हिंदूफोबिया के खिलाफ उठ रही अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर आवाजें
US Indian American Congressman Ro Khanna supports resolution condemning Hinduphobia and attacks on temples
हिंदूफोबिया और मंदिरों पर हमलों की निंदा का प्रस्ताव, भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने किया समर्थन 
अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक योगदान को मान्यता देने वाले प्रस्ताव का अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने भी किया। इसे डेमोक्रेट सांसद श्री थानेदार लाये थे। प्रस्ताव में हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ते पूर्वाग्रह, भेदभाव, घृणा अपराधों और मंदिरों पर हमलों की निंदा की गई है।
US Indian American Congressman Ro Khanna supports resolution condemning Hinduphobia and attacks on temples
अमेरिकी डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना
अमेरिका के एक प्रमुख सांसद ने प्रतिनिधि सभा के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें हिंदू-अमेरिकी समुदाय के देश की अर्थव्यवस्था में योगदान का सम्मान किया गया है। इसके साथ ही हिंदूफोबिया, हिंदू विरोधी पूर्वाग्रह और मंदिरों पर हमलों की निंदा की गई है। इस प्रस्ताव का समर्थन सोमवार को डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना ने किया। इसे मिशिगन से भारतीय मूल के डेमोक्रेट सांसद श्री थानेदार ने पेश किया था।
24 जनवरी 2025 को पेश किए गए इस प्रस्ताव को अब तक 32 सांसदों का समर्थन मिल चुका है। इनमें राजा कृष्णमूर्ति और सुहास सुब्रमण्यम भी शामिल हैं। कैलिफोर्निया का प्रतिनिधित्व करने वाले डेमोक्रेट सांसद रो खन्ना ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस प्रस्ताव के समर्थन की घोषणा की।
प्रस्ताव को लेकर क्या बोले रो खन्ना?
रो खन्ना ने अपनी पोस्ट में कहा, “मुझे सांसद श्री थानेदार के विधेयक H.Res.69 का सह-प्रायोजक बनने पर गर्व है। यह प्रस्ताव अमेरिका में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के निरंतर योगदान और उसकी जीवंत विविधता का सम्मान करता है, जबकि हम अपने देश के बहुजातीय लोकतंत्र को और मजबूत बनाने के लिए काम कर रहे हैं।”
प्रस्ताव में कहा गया है कि हिंदू धर्म दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है, जिसके 100 से अधिक देशों में 1.2 अरब से ज्यादा अनुयायी हैं। इसमें जिक्र किया गया है कि हिंदू धर्म विभिन्न परंपराओं और आस्था प्रणालियों का समूह है, जो स्वीकार्यता, पारस्परिक सम्मान और शांति जैसे सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा देता है।
अमेरिका ने 40 लाख से ज्यादा हिंदुओं का किया स्वागत
प्रस्ताव के अनुसार, 1900 के दशक से अमेरिका ने दुनिया भर से 40 लाख से अधिक हिंदुओं का स्वागत किया है, जो विभिन्न नस्लीय, भाषाई और जातीय पृष्ठभूमियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें कहा गया है कि हिंदू-अमेरिकियों के योगदान से अमेरिका को उसकी अर्थव्यवस्था और लगभग हर उद्योग क्षेत्र में लाभ मिला है।
प्रस्ताव में रेखांकित किया गया है कि हिंदू-अमेरिकियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और विभिन्न उद्योगों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। वहीं, हिंदू परंपराओं और प्रथाओं ने दर्शन, आयुर्वेद, कला, संगीत, नृत्य, फैशन, ध्यान, योग और सामुदायिक सेवा के माध्यम से अमेरिकी समाज को समृद्ध बनाया है।
हिंदूफोबिया समेत इन मामलों की निंदा
अमेरिका में बढ़ते हिंदूफोबिया, हिंदू विरोधी पूर्वाग्रह, नफरत और असहिष्णुता की निंदा करते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि सकारात्मक योगदान के बावजूद हिंदू-अमेरिकियों को उनकी विरासत और प्रतीकों को लेकर रूढ़िवादी धारणाओं तथा भ्रामक सूचनाओं का सामना करना पड़ता है। वे स्कूलों और कॉलेज परिसरों में उत्पीड़न, भेदभाव, घृणास्पद भाषण और पूर्वाग्रह से प्रेरित अपराधों का भी निशाना बनते हैं।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि महात्मा गांधी और उनकी शिक्षाओं का प्रभाव मार्टिन लूथर किंग जूनियर पर पड़ा था। किंग ने स्वीकार किया था कि हिंदू दर्शन से निकली अहिंसक सविनय अवज्ञा की शिक्षाओं ने अमेरिका के नागरिक अधिकार आंदोलन पर सकारात्मक प्रभाव डाला।
प्रस्ताव में किया गया नफरती अपराधों का जिक्र
संघीय जांच ब्यूरो (एफबीआई) की ‘हेट क्राइम्स स्टैटिस्टिक्स रिपोर्ट’ का हवाला देते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि मंदिरों और व्यक्तियों को निशाना बनाने वाले हिंदू विरोधी घृणा अपराधों में हर साल वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही अमेरिकी समाज में हिंदूफोबिया भी बढ़ रहा है।
प्रस्ताव में अमेरिका में हिंदुओं और हिंदू धर्म के ऐतिहासिक तथा निरंतर योगदान का सम्मान किया गया है। साथ ही अमेरिका की विविधता को समृद्ध बनाने में हिंदू संस्कृति की भूमिका को मान्यता दी गई है और हिंदू-अमेरिकियों के स्वागत के प्रति देश की प्रतिबद्धता दोहराई गई ।
US Georgia Assembly Passes Resolution Condemning Hinduphobia Making It First American State to Take Such Legislative Measure US Condemning Hinduphobia: ‘हिंदू धर्म ने सुधारा लाखों लोगों का जीवन…’, पहली बार 2023 में किसी अमेरिकी राज्य जॉर्जिया में पास हुआ ‘हिंदूफोबिया’ के खिलाफ प्रस्ताव
Condemning Hinduphobia: अमेरिका की जॉर्जिया असेंबली ने ‘हिंदूफोबिया’ (हिंदू धर्म के प्रति पूर्वाग्रह) की निंदा करने वाला एक प्रस्ताव पारित किया है. यह इस तरह का कानूनी उपाय करने वाला पहला अमेरिकी राज्य बन गया है.
हिंदूफोबिया और हिंदू विरोधी कट्टरता की निंदा करते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि हिंदू धर्म दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे पुराना धर्म है और दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में 1.2 अरब लोग यह धर्म मानते हैं. प्रस्ताव में कहा गया कि यह धर्म स्वीकार्यता, आपसी सम्मान और शांति के मूल्यों के साथ विविध परंपराओं और आस्था प्रणालियों को सम्मिलित करता है.
प्रस्ताव में क्या-क्या कहा गया?
प्रस्ताव को अटलांटा की फोरसाइथ काउंटी से जनप्रतिनिधि लॉरेन मैक्डोनल्ड और टॉड जोन्स ने पेश किया था. अटलांटा में बड़ी संख्या में हिंदू और भारतीय-अमेरिकी समुदाय के लोग रहते हैं. प्रस्ताव में कहा गया है कि अमेरिकी-हिंदू समुदाय का चिकित्सा, विज्ञान और इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, आतिथ्य, वित्त, शिक्षा, विनिर्माण, ऊर्जा और खुदरा व्यापार जैसे विविध क्षेत्रों में प्रमुख योगदान रहा है.
‘लाखों लोगों के जीवन को सुधारा’
इसमें कहा गया है कि योग, आयुर्वेद, ध्यान, भोजन, संगीत और कला के क्षेत्र में समुदाय के योगदान ने सांस्कृतिक ताने-बाने को समृद्ध किया है और इसे अमेरिकी समाज में व्यापक रूप से अपनाया गया है और इसने लाखों लोगों के जीवन को सुधारा है.
प्रस्ताव में कहा गया है कि बीते कुछ वर्षों में देश के कई हिस्सों में हिंदू-अमेरिकियों के खिलाफ नफरती अपराध के कई मामले दर्ज हुए हैं. प्रस्ताव के मुताबिक, कुछ ऐसे ‘‘शिक्षाविदों ने हिंदूफोबिया को भड़काया है जो हिंदू धर्म को नष्ट करने का समर्थन करते हैं और इसके पवित्र ग्रंथों और सांस्कृतिक प्रथाओं पर हिंसा और उत्पीड़न को बढ़ावा देने’’ का आरोप लगाते हैं.
कॉलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका ने की प्रस्ताव की अगुवाई
इस प्रस्ताव संबंधी कदम की अगुवाई ‘कॉलिशन ऑफ हिंदूज ऑफ नॉर्थ अमेरिका’ (COHNA) की अटलांटा इकाई ने की है. उसने 22 मार्च को ‘जॉर्जिया स्टेट कैपिटल’ में ‘हिंदू एडवोकेसी डे’ का आयोजन किया था. इसमें करीब 25 जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया था जिसमें रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी, दोनों के सदस्य शामिल थे.
सीओएचएनए के उपाध्यक्ष राजीव मेनन ने कहा, “मैकडॉनल्ड और जोन्स के साथ-साथ अन्य जन प्रतिनिधियों के साथ काम करना बड़े सम्मान की बात है जिन्होंने इस प्रस्ताव को पारित करने की पूरी प्रक्रिया में हमारा मार्गदर्शन किया.”
हिंदूफोबिया के खिलाफ उठती आवाज
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में
मिशिगन के सांसद श्री थानेदार ने हिंदूफोबिया के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसका 32 सांसदों ने समर्थन किया।
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में हिंदूफोबिया विरोधी प्रस्ताव पेश।
हिंदुओं के प्रति घृणा अपराधों को रोकने का लक्ष्य।
मिनेसोटा और जॉर्जिया में भी पहले आ चुके ऐसे प्रस्ताव।
बीते दिनों अमेरिका की प्रतिनिधि सभा में हिंदुओं के प्रति घृणा अपराध से जुड़ा एक प्रस्ताव पेश किया गया। यह प्रस्ताव मिशिगन से डेमोक्रेट सांसद श्री थानेदार ने पेश किया था। इस प्रस्ताव का रो खन्ना, राजा कृष्णमूर्ति और सुहास सुब्रमण्यम सहित 32 सांसद समर्थन कर चुके हैं। इससे पूर्व अमेरिका के मिनेसोटा प्रांत की सीनेट ने भी हिंदूफोबिया के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया था।
इस प्रस्ताव को यहां के 400 से अधिक कानून निर्माताओं ने अपने समर्थन से प्रस्तुत किया। इस कार्य के पीछे ‘कोलिशन आफ हिंदूज आफ नार्थ अमेरिकन’ (कोहना) नाम की एक संस्था का सफल प्रयास रहा।
इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य अमेरिका में रहने वाले हिंदू अमेरिकी और हिंदू धर्म, रीति-रिवाज और संस्कृति के खिलाफ चलाए जा रहे सुनियोजित कट्टर अभियानों को रोकना और हिंदू समुदाय के साथ होने वाले भेदभावों को ध्यान में रखकर ऐसा कृत्य करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। यह प्रस्ताव हिंदू समुदाय के खिलाफ बढ़ती कट्टरता और हिंदू पूजा स्थलों को क्षति पहुंचाने की घटनाओं के कारण लाया गया था।
अमेरिका में इस प्रकार का प्रस्ताव पहली बार नहीं लाया गया है। इससे पहले अमेरिका के जार्जिया प्रांत में भी अप्रैल 2023 में यहां की असेंबली ने एक प्रस्ताव पास किया था, जो हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती कट्टरता, घृणा और अत्याचार को रोकने के लिए एक औपचारिक मान्यता प्रदान करता है।
पिछले कई वर्षों में अमेरिका और यूरोप सहित पश्चिम के अनेक देशों में रहने वाले हिंदू समुदाय के प्रति कट्टरता और हिंसा में बढ़ोतरी हुई है। वहां के हिंदू समुदाय के लोगों के साथ कार्यस्थलों पर भेदभाव की घटनाएं सामने आती हैं। सूचना क्रांति के इस युग में भिन्न-भिन्न प्लेटफार्म्स पर हिंदू परंपराओं और मान्यताओं के खिलाफ सुनियोजित ढंग से एक प्रोपेगंडा फैलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य हिंदू समुदाय को नीचा दिखाना तथा उनके प्रति नकारात्मक और अपमानजनक दृष्टिकोण रखकर उन्हें हतोत्साहित करना है।
‘हिंदूफोबिया’ शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग 1866 में सर एडवर्ड सुल्लीवन ने किया। उन्होंने हिंदूफोबिया की चर्चा करते हुए हिंदुओं के प्रति होने वाले पूर्वाग्रहों और उनके प्रति अपमानजनक दृष्टिकोण को पेश किया था। प्रसिद्ध लेखक राजीव मल्होत्रा ने भी अपनी बहुचर्चित पुस्तक ‘स्नेक्स इन द गंगा: ब्रेकिंग इंडिया 2.0′ में वैश्विक स्तर पर एक विशेष विचारधारा के लोगों द्वारा भारत की सनातन संस्कृति और विरासत के खिलाफ चलाए जा रहे वैचारिक षड्यंत्र की ओर ध्यान आकर्षित कराया।
हाल के वर्षों में कई पश्चिमी देशों में हिंदू धर्म के अनेक अनुयायियों को निशाना बनाया गया है। इसलिए कई देशों की संसद में इस विषय से जुड़ी चिंताओं को प्रकट किया है। पिछले वर्ष स्काटलैंड की संसद में ‘हिंदूफोबिया इन स्काटलैंड’ नामक एक रिपोर्ट को प्रस्तुत किया गया था। इस रिपोर्ट को गांधीयन पीस कमेटी द्वारा तैयार किया गया था। यह रिपोर्ट बताती है कि स्काटलैंड में रहने वाले हिंदुओं के खिलाफ हिंसा और भेदभाव के मामले 2019 के बाद कई गुना बढ़ गए हैं। इस कारण यहां हिंदू समुदाय के लोग अपने परंपरागत परिधान पहनने से और अपनी पहचान सार्वजनिक करने से बचते हैं।
हिंदू धर्म और संस्कृति के प्रति घृणा को मुख्यधारा के अकादमिक जगत में भी व्यापक रूप से देखा जाता है, जिसमें कई विश्वविद्यालयों में हिंदू धर्म और हिंदू समुदाय के लोगों को अपमानित किया जाता है। इस संदर्भ में ब्रिटेन स्थित आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली छात्रा रश्मि सामंत का कटु अनुभव उल्लेखनीय है।
उन्होंने अपनी पुस्तक ‘ए हिंदू इन आक्सफोर्ड’ में लिखा कि इस विश्वविद्यालय में हिंदूफोबिया के कारण ही उन्हें छात्र संघ के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वह यह पद हासिल करने वाली पहली महिला भारतीय थीं। भारत का हिंदू दर्शन और चिंतन विश्व को एक परिवार के रूप में देखता है। यह हिंदू जीवन पद्धति ही है, जो संसार के सभी प्राणियों में एक ही चैतन्य के अस्तित्व का अनुभव करती है। हिंदू चिंतन सर्वसमावेशी होकर सभी के कल्याण और उत्थान की कामना करता है।
उन्नीसवीं सदी के महानतम लेखकों में से एक रूस के लियो टाल्स्टाय ने हिंदू धर्म और विचार की बड़ी प्रशंसा की। सुप्रसिद्ध नाटककार नोबेल पुरस्कार विजेता जार्ज बनार्ड शा ने हिंदू धर्म को विश्व के सबसे लचीले, सहिष्णु और समावेशी धर्म के रूप में देखा है। जर्मन मूल की प्रसिद्ध लेखिका मारिया विर्थ अपनी पुस्तक ‘थैंक यू इंडिया: ए जर्मन वूमेंस जर्नी टू विजडम आफ योग’ में भारत और इसकी सनातन संस्कृति का गुणगान करती हैं।
विश्व के कई देशों में हिंदू समुदाय के असंख्य लोग शांतिप्रिय ढंग से रह रहे हैं और अपने ज्ञान, मेधा तथा मेहनत से उस देश की उन्नति में अपना मूल्यवान योगदान सुनिश्चित कर रहे हैं। वे चिकित्सा, शिक्षा, तकनीक और राजनीति जैसे क्षेत्रों में भी अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। हिंदू चिंतन सार्वभौमिकता, मानवीयता और तर्कशीलता के गुणों के आधार पर समूचे विश्व के कल्याण की भावना के साथ विश्वबंधुत्व का संदेश देता है। विश्व को भी हमारी चिर पुरातन और नित-नूतन हिंदू परंपरा का सम्मान करना चाहिए।
(लेखक डॉक्टर आशीष त्रिपाठी दिल्ली विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर हैं)

