स्कंद के ग्रामीणों के खुद सड़क बनाने का संज्ञान लिया मुमं धामी ने,भेजे अधि‍कारी

*ग्रामीणों की समस्या पर मुख्यमंत्री धामी का तत्काल एक्शन, सकण्ड गांव की सड़क को लेकर तीन माह में कार्रवाई के निर्देश*

*मुख्यमंत्री धामी के निर्देश पर राजस्व, वन विभाग और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम पहुंची सकण्ड गांव*

*सीएम धामी के त्वरित संज्ञान पर ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी ने जताया आभार, कहा—मुख्यमंत्री जी और शासन-प्रशासन का धन्यवाद*

चमोली जिले के कर्णप्रयाग विकासखंड के अंतर्गत सकण्ड (स्कंद) गांव में सड़क सुविधा को लेकर ग्रामीणों द्वारा स्वयं गेती, फावड़े और कुदाल उठाकर श्रमदान किए जाने की खबरों का मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने तत्काल संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों की समस्या को गंभीरता से लेते हुए संबंधित जिलाधिकारी को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए तथा सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि ग्रामीणों की सड़क संबंधी समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और सड़क निर्माण की कार्रवाई को तीन माह के भीतर पूरा करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जाए।

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य सरकार के लिए गांवों का विकास और ग्रामीणों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए किसी भी प्रकार की परेशानी न उठानी पड़े, इसके लिए शासन-प्रशासन को संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ और विकास कार्य धरातल पर गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के क्रम में आज राजस्व विभाग, वन विभाग और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम ने ग्राम सकण्ड पहुंचकर मौके का निरीक्षण किया और सड़क निर्माण से संबंधित आवश्यक कार्रवाई शुरू की। संयुक्त टीम ने ग्रामीणों को सड़क निर्माण की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा तीन माह के भीतर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया।

मुख्यमंत्री के त्वरित हस्तक्षेप और शासन-प्रशासन की कार्रवाई पर ग्राम प्रधान श्रीमती शिवानी चौधरी ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जी ने ग्रामीणों की समस्या का तत्काल संज्ञान लेते हुए जिला प्रशासन को निर्देश दिए , जिसके क्रम में आज राजस्व, वन विभाग और लोक निर्माण विभाग की संयुक्त टीम ग्राम सकण्ड पहुंची है। उन्होंने कहा कि टीम द्वारा मामले में तीन माह के भीतर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है। ग्राम प्रधान ने मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के साथ-साथ शासन एवं जिला प्रशासन का भी आभार व्यक्त किया।

तंत्र की बेरुखी, ग्रामीणों ने खुद उठाया सड़क निर्माण का जिम्मा

चमोली में शासन-प्रशासन की उपेक्षा से त्रस्त ग्रामीणों ने श्रमदान कर गांव तक सड़क बनाने की ठान ली.

गांव के लिए सड़क बनाना भूले जिम्मेदार
चमोली: सड़क सुविधा से वंचित कर्णप्रयाग विकासखंड के सकंड गांव के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब देने लगा है. शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से लगातार सड़क की मांग करने के बावजूद जब गांव तक सड़क नहीं पहुंची तो ग्रामीणों ने खुद ही गेती, फावड़ा, बेलचा और अन्य औजार उठा लिए. ग्रामीणों ने अपने निजी संसाधनों और श्रमदान से गांव तक सड़क निर्माण का काम शुरू कर दिया है.

आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला: ग्रामीणों का कहना है कि गांव को सड़क से जोड़ने के लिए वे लंबे समय से शासन-प्रशासन, जिलाधिकारी और विधायक समेत संबंधित अधिकारियों को पत्राचार करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है. सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार अधिकारियों के समक्ष मामला उठाने के बाद भी ग्रामीणों को सिर्फ आश्वासन ही मिले.

तंत्र की बेरुखी से ग्रामीण खफा
बीमार और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी: सड़क नहीं होने के कारण गांव के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी पैदल आवाजाही करनी पड़ती है. सबसे अधिक परेशानी बीमार, बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को उठानी पड़ती है. किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर उसे सड़क तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है. इसके बाद ही वाहन के जरिए उसे कर्णप्रयाग तक ले जाना संभव हो पाता है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में सड़क सुविधा नहीं होने का असर सिर्फ आवागमन तक सीमित नहीं है. कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने, जरूरी सामान गांव तक लाने और आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी भारी दिक्कत होती है.

ग्रामीणों ने खुद उठाया सड़क निर्माण का जिम्मा (Photo-ETV Bharat)
सकंड गांव के ग्रामीणों द्वारा अपने संसाधनों से सड़क निर्माण किए जाने का मामला उनके संज्ञान में आया है. जिस स्थान पर ग्रामीण सड़क बना रहे हैं, वह वन भूमि के अंतर्गत आती है. मामले की जानकारी संबंधित विभागों को भी दी जा रही है.
-अल्केश नौटियाल,उपजिलाधिकारी कर्णप्रयाग-

सरकार को आइना दिखाने के लिए उठाया कदम: ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से मांग और पत्राचार के बावजूद जब सड़क नहीं बनी तो अब उन्होंने अपने स्तर से निर्माण शुरू करने का फैसला लिया है. ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम सरकार और शासन-प्रशासन को आइना दिखाने के लिए उठाया गया है. उनका कहना है कि जब ग्रामीण अपने सीमित संसाधनों से सड़क बनाने को मजबूर हो सकते हैं तो जिम्मेदार विभागों को भी गांव की समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए. ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि सकंड गांव को सड़क सुविधा से जोड़ने के लिए जल्द ठोस कार्रवाई की जाए और सड़क निर्माण को सरकारी स्तर पर स्वीकृति देकर कार्य शुरू कराया जाए.
सिस्टम को ग्रामीणों ने दिखाया आइना
ग्राम प्रधान शिवानी चौधरी के नेतृत्व में वीरेंद्र सिंह, दाताराम, देवली, रघुवीर सिंह, गजेंद्र सिंह, उषा देवी, सरस्वती देवी समेत अन्य ग्रामीण अपने स्तर से सड़क निर्माण में जुटे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि गांव तक सड़क पहुंचाने के लिए कई बार सर्वे किए गए, लेकिन इसके बावजूद सड़क का निर्माण शुरू नहीं हो पाया. आज भी ग्रामीणों को करीब नौ किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है. ग्रामीणों ने बताया कि मांग को लेकर जनवरी में पांच और छह जनवरी को आंदोलन भी किया गया था.

विधायक अनिल नौटियाल के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने दो दिन बाद आंदोलन समाप्त कर दिया था. ग्रामीणों के अनुसार विधायक ने तीन माह के भीतर सड़क का सर्वे कराने और जल्द सड़क कटिंग का काम शुरू कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन समय बीतने के बाद भी गांव तक सड़क नहीं पहुंची. ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले गांव को सड़क सुविधा से नहीं जोड़ा गया तो वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव का बहिष्कार किया जाएगा. ग्रामीणों ने कहा कि चुनाव बहिष्कार की स्थिति में इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी.

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