रेखा आर्य के पति साहू की अग्रिम जमानत याचिका अस्वीकार
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य विवाद: एसआइटी ने बयान दर्ज कर जुटाए अहम दस्तावेज
एसआइटी ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू के विवाद की जांच तेज कर दी है। मंत्री के बयान अंकित कर अभिलेख जुटाए गए हैं, साथ ही बरेली से भी साक्ष्य एकत्र किए गए और एक ऑडियो रिकॉर्डिंग फॉरेंसिक लैब भेजी गई है।
देहरादून। मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच चल रहे विवाद की जांच में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआइटी) ने कैबिनेट मंत्री के बयान दर्ज करने के साथ ही उनसे संबंधित अभिलेख भी जुटाए हैं।
वहीं, मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल के लिए बरेली गई पुलिस टीम भी पूछताछ और दस्तावेजी साक्ष्य एकत्र करने के बाद वापस लौट आई है। पुलिस के हाथ लगे साक्ष्यों की अब जांच की जा रही है। इसके साथ ही मामले से जुड़ी एक आडियो रिकार्डिंग को भी जांच के लिए फारेंसिक लैब भेजा गया है।
पुलिस की जांच अब बयानों, दस्तावेजों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ रही है। एसआइटी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि विवाद से जुड़े आरोपों में कितनी सच्चाई है और उपलब्ध साक्ष्य किस दिशा में संकेत कर रहे हैं। हालांकि, जांच पूरी होने और साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद ही मामले में स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
बयानों और दस्तावेजों की पड़ताल
मामले में मंत्री रेखा आर्या की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाया है। एसआइटी ने मंत्री के बयान दर्ज कर प्रकरण से संबंधित दस्तावेज प्राप्त किए हैं। जांच में इन दस्तावेजों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
टीम बयानों और दस्तावेजों का मिलान कर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। इसके साथ ही गिरधारी लाल साहू की ओर से कंपनी के जो कथित फर्जी दस्तावेज बनाए गए हैं, उनकी भी पुलिस जांच करवा रही है।
बरेली गई टीम ने जुटाए साक्ष्य
प्रकरण के कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच के लिए पुलिस टीम बरेली भेजी गई थी। घटनाक्रम से जुड़े स्थान और वहां उपलब्ध जानकारी के आधार पर टीम ने पूछताछ की और दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए। इसके बाद टीम देहरादून लौट आई है।
बताया जा रहा है कि वहां टीम ने गिरधारी लाल साहू के विरुद्ध पूर्व में दर्ज मुकदमों के बारे में जानकारी जुटाई। इसके साथ ही स्थानीय लोगों से गिरधारी लाल व अज्ञात महिला के बारे में पूछताछ की। बताया जा रहा है कि पूछताछ में काफी जानकारियां पुलिस के साथ लगी हैं।
फारेंसिक जांच से स्पष्ट होंगे तथ्य
मामले में सामने आई आडियो रिकार्डिंग को भी पुलिस ने जांच के लिए फारेंसिक लैब भेजा है। इसकी जांच से रिकार्डिंग की प्रामाणिकता और उससे जुड़े तकनीकी पहलुओं के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है।
हालांकि मंत्री स्पष्ट कर चुकी है कि इंटरनेट मीडिया पर जो आडियो प्रसारित हुई है उसमें आवास उनके पति गिरधारी लाल साहू व उनकी महिला मित्र की है।
सतर्कता अधिष्ठान पहुंची शिकायत
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की कथित 210 करोड़ रुपये की संपत्ति का मामला अब सतर्कता अधिष्ठान पहुंच गया है। उनके पति द्वारा लगाए गए आरोपों के बाद अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या की कथित 210 करोड़ रुपये की संपत्ति का मामला अब सतर्कता अधिष्ठान पहुंच गया है। मंत्री के पति गिरधारी लाल साहू की ओर से लगाए गए आरोपों के बाद अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने 17 अक्टूबर को लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने संबंधित संपत्तियों के स्वामित्व, बैंक खातों, निवेश, कंपनियों और आय के स्रोतों की जांच कराने का अनुरोध किया है। शिकायतकर्ता ने कहा है कि जांच में आरोपों की पुष्टि होने और अपराध के पर्याप्त आधार मिलने पर प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
मामले ने 16 अक्टूबर को उस समय तूल पकड़ा, जब गिरधारी लाल साहू ने एक वीडियो जारी कर रेखा आर्या के पास करीब 210 करोड़ रुपये की कथित अवैध संपत्ति होने का आरोप लगाया।
इसके अगले दिन अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने सतर्कता अधिष्ठान में शिकायत देकर पूरे मामले की जांच की मांग की। हालांकि, संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोपों की अब तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में शिकायतकर्ता ने जांच के जरिए तथ्यों की वास्तविक स्थिति सामने लाने पर जोर दिया है।
संपत्ति के साथ आय के स्रोतों की भी हो जांच
अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने मांग की है कि जांच केवल कथित संपत्ति के कुल मूल्य तक सीमित न रहे, बल्कि यह भी पता लगाया जाए कि संपत्तियां किन स्रोतों से अर्जित की गईं।
इसके लिए संबंधित व्यक्तियों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, सावधि जमा, शेयरों, कंपनियों और अन्य वित्तीय हितों से जुड़े अभिलेखों की पड़ताल कराने का अनुरोध किया गया है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि संबंधित संपत्तियों का मिलान ज्ञात और वैध आय के स्रोतों से किया जाए। इसके साथ ही संपत्ति से जुड़े आवश्यक वैधानिक घोषणापत्रों और विवरणों की भी जांच होनी चाहिए। शिकायतकर्ता के अनुसार, वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की पड़ताल से संपत्ति के स्रोतों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम में कार्रवाई की मांग
शिकायत में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13(1)(ख) और 13(2) का उल्लेख किया गया है। अधिवक्ता ने कहा है कि यदि जांच में इन प्रावधानों के तहत अपराध के पर्याप्त आधार मिलते हैं, तो प्राथमिकी दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग करते हुए कहा है कि इसकी जिम्मेदारी ऐसे सक्षम अधिकारी को सौंपी जाए, जिस पर राजनीतिक या अन्य किसी तरह के अनुचित दबाव की आशंका न हो।
साथ ही संबंधित व्यक्तियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए। जांच के निष्कर्ष दस्तावेजों, वित्तीय अभिलेखों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तय करने का अनुरोध किया गया है।
बोले- आरोप निराधार हैं तो भी स्थिति स्पष्ट हो
अधिवक्ता पंकज सिंह क्षेत्री ने कहा कि शिकायत का उद्देश्य किसी की राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उनका कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं, तो निष्पक्ष जांच से यह स्पष्ट हो जाना चाहिए। वहीं, आरोपों की पुष्टि होने पर कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने सतर्कता अधिष्ठान से शिकायत पर विधिवत संज्ञान लेकर प्रारंभिक जांच कराने और गिरधारी लाल साहू की ओर से जारी वीडियो सहित उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने का अनुरोध किया है। शिकायत सौंपते समय अधिवक्ता अल्का शर्मा और अधिवक्ता अजय धीमान भी मौजूद रहे।
फिलहाल, 210 करोड़ रुपये की कथित संपत्ति को लेकर लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। मामले में वास्तविक स्थिति जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


