प्रियंका-राहुल
प्रियंका-राहुल गांधी का हंगामा, संसद की कार्यवाही से हटाए कैसे जाते हैं शब्द
Expunge: प्रियंका-राहुल गांधी ने किया खूब हंगामा, संसद की कार्यवाही से हटाए कैसे जाते हैं शब्द?
Parliament Proceedings Expunge: लोकसभा में पेपर लीक के खिलाफ पेश विधेयक पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अपनी बातें रखीं. लेकिन कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के भाषण चर्चा के केंद्र में आ गए. दोनों भाई-बहनों ने खूब हंगामा किया और कई सारी ऐसी बातें कहीं, जिन्हें विरोध के बीच सदन की कार्यवाही से हटाने यानी Expunge करने का निर्देश दिया गया. ये प्रक्रिया कैसे काम करती है?
Rahul and Priyanka Gandhi Speech Expunction: सावन के मौसम में भारत की राजनीति गरमाई हुई है. जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन और विरोध के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को आखिरकार इस्तीफा दे देना पड़ा. मानसून सत्र की शुरुआत से ही विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेर रखा था और अब इस्तीफे के बाद भी हंगामा जारी है. दरअसल लोकसभा में पेपर लीक के खिलाफ पेश विधेयक पर चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अपनी बातें रखीं. लेकिन कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के भाषण चर्चा के केंद्र में आ गए. दोनों भाई-बहनों ने खूब हंगामा किया और कई सारी ऐसी बातें कहीं, जिन्हें विरोध के बीच सदन की कार्यवाही से हटाने यानी Expunge करने का निर्देश दिया गया. ये प्रक्रिया कैसे काम करती है?
प्रियंका-राहुल गांधी का हंगामा, संसद की कार्यवाही से हटाए कैसे जाते हैं शब्द
संसदीय कार्यवाही से शब्द निकालना
संसद की कार्यवाही से भाषण या शब्द हटाने का क्या मतलब?
सदन के स्पीकर को अगर ऐसा लगता है कि किसी सदस्य की तरफ से की गई टिप्पणी संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं है तो वह उस खास हिस्से या शब्द को एक्सपंज करने का निर्देश दे सकते हैं. इसका मतलब होता है कि वह संसद की आधिकारिक कार्यवाही का हिस्सा नहीं माना जाएगा.
संसद में कौन-कौन से शब्द होते हैं ‘असंसदीय’? राहुल गांधी ने ऐसा क्या कहा?
संसद की कार्यवाही से किसी भाषण या शब्दों को हटाने की प्रक्रिया को एक्सपंक्शन (Expunction) कहा जाता है. लोकसभा में यह कार्रवाई नियम 380 और 381 के तहत की जाती है. वहीं राज्यसभा में नियम 261 और 262 के तहत अध्यक्ष या स्पीकर के विवेक से की जाती है.
नियम और अधिकार
लोकसभा नियम 380:
लोकसभा अध्यक्ष को यह शक्ति देता है कि यदि सदन की बहस में कोई अपमानजनक, अमर्यादित, असंसदीय या अशोभनीय शब्दों का प्रयोग किया जाए तो वे उन्हें कार्यवाही से हटाने का आदेश दे सकते हैं.
लोकसभा नियम 381:
इसमें हटाए गए हिस्से की जगह कागजी रिकॉर्ड में तारे के जैसा खास निशान यानी Asterisks लगा दिया जाता है और नीचे फुटनोट लिखा जाता है- पीठासीन अधिकारी के आदेशानुसार कार्यवाही से निकाला गया.
राज्यसभा नियम 261:
राज्यसभा के सभापति को सदन के रिकॉर्ड से ऐसे आपत्तिजनक शब्दों को हटाने के लिए समान अधिकार प्राप्त है.
हटाने की प्रक्रिया कैसे होती है?
रिपोर्टिंग सेक्शन की भूमिका:
बहस के दौरान यदि कोई सांसद आपत्तिजनक शब्द बोलता है तो संसद की रिपोर्टिंग/संपादन शाखा नियमावली और संदर्भ के आधार पर उन शब्दों को चिह्नित करके पीठासीन अधिकारी के पास सिफारिश भेजती है.
पीठासीन अधिकारी का निर्णय:
अध्यक्ष या सभापति पूरे संदर्भ और प्रसंग को देखकर यह तय करते हैं कि शब्द असंसदीय हैं या फिर नहीं. इसके बाद उन्हें रिकॉर्ड से हटाने का अंतिम आदेश देते हैं.
रिकॉर्ड से हटाया जाना:
यहां आदेश मिलने के बाद वे शब्द आधिकारिक लिखित रिकॉर्ड से हमेशा के लिए हटा दिए जाते हैं और मीडिया हाउस उन हटाए गए हिस्सों को रिपोर्ट या प्रसारित नहीं कर सकते हैं.
राहुल और प्रियंका का हंगामा
राहुल गांधी ने लोकसभा में ऐंटी पेपर लीक से जुड़े विधेयक पर चर्चा के दौरान छात्रों के आंदोलन का समर्थन किया. उन्होंने अपने भाषण के दौरान लोगों को अलग-अलग कैटिगरी में बांटते हुए अंधभक्त और इडियट जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया. ऐसे शब्दों पर सत्ता पक्ष ने कड़ी आपत्ति की।
इससे पहले प्रियंका गांधी ने धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफे के बाद सदन में आने पर स्वागत किए जाने को शर्मनाक करार दिया. उन्होंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारी छात्रों पर लाठी, आंसू गैस, पैलेट गन चलाने और महिलाओं से मारपीट की घटना पर नाराजगी जताई.
प्रियंका यहीं नहीं रूकीं, उन्होंने नए शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी की नियुक्ति पर भी सवाल खड़े करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने एक ऐसा नया शिक्षा मंत्री चुना है, जिन्होंने एक गर्भवती महिला के साथ रेप के दोषियों की रिहाई पर सहमति और खुशी भी जताई. उन्होंने इससे देश की महिलाओं को क्या संदेश दिया.
प्रियंका के इस बयान पर सदन में हंगामा मच गया. एक तरफ जहां प्रह्लाद जोशी ने आरोपों को खारिज करते हुए बयानों की पुष्टि करके बोलने की हिदायत दी और साथ ही पार्टी से निकाले जाने की मांग की. वहीं केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने चरित्र हनन करार देते हुए इस बयान को संसद के रिकॉर्ड से हटाए जाने की बात कही.
राहुल गांधी ने भी बहन प्रियंका की बातों का सपोर्ट करते हुए देश के नए शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी को सबसे घटिया किस्म का इंसान कहा. उन्होंने बलात्कारियों को बचाने वाला करार देते हुए जोशी के चयन पर प्रधानमंत्री के रवैये को अजीब और हैरान करने वाला बताया.
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि राहुल गांधी ने सदन में असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया है, जो संसदीय गरिमा के खिलाफ हैं.उन्होंने राहुल गांधी से माफी मांगने की भी मांग की. इसके बाद सदन में जोरदार हंगामा हुआ.राहुल गांधी ने जवाब में कहा कि उन्होंने यह शब्द किसी सांसद के लिए इस्तेमाल नहीं किया बल्कि अपने भाषण के संदर्भ में कहा था.
गोमूत्र विशेषज्ञ, स्टूपिड अंधभक्त… प्रियंका-राहुल गांधी ने तोड़ी मर्यादा, सदन को किस राह पर ले जा रहे भाई-बहन
पेपर लीक विधेयक पर लोकसभा में चर्चा के दौरान प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के बयानों पर जमकर हंगामा हुआ. सत्ता पक्ष ने विरोध जताया, जिससे सदन की कार्यवाही बाधित हुई. लेकिन, सवाल यह है कि दोनों भाई-बहन असंसदीय भाषा का इस्तेमाल कर आखिर क्या हासिल करना चाहते हैं.
पेपर लीक के खिलाफ पेश विधेयक पर लोकसभा में मंगलवार से चर्चा चल रही है. इस दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सांसदों ने अपनी-अपनी बातें रखीं. लेकिन चर्चा का केंद्र विधेयक से ज्यादा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के भाषण बन गए. मंगलवार को प्रियंका गांधी ने शिक्षा मंत्रालय संभाल रहे प्रह्लाद जोशी को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया. इसके बाद सदन में हंगामा हुआ और कार्यवाही कुछ समय के लिए बाधित भी हुई. अगले दिन राहुल गांधी ने बहस में हिस्सा लेते हुए सरकार पर तीखे राजनीतिक आरोप लगाए. अपने भाषण के दौरान उन्होंने अंधभक्त शब्द का इस्तेमाल किया. इसके अलावा उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि दिल्ली में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन के दौरान पैलेट गन चलाने का आदेश केंद्रीय गृह मंत्री ने दिया था. इन बयानों के बाद सत्ता पक्ष के सांसद अपनी सीटों पर खड़े हो गए और सदन में फिर जोरदार हंगामा दिखा।
लोकसभा में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के भाषणों पर जमकर हंगामा हुआ.
दरअसल, लोकतंत्र में सरकार की आलोचना विपक्ष का अधिकार ही नहीं, बल्कि उसकी जिम्मेदारी भी है. विपक्ष का काम सरकार से सवाल पूछना, उसकी नीतियों की समीक्षा करना और जनता की आवाज उठाना है. लेकिन संसद केवल राजनीतिक मंच नहीं है. यह देश की सर्वोच्च विधायी संस्था है, जहां शब्दों का चयन और बहस का स्तर दोनों ही लोकतांत्रिक परंपराओं को तय करते हैं.
यही वजह है कि संसद में इस्तेमाल होने वाली भाषा हमेशा चर्चा का विषय बनती है.व्यक्तिगत टिप्पणियां, व्यंग्यात्मक संबोधन या ऐसे शब्द,जो बहस को मुद्दे से भटका दें,अक्सर पूरे विमर्श को प्रभावित करते हैं. नतीजा यह होता है कि जिस विधेयक पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए,उससे ध्यान हटकर नेताओं के बयान सुर्खियां बन जाते हैं.
संसदीय परंपरा
इस पूरे घटनाक्रम में एक और बात ध्यान देने वाली रही. लोकसभा अध्यक्ष ने कई बार सदस्यों से आग्रह किया कि वे विधेयक के प्रावधानों पर अपनी बात रखें और चर्चा को उसी दायरे में रखें. संसदीय परंपरा भी यही कहती है कि बहस का केंद्र विधेयक, उसके प्रावधान और उसके संभावित प्रभाव होने चाहिए. लेकिन जब चर्चा का बड़ा हिस्सा राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप या व्यक्तिगत टिप्पणियों में बीत जाता है,तो मूल उद्देश्य पीछे छूट जाता है.पेपर लीक जैसे मुद्दे का सीधा संबंध देश के करोड़ों छात्रों और युवाओं से है.प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता,भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जैसे सवाल इस विधेयक के केंद्र में हैं. स्वाभाविक रूप से जनता भी यही उम्मीद करती है कि संसद में इन मुद्दों पर गंभीर और तथ्य आधारित बहस हो.
यह अपेक्षा केवल विपक्ष से ही नहीं,बल्कि सत्ता पक्ष से भी समान रूप से है.संसदीय लोकतंत्र की मजबूती इस बात पर निर्भर करती है कि असहमति कितनी सभ्य भाषा में व्यक्त की जाती है. तीखी आलोचना और कठोर सवाल लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्तिगत हमले और उत्तेजक शब्दावली बहस की गुणवत्ता को कमजोर कर सकते हैं. राहुल गांधी और प्रियंका गांधी कांग्रेस के सबसे प्रमुख चेहरों में हैं. उनके हर शब्द को राजनीतिक महत्व मिलता है और उनके भाषणों पर पूरे देश की नजर रहती है. ऐसे में उनसे यह अपेक्षा भी अधिक होती है कि वे अपनी बात तथ्यों, तर्कों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप रखें.
