‘सोचा,प्रोटेस्ट क्यों जाऊं,जब पढ़ाई कर बढ़ा सकता हूं स्कोर?’: NEET टॉपर पंशुल बंसल

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दादी की हुई थी कैंसर से मौत, NEET टॉपर आर्यन गुप्ता ने बताया आखिर क्यों बनना चाहते हैं डॉक्टर
Read In AppSuccess Story: दादी की हुई थी कैंसर से मौत, NEET टॉपर आर्यन गुप्ता ने बताया आखिर क्यों बनना चाहते हैं डॉक्टरSuccess Story: पंजाब के आर्यन गुप्ता ने NEET-UG एग्जाम में पहली रैंक हासिल की है. अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय उन्होंने परिवार और टीचरों को दिया है. आर्यन गुप्ता ने कहा, “मुझे नींद नहीं आती थी. रिजल्ट आने के बाद अब लग रहा है जैसे कोई सपना पूरा हो गया है।

आर्यन गुप्ता ने AIR 1 हासिल की है, 720 में से 715 नंबर पाए हैं.
पंजाब के आर्यन गुप्ता ने NEET-UG परीक्षा में टॉप किया है. आर्यन गुप्ता को जैसे ही पता चला कि NTA ने NEET-UG रिजल्ट जारी कर दिया है, तुरंत ही आर्यन ने NTA की वेबसाइट खोलकर अपना रिजल्ट चेक किया. रिजल्ट स्क्रीन पर आते ही, उनकी आंखें खुशी से झूम उठी. लुधियाना के आर्यन गुप्ता ने 99.9999 परसेंटाइल के साथ ऑल इंडिया रैंक (AIR) 1 हासिल की है. परिवार को जैसे ही ये खबर मिली, तो परिवार में खुशी की एक लहर सी दौड़ गई. आर्यन गुप्ता की इस कामयाबी का जश्न मनाया जाने लगा. अपनी इस सफलता पर आर्यन गुप्ता ने कहा कि, “मैंने AIR 1 हासिल की, 720 में से 715 नंबर पाए. मेरे माता-पिता डॉक्टर हैं. मैंने बहुत मेहनत की. मुझे नींद नहीं आती थी. लेकिन अब यह सब अविश्वसनीय लग रहा है. जैसे कोई सपना हो, सब खुश हैं”.

मैंने 16-17 घंटे पढ़ाई की
अपनी पढ़ाई का शेड्यूल बताते हुए आर्यन गुप्ता ने कहा, मैं दिन में 16-17 घंटे पढ़ते थे. आर्यन गुप्ता ने आगे कहा कि मैं ऑन्कोलॉजिस्ट बनना चाहता हूं. उन्होंने बताया कि “मेरी दादी की मौत कैंसर से हुई थी, तब मैं तीसरी क्लास में था. तभी मैंने यह संकल्प लिया था. ज़िंदगी में अभी बहुत कुछ करना है.”

सफलता का दिया मंत्र
नीट एग्जाम में पहली रैंक पाकर आर्यन गुप्ता ने अपने संकल्प को पूरा करने की दिशा में पहला कदम उठाया है. उन्होंने कहा कि अभी तो बस शुरुआत है, अभी काफी कुछ करना है. कॉलेज चुनना है. वही जो बच्चे NEET-UG की तैयारी कर रहे हैं. उनको सफलता का मंत्र देते हुए आर्यन गुप्ता ने कहा कि अपने शिक्षकों की बात सुने. उन्हें वर्षों का अनुभव होता है. ईमानदारी से मेहनत करो, आपको सफलता जरूर मिलेगी.

प्रोटेस्ट में क्यों जाऊं, जब पढ़ाई कर स्कोर बढ़ा सकता हूं?’: NEET सेकेंड टॉपर पंशुल बंसल

NEET परीक्षा निरस्त हुई, देशभर में प्रदर्शन शुरू हो गए, लेकिन पंशुल बंसल ने अलग रास्ता चुना. विरोध की जगह पढ़ाई पर ध्यान दिया और 706 से बढ़ाकर 715 अंक पा पूरे देश में AIR-2 रैंक प्राप्त कर ली.

NEET AIR-2 पंशुल बंसल का बड़ा बयान: ‘प्रदर्शन में जाने के बजाय पढ़ाई की’

NEET-UG 2026 परीक्षा निरस्त होने और पेपर लीक विवाद में देशभर में जहां विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बहस तेज रही, वहीं दिल्ली के छात्र पंशुल बंसल ने यह मुश्किल समय अपने लिए अवसर में बदल दिया. री-एग्जाम में ऑल इंडिया रैंक (AIR)-2 पाने वाले पंशुल बंसल ने एक बातचीत में कहा कि वो नेगेटिविटी से दूर रहे और पूरी एनर्जी पढ़ाई में लगाई. उन्होंने साफ कहा कि जब वो पढ़ाई कर सकते थे तो प्रदर्शन में शामिल क्यों होना था? इसी रणनीति का परिणाम रहा कि उन्होंने दोबारा हुई परीक्षा में 715 अंक प्राप्त किए और देश के दो टॉपर्स में अपनी जगह बनाई. पंशुल ने कहा कि शुरुआत में परीक्षा रद्द होने से उन्हें निराशा हुई थी, लेकिन कुछ घंटों बाद उन्होंने खुद को संभालकर बेहतर प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी.

री-एग्जाम में हासिल की ऑल इंडिया रैंक-2
नई दिल्ली के ग्रेटर कैलाश स्थित केआर मंगलम वर्ल्ड स्कूल के छात्र पंशुल बंसल ने NEET-UG 2026 की पुनर्परीक्षा में 99.9999 परसेंटाइल पा ऑल इंडिया रैंक-2 प्राप्त की. परीक्षा का परिणाम 16 जुलाई को घोषित किया गया था. पंशुल ने री-एग्जाम में 715 अंक हासिल किए, जो उनके पहले परीक्षा स्कोर से भी बेहतर था.

‘विरोध करने के बजाय पढ़ाई चुनी’
एक बातचीत में पंशुल बंसल ने कहा कि जब परीक्षा निरस्त होने के बाद देशभर में प्रदर्शन हो रहे थे, तब उन्होंने अलग रास्ता चुना. उन्होंने कहा, ” मैंने सोचा कि मुझे विरोध प्रदर्शन में क्यों जाना चाहिए? इसके बजाय मैं घर पर रहकर पढ़ाई कर सकता हूं, अपनी क्षमताओं को बेहतर बना सकता हूं और अपना स्कोर बढ़ा सकता हूं.” पंशुल का कहना है कि उन्होंने विरोध-प्रदर्शन में शामिल होने की बजाय अपनी तैयारी को और मजबूत करने पर ध्यान दिया.

पहले हुई थी निराशा
परीक्षा निरस्त होते समय अपनी मानसिक स्थिति याद करते हुए पंशुल ने कहा कि शुरुआत में उन्हें काफी दुख और निराशा हुई थी. उन्होंने कहा, ” शुरुआत में मुझे निराशा और दुख महसूस हुआ था. लेकिन एक-दो घंटे बाद मैंने इस स्थिति को सकारात्मक नजरिए से देखा और इस बार बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित और दृढ़ संकल्पित हो गया.” कुछ समय बाद उन्होंने स्थिति को सकारात्मक नजरिए से देखना शुरू किया और दोबारा परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन करने का लक्ष्य तय किया.

706 से बढ़कर पहुंचे 715 अंक तक
पंशुल ने बताया कि पहली परीक्षा में उनका स्कोर लगभग 706 अंक था, लेकिन पुनर्परीक्षा में उन्होंने इसे बढ़ाकर 715 अंक कर लिया. दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने अपनी तैयारी के तरीके में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया. उन्होंने कहा, ” मैंने अपनी दिनचर्या में कोई बदलाव नहीं किया. मैं पहले की तरह उसी रूटीन का पालन करता रहा. मुझे बस इतना लगा कि पिछले डेढ़ महीने में मुझे अपनी ओर से पूरी मेहनत करनी है और बाकी सब भगवान पर छोड़ देना है.”

निगेटिविटी से दूर रहने की कोशिश
पंशुल ने कहा कि जब परीक्षा निरस्त हुई तो उनके मन में यह सवाल जरूर आया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ, खासकर तब जब उन्हें भरोसा था कि उनका प्रदर्शन सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश दिलाने के लिए पर्याप्त था. लेकिन उन्होंने खुद को नकारात्मक सोच से दूर रखा. उन्होंने कहा, ” मैंने सोचा कि मैं अपने मन में नकारात्मकता क्यों लाऊं? मुझे सब कुछ भूलकर अपने मुख्य लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए. जो भी होगा, अच्छे के लिए ही होगा. एक बार परीक्षा खत्म हो जाएगी तो तनाव और चिंता भी समाप्त हो जाएगी.”

प्रदर्शनों पर टिप्पणी से किया इनकार
देशभर में NEET-UG पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में जब उनसे इस मुद्दे पर राय पूछी गई, तो उन्होंने कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, ” मैं इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहूंगा.”

ऐसा था पूरा मामला?
NEET-UG 2026 की मूल परीक्षा 3 मई को आयोजित हुई थी. बाद में पेपर लीक के आरोप सामने आने पर 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी गई. मामले की जांच फिलहाल CBI कर रही है. इसके बाद कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच 21 जून को पुनर्परीक्षा आयोजित की गई और 16 जुलाई को परिणाम घोषित किए गए. इस पूरे घटनाक्रम के बीच पंशुल बंसल की सफलता की कहानी चर्चा में है, क्योंकि उन्होंने विवाद और अनिश्चितता के माहौल में भी अपनी तैयारी पर फोकस बनाए रखा और देशभर में दूसरा स्थान पाया।

राजस्थान में गाड़िया लोहार का बेटा बनेगा डॉक्टर, बेटे की सफलता पर मां के छलक आए आंसू

NEET UG 2026 के रिजल्ट में गाड़िया लोहार परिवार के बेटे ने सफलता प्राप्त की है. गाड़िया लोहार परिवार से ताल्लुक रखने वाले सुनील का परिवार अभी भी घूमंतु जीवन जी रहा

घुमंतू गाड़िया लोहार परिवार के बेटे ने NEET में रचा इतिहास
पेपर लीक, फिर री-एग्जाम के बाद NEET UG 2026 का रिजल्ट जारी कर दिया गया है. इस बार हरियाणा के पांशुल बंसल और पंजाब के आर्यन गुप्ता ने 715 नंबर के साथ NEET UG 2026 के रिजल्ट में टॉप किया है. पांशुल और आर्यन को 720 में से 715 नंबर मिले हैं. इस रिजल्ट में राजस्थान के भी छात्रों का जलवा रहा है. NEET के रिजल्ट में टॉप 100 की लिस्ट में कोटा में रहकर मेडिकल एंट्रेस एग्जाम- NEET की तैयारी करने वाले 44 छात्रों जगह बनाई है, जबकि टॉप 10 में कोटा कोचिंग के 4 छात्र हैं. NEET UG 2026 के रिजल्ट में राजस्थान के रींगस के गाड़िया लोहार परिवार के बेटे ने भी कमाल किया है.

सुनील को NEET में मिली 5000वीं रैंक
NEET के रिजल्ट में सुनील गाड़िया लोहार ने 5000 वीं रैंक हासिल की है. बताया जा रहा है कि सुनील राजस्थान के पहले छात्र हैं जो गाड़िया लोहार परिवार से NEET UG की परीक्षा में सफल हुए हैं. उनका परिवार आज भी घुमंतू जीवन जी रहा है. गाड़िया लोहार समाज का इतिहास महाराणा प्रताप से जुड़ा हुआ है.

परिवार अभी भी घूमंतु जीव जीता
सुनील की इस सफलता से पूरे परिवार और रींगस शहर में खुशी की लहर है. उनके पिता भगवान सहाय ने बताया कि हर मुश्किल को पार कर सुनील ने ये साबित कर दिया कि लगन हो तो मंजिल जरूर मिलती है. पिता का कहना है कि हम लोग घुमंतू जीवन जीते हैं, लेकिन सुनील ने दिन-रात मेहनत की. आज वो पूरे समाज का नाम रोशन कर रहा है, समाज के हर बेटी और बेटे को पढ़ाना चाहिए.

बेटे की सफलता पर मां के छलक आए आंसू
गाड़िया लोहार समाज के लिए सुनील का नीट में सफल होना अपने-अपने में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. शहरवासी नगरपालिका के उपाध्यक्ष अमित शर्मा के नेतृत्व में लगातार सुनील को बधाई दे रहे हैं. सुनील की मां सीकरी देवी की आंखों में ख़ुशी के आंसू छलक रहे हैं, जिन्हें वह घूंघट के माध्यम से छुपाने का पूरा प्रयास कर रही है. सुनील के घर में आज भी सुविधाओं का अभाव है.

10 दिन में 3 एग्जाम क्रैक, NEET में सफल राजस्थान की डिंपल ने बना दिया ‘रिकॉर्ड’

NEET के रिजल्ट में जोधपुर की बेटी ने कमाल किया है. उसने बीते 10 दिन में 3 एग्जाम क्रैक किए

कहते हैं कि मंजिल उसी को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है. इस कहावत को जोधपुर की डिंपल खींची ने साबित कर दिया है. डिंपल ने बीते 10 दिनों में ही 3 कंपटीशन एग्जाम को क्रैक किया है और उनमें से एक NEET UG की परीक्षा है. खेल के मैदान में सिल्वर मेडल जीतने वाली डिंपल यादव ने एक के बाद एक लगातार तीन परीक्षा में अपनी सफलताओं के झंडे बुलंद किए हैं. नीट के रिजल्ट में 617 नंबर के साथ डिंपल की ऑल इंडिया 5609 रैंक आई है, जबकि उनकी कैटेगरी रैंक 577 है.

डिंपल अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं.एक बातचीत में डिंपल ने कहा कि आज मुझे जो सफलता मिली है, वह मेरे मम्मी पापा वजह से है. मुझे तैयारी के लिए जिस चीज की जरूरत होती थी, उसे समय पर उपलब्ध करवाया. उन्होंने मुझे पूरी तरह से सपोर्ट किया है. खेल के मैदान में अपनी सफलता को लेकर डिंपल ने बताया कि अगर आपमें लगन है तो पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी हो सकता है. रोप स्कीपिंग में मेरा नेशनल हुआ और रीजनल में मुझे सिल्वर मेडल मिला है, जबकि नेशनल में भी सिल्वर मेडल हासिल किया.

कितने घंटे पढ़तीं डिंपल?
डिंपल ने बताया कि मेरा डॉक्टरी को लेकर इंट्रेस्ट था, जिसकी तैयारी मैंने की और आज यह रिजल्ट आया है. परीक्षा में एक बार फेल हो जाने से निराश होने वाले छात्रों को डिंपल ने कहा कि सफलता एकदम से नहीं आती है. थोड़ा इंतजार करना पड़ता है. सफलता के लिए सबसे जरूरी है- धैर्य. डिंपल कंपीटन की तैयारी करने वाले छात्रों का सलाह देती हैं कि मोबाइल से थोड़ा दूर रहना चाहिए. हम भले ही सोचते हैं कि मोबाइल को हम कंट्रोल कर सकते हैं, पर मोबाइल असल में हम लोगों डिस्ट्रैक्ट करता है. डिंपल रोजाना 14-15 घंटे की पढ़ाई करतीं थीं.

3 साल से सिर्फ पढ़ाई पर फोकस
वह कहती हैं कि तीन साल से मैं कहीं बाहर नहीं गईं हूं, न किसी शादी में, न ही किसी फंक्शन में. मैं लगातार पढ़ाई ही करती थी. अब आगे मेडिकल की पढ़ाई करनी है. NEET UG 2026 के रिजल्ट के साथ डिंपल को बीते 10 दिन में 3 एग्जाम में सफलता मिली है. सबसे पहले डिंपल का राजस्थान यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंस (RUHS) का एंट्रेंस एग्जाम क्लियर हुआ.
RUHS में डिंपल के 85 नंबर आए. इसके बाद AIIMS के B.Sc. Nursing का एग्जाम निकला. एम्स नर्सिंग एंट्रेंस एग्जाम में डिंपल की ऑल इंडिया 379 वीं रैंक आई है. अब 617 नंबर के साथ डिंपल ने NEET UG 2026 की परीक्षा पास की है.
माता-पिता के सपने को साकार करेंगी डिंपल
अपनी बेटी डिंपल की सफलता पर मां ने कहा कि आज बच्ची की सफलता से बहुत ही खुश हूं,पापा का सपना था कि हमारे भी बच्चे डॉक्टर बने.एक बार डॉक्टर को देखती तो घर आकर कहती है कि अच्छे से पढ़ाई करो और आगे चलकर डॉक्टर बनो.आज मेरी NEET परीक्षा पास कर गई.आज डिंपल खींची उन हजारों विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं जो आज के समय में खेल और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाने में कठिनाई महसूस करते हैं.

डिंपल खींची  सिर्फ एक होनहार छात्रा ही नहीं एक खिलाड़ी  भी है. वह राष्ट्रीय स्तर की रोप स्पीकिंग खिलाड़ी भी हैं और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल की जीत चुकी हैं. उनकी इस सफलता के बाद उनके परिवार में भी खुशी है और परिवार और रिश्तेदार भी लगातार उनके घर पहुंचकर उन्हें शुभकामनाएं दे रहे हैं.

गांव का पहला डॉक्टर बनेगा AIR 4! NEET में नवादा के आयुष भालोटिया ने गाड़े झंडे

बिहार के आयुष भलोटिया ने ऑल इंडिया रैंक-4 हासिल की है, जिसके बाद अब वो अपने गांव से पहले डॉक्टर बनने जा रहे हैं. आयुष का सपना बचपन से ही डॉक्टर बनने का था.

NEET में बिहार के आयुष का जलवा
बिहार के नवादा जिले के वारिसलीगंज के रहने वाले आयुष भालोटिया ने NEET UG 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए देशभर में चौथा स्थान (AIR-4) हासिल किया है. 720 में से 713 अंक लाने वाले 18 वर्षीय आयुष की सफलता से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है. परिवार का कहना है कि आयुष उनके गांव के पहले डॉक्टर बनने जा रहे हैं, जिससे यह उपलब्धि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय बन गई है.

बचपन का सपना, अब सच के करीब
आयुष का सपना बचपन से ही डॉक्टर बनने का था. उनका कहना है कि वे चिकित्सा क्षेत्र में जाकर लोगों की सेवा करना चाहते हैं. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने स्कूली शिक्षा के दौरान ही मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी की दिशा तय कर ली थी.

बोर्ड परीक्षा में भी शीर्ष 
आयुष शुरू से ही पढ़ाई में उत्कृष्ट रहे. उन्होंने 10वीं बोर्ड परीक्षा में 96.2 प्रतिशत और 12वीं में 93.8 प्रतिशत अंक पाए. बोर्ड परीक्षा के बाद उन्होंने पूरी एकाग्रता से NEET की तैयारी शुरू की.

रिवीजन और मॉक टेस्ट बने सफलता की कुंजी
आयुष अपनी सफलता का रहस्य बताते हैं कि केवल पढ़ाई पर्याप्त नहीं होती, बल्कि नियमित रिवीजन और लगातार मॉक टेस्ट सबसे अधिक जरूरी है. हर टेस्ट के बाद वे अपनी गलतियों का विश्लेषण कर अगली परीक्षा में उन्हें दोहराने से बचने की कोशिश करते थे. यही रणनीति उन्हें लगातार बेहतर बनाती गई.
NCERT पर मजबूत पकड़ बनाई
आयुष का मानना है कि NEET की तैयारी में NCERT सबसे महत्वपूर्ण किताब है. उनके अनुसार, कई किताबें बदलने की बजाय NCERT को बार-बार पढ़ना और उसके प्रत्येक कॉन्सेप्ट को अच्छी तरह समझना ज्यादा प्रभावी रहता है.

क्लास के बाद रोज 7-8 घंटे स्वाध्याय 
आयुष पिछले दो वर्षों से एलन करियर इंस्टीट्यूट के नियमित क्लासरूम छात्र रहे. बताते हैं कि क्लास के बाद रोज 7 से 8 घंटे स्वाध्याय करते थे. हालांकि उनके अनुसार पढ़ाई के घंटों से ज्यादा उसकी गुणवत्ता अर्थपूर्ण है.

मानसिक दबाव से भी किया मुकाबला
NEET जैसी कठिन परीक्षा की तैयारी के दौरान कई बार मानसिक दबाव महसूस हुआ, लेकिन परिवार और शिक्षकों ने हर कदम पर उनका उत्साह बढ़ाया. आयुष कहते हैं कि कठिन समय में परिवार का भरोसा और शिक्षकों का मार्गदर्शन उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता रहा.

बड़े भाई से मिली प्रेरणा
आयुष अपनी सफलता का बड़ा श्रेय अपने बड़े भाई अर्पित भालोटिया को भी देते हैं. अर्पित आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई कर चुके हैं और वर्तमान में अमेरिका में पीएचडी कर रहे हैं. आयुष बताते हैं कि भाई ने उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ समय प्रबंधन, अनुशासन और परीक्षा के दौरान मानसिक संतुलन बनाए रखने की सीख दी.

माता-पिता का मिला पूरा सहयोग
आयुष के पिता सुनील कुमार भालोटिया सीमेंट और स्टील के व्यवसाय से जुड़े हैं, जबकि उनकी मां किरण देवी ने पूरे तैयारी काल में उनका मनोबल बनाए रखा. आयुष कहते हैं कि यह सफलता पूरे परिवार की सामूहिक मेहनत का परिणाम है.

शतरंज से दूर किया तनाव
लगातार पढ़ाई के बीच आयुष शतरंज खेलकर खुद को तरोताजा रखते थे. उनका मानना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए पढ़ाई के साथ कोई सकारात्मक हॉबी होना जरूरी है, जिससे तनाव कम होता है और एकाग्रता बढ़ती है. सोशल मीडिया व्हाट्सएप और टेलीग्राम से जरूर थे. लेकिन सोशल मीडिया ऊनपर हावी नहीं था.

छोटे शहर के छात्रों के लिए दिया संदेश
आयुष का कहना है कि सफलता स्थान नहीं, बल्कि मेहनत और सही दिशा पर निर्भर करती है. उनका मानना है कि छोटे शहर या गांव से आने वाले छात्र भी देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में शीर्ष स्थान हासिल कर सकते हैं. उन्होंने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि वे दूसरों से तुलना करने के बजाय अपनी तैयारी पर पूरा ध्यान दें और नियमित अभ्यास जारी रखें.

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