः आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या में ताहिर हुसैन दोषी,कड़कड़डूमा कोर्ट का फैसला
दिल्ली कोर्ट ने दिल्ली दंगों में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) कर्मी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन समेत पांच को दोषी ठहराया है। ताहिर हुसैन को आईपीसी की धाराओं 188, 153A, 147, 148, 149, 365 और 302 में अपराधों में दोषी पाया गया है।
नई दिल्ली 13 जुलाई 2026 । दिल्ली कोर्ट ने सीएए विरोधी दिल्ली दंगों में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के कर्मचारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में ताहिर हुसैन को दोषी ठहराया है। ताहिर हुसैन को आईपीसी की धाराओं 188, 153A, 147, 148, 149, 365 और 302 में अपराधों को दोषी पाया गया है। हालांकि षडयंत्र के आरोपों से बरी कर दिया गया है।

फैसला सुनते ही कोर्ट में रोने लगा ताहिर हुसैन
फैसला सुनकर हुसैन कोर्ट में रो पड़ा। मामला दयालपुर पुलिस स्टेशन में FIR नंबर 65/2020 से जुड़ा है। FIR शर्मा के पिता की शिकायत पर लिखी गई थी, जिन्होंने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की हत्या को ताहिर हुसैन और उनके साथी जिम्मेदार थे।
घर का सामान लेने निकले, घर नहीं लौटे अंकित शर्मा
अभियोजन पक्ष के अनुसार,शर्मा 25 फरवरी, 2020 को शाम 5 बजे के आसपास किराने का सामान और अन्य घरेलू सामान खरीदने अपने घर से निकले लेकिन वापस नहीं लौटे। परिवार ने शुरू में खोने की शिकायत कराई थी। बाद में उनका शव चांद बाग पुलिया के पास नाले से मिला और गुरु तेग बहादुर (जीटीबी) अस्पताल में उन्हें मृत बताया गया। पोस्टमार्टम जांच में पाया गया कि शर्मा को तेज धार वाले हथियारों और कुंद बल से 51 चोटें लगी। थीं।
किन-किन धाराओं में तय किए आरोप
मार्च 2023 में,ट्रायल कोर्ट ने हुसैन और 10 अन्य आरोपितों पर आईपीसी के विभिन्न प्रावधानों में आरोप तय किए,जिनमें हत्या,दंगा,समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा,अपहरण,आपराधिक षडयंत्र और गैरकानूनी सभा हैं। हुसैन को आईपीसी की धारा 505, 109 और 114 में अतिरिक्त आरोपों का भी सामना करना पड़ा, जबकि आरोपित नाजिम पर शस्त्र अधिनियम की धारा 25 में अतिरिक्त आरोप लगाए गए।
सजा पर अदालत का फैसला अलग से सुनाया जाएगा.
IB अफसर अंकित शर्मा के साथ उस दिन क्या हुआ था?
नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध उत्तर पूर्व दिल्ली में फरवरी 2020 में दंगे भड़के थे, तब IB अफसर अंकित शर्मा की हत्या हुई थी. इसमें 6 साल बाद न्याय मिला. दिल्ली कोर्ट ने अंकित शर्मा हत्याकांड में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 आरोपित दोषी पाये हैं. अंकित शर्मा हत्याकांड ने पूरा देश झकझोर दिया था.
दोनों पक्षों के तर्क सुन अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.मामला सिर्फ एक हत्या नही, बल्कि दंगों का एक गहरा खतरनाक षड्यंत्र था, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों और सामान्य जन को हिलाकर रख दिया था।
क्या हुआ था 25 फरवरी 2020 को?
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध और समर्थन को लेकर फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली सुलग रही थी.चांद बाग,खजूरी खास और मुस्तफाबाद जैसे इलाके हिंसा की आग में झुलस रहे थे. पथराव,आगजनी और गोलियों की आवाज में चारों तरफ चीख-पुकार मची थी।
आईबी के 26 वर्षीय अंकित शर्मा 25 फरवरी शाम दफ्तर से घर लौट रहे थे.वातावरण बेहद तनावपूर्ण था. प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस आरोपपत्र के अनुसार, अंकित शर्मा गली में हिंसक भीड़ शांत कराने और लोगों को समझाने-बुझाने घर से निकले थे.वे चांद बाग पुलिया के पास पहुंचे,जहां उपद्रवियों का तांडव चल रहा था. चांद बाग पुलिया के पास मस्जिद और ताहिर हुसैन के घर के पास हिंसक भीड़ ने अंकित शर्मा को घेर लिया.भीड़ हिंदू-हिंदू चिल्लाते बढ़ी. अंकित ने भागने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बेरहमी से घसीटते ताहिर हुसैन के घर के पास ले जाया गया. वहां धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार कर हत्या बाद शव पास के ही खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया.
लाश मिलने पर खुली क्रूरता की परतें
अगले दिन, 26 फरवरी को अंकित के पिता पूर्व पुलिसकर्मी रविंदर कुमार ने दयालपुर थाने में बेटा खोने की रिपोर्ट कराई. खोजबीन में स्थानीय लड़कों ने बताया कि एक युवक मारकर नाले में फेंका गया है. पुलिस गोताखोरों ने खजूरी खास नाले से अंकित का शव निकाला,तो पूरा देश दहल गया.
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनावरण मानवता लज्जित करने वाले थे. अंकित के शरीर पर चाकू और अन्य धारदार हथियारों के 51 गहरे चोटों के निशान थे. उनके फेफड़ों और मस्तिष्क पर इतने घातक वार किए गए थे कि अत्यधिक खून बहने से वही उनकी मौत हो गई थी. पहचान मिटा प्रमाण नष्ट करने को शव गंदे नाले के कीचड़ में धकेला गया था.
ताहिर हुसैन और अन्य 10 आरोपित
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन को इस पूरे हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड बताया. ताहिर हुसैन का घर दंगाइयों का ठिकाना था,जहां से तेजाब की बोतलें,गुलेल और पत्थर मिले थे.
मार्च 2023 में अदालत ने ताहिर हुसैन समेत कुल 11 आरोपितों पर हत्या, दंगा भड़काने और आपराधिक षडयंत्र की धाराएं तय की थीं. कुल 11 आरोपी थे-
1-मोहम्मद ताहिर हुसैन (मुख्य आरोपी ,पूर्व पार्षद)
2-हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान
3-नाजिम
4-कासिम
5-समीर खान
6-अनस
7-फिरोज
8-जावेद
9-गुलफाम
10-शोएब आलम उर्फ बॉबी
11-मुंतजिम उर्फ मूसा
अदालत ने इनमें से 5 आरोपित- ताहिर हुसैन, नाजिम, कासिम, अनस और जावेद को दोषी पा. बाकी 6 छोड दिये गए है.
कोर्ट में अब तक क्या-क्या हुआ?
अदालत के भीतर यह मामला लंबे समय तक कानूनी दांव-पेचों से गुजरा. आरोपितों ने कई बार जमानत याचिकाएं दी. सितंबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने ताहिर हुसैन की जमानत याचिका को यह कहते हुए सिरे से निरस्त कर दी थी कि यह एक युवा गुप्तचर अधिकारी की बर्बर हत्या का बेहद चौंकाने वाला मामला है, जिसमें जमानत का कोई आधार नहीं बनता.
कोर्ट रूम में दोनों पक्षों की ओर से रखी गई मुख्य तर्क-
अभियोजन पक्ष यानी सरकारी वकील के तर्क
सरकारी वकील ने कोर्ट में साफ कहा कि यह अचानक हुआ अपराध नहीं था.आरोपितों का साझा उद्देश्य और गहरा षडयंत्र बहुसंख्यक समुदाय को निशाना बनाना था. अंकित शर्मा अकेले पड़ गए,भीड़ ने उन्हें पहचानकर पकड़ लिया.
अदालत ने भी आरोप तय करते टिप्पणी की थी कि ताहिर हुसैन ने भीड़ उकसायी थी.अंकित भीड़ की तरफ बढ़े, तो ताहिर हुसैन के इशारे पर ही उन्हें निशाना बनाया गया.
पुलिस ने कोर्ट के सामने कई स्थानीय गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स से सिद्ध किया कि हत्या के वक्त सभी आरोपित घटना स्थल के आसपास ही थे और एक-दूसरे के संपर्क में थे.
आरोपितों के वकील के तर्क
ताहिर हुसैन के वकीलों ने तर्क दिये कि उन्हें राजनीतिक द्वेष में फंसाया गया है. दंगों में वे खुद अपनी जान बचाने की कोशिश में पुलिस को फोन किया था.
बचाव पक्ष का कहना था कि पुलिस के पास ऐसा कोई सीधा वीडियो या कोई दूसरा प्रमाण नहीं है,जो यह दिखाए कि ताहिर हुसैन या अन्य आरोपितों ने अंकित शर्मा पर चाकू से वार किए थे.सिर्फ भीड़ में होने से सभी को हत्यारा नहीं ठहरा सकते.
अदालत ने क्या-क्या टिप्पणियां की थीं.
मामले की गंभीरता देख पूर्व में एडिशनल सेशंस जज प्रवीण सिंह ने आरोप तय करते हुए एक बेहद तीखी टिप्पणी की थी, जिसने इस केस की दिशा तय कर दी.
मामले में आरोपितों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (दंगा),148 (घातक हथियार से दंगा), 153A (धर्म के आधार पर दुश्मनी बढ़ाना),120B (अपराधिक षडयंत्र) और धारा 302 (हत्या) में मुकदमे चलाए गए.ताहिर हुसैन पर इसके अतिरिक्त धारा 109 (उकसाने) और धारा 505 (सार्वजनिक अशांति फैलाने वाले बयान) में भी आरोप लगे थे.
(नोट: अदालत ने ताहिर हुसैन को धारा 120B यानी आपराधिक षडयंत्र के आरोप से मुक्त कर दिया है।)
क्या मिलेगी सजा ?
चूंकि सभी 5 आरोपितों को धारा 302 (हत्या) में मुख्यत: दोषी ठहराया गया है, इसलिए भारतीय कानून के अनुसार उन्हें मिलने वाली सजा के दो ही विकल्प हैं:
आजीवन कारावास (Life Imprisonment): दोषियों को कम से कम आजीवन कारावास मिलना तय है, जिसके साथ अर्थदण्ड भी लगेगा।
मृत्युदंड (Death Penalty / फांसी): मामला ऑन-ड्यूटी सुरक्षाकर्मी की दंगों में बेरहमी से हत्या (पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार अंकित शर्मा के शरीर पर चाकू और चोटों के 51 निशान थे) का है, इसलिए अभियोजन पक्ष (Prosecution) इसे ‘दुर्लभ से दुर्लभतम मामला’ (Rarest of Rare Cases) मानकर फांसी की सजा मांग सकता है।
वर्तमान स्थिति: कोर्ट ने फिलहाल दोषसिद्धि (Conviction) निर्णय सुनाया है। लिखित आदेश जारी होने के बाद, अदालत सजा की अवधि (Quantum of Punishment) पर दोनों पक्षों के तर्क सुनने को नई तारीख तय कर अंतिम सजा घोषित की जाएगी।

