मंदिर भूमि पर मुहर्रम झंडा,कांवड पर हमला,नेपाल में 3मरे,6 शहरों में कर्फ्यू
नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा से उबाल, छह से ज्यादा शहरों में कर्फ्यू, तीन की मौत
नेपाल के कई हिस्सों में हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़, पथराव और पुलिस के साथ झड़प की घटनाएं सामने आई हैं. इन घटनाओं के बाद कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं. कई जिलों में हालात को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने कर्फ्यू लागू किया.
सुनसरी में शुरू हुई हिंसा धीरे-धीरे अन्य शहरों तक फैल गई.
पंकज दास
काठमांडू,30 जुलाई 2026,नेपाल के सुनसरी में भड़की सांप्रदायिक हिंसा अब नेपाल के कई शहरों तक फैल चुकी है. पिछले चार दिनों में देश के अलग-अलग हिस्सों में हिंसा, आगजनी, तोड़फोड़, पथराव और पुलिस से झड़प की घटनाओं ने कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
हालात ऐसे बन गए कि कई जिलों में स्थानीय प्रशासन को कर्फ्यू लागू करना पड़ा, जबकि सेना को सड़कों से लेकर संवेदनशील इलाकों की निगरानी को हेलिकॉप्टरों के साथ मोर्चा संभालना पड़ा.
हिंसा में अब तक तीन लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गोली लगने सहित विभिन्न घटनाओं में घायल हुए हैं.
भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस ने गोली चलाई. फायरिंग में सुरक्षाकर्मियों समेत 12 से ज्यादा लोग घायल हो गए. काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार मृतक का नाम
ओम प्रकाश मेहता है.
प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने

घायलों में प्रदर्शनकारी, स्थानीय नागरिक और सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. कई स्थानों पर सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया है व दर्जनों वाहनों और दुकानों में आग लगा दी गई.
इस बीच, नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने सुनसरी जिले सहित आसपास के क्षेत्रों में हाल ही में उत्पन्न विषम परिस्थितियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सदियों से कायम सामाजिक और जातीय सौहार्द, सहिष्णुता, आपसी मेल-मिलाप, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता को बनाए रखने की अपील की है.
बता दें, प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार देवानगंज में बोलबम यात्रा के दौरान हिंदू श्रद्धालुओं और स्थानीय मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों के बीच विवाद हो गया.
स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगा कि मंदिर की सार्वजनिक भूमि पर मुहर्रम पर लगाये झंडा हटाने को लेकर पहले से विवाद चल रहा था और कई बार अनुरोध किए जाने के बावजूद झंडा नहीं हटा. इसी को लेकर दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए.
बताया जा रहा है कि रविवार की रात को जब बोलबम जाने को कांवड़ यात्रा की शुरुआत उसी मैदान से हो रही थी, तब अचानक ही कांवड़ियों पर हमला कर दिया गया.
विवाद बढ़ने के बाद स्थिति हिंसक हो गई. पथराव और झड़प की घटनाओं के बीच पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया.
सुनसरी में शुरू हुई हिंसा धीरे-धीरे अन्य शहरों तक फैल गई. अलग-अलग स्थानों पर सांप्रदायिक तनाव ने उग्र रूप लिया, जिसके बाद प्रशासन को एक के बाद एक कड़े कदम उठाने पड़े. कई शहरों में इंटरनेट सेवाओं पर निगरानी बढ़ाई गई, सुरक्षा बलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात की गईं और लोगों से घरों के भीतर रहने की अपील की गई.
स्थिति बिगड़ने पर प्रशासन ने इनरवा, जनकपुर, सिरहा, गोलबाजार, लहान सहित कई शहरों में कर्फ्यू लागू कर दिया. संवेदनशील इलाकों में पुलिस के साथ सशस्त्र पुलिस बल और नेपाली सेना को भी तैनात किया गया. कई स्थानों पर सेना ने फ्लैग मार्च किया, जबकि हवाई निगरानी के जरिए हालात पर नजर रखी गई.
लगातार फैलती हिंसा के बीच पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठ रहे हैं. कई स्थानों पर भीड़ पुलिस पर भारी पड़ती दिखाई दी, जिसके बाद हालात नियंत्रित करने के लिए सेना को आगे आना पड़ा. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हिंसा फैलाने वालों की पहचान कर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन विपक्ष और स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि शुरुआती चरण में प्रभावी कदम नहीं उठाए जाने से स्थिति और बिगड़ गई.
इस बीच प्रधानमंत्री बालेन शाह के नेतृत्व वाली सरकार विपक्ष के निशाने पर है. विपक्ष का कहना है कि सरकार जमीन पर हालात संभालने के बजाय लगातार बैठकों, समीक्षा और बयानबाजी तक सीमित रही. सरकार ने उच्चस्तरीय बैठकों का सिलसिला जारी रखते हुए शांति बनाए रखने की अपील की है और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है.
चार दिनों से जारी अशांति ने सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित किया है.बाजार बंद हैं,सार्वजनिक परिवहन प्रभावित है,शैक्षणिक संस्थान बंद हैं और हजारों लोग भय में अपने घरों में रहने को मजबूर हैं.व्यापारिक गतिविधियां भी ठप हैं,जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है.पूरे देश की नजर अब इस बात पर है कि सरकार और सुरक्षा एजेंसियां हालात को कितनी जल्दी सामान्य कर पाती हैं.
भारत सीमा पास नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा रोकी जा सकती थी? 3 साल पहले मिली थी चेतावनी
नेपाल के सुनसरी जिले में दो धार्मिक समुदायों में हिंसा के बाद तनाव चरम पर है. पुलिस फायरिंग में युवक की मौत ने स्थिति और नाजुक बना दी है।
भारत की सीमा से लगे नेपाल के इलाके में इस समय सांप्रदायिक हिंसा भड़की हुई है. नेपाल के सुनसरी जिले में कर्फ्यू लगाना पड़ा है. हिंसक भीड़ को कंट्रोल करने के लिए पुलिस ने यहां गोलीबारी कर दी है जिसमें 1 व्यक्ति की मौत हो गई है और कई लोग घायल हुए हैं. दो समुदायों के बीच तनाव इस स्तर के हैं कि नेपाल सेना यहां हेलीकॉप्टर से हवाई गश्त शुरू कर रही है और सुरक्षा बल इलाके में अपनी मौजूदगी बढ़ाए हुए हैं. दोनों समुदाय के धार्मिक नेता मिलकर शांति की अपील कर रहे हैं तो हर पार्टी भी संयम बनाए रखने की सीख दे रही हैं. ऐसे में एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जो दिखाती है कि अगर वहां कि पुरानी सरकार चाहती तो इस हिंसा को रोका जा सकता था.
रिपोर्ट में बड़ा अनावरण
काठमांडू पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल सीमा सुरक्षा और दंगा-रोधी बल,आर्म्ड पुलिस फोर्स (APF) ने तीन साल पहले सरकार को एक गुप्त रिपोर्ट सौंप चेताया था कि तराई इलाके में धार्मिक और जातीय बंटवारे की सुनियोजित कोशिशें हो रही हैं.रिपोर्ट में तुरंत राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तक्षेप को कहा गया था ,लेकिन अधिकारियों का कहना है कि तब देश संभालते नेताओं ने इसकी बातों पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया.
तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और गृहमंत्री रमेश लेखक को सौंपी गई रिपोर्ट में सरकार से पंथ और जातीय आधारित संगठनों पर कड़ी नज़र रखने को कहा गया था.इसमें आरोप था कि तराई में मौजूद कुछ मुस्लिम और हिंदू समूहों को देश और विदेश के गैर-सरकारी संगठनों से मदद मिलती थी.
रिपोर्ट के जानकार APF के एक सीनियर अधिकारी ने काठमांडू पोस्ट को बताया कि इस फोर्स ने राजनीतिक नेतृत्व को सांप्रदायिक ध्रुवीकरण से पैदा खतरों के बारे में बार-बार जानकारी दी थी, लेकिन उनकी संस्तुतियों की उपेक्षा हुई.
APF ने नेपाल के तराई क्षेत्र में मजहब और जाति के नाम पर भड़काने वाले चरमपंथी समूहों की बढ़ती कोशिशें पहचानी थी. इसमें चेतावनी दी गई थी कि नेपाल को दक्षिण एशिया में दूसरी जगहों पर हुई पंथक हिंसा से सबक लेकर विवादों को बड़े पैमाने पर अशांति में बदलने से पहले ही सुलझा लेना चाहिए. रिपोर्ट में कथित तौर पर कहा गया था कि नेपाल को भारत के मणिपुर में हुई हिंसा के साथ-साथ अलग-अलग देशों में जातीय, पंथ और भाषाई संघर्षों से हुए जान-माल के नुकसान से सीखना चाहिए और जातीय व पंथ विवाद समय रहते सुलझाना चाहिए.
रिपोर्ट जब तैयार हुई, तब भारत के मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदायों में हिंसक झड़पें हो रही थीं.


