परंपरागत भोजन रही गेहूं की रोटियां,अब क्यों बन गई ‘विलेन’? और फ्रिज में रखा आटा?

परंपरागत भोजन रही गेहूं की रोटियां,अब क्यों बन गई ‘विलेन’?
ग्लूटेन, डायबिटीज और वेट लॉस के नाम पर लोग रोटी से दूरी बना रहे हैं. लेकिन क्या सचमुच गेहूं स्वास्थ्य को खराब हो गया है? डॉ. हंसाजी योगेंद्र ने इस पर अपनी राय दी है.
गेहूं की रोटी से डर क्यों? डॉक्टर ने बताया सच ( Screengrab/HansajiSocial)
एक समय था जब भारतीय घरों में रोटी सिर्फ खाना नहीं, बल्कि दैनिक जीवन का हिस्सा मानी जाती थी. पीढ़ियों तक लोगों ने गेहूं की रोटियां खाईं और उसी भोजन के सहारे खेतों से लेकर फैक्ट्री तक घंटों काम भी किया.लेकिन पिछले कुछ सालों में तस्वीर तेजी से बदली है.सोशल मीडिया पर अक्सर सुनते है कि ग्लूटेन छोड़ दो,रोटी मत खाओ,गेहूं डायबिटीज बढ़ाता है या वेट लॉस करना है तो सबसे पहले गेहूं बंद कर दो.

ऐसे में कईयों के मन में सवाल उठना तय है कि क्या सचमुच गेहूं अब सेहत को खराब हो गया है या फिर इसके पीछे कोई बड़ी गलतफहमी है? इसी पर योग एक्सपर्ट और वेलनेस गाइड डॉक्टर हंसाजी योगेंद्र ने विस्तार से बात की है.

क्या सचमुच गेहूं है समस्या? (Is Wheat Really the Problem?)
डॉक्टर हंसाजी के अनुसार, समस्या हमेशा गेहूं में नहीं होती. असली फर्क इस बात से पड़ता है कि आप गेहूं किस रूप में और कितनी मात्रा में खा रहे हैं. उनका कहना है कि आज लोग जिस गेहूं को दोष देते हैं, कई बार समस्या उससे ज्यादा मैदा, बेकरी प्रोडक्ट्स, पैकेज्ड स्नैक्स और दूसरे प्रोसेस्ड फूड्स से जुड़ी होती है. साबुत गेहूं और रिफाइंड मैदा को एक जैसा मान लेना सही नहीं है.

डॉक्टर हंसाजी बताती हैं कि साबुत गेहूं में फाइबर, विटामिन बी, आयरन, मैग्नीशियम और कई दूसरे पोषक तत्व पाए जाते हैं. फाइबर पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है, आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को सपोर्ट करता है और शरीर में शुगर के एब्जॉर्ब की रफ्तार को भी धीमा कर सकता है. यही वजह है कि संतुलित मात्रा में खाया गया साबुत गेहूं कई लोगों के लिए हेल्दी डाइट का हिस्सा हो सकता है.

डायबिटीज और मोटापे के लिए सिर्फ रोटी जिम्मेदार नहीं (The Real Reason Behind Rising Diabetes and Obesity)

हंसाजी का कहना है कि आज डायबिटीज, मोटापा, पीसीओएस और फैटी लिवर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन इसके लिए सिर्फ रोटी को दोष देना सही नहीं होगा. देर रात खाना, कम फिजिकल एक्टिविटी, जरूरत से ज्यादा भोजन करना, लगातार बैठे रहना और बढ़ता तनाव भी बड़ी वजहें हैं.

उनके अनुसार, जब प्रोसेस्ड फूड ज्यादा मात्रा में खाए जाते हैं और शरीर को पर्याप्त एक्टिविटी नहीं मिलती, तब कई स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है.

रोटी को दाल, सब्जी, दही या दूसरे प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों के साथ खाना बेहतर माना जाता है. थोड़ा घी भी नुकसानदायक नहीं है. वह सलाह देती हैं कि भोजन को अच्छी तरह चबाकर खाएं और खाने के बाद 10 से 15 मिनट की हल्की वॉक जरूर करें. उनके मुताबिक, ऐसी छोटी-छोटी आदतें पाचन को बेहतर बनाने में मदद कर सकती हैं.

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?(When Wheat May Not Be Right for You)
हंसाजी मानती हैं कि हर व्यक्ति की जरूरतें अलग होती हैं. जिन लोगों को ग्लूटेन से जुड़ी मेडिकल समस्या, जैसे सीलिएक डिजीज है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार गेहूं से परहेज करना चाहिए. सीलिएक डिजीज एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर ग्लूटेन को सहन नहीं कर पाता.

वहीं कुछ लोगों को ब्लोटिंग, पाचन संबंधी दिक्कत या गेहूं से जुड़ी संवेदनशीलता हो सकती है. ऐसे मामलों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. हालांकि बिना जांच और मेडिकल सलाह के सिर्फ ट्रेंड्स देखकर गेहूं छोड़ देना सही फैसला नहीं माना जा सकता.

दूसरे अनाजों को भी दें जगह (Why Experts Recommend Grain Rotation)
योग विशेषज्ञ हंसाजी सलाह देती हैं कि भोजन में सिर्फ एक ही अनाज पर निर्भर रहने के बजाय ज्वार, बाजरा और रागी जैसे दूसरे अनाजों को भी शामिल किया जाना चाहिए. इससे पोषण का संतुलन बेहतर हो सकता है और शरीर को अलग-अलग तरह के पोषक तत्व मिलते हैं.

कुल मिलाकर,सही मात्रा,सही तरीके और एक्टिव लाइफ स्टाइल के साथ खाया गया साबुत गेहूं शरीर को ऊर्जा और पोषण दे सकता है.उनका मानना है कि रोटी को दोष देने से पहले अपनी दिनचर्या,खानपान की आदतों और फिजिकल एक्टिविटी पर नजर डालना ज्यादा जरूरी है.

क्या आप भी फ्रिज में रखे हुए आटे की रोटी खाते हैं? जान लें कितनी देर बाद गूंथा आटा हो जाता है खराब

Fresh VS Stale Roti Nutrition: भागदौड़ भरी जिंदगी और समय की कमी के चलते आज के समय में ज्यादातर लोग आटा गूंथ कर फ्रिज में रख देते हैं. लेकिन क्या आप ये जानते हैं कि ये सेहत पर क्या असर डालता है. अगर नहीं, तो इस आर्टिकल को जरूर पढ़ें.

Stale Dough Side Effects: भारतीय घरों में रोटी हमारे मील का अहम हिस्सा है. लेकिन आज की भादौड़ भरी जिंदगी और समय की कमी के चलते हम एक बार में ज्यादा आटा गूंथ लेते हैं और उसे फ्रिज में स्टोर करके रख देते हैं. कई बार रात का बचा हुआ आटा सुबह इस्तेमाल कर लिया जाता है. क्या आप भी ऐसा ही करते हैं. अगर हां तो ये आर्टिकल आपके लिए ही है. तो चलिए जानते फ्रिज में रखें आटे यानि बासी आटे से बनी रोटियों का सेवन सेहत पर क्या असर डालता है.

फ्रिज में रखें आटे की रोटी खाने से सेहत पर क्या पड़ता है असर?
बासी आटे की रोटियां दिखने में शायद ठीक लगें, लेकिन पेट के अंदर जाकर ये कई मुश्किलें खड़ी कर सकती हैं.पेट में गैस- बासी आटे की रोटी पचने में भारी होती है. इसे खाने से पेट फूलने, गैस बनने और भारीपन की समस्या आम है.कब्ज- ताजा आटे के फाइबर और पोषक तत्व शरीर को फायदा पहुंचाते हैं, जबकि बासी आटे के पोषक तत्व खत्म होने लगते हैं, जिससे पाचन तंत्र बिगड़ सकता हैफूड पॉइजनिंग- अगर आटा काफी पुराना है, तो यह फूड पॉइजनिंग का कारण भी बन सकता है, जिससे उल्टी या दस्त की शिकायत हो सकती है.
क्या कहते हैं आयुर्वेद और विज्ञान?
आयुर्वेद में स्पष्ट कहा गया है कि भोजन हमेशा ताजा और गर्म ही करना चाहिए. गूंथा हुआ आटा ‘जीवित’ माना जाता है, लेकिन इसे रखने से इसमें ‘तामसिक’ गुण आ जाते हैं. वहीं, विज्ञान के नजरिए से देखें तो आटे को गीला छोड़ने पर उसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट्स टूटने लगते हैं, जिससे उसका पोषण कम हो जाता है.

फ्रिज में आटा रखने से पहले इन बातों का रखें ध्यान-
एयरटाइट कंटेनर- आटे को हमेशा ढक्कन वाले डिब्बे में रखें ताकि बाहरी हवा और बैक्टीरिया न लगें.तेल या घी- आटे के ऊपर हल्का सा तेल या घी लगा दें, इससे वह सूखेगा नहीं और पपड़ी नहीं जमेगी.8-10 घंटे- कोशिश करें कि आटा एक ही समय के अंतराल में खत्म हो जाए. इसे ज्यादा खींचना बीमारी को दावत दे सकता है.
आटे में कब पनपने लगते हैं बैक्टीरिया?
एक्सपर्ट की माने तो जैसे ही हम आटे में पानी मिलाते हैं, उसमें रासायनिक बदलाव (Chemical changes) शुरू हो जाते हैं. अगर आप आटे को गूंथकर किचन के स्लैब पर या फ्रिज में घंटों छोड़ देते हैं, तो उसमें फर्मेंटेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. सीधे शब्दों में कहें तो, हवा में मौजूद बैक्टीरिया और फंगस आटे को अपना घर बना लेते हैं. फ्रिज भले ही उसे ठंडा रखे, लेकिन वह इन बैक्टीरिया को पूरी तरह से रोक नहीं सकता. कई बार आपने देखा होगा कि फ्रिज में रखे आटे का रंग हल्का काला या मटमैला हो जाता है और उसमें से एक अजीब सी महक आने लगती है. यह इस बात का संकेत है कि आटा अब ताज़ा नहीं रहा.

(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी को है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी को हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. हम इस जानकारी की ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करते.)

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