मत: वैमानिकी जानते थे भारतीय कि पूरी तरह पश्चिम की देन है यह?
क्रिटिकल स्टडी की क्रिटिकल परख: संदर्भ वैमानिक शास्त्र
[हमारी शिक्षा और व्यवस्था, आलेख – 11 ]
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मेरे आलेख “वैमानिक शास्त्र – कल्पना और विचारधारा” से असहमत मित्र ने एक शोधपत्र भेजा – “अ क्रिटिकल स्टडी ऑफ द वर्क – वैमानिक शास्त्र (साईंटिफिक ओपीनियन, 1974, पृ 5-12)” तथा इसे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साईन्स के एच एस मुकुंदा, एस एम देशपाण्डेय एवं एच आर नागेंद्रा ने लिखा है। पूरा शोधपत्र पढ कर गहरी निराशा हुई चूंकि अधिकतम विवरण “ऐसा लगता है (appears that), संभावना है (supposed to) अथवा हो सकता है (maybe) जैसी शब्दावलियों से भरा पड़ा है। मेरे सामने प्रश्न यह था कि क्या इन शोधार्थियों ने वैमानिक शास्त्र में उल्लेखित विधियों की बारीक विवेचना प्रस्तुत की है? इसका उत्तर है – नहीं। शोधपत्र का अधिकांश हिस्सा यह सिद्ध करने में लगाया गया है कि वैमानिक शास्त्र महर्षि भारद्वाज की मूल कृति है अथवा किसी ने अपनी कल्पना के आधार पर इसे तैयार किया है। मुझे लगा कि कालखण्ड की बात स्क्रिप्ट की डेटिंग अथवा भाषा-विज्ञान के आधार पर कही गयी होगी। हर युग की अपनी भाषागत पहचान है जिसे कोई भी भाषा-वैज्ञानिक आसानी से सुझा सकता है, परंतु शोधपत्र में उनके किये काल निर्धारण का यह आधार नहीं था। इससे क्या सिद्ध होता है कि कौन सी पाण्डुलिपी कहाँ मिली,कब मिली?
मैं विज्ञान के उस प्रपत्र को पढा रहा था जो इतिहास का प्रतीत हो रहा था। शोधपत्र के पहले भाग का सार संक्षेप है – Vymanika Shastra was brought into existence sometime between 1900 and 1922 by Pandit Subbaraya Shastry by techniques unclear to us at the moment. इस उद्धरण में रेखांकित करने वाला वाक्य है “तकनीक जिससे वर्तमान में हम अनभिज्ञ हैं – techniques unclear to us at the moment” और यदि यही सच्चाई है तो फिर पूरे शोधपत्र की वैज्ञानिकता पर सवाल खड़ा होता है अथवा वैमानिक शास्त्र पर? मेरा प्रश्न है कि शिवकर बापूजी तलपडे जिनके विषय में यह कहा जाता है कि उन्होने पहला विमान प्राचीन शास्त्रों को आधार बना कर डिजाईन करने व वर्ष 1895 में उडाने का प्रयास किया, वह किन संदर्भों पर आधारित था, इसका शोधपत्र में संज्ञान क्यों नहीं लिया गया जबकि दयानंद सरस्वती का उद्धरण देते हुए लिखा गया है कि उनके ऋग्वेद के भाष्य (1878 अथवा पूर्व में प्रकाशित) में विमान के परिचालन को ले कर अनेक वर्णन हैं। यहाँ वर्ष 1878 महत्व का नहीं है चूंकि भाष्य मूल कृति नहीं होते, वस्तुत: विमान की शोधपत्र में उल्लेखित संकल्पना उन वैदिक श्लोकों से ली गयी हैं जिनका रचनाकाल ईसामसीह के जन्म से भी हजारो वर्ष पहले का है। प्रपत्र लिखने वालों की भाषा से प्रतीत होता है कि उन्हें आपत्ति है कि विमान शास्त्र में जिन मशीनों/यंत्रों का उल्लेख है वे आधुनिक प्रतीत होते हैं। वे लिखते हैं – It has several tiers, each one containing different yantras (machines). The drawings show parts like cylinder, piston worm gear, and pumps which seem entirely modern (beyond 18th century), समझने में असमर्थ हूँ कि इस पर गर्व होना चाहिये अथवा प्रश्नचिन्ह लगाया जाना चाहिये?
प्रपत्र में दो कृतियों ब्रम्हमुनि परिव्राजका के “वृहद विमान शास्त्र” एवं महर्षि भरद्वाज के “वैमानिक शास्त्र” पर अपर्याप्त चर्चा है। लेखक त्रय लिखते हैं कि वैमानिकी पर केंद्रित उल्लेखित कृतियाँ सीधे – सीधे विमान की संरचनागत विशेषतायें बताने लगती हैं। आधुनिक विज्ञान के दम्भ का प्रदर्शन करते हुए लिखा गया है कि – The science of aeronautics requires an understanding of a number of disciplines: aerodynamics, aeronautical structures, propulsive devices, materials, and metallurgy. The subject works lay uncalled for emphasis on propulsive devices and structures, but little or no emphasis on aerodynamics. इस वाक्यांश से चकित हूँ कि वैज्ञानिकों का लिखा शोधपत्र “एयरोडाईनमिक्स पर कम अथवा नहीं के बराबर जोर देने – little or no emphasis on aerodynamics की बात करता है। यदि ‘नहीं है’ तो बोल्ड अक्षरों में NO लिख कर नकारा जाना चाहिये यदि LITTLE EMPHASIS है तो उस पर स-तर्क चर्चा होनी चाहिये।
शोधपत्र में वैमानिक शास्त्र के विषय में जानकारी देते हुए लिखा गया है कि ग्रंथ में विमान की परिभाषा, विमान चालक, वायु मार्ग, वायु यात्रा के दौरान भोजन, पहने जाने वाले वस्त्र, धातु-प्रयोग, युद्ध में विमान के उपयोग, विविध यंत्रों आदि व उनके प्रयोगों की जानकारी दी गयी है। प्रपत्र मुख्य रूप से चार प्रकार के वर्णित विमानों पर अपने विचार रखता है। लिखा गया है कि ग्रंथों में विमानों के मांत्रिक, तांत्रिक एवं कृतक के रूप में तीन मुख्य वर्गीकरण हैं। कृतक श्रेणी के चार प्रमुखता से वर्णित वायुयानों अर्थात शकुन, सुंदर, रुक्म एवं त्रिपुर पर ही शोधपत्र में चर्चा है – The works [1,2] under discussion contain description and details on the definition of an airplane, a pilot, aerial routes, food, clothing, metals, metal production, mirrors and their uses in wars, varieties of machinery and yantras, planes like ‘mantrik’, ‘tantrik’, and ‘kritak’. Details about four planes in the ‘kritak’ category –Shakuna, Sundara, Rukma, and Tripura – are also given.
सभी चार प्रकार के विमानों का वर्णन पढते हुए आश्चर्य इस बात का है कि प्रपत्र लेखकों को विमान में प्रयोग किये जाने वाले फ्यूल अथवा ईंधन की समुचित जानकारी हासिल नहीं हो सकी है इसकी स्वीकारोक्ति है, उन्हें श्लोकों में प्रयोग किये गये युनिट समझ में नहीं आये और पूरा रिसर्च भी हो गया। वे लिखते हैं – One of them concerns the kind of units used. The basic text uses ‘vitasti’ for length, ‘link’ for speed, ‘kaksha’ for heat, & ‘link’ again for electrical force. The units of speed and temperature are new and, to the best of our knowledge, do not have any easily decipherable meaning. मैं यहाँ लेखकों के “बेस्ट ऑफ अवर नॉलेज” का प्रयोग से सहमत हूँ कि जो समझ में आया ही नहीं उसपर ही पेपर लिख दिया गया और उसे साईंटिफिक भी माना जाये इसका दुराग्रह भी है?
फ्यूल पर तो बाद में चर्चा होगी, एयरोडाईनामिक्स पर भी विमर्श कर लिया जायेगा पहले अनिवार्य मापकों और इकाईयों को तो ठीक से समझ लो फिर दुनिया को समझाना कि विज्ञान अलाना है और शास्त्र फलाना। साईंस के विद्यार्थी इस कथित साईंटिफिक पेपर की हकीकत और नीयत को इस बात से भी समझ सकते हैं कि एक ओर आपको स्पीड/गति, हीट/ऊष्मा तथा इलेक्क्ट्रिकलफोर्स/विद्युतशक्ति की वैमानिक शास्त्र के श्लोकों में प्रयोग की गयी इकाईयाँ समझ नहीं आयीं लेकिन आपको चिंता है कि वजन और द्रव्यमान की इकाईयाँ का उल्लेख क्यों नहीं है -Also, no data have been given about the weights of crafts and their components. This is serious since weight is fundamental to the flying of heavier than air machines. Moreover, the unit of mass does not even appear anywhere is the text. इन शोधार्थियों से प्रश्न उठता है कि क्या वे संस्कृत का यथोचित ज्ञान रखते हैं? क्या वे उन पुरा-शब्दों के अर्थ करने की समुचित योग्यता भी रखते हैं जो कि उल्लेखित वैमानिक शास्त्र की भाषा है? क्या परिशिष्ठ में जितने संदर्भ दिये गये हैं (कुल छ:) वे इतने भर से इस जटिल और महत्वपूर्ण विषय को समझ लिया जायेगा? शोधपत्र की विशेषता है कि इसके लेखकों ने न तो डिजाईन बनाया, न कोई मॉडल तैयार किया, न ही किसी तरह का प्रयोग किया केवल अपने किताबी ज्ञान को सामने रखा है। क्या इसे विज्ञान का शोधपत्र माना जाना चाहिये?
इस कथित शोध-पत्र की चीर-फाड इसलिये आवश्यक है चूंकि इसी को वामपंथी तर्कशास्त्रियों ने आधार बना कर पोल खुली, कल्पना, असत्य आदि संबोधनों के साथ वैमानिक शास्त्र के विरुद्ध बडे बडे व्यंग्य लिखे हैं जिन्हें प्रगतिशील लेबल वाले अखबरों, पत्रिकाओं और वेबसाईटों ने प्रकाशित किया है। मेरा कहना है कि नकार सबसे आखिरी चरण है किसी भी शोध का पहला चरण स्वीकार है। वैमानिकी से ही जुडे एक महत्वपूर्ण ग्रंथ समरांगण सूत्रधार का अनुवाद व संपादन करने वाले प्रसिद्ध इतिहासकार श्रीकृष्ण जुगनू Shri Krishan Jugnu अपने एक लेख में ग्रंथ से उद्धरित करते हैं कि “भोजराज कहते हैं कि वह इस विद्या (वैमानिकी) को खुलकर इसलिए नहीं लिख रहे हैं कि यदि यह विद्या आतंकियों के हाथ पड़ गई तो नुकसान ही अधिक होगा। ग्रंथकार की यह आत्म स्वीकारोक्ति है कि इस विद्या पर राम नामक राजाधिराज के ‘यंत्र प्रपंच’ नामक ग्रंथ में ‘यंत्राध्याय’ है और उसी से वह यथेष्टं वर्णन उद्धृत कर रहा है। इससे लगता है कि 10वीं सदी से पहले राम नामक राजा का इस विद्या पर कोई ग्रंथ था जो बहुत नहीं तो गुप्तरूप से राजाओं के यहां पठनीय, अनुकरणीय रहा होगा”।
इस आलोक में नवभारत टाईम्स में 6 जनवरी 2015 को प्रकाशित इसी शोधपत्र को आधार बना कर लिखे गये एक आलेख के शीर्षक पर गौर करें – “40 साल पहले ही खुल गई थी ‘वैमानिक शास्त्र’ की पोल” और अब आप चाहें तो दो मिनट का मौन भारतीयों की वर्तमान विमर्श प्रक्रिया और सोच के लिये रख सकते हैं। नवभारत टाईम्स ने वर्ष 2015 में एकाएक चालीस वर्ष पश्चात शोधपत्र को इस वाहयात शीर्षक के साथ क्यों प्रकाशित किया जिसे वामपंथी पत्र-पत्रिकाओं व वेबसाईटों ने हाथोहाथ लिया, इसे तलाशने के लिये अधिक यत्न नहीं करना पड़ा। प्रसिद्ध लेखक श्री सुरेश चिपलूनकर Suresh Chiplunkar के उसी दौरान लिखे गये एक ब्लॉग में जानकारी मिली कि – “जैसे ही यह निश्चित हुआ, कि मुम्बई में सम्पन्न होने वाली 102 वीं विज्ञान कांग्रेस में भूतपूर्व फ्लाईट इंजीनियर एवं पायलट प्रशिक्षक आनंद बोडस भारतीय प्राचीन विमानों पर एक शोधपत्र पढ़ेंगें, तभी यह तय हो गया था कि भारत में वर्षों से विभिन्न अकादमिक संस्थाओं पर काबिज, एक निहित स्वार्थी बौद्धिक समूह अपने पूरे दमखम एवं सम्पूर्ण गिरोहबाजी के साथ बोडस के इस विचार पर ही हमला करेगा, और ठीक वैसा ही हुआ भी”। तो गडे मुर्दे कब क्यों उखाडे जाते हैं यह राजनीति का विषय है परंतु वैज्ञानिक कहे जाने वाले शोधपत्र ऐसे उथले हों तो आधुनिकता पर से भरोसा उठ जायेगा। आप योग्य नहीं तो ऐसे शोध में अपना कीमती समय क्यों खर्च करते हैं, आधुनिक विज्ञान के बहुत से विषय सामने हैं, पुरातन को किसी जुनूनी शोधार्थी के लिये छोड दीजिये जो कभी न कभी इस अबूझे विषय के गहरे सागर में उतर मोती तलाश ही लायेगा। आज का विज्ञान ही थोथे तर्क देने लगे और उसी को शोधपत्र का नाम दे कर भ्रमित करने का कार्य करे तो यह अनुचित कृत्य कहा जायेगा। इस तरह के तथ्यहीन प्रपत्र कुतर्कशास्त्रियों के लिये हथियार का काम करते हैं और वास्तविक शोध की दिशा में अवरोध बनते हैं।
[अगली कड़ी में जारी……..]
–✍🏻राजीव रंजन प्रसाद
संदर्भित आलेख और वीडियो–वैमानिक शास्त्र – कल्पना और विचारधारा
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राईट्स बंधुओं के पहला विमान उडाने से कुछ पहले एक सफल-या असफल कहानी भारत की भी है। शिवकर बापूजी तलपडे ने ऋग्वेद एवं यजुर्वेद के भाष्य ग्रंथों, प्राचीन वैमानिक शास्त्रों से प्रेरणा ले कर, ग्रंथ में दिये गये विवरणों को आधार बना कर हवा में उडने वाले विमान का डिजाईन तैयार किया। जब तलपडे को यह विश्वास हो गया कि अपने प्रयोगों में वे महत्वपूर्ण सफलता अर्जित कर सकते हैं तब उन्होंने राजा-रजवाडों और ब्रिटिश सरकार से अपने शोध में सहायता की अपेक्षा की। साम्राज्यवादी ब्रिटेन की सरकार और उसके अधीन आने वाले राजे रजवाडे अपने उपनिवेश के किसी शोधार्थी को सहायता क्यों प्रदान करते? उन्हें उपयुक्त आर्थिक मदद कहीं से प्राप्त नहीं हुई। इसके बाद भी वे निजी प्रयास करते रहे। आखिरकार उन्होंने अपना विमान तैयार किया जिसे निश्चित ऊँचाई तक उडने में सफलता प्राप्त हुई। विमान कुछ देर हवा में रह कर जमीन पर गिरा और टूट गया। उन्होंने जब अपना विमान उडाया तब उसे देखने वाले कुछ प्रत्यक्षदर्शी भी थे, इस सबके बाद भी वैमानिक शास्त्र को अनदेखा किया गया, प्रयोगों को खारिज कर दिया गया। शिवकर बापूजी तलपडे ने हिम्मत नहीं हारी, जीवन के अंतिम दिनों में ‘मरुत्सखा’ नाम के एक विमान का निर्माण करने की कोशिश में थे, यद्यपि उनका दूसरा प्रयास सफल नहीं हो सका। कालांतर में “प्राचीन विमान कला का शोध” नाम से एक पुस्तक भी लिखी।
क्या एक जीवट शोधार्थी के इन प्रयासों को सम्मान नहीं मिलना चाहिये था? क्यों नहीं मिला? प्राचीन वैमानिक शास्त्रों का सबसे बडा नकार और दुत्कार वामपंथी खेमे के द्वारा हुआ है। जब जब वैमानिक शास्त्र पर चर्चा आरम्भ हुई, विशेष रूप से लाल-पत्र पत्रिकाओं में ऐसे आलेख प्रकाशित हुए जिनमें से कुछ के शीर्षक हैं – “चालीस साल पहले ही खुल गयी थी वैमानिक शास्त्र की पोल” अथवा “एक भारतीय ने विमान उडाने की कोशिश की थी, आविष्कार नहीं”। ब्रिटिश पराधीनता के दौर में भारतीय ज्ञान अथवा शास्त्रों का नाकार समझ आता है, परंतु आज हम क्या कर रहे हैं? क्या आज भी पुरातान को उसका हक, उसका श्रेय प्रदान करने में आडे आने वाला झोलाछाप वामपंथ नये दौर का मैकाले मैकाले-मैक्समूलर है?
सत्य को कुछ तर्कों की कसौटी पर कस कर देखिये। तलपडे द्वारा निर्मित वायुयान में मरकारी वोर्टक्स इंजन का प्रयोग किया गया था। अर्थात यह मर्करी (पारे) का एक ड्रम था जो सूर्य की रौशनी के सम्पर्क में आने पर हाईड्रोजन छोडता था जिससे जहाज उपर की ओर उडता था। इस तथ्य पर नकारशास्त्री दो तरह की भ्रामक बातें रखते हैं पहली यह कि पारा सूर्य की रौशनी के साथ किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं करता। ठीक है, यहाँ बात समाप्त हो जाती लेकिन खारिजकर्ता जानते हैं कि वे पूर्णसत्य नहीं कह रहे, उनकी बात काटी न जा सके, वैज्ञानिक लगे, इसलिये आगे जोडा गया है कि पारा, सूर्य की रोशनी से प्रेरित कुछ रासायनिक प्रक्रियाओं मे भागीदारी कर सकता है, वह ऑक्सीजन के साथ बहुत थोडी मात्रा में प्रतिक्रिया करता है (अब दो में से एक ही बात सही हो सकती है)। प्रगतिशील किस्म के वैज्ञानिक जरा दूजे टाईप होते हैं, स्यादवाद से प्रभावित…मतलब क्रिया करता है, नहीं भी करता है, कर भी सकता है, नहीं भी कर सकता है, उस कोण से करेगा, इस कोण से नहीं करेगा…..कोई पूछे कहना क्या चाहते हो? सभी जानते हैं कि आज विज्ञान ने अपनी गति अपनी उपलब्धियों की प्रसंशनीय दिशा तय कर ली है, इसका अर्थ यह तो नहीं कि पुरा-प्रयोगों को उनके ऐतिहासिक होने का सम्मान भी न मिले? वामपंथी वेबपोर्टल दि वायर में एक लेख निर्णय देता है कि “इन कहानियों को पूरी तरह से खारिज किया जा चुका है- खासकर पश्चिम की वैज्ञानिक परंपराओं के द्वारा।” पश्चिम की वैज्ञानिक परम्परायें खारिज और वाजिब के सार्टिफिकेट बांटती ही रहती हैं, मेरा प्रश्न अपने दर्शकों से है कि हमने अपनी ही पुरातन पुस्तकों पर क्या और कितना शोध किया?
वैमानिक शास्त्र को खारिज करने वालों ने बिना संदर्भ यह घोषित किया कि ग्रंथ भारद्वाज ऋषि द्वारा नहीं अपितु सुब्बाराया शास्त्री द्वारा 1900 के आसपास लिखा गया है। चलिये सारे तर्क-कुतर्क को मान लिया जाये तब भी राईटर्स बंधुओं ने पहला जहाज 1903 में उडाया जबकि तलपडे का प्रयास 1895 का है अर्थात लगभग एक दशक पूर्व। इसका अर्थ यह भी है कि उन्होंने विमान निर्माण और उसकी प्रक्रियाओं का जो अनुसरण किया वे ग्रंथ और भी पुरातन थे। राईटर्स बंधुओं ने पहला विमान उडाया इस मान्यता से किसी को इनकार नहीं क्योंकि जो घटनाक्रम दस्तावेजीकृत हुआ वही प्रामाणित है। इसके बाद भी हम नकारना क्यों चाहते हैं कि विमान की संकल्पना ही नहीं उसके निर्माण के विशुद्ध भारतीय प्रयासों पर इक्का-दुक्का ग्रंथ नहीं अपितु पूरी परम्परा ही मौजूद जान पडती है। जब दुनिया ठीक से नेकर सिलना नहीं जानती थी उस दौर के ग्रंथों में सैंकडो बार वायु-मार्ग और विमान शब्द का प्रयोग हुआ है, क्यों? हमारी कृतियों के पुन: अनुवाद, पठन-पाठन अथवा उनपर शोध के प्रति भद्दे तरीके का इनकार क्यों है? मेरा तो कहना है कि एक बार के लिये ही चरक से ले कर अर्यभट्ट तक और आयुर्वैदिक ग्रंथों से ले कर वैमानिक शास्त्र तक सब कुछ किसी गड्ढे में दबा ही दें और औरंगजेब बन जायें। कल्पनाजीवी लोगों का देश था भारत, यही सही….जाने भी दो यारो।
-राजीव रंजन प्रसाद
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#vaimanikshaastra #vimana #वैमानिकशास्त्र #प्राचीनभारत #विमान
यदि आप शिवकर बापूजी तलपदे को नहीं जानते तो इसे अपना दुर्भाग्य समझिए। आपने निश्चय ही अपनी पाठ्यपुस्तकों में अमेरिका के राइट बंधुओं द्वारा 17 दिसम्बर, 1903 में उड़ाये गए पहले हवाई जहाज के विषय में अवश्य सुना होगा परंतु क्या आप जानते हैं कि वर्ष 1895 में अर्थात दुनिया के कथित पहले विमान के उड़ाये जाने से बहुत पहले एक भारतीय ने प्राचीन शास्त्रों और संदर्भों पर आधारित पहला विमान उड़ाने का अर्धसफल प्रयास किया था? उनके द्वारा जो विमान निर्मित किया गया व उड़ाया गया उसका नाम था मारुतशक्ति। जो संदर्भ इसपर प्राप्त होता है वह डेकन हेराल्ड पेपर का है जिसके अनुसार “1895 जून में (दुर्भाग्यवश सही तारीख नही मालूम, क्यूंकी पुणे से प्रकाशित होने वाले बालगंगाधर तिलक द्वारा संपादित पत्र ” केसरी” जिसने इस की रिपोर्टिंग की थी, उसमें तारीख का ज़िक्र नही था) महादेव गोविंद रानाडे और बरोडा के महाराज सयाजी गायकवाड़ के समक्ष तलपदे ने गिरगाम चौपाटी पर “मारुत शक्ति” नामक अपना मानवरहित विमान उड़ाया। यह 1500 फीट की उँचाई तक उड़ा और फिर ज़मीन पर गिर पड़ा।” बाल गंगाधर तिलक स्वयं ही मराठी भाषा में प्रकाशित होने वाले केसरी पत्र के संपादक थे; अत: उनके द्वारा इस समाचार को प्रकाशित किया जाना घटना को विश्वसनीयता प्रदान करता है। कुछ लोगों का मत है कि मारुतसखा विमान ने केवल बीस मीटर ऊंचाई से ही उड़ान भरी और वह सत्रह मिनट के भीतर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, इसलिए उसे विफलता के रूप में गिना गया था। यदि यही सफलता और विफलता का मानक है तो फिर सोचिए कि राईट बंधुओं का विमान भी केवल 120 फुट की ऊंचाई पा सका और मात्र 12 सेकेंड ही हवा में उड़ा था।
#vaimanikshastra #vimana #shivkarbapujitalpede #ancientvimanas #वैमानिकशास्त्र #विमान #प्राचीनविमान
संपादकीय परिशिष्ठ
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विमान विद्या के खोजकर्ता किस ऋषि को माना जाता है?
महर्षि भारद्वाज ने ‘विमान’ को परिभाषित किया है। वेग-संयत् विमानों को अण्डजानाम् पक्षियों के समान वेग होने के कारण ‘विमान’ कहते हैं। ऋग्वेद में लगभग 200 बार विमानों के बारे में उल्लेख है।
https://www.mvspujjain.com
महर्षि भारद्वाज – महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ
वैमानिक शास्त्र क्या है?
वैमानिक शास्त्र (Vaimanika Shastra) 20वीं सदी का एक संस्कृत ग्रंथ है जो प्राचीन भारत में उड़ने वाले वाहनों (विमानों) के निर्माण और संचालन का वर्णन करता है, जिसे पंडित सुब्बाराय शास्त्री ने महर्षि भारद्वाज के हवाले से लिखा था, लेकिन भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) ने इसे “घटिया कल्पना” और अव्यावहारिक बताया है, फिर भी यह प्राचीन अंतरिक्ष यात्री सिद्धांतों में लोकप्रिय है और विमानों की बनावट, धातुओं और ऊर्जा स्रोतों का विस्तृत विवरण देता है.
मुख्य बातें:
लेखक और उत्पत्ति : दावा किया जाता है कि इसे पंडित सुब्बाराय शास्त्री (1866-1940) ने 1918-1923 के बीच लिखा, जो प्राचीन ऋषि भारद्वाज से मानसिक प्रेरणा से प्राप्त हुआ था.
विषय-वस्तु: यह विमानों (उड़ने वाले वाहनों) के प्रकार, उनके पुर्जों, धातुओं (जैसे ‘राज लोहा’), ऊर्जा स्रोतों और संचालन (पायलट, मार्ग, कपड़े) का वर्णन करता है.
संरचना : इसमें 8 अध्याय और लगभग 3000 श्लोक हैं, जो ‘यंत्र सर्वस्व’ नामक ग्रंथ का हिस्सा हैं.
वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Viewpoint): 1974 में IISc के शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि इसमें वर्णित विमान अव्यावहारिक और विज्ञान-विरोधी थे, जैसे ‘रुक्म विमान’ का होना असंभव बताया गया.
लोकप्रियता: प्राचीन अंतरिक्ष यात्री (Ancient Astronauts) सिद्धांतों के समर्थक इसे प्राचीन उन्नत तकनीक का प्रमाण मानते हैं.
निष्कर्ष :वैमानिक शास्त्र प्राचीन भारतीय ज्ञान की एक आकर्षक लेकिन विवादास्पद कृति है, जो विमानों के बारे में विस्तृत तकनीकी जानकारी का दावा करती है, लेकिन आधुनिक विज्ञान इसे एक काल्पनिक रचना मानता है.
वैमानिक शास्त्र – विकिपीडिया
— वैमानिक शास्त्र ( वैमानिक शास्त्र , शाब्दिक अर्थ ” विमानों के विषय पर शास्त्र ” या “वैमानिकी विज्ञान”, जिसे कभी-कभी विमानिका, व्यामनिका या व्यामनिका भी कहा जाता है) 20वीं सदी का एक संस्कृत ग्रंथ है। इसमें दावा किया गया है कि प्राचीन संस्कृत महाकाव्यों…
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8 Dec 2022 — स्कॉलर शिवकर बापूजी तलपड़े ने दुनिया का पहला अनमैन एयर एयरक्राफ्ट बनाया था वो भी राइट ब्रदर्स से पहले. ऐसे और दिलचस्प. फैक्ट्स जानने के लिए देखिए. एपिकपीडिया का यह. वीडियो. माना जाता है कि भारद्वाज. वैदिक समय के बहुत ही रि…
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विमान शास्त्र – eGyanKosh
विमानों के विषय में प्रामाणिक एवं विस्तृत वर्णन भारद्वाज मुनि रचित वैमानिक शास्त्र से प्राप्त होता है। महर्षि भारद्वाज के यन्त्रसर्वस्व ग्रन्थ की रचना, वैमानिक शास्त्र उसी का भाग है जिसे बृहद विमान शास्त्र भी कहा जाता है। संस्कृत में रचित इस वैमानिक प्रकरण…
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18 May 2021 — भारत का प्राचीन विमान शास्त्र 🛸 राइट बंधुओं ने 17 दिसंबर 1903 में पहला विमान उड़ाया पर भारत में यह हजारों वर्ष पूर्व बनाया जा चुका था । विद्या वाचस्पति पं मधुसूदन सरस्वती ‘इंद्र विजय’ नामक ग्रंथ में ऋग्वेद के 36वें सूक्त के प्रथम …
वैमानिक शास्त्र, वैमानिक शास्त्र: 1 परिभाषा
Translated — सामान्य परिभाषा (हिंदू धर्म में) … वैमानिक शास्त्र, 20वीं सदी के आरंभ में वैमानिकी पर लिखा गया एक संस्कृत ग्रंथ है, जो कथित तौर पर मानसिक प्रेरणा से प्राप्त हुआ था। यह ग्रंथ, “देवताओं के रथ” कहे जाने वाले विमानों के निर्माण के बारे में…
wisdomlib.org
“वैमानिक शास्त्र” कृति का एक आलोचनात्मक अध्ययन – — 2.4c ज्यामिति – यह ज्यामिति भी बेलन-शंकु संयोजन है जिसका आधार व्यास 100 फीट, ऊँचाई 20 फीट और शंकु ऊँचाई 80 फीट है। पाठ में आधार के लिए 1000 फीट के आयाम का उल्लेख है। हालाँकि, चित्र में केवल 100 फ़ीट ही दिखाया गया है…
वैमानिका शास्त्र क्या है?
वैमानिक शास्त्र (वैमानिक शास्त्र, जिसका शाब्दिक अर्थ है “विमानों के विषय पर शास्त्र” या “विमानन विज्ञान”, जिसे कभी-कभी विमानिका, व्यामानिका या व्यामानिका भी लिखा जाता है) 20वीं शताब्दी का संस्कृत ग्रंथ है।
https://en.wikipedia.org
वैमानिक शास्त्र – विकिपीडिया
विमान विषयक विद्या के जनक कौन हैं?
विश्वकर्मा नामक महान शिल्पी का उल्लेख अनेकों इतिहास ग्रंथों में आता है। इससे स्पष्ट पता चलता है कि वेदों को पढ़कर सर्वप्रथम विमान का आविष्कार विश्वकर्मा ने करोड़ों वर्ष पूर्व ही कर दिया था।16 Nov 2020
https://www.thanksbharat.com
हवाई जहाज – विमान विद्या का सम्पूर्ण इतिहास –
विमान शास्त्र कब लिखा गया था?
☀ महान भारतीय आचार्य महर्षि भारद्वाज ने एक ग्रंथ रचा, जिसका नाम है, “विमानिका” या “विमानिका शास्त्र” ☀ १८७५ ईसवीँ में दक्षिण भारत के एक मन्दिर में विमानिका शास्त्र ग्रंथ की एक प्रति मिली थी। इस ग्रन्थ को ईसा से ४०० वर्ष पूर्व का बताया जाता है, इस ग्रंथ का अनुवाद अंग्रेज़ी भाषा में हो चुका है।19 Jul 2025
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प्राचीन #भारतीय #विमानशास्त्र ऐसे कई गूढ़ रहस्य भरे है.. हमारे देश की …
वैमानिकी के प्रणेता कौन थे?
ऐसा ही एक महर्षि भारद्वाज द्वारा रचित ‘विमान शास्त्र’ ग्रंथ है, जिसे संस्कृत में ‘वैमानिक शास्त्र’ या ‘विमानिका शास्त्र’ कहा जाता है।30 Jun 2025
https://khabargaon.com
महर्षि भारद्वाज रचित ‘विमान शास्त्र’ और आधुनिक युग में इसका प्रभाव
Kuber ko Pushpak Viman Kisne diya?
Aeroplane ka invent Kisne kiya tha?
राइट बंधु कौन थे?
जानें- 114 साल पहले कैसे राइट …
राइट बंधु (Wilbur और Orville Wright) अमेरिकी आविष्कारक और विमानन के अग्रदूत थे, जिन्होंने 17 दिसंबर, 1903 को दुनिया की पहली सफल, नियंत्रित और संचालित हवाई जहाज की उड़ान भरी थी, जिससे आधुनिक विमानन युग की शुरुआत हुई। वे मूल रूप से साइकिल मैकेनिक थे जिन्होंने अपने साइकिल के अनुभव का इस्तेमाल विमान के डिजाइन और नियंत्रण विधियों को विकसित करने में किया, खासकर हवाई जहाज को नियंत्रित करने की विधि (three-axis control) का आविष्कार किया, जो आज भी हवाई जहाजों के लिए महत्वपूर्ण है।
मुख्य बातें:
आविष्कार: 17 दिसंबर, 1903 को किट्टी हॉक, उत्तरी कैरोलिना में पहली सफल उड़ान भरी (Wright Flyer)।
पृष्ठभूमि: वे डेटन, ओहियो में एक साइकिल की दुकान चलाते थे, जहाँ से उन्हें यांत्रिकी और वायुगतिकी (aerodynamics) में रुचि हुई।
महत्व: उन्होंने न केवल विमान बनाया, बल्कि उसे नियंत्रित करने की विधि भी विकसित की, जो हवाई जहाज के लिए आवश्यक थी।
प्रेरणा: बचपन में मिले एक खिलौना हेलीकॉप्टर मॉडल ने उनमें उड़ान के प्रति जुनून जगाया।
विरासत: उनकी खोजों ने भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण और युद्धक विमानों के विकास की नींव रखी।
संक्षेप में, राइट बंधु वे लोग थे जिन्होंने मानव को हवा में उड़ने का व्यावहारिक तरीका सिखाया और विमानन के क्षेत्र में क्रांति ला दी।
राइट बंधु – विकिपीडिया
राइट बंधु (अंग्रेजी: Wright brothers), ऑरविल (अंग्रेजी: Orville, १९ अगस्त, १८७१ – ३० जनवरी १९४८) और विलबर (अंग्रेजी: Wilbur, १६ अप्रैल, १८६७ – ३० मई, १९१२), दो अमरीकन बंधु थे जिन्हें हवाई जहाज का आविष्का…
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राइट ब्रदर्स | राष्ट्रीय वायु एवं अंतरिक्ष संग्रहालय
— राइट ब्रदर्स कौन थे? ऑरविल और विल्बर राइट को आमतौर पर चतुर साइकिल मैकेनिक के रूप में चित्रित किया जाता है जिन्होंने किसी तरह हवाई जहाज का आविष्कार किया। उन्हें एक ही व्यक्तित्व के रूप में वर्णित किया जाता है: “राइट बंधु” – एक म…
राइट बंधु | जीवनी, आविष्कार, गृहनगर, विमान और तथ्य | ब्रिटानिका – — राइट बंधु , अमेरिकी आविष्कारक और विमानन अग्रदूत जिन्होंने पहली संचालित, निरंतर और नियंत्रित हवाई जहाज उड़ान (1903) हासिल की। विल्बर राइट (16 अप्रैल, 1867, मिलविले के पास, इंडियाना, अमेरिका—30 मई, 1912, डेटन, ओ…
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राइट ब्रदर्स कौन हैं? –
उत्तर – — राइट बंधु कौन हैं? विल्बर और ऑरविल राइट भाई और अमेरिकी आविष्कारक थे जिन्हें अब विमानन के अग्रदूत के रूप में जाना जाता है। विल्बर का जन्म 16 अप्रैल 1867 को इंडियाना, अमेरिका में हुआ था। ऑरविल का जन्म कुछ साल बाद 1871 में …
राइट ब्रदर्स के बारे में 10 बातें जो आप नहीं जानते होंगे | राष्ट्रीय विमानन …
Translated — 3. बचपन की प्रेरणा: वह खिलौना जिसने जुनून जगाया एक खिलौने ने उनके उड़ने के जुनून को जन्म दिया। 1878 में जब दोनों भाई छोटे थे, तो एक शाम उनके पिता एक उपहार लेकर घर लौटे और उसे हवा में उछाल दिया। भाइयों ने 1908…

राइट ब्रदर्स | आविष्कार, जीवनी और उपलब्धियाँ –
— पाठ सारांश ऑरविल और विल्बर राइट, राइट ब्रदर्स , हवाई जहाज और विमानन के आविष्कार के पर्याय हैं। राइट ब्रदर्स को हवा से भारी, बिजली से चलने वाले पहले हवाई जहाज, राइट फ्लायर , के आविष्कार और उसकी सफल उड़ान के लिए याद…
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राइट ब्रदर्स कौन हैं? बच्चों के लिए तथ्य और गतिविधियाँ। –
— राइट बंधुओं के बारे में जानें, जो विमानन के अग्रदूत थे और जिन्होंने 1903 में पहली बार बिजली से उड़ान भरी थी। हमारे ब्लॉग में उड़ान के इतिहास में उनके सफ़र के बारे में रोचक तथ्य और दिलचस्प गतिविधियाँ शामिल हैं। हवाई जहाज़ों की आकर्ष…
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राइट बंधु – सरल अंग्रेज़ी विकिपीडिया, मुक्त विश्वकोश – Simple Wikipedia
Translated — राइट ब्रदर्स … राइट बंधुओं , ऑरविल राइट (19 अगस्त, 1871 – 30 जनवरी, 1948) और विल्बर राइट (16 अप्रैल, 1867 – 30 मई, 1912) ने 17 दिसंबर, 1903 को पहला नियंत्रित, संचालित, हवा से भारी हवाई जहा…
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शिवकर बापूजी तलपडे कौन थे?
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Shivkar Bapuji Talpade, an Indian scientist and a Sanskrit …
शिवकर बापूजी तलपडे (1864-1917) एक भारतीय विद्वान और संस्कृत साहित्य के अध्येता थे, जिन्हें 1895 में राइट बंधुओं से कई साल पहले, प्राचीन संस्कृत ग्रंथों (विशेषकर विमानशास्त्र) के आधार पर एक मानवरहित विमान “मरुत्-सखा” बनाने और उड़ाने का श्रेय दिया जाता है, हालांकि इस दावे को लेकर ऐतिहासिक साक्ष्य और सत्यापन की कमी के कारण इतिहासकारों में मतभेद है और इसे एक मिथक भी माना जाता है।
मुख्य बिंदु:
जन्म और पृष्ठभूमि: उनका जन्म मुंबई में हुआ था और वे संस्कृत साहित्य, चित्रकला और वेदों के गहरे जानकार थे।
विमान का दावा: उन्होंने महर्षि भारद्वाज लिखित ‘विमान संहिता’ का अध्ययन किया और उसी से प्रेरणा लेकर 1895 में बॉम्बे के चौपाटी बीच पर ‘मरुत्-सखा’ नामक विमान का प्रदर्शन किया, जिसे उन्होंने लगभग 1500 फीट ऊपर उड़ाया।
प्रेरणा: उन्हें पंडित सुब्राय शास्त्री का मार्गदर्शन मिला, जिन्होंने ‘वैमानिक शास्त्र’ ग्रंथ पर काम किया था।
ऐतिहासिक विवाद: कई इतिहासकार इस दावे को विश्वसनीय नहीं मानते क्योंकि इसके समर्थन में पर्याप्त ऐतिहासिक या वैज्ञानिक प्रमाण नहीं हैं, और इसे अक्सर एक मिथक माना जाता है।
विरासत: तलपडे ने ‘प्राचीन विमानकला का शोध’ नामक एक पुस्तक भी लिखी, जो उनके काम का हिस्सा है।
संक्षेप में, शिवकर बापूजी तलपडे एक भारतीय विद्वान थे जिनके बारे में दावा किया जाता है कि उन्होंने प्राचीन ज्ञान का उपयोग करके पहला विमान बनाया और उड़ाया, लेकिन यह एक विवादास्पद विषय है।
शिवकर बापूजी तलपदे – विकिपीडिया
उन्होंने स्वामी दयानन्द सरस्वती कृत ‘ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका’ एवं ‘ऋग्वेद एवं यजुर्वेद भाष्य’ एवं महर्षि भारद्वाज की ‘विमान संहिता’ का अध्ययन कर प्राचीन भारतीय विमानविद्या पर कार्य करने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने संस्कृत सीखकर वैदिक विमानविद्या पर अनुसंधान …
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शिवकर बापूजी तलपडे ,के बारे में रोचक तथ्य क्या है जो दुनिया से छिपाया गया? – Quora
28 Apr 2020 — शिवकर बापूजी तलपदे कौन थे ? … 1864 में मुंबई में जन्मे शिवकर बापूजी तलपडे आर्य समाज के अनुयाई थे. वे शुरुआत से ही पढ़ाई में तेज थे. इसके अलावा भारतीय संस्कृति की पौराणिक ग्रंथों में उनकी विशेष रुचि थी और इन्हीं पौराणिक क…
शिवकर बापूजी तलपदे – विकिपीडिया – hiwiki
29 Mar 2022 — शिवकर बापूजी तलपदे (१८६४ – १७ सितम्बर १९१७) एक भारतीय विद्वान थे। उन्होंने १८९५ में उन्होने मानवरहित विमान का निर्माण किया था वे मुम्बई के निवासी थे तथा संस्कृत साहित्य एवं चित्रकला के अध्येता थे।
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दुनिया का सबसे पहला हवाई जहाज भारत में “शिवकर बापूजी तलपडे” ने बनाया …
20 Aug 2025 — दुनिया का सबसे पहला हवाई जहाज भारत में “शिवकर बापूजी तलपडे” ने बनाया था। और उन्होंने हवाई जहाज को राइट ब्रदर्स से 8 साल पहले वर्ष 1895 में बना दिया था। संस्कृत साहित्य और चित्रकला के अध्येता थे और उनका जन्म मुंबई में हु…
Wright Brothers Was Wrong! एक भारतीय ने बनाया था पहला विमान
20 Oct 2018 — This video is about Shivkar Bapuji Talpade Biography / Story in Hindi, Shivkar Bāpuji Talpade was an Indian scholar who is said to have constructed a…
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शिवकर तलपड़े: भारत का पहला विमान उड़ाने वाले व्यक्ति की अनकही कहानी
— दृश्य … शिवकर बापूजी तलपड़े, एक भारतीय विद्वान, के बारे में कहा जाता है कि उन्होंने राइट बंधुओं की पहली उड़ान से आठ साल पहले, 1895 में, मारुत्सखा नामक एक मानवरहित विमान का निर्माण और उड़ान भरी थी। उनका डिज़ाइन प्राचीन …
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शिवकर तलपड़े की अनकही कहानी – एक ऐसे व्यक्ति जिसने दुनिया का पहला …
— शिवकर बापूजी तलपड़े (1864-1916) और सुब्बाराय शास्त्री दो भारतीय वैज्ञानिक थे, जिन्होंने 1895 में भारत का पहला मानवरहित हवाई जहाज बनाया और उसे 1500 फीट की ऊँचाई तक उड़ाया। विमानन इतिहासकारों के अनुसार, श्री तलपड़े ने वि…
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शिवकर बापूजी तळपदे – विकिपीडिया
तळपदे हे मुंबईत राहत असून त्यांना संस्कृत आणि वेदांचे अभ्यासक असलेल्या पंडित सुब्राय शास्त्री यांचे मार्गदर्शन मिळाले होते. शास्त्रींनी लिहिलेल्या वैमानिक शास्त्र या अभ्यासग्रंथावरून तळपदेंना विमान उडवण्याचा प्रेरणा मिळाली. या ऐतिहासिक क्षणाचे साक्षीदार महादेव गोविंद रानडे व तिसरे…
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प्राचीन विमानकला का शोध- Ancient Aeronautics Research On This …
Publisher: Vaidik Shilpa Sansodhan Mandal. Author Shivkar Bapuji Talpade. Language: Hindi and Sanskrit. Pages: 95 (Throughout B/w Illustrations). Cover: Paperba…
Exotic India Art
The Untold Story of Shivkar Bapuji Talpade: The First Aircraft Inventor
Translated — They made, controlled, sustained flight of a powered, heavier-than-air aircraft with the Wright Flyer on December 17, 1903, 4 mi (6 km) south of Kitty…
17 दिसंबर 1903 को क्या हुआ था?
भारत में सबसे पहले विमान किसने बनाया था?
मरुत्सखा विमान क्या था?
Aeroplane ka Avishkar Kisne kiya Aur kab kiya?
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वैमानिक शास्त्र कल्पना और विचारधारा; EPISODE 132
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वैज्ञानिक दृष्टिकोण से वैमानिक शास्त्र की पड़ताल; EPISOFE 133
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प्राचीन भारत के विमान, Vimanas of Ancient India; EPISODE 357
प्राचीन भारत के विमान, Vimanas of Ancient India; EPISODE 357
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