मत:करोड़पति बनना है तो किराए पर रहें…विशेषज्ञ बता रहे मकान स्वामित्व की हानि,जान लें

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करोड़पति बनना है तो किराएदार बनें…विशेषज्ञ ने बताई मकान खरीदने की हानि, आप भी जान लें
Renting or Buying Home: लगभग हर किसी का सपना होता है कि उसका अपना घर हो। लेकिन एक विशेषज्ञ ने चेताया है। उनका कहना है कि घर खरीदने की कई हानियां हो सकती हैं।

नई दिल्ली: आपको लगता है कि मकान खरीदकर रहना निवेश की दृष्टि से भी अच्छा है तो आप गलत हो सकते हैं। एक विशेषज्ञ ने मकान खरीदने की जगह, किराए पर रहना ज्यादा अच्छा बताया है। विशेषज्ञ के अनुसार किराए पर रहने से आप करोड़पति बन सकते हैं। वहीं मकान खरीदना घाटे का सौदा हो सकता है।
Renting or Buying Home
किराए पर रहें या मकान खरीदें

वित्तीय सलाहकार और पूर्व-बैंकर शरण हेगड़े (Sharan Hegde) ने यू-ट्यूब पर एक वीडियो में कहा है कि अपना घर खरीदने के स्थान किराए पर रहना आपको करोड़पति बना सकता है। यह बात कई लोगों को अजीब लग सकती है, लेकिन हेगड़े ने इसे एक सच के रूप में सामने रखा है। हेगड़े ने आंकड़ों सै समझाया है कि भारत में घर खरीदना एक बड़ा वित्तीय लक्ष्य माना जाता है। लेकिन उनका कहना है कि 1 करोड़ रुपये का घर खरीदना ज्यादातर नौकरीपेशा लोगों का सबसे खराब वित्तीय फैसलों में से एक हो सकता है।

क्या कहा विशेषज्ञ ने?
शरण हेगड़े वीडियो में कहते हैं, ‘मैंने पिछले 10 सालों में किराए पर 1 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च किए हैं और मुझे एक रुपये का भी खेद नहीं है क्योंकि मैंने वह हिसाब-किताब किया, जो 99% घर खरीदने वाले अपनी जिंदगी के अगले 20 साल गिरवी रखने से पहले कभी नहीं करते। उनका यह हिसाब-किताब किराए पर रहने और घर खरीदने की पुरानी सोच को पूरी तरह से बदल देता है।

घर की कीमत से दोगुना खर्च
शरण हेगड़े बताते हैं कि ईएमआई पर 1 करोड़ रुपये का घर खरीदने पर लगभग 90 लाख रुपये ब्याज देना पड़ता हैं। इसके अलावा स्टांप ड्यूटी और अन्य खर्चों में 10 लाख रुपये लगते हैं। 20 सालों में घर के रखरखाव पर कम से कम 20 लाख रुपये और खर्च होते हैं। इस तरह, घर की कुल लागत 2 करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा होती है। हेगड़े बताते हैं कि अगर प्रॉपर्टी की कीमत बढ़कर 4 करोड़ रुपये भी हो जाए, तो भी महंगाई एडजस्ट करने पर असली लाभ बहुत कम हो जाता है।

किराए पर रहना कितना लाभकारी?
अब इसकी तुलना किराए पर रहने से करते हैं। हेगड़े कहते हैं कि अगर आप 20 सालों तक हर महीने 25,000 रुपये किराया देते हैं, तो कुल 1.12 करोड़ रुपये (किराए में वार्षिक वृद्धि जोड़ कर) खर्च होते हैं। यह घर खरीदने की कुल लागत (जो लगभग 2.2 करोड़ रुपये है) से बहुत कम है।

लाभ की डबल डोज
शरण हेगड़े के अनुसार किराए पर रहना लाभ की डबल डोज जैसा है। पहला किराए पर रहना मकान खरीदने की तुलना में काफी सस्ता रहता है। वहीं दूसरा कि अगर आप घर खरीदने में लगने वाले 20 लाख रुपये के डाउन पेमेंट और ईएमआई की बचत हर साल सिर्फ 12% के रिटर्न पर निवेश करते हैं, तो यह रकम बढ़कर 4.6 करोड़ रुपये हो सकती है। यह 3.1 करोड़ रुपये का बड़ा लाभ है, जिसे हेगड़े ‘कम समझदार निवेशक’ के लिए भी बताते हैं। वह बताते हैं कि अगर रिटर्न 18% मिलता है तो यह अंतर बढ़कर 8.5 करोड़ रुपये हो जाता है।

बैंक को दोगुना किराया!
हेगड़े रियल एस्टेट से जुड़े भावनात्मक मिथकों को भी तोड़ते हैं। वह कहते हैं कि जब लोग कहते हैं कि उन्हें किराया देना पसंद नहीं है, तो वे असल में बैंक को दोगुना किराया दे रहे होते हैं।

उनका कहना है कि रियल एस्टेट में जीतने का असली तरीका कम समय में प्रॉपर्टी खरीदकर बेचना और उधार के पैसे का इस्तेमाल करना है। यह तरीका एक ही घर खरीदकर जिंदगी भर उसमें रहने से बिल्कुल अलग है,जो ज्यादातर भारतीय करते हैं।

क्या भविष्य खत्म कर देगा मकान खरीदना
हेगड़े घर खरीदने के लिए चार कड़े नियम बताए हैं : पहला, आपकी ईएमआई आपकी टैक्स कटने के बाद की आय के 30% से कम होनी चाहिए। दूसरा, आपके पास कम से कम 20% डाउन पेमेंट के रूप में बचा हुआ होना चाहिए। तीसरा, आपके पास दो साल की ईएमआई के बराबर इमरजेंसी फंड होना चाहिए। और चौथा आप प्रॉपर्टी की कीमत में गिरावट सहने की हिम्मत रखते हों। हेगड़े चेताते हैं, ‘नहीं तो, आप कोई संपत्ति (asset) नहीं खरीद रहे हैं। आप एक ऐसी देनदारी (liability) खरीद रहे हैं, जो आपका भविष्य समाप्त कर देगी।’

किरायेदार खबरदार! मकान देखने जा रहे हैं तो……, बड़ेे काम आयेगी ये चैकलिस्ट

कुछ सवाल अगर आप पहले से ही पूछ रखते हैं तो आगे चलकर परेशानी से बच सकते हैं. ये ऐसी चेकलिस्ट है जो हर किरायेदार को मकान किराये पर लेने के पहले इस्तेमाल करनी चाहिए.
जो लोग किराये पर रहते हैं वो जानते हैं कि किराये पर घर ढूंढना कितना बड़ा सिरदर्द है. बजट, एरिया, सुविधाओं और भी न जाने किन-किन आधार पर घर ढूंढना, पसंद के हिसाब से घर मिलना और फिर शिफ्टिंग तक प्रक्रिया बहुत थकाऊ काम है. लेकिन ऐसा भी होता है कि बड़ी कोशिश कर, पसीना बहाकर ढंग का घर ढूंढा, शिफ्ट हो गए लेकिन फिर धीरे-धीरे पता चल रहा है कि बहुत सी चीजें पहले साफ नहीं हो पाई थीं. मकान मालिक कई शर्तें रख रहा है, जो आप पहले समझ नहीं पाए थे. या फिर घर में ही ऐसी कुछ दिक्कतें आने लगीं, जिनके बारे में आपने ध्यान नहीं दिया था.तब बस यही लगता है कि काश शिफ्टिंग से पहले ही सब कुछ अच्छे से ठोक-बजाकर देख लेते.

ऐसे में कुछ सवाल आप पहले से ही पूछ रखते हैं तो ऐसी स्थिति से बच सकते हैं. ये चेकलिस्ट हर किरायेदार को मकान किराये पर लेने के पहले इस्तेमाल करनी चाहिए.

1. रेंट में क्या कुछ शामिल है?

सामान्य रूप से यही होता है कि मकान मालिक का बताया किराया बस घर का किराया ही होता है. उसमें बिजली, पानी, पार्किंग, सिक्योरिटी, मेंटेनेंस कुछ भी शामिल नहीं होता. ये आपको अलग से देना होता है, इसलिए पहले ही कन्फर्म कर लें कि रेंट में क्या-क्या शामिल है. एक बार मोल-भाव जरूर करें कि ये एक्स्ट्रा चार्जेज कुछ कम हों या रेंट में ही शामिल कर लिए जाएं.

2. रेंट कब देना होगा और कैसे देना होगा?
किराया क्या उसी दिन से देना है, जिस दिन आप शिफ्ट हुए थे, या फिर पहली से पहली तारीख का साइकल चलेगा,कन्फर्म कर लें.साथ ही कैश में रेंट भरना है या फिर ऑनलाइन पेमेंट कर सकते हैं, ये भी पूछना न भूलें.

3. सिक्योरिटी डिपॉजिट पर क्या नियम है?
अब तो रेंट के साथ सिक्योरिटी डिपॉजिट लेना सामान्य हो गया है. अब आपको पहले महीने के रेंट के साथ एक महीने का रेंट और देना होता है, जिसे सिक्योरिटी डिपॉजिट या फिर एडवांस माना जाता है. कहीं-कहीं तो ये एक से तीन महीने तक भी हो सकता है. लैंडलॉर्ड ये अमाउंट अपनी प्रॉपर्टी के मुकाबले कॉलेटरल रूप में लेते हैं. जब आप मकान छोड़ते हैं तो उसके आकलन से मकानमालिक हिसाब लगाता है कि आपको कितना पैसा लौटाना होता है. इतना तो साफ है कि आपको पूरा पैसा नहीं मिलेगा, तो ये पहले साफ कर लें कि आप मकान छोड़ेंगे तो एडवांस का कितना पैसा रिफंडेबल है.

4. नोटिस पीरियड कितना होगा?
आपको मकान छोड़ने से कुछ समय पहले मकानमालिक को बताना होगा कि आप मकान छोड़ रहे हैं, ताकि वो इस समय में दूसरा किरायेदार ढूंढ लें. सामान्य रूप से ये एक माह होता है, कहीं पर ये दो माह भी हो सकता है. तो ये कन्फर्म जरूर कर लें.

5. रेंटल एग्रीमेंट तोड़ने पर क्या होगा?
अगर आप एग्रीमेंट की किसी शर्त बाद में पूरा नहीं कर पाते हैं, तो क्या मकान मालिक आपके ऊपर कोई जुर्माना लगाएंगे, ये भी जरूर पूछ लें. एग्रीमेंट में पेनाल्टी अमाउंट का जिक्र रहे.

6. मेंटेंस कौन भरेगा?
रेंट के साथ मकान मालिक मेंटेनेंस मांगते ही हैं. वो अलग से भरना है या फिर आप रेंट में ही शामिल करके ये चार्ज देने वाले हैं? अगर आपको देना है तो किसे देना है, ये चीजें पता कर लें.

7. परिवार/मेहमानों के आने पर क्या रुख है?
कुछ मकानमालिक शर्तें रख सकते हैं कि घर पर मेहमान नहीं आ सकते. या ज्यादा दिनों नहीं रुक सकते, वगैरह-वगैरह. साथ ही जेंडर वगैरह की भी शर्तें रखी जा सकती हैं. तो ये पूछ लें कि अगर आपके परिवार से कोई आता है, या कोई मेहमान कुछ दिनों को आता है तो क्या मकान मालिक को इससे कोई दिक्कत है?

8. क्या किसी तरह की कोई रोक-टोक है?
कई मकान मालिक किराये पर मकान देने से पहले कई शर्तें रखते हैं. वेज-नॉनवेज क्या खाते हैं, पेट्स रख सकते हैं या नहीं. पार्टी कर सकते हैं या नहीं, म्यूजिक चला सकते हैं या नहीं. ऐसी बहुत सी चीजें होती हैं. ये पहले से जान लेना अच्छा है.

9. यूटिलिटिज़ में क्या है?
घर की फर्निशिंग में क्या मिल रहा है, गैस पाइपलाइन मिलेगा या नहीं. एलपीजी कनेक्शन कैसे लगवा सकते हैं? गीज़र सुविधा है या नहीं, किचन में RO लगा है या लगवाना पड़ेगा. पार्किंग मिलेगी या नहीं और क्या इसको अलग से कोई चार्ज देना पड़ेगा. साथ ही जब आप पहली बार शिफ्ट हो रहे होंगे तो आपको अच्छे से सफाई और पुताई होकर मकान मिलेगा या नहीं. ये सब पता कर लें.

10. मकानमालिक कहां रहते हैं?
ये बहुत ही जरूरी सवाल होता है. ये जरूर पूछें कि आपके मकानमालिक क्या उसी बिल्डिंग में रहते हैं. इससे आपको अंदाजा लग जाता है कि आपको कितनी प्राइवेसी मिलेगी. साथ ही उनके बातचीत के तरीके से आप ये भी पता लगा सकते हैं कि उनका व्यवहार हस्तक्षेपकारी तो नहीं रहेगा?

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