पेपर लीक से डेटा लीक तक… प्रश्नों में है टेलीग्राम, 9 देश में बैन,भारत क्यों कड़क?
पेपर लीक से डेटा लीक तक… प्रश्नों में है टेलीग्राम, 9 देश में प्रतिबंध, भारत क्यों हुआ कठोर
भारत से पहले कई अन्य देश भी Telegram पर आंशिक रूप से प्रतिबंध लगा चुके हैं. वहीं दुनिया के कुछ देश ऐसे भी हैं, जहां पर ये क्लाउड बेस्ड इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप पूरी तरह से बैन है ।
Telegram और उससे जुड़े विवाद
टेलीग्राम एक बार फिर सवालों के घरे में है. इस बार मामला भारत से जुड़ा है. नीट के 21 जून को होने वाले री-एग्जाम से पहले सरकार ने 22 जून तक टेलीग्राम पर अस्थायी रोक लगा दी है. वहीं 30 जून तक टेलीग्राम को पुराने मैसेज एडिट करने का फीचर को बंद रखने का निर्देश दिया गया है. सरकार ने ये कदम परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सावधानी बरतने के लिहाज से उठाया है. NTA ने भी सरकार के इस कदम का स्वागत किया है. हालांकि Telegram के सीईओ इस पाबंदी से खुश नहीं हैं. बता दें कि भारत पहला देश नहीं है, जिसने टेलीग्राम पर रोक लगाई है. इससे पहले दुनिया के कई देश टेलीग्राम पर पूर्ण या आंशिक रोक लगा चुके हैं. डिटेल में जानें सबकुछ.
Telegram पर रोक की वजह
Telegram का नाम साइबर फ्रॉड, ऑनलाइन फ्रॉड और पेपर लीक के मामलों में अक्सर सामने आता रहा है.भारत ही नहीं केन्या ने भी एग्जाम के दौरान इस पर कुछ हफ्तों की रोक लगाई थी. इसके पीछे कई टेक्निकल वजहें जिम्मेदार है. जैसे इस पर अकाउंट बनाना आसान है. वहीं हजारों लोगों वाले बड़े ग्रुप और चैनल आसानी से बनाए जा सकते हैं. बॉट्स और ऑटोमेशन जैसी सुविधाओं की वजह से ठग बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचने के लिए Telegram का इस्तेमाल करते हैं. इसके एडिट फीचर की वजह से पुराने मैसेज एडिट करना आसान होता है. ठग इस सुविधा का गलत इस्तेमाल करते हैं.
Telegram के विवादों में रहने का कारण?
सरकारों को यूजर्स का डेटा शेयर न करना, मतलब प्राइवेट चैट्स सिक्योरजिन देशों में फ्रीडम ऑफ स्पीच नहीं वहां ये प्लेटफॉर्म विरोधियों की एकजुटता के लिए बड़ा मंचपब्लिक ग्रुप और चैनल्स पर कंपनी की निगरानी कम, गैरकानूनी गतिविधियां होना आसान टेलीग्राम स्थानीय नियमों को नहीं मानता
Telegram ऐप क्या है?![]()
टेलीग्राम एक क्लाउड बेस्ड इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप है. इसका मुख्य काम वैसा ही है जासा वॉट्सऐप, वीचैट या लाइन या वाइबर करते हैं. इस ऐप को 2013 में रूस के पावेल और निकोलाई डुरोव ने बनाया था. इसका हेडॉफिस वर्तमान में दुबई में है. टेलीग्राम के दुनियाभर में करीब 1 अरब से ज्यादा यूजर्स हैं. इस ऐप का अलग-अलग डिवाइसों पर आसानी से एक्सेस किया जा सकता है.
किन देशों में बैन है Telegram?
सिक्योरिटी और सरकार के नियम न मानने जैसी कई वजहें हैं कि टेलीग्राम दुनिया के कई देशों में आंशिक या फिर पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है. अब भारत में इस पर अस्थाई रोक लगाई गई है.
- नेपाल- 18 जुलाई 2025 से बैन
रूस-अप्रैल 2026 से बैन
चीन-2025 से बैन
पाकिस्तान- नवंबर 2017 से बैन
थाईलैंड- अक्टूबर 2020 से बैन
क्यूबा- जुलाई 2021 से बैन
ईरान-1 मई 2028 से बैन
वियतनाम- 21 मई 2025 से बैन - सोमालिया-अगल्त 2023 से बैन
भारत की तरह ही कुछ अन्य देश भी हैं जहां पर टेलीग्राम पूरी पर से प्रतिबंधित नहीं है. लेकिन कुछ चिंताओं के चलते इस पर कुछ समय के लिए प्रतिबंध लगा था या फिर कुछ खास तरह के नियम और शर्तों के साथ ये चल रहा है.
फ्रांस: डेटा सिक्योरिटी की वजह से सरकारी मंत्रियों और कर्मचारियों के लिए 2023 से बैन
ब्राजील-2022-2023 में कुछ दिनों के लिए सस्पेंड किया गया था. वजह थी फेक न्यूज मामले में सहयोग न करना
अजरबैजान– 2020 में युद्ध के समय कुछ दिनों के लिए लगा था प्रतिबंध
जर्मनी और चेक गणराज्य– हेट स्पीच और रूसी प्रोपेगेंडा स्प्रैड करने वाले कुछ खास टेलीग्राम चैनल ब्लॉक हैं
केन्या– नवंबर 2023 और नवंबर 2024 में नेशनल एग्जाम्स के दौरान लीक और नकल पर रोक के लिए कुछ हफ्तों के लिए लगी थी अस्थाई रोक
भारत ने Telegram पर क्यों लगाई रोक?
भारत ने टेलीग्राम पर अस्थाई रोक का फैसला नीट पेपर लीक के बाद रीएग्जाम से पहले लिया है. NTA ने साफ किया कि ये कदम किसी नए पेपर लीक की वजह से नहीं बल्कि एग्जाम से जुड़े फर्जी मैसेज और भ्रामक दावों की वजह से अभ्यर्थियों में भ्रम और मानसिक तनाव पैदा न हो इसलिए उठाया गया है.
टेलीग्राम बैन पर CEO ने कहा – 15 करोड़ यूजर्स को क्यों मिल रही है सजा
क्या टेलीग्राम पर लगा बैन सिर्फ पेपर लीक रोकने के लिए है या इसके पीछे कोई और बड़ी वजह छिपी है? CEO के बयान ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं.
भारत सरकार ने सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम को 22 जून 2026 तक टेम्पररी बैन कर दिया है. इस बैन की मांग नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने की थी. NTA का कहना है कि इससे पेपर लीक को लेकर फैलाए जा रहे फेक मैसेज कम होंगे. NEET UG की एग्जाम 21 जून 2026 को है.
NTA के हेड के मुताबिक कोई नया पेपर लीक मामला सामने नहीं आया था, लेकिन सोशल मीडिया पर फैल रहे फर्जी मैसेज से स्टूडेंट्स में तनाव बढ़ रहा था. गूगल ने भारत में अपने प्ले स्टोर से टेलीग्राम को हटा दिया है और एप्पल भी जल्द ऐसा कर सकता है.
बैन के बाद टेलीग्राम के CEO का बड़ा बयान
टेलीग्राम के फाउंडर और CEO पावेल दुरोव ने भारत सरकार के इस फैसले पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि इस बैन की वजह से 15 करोड़ रेगुलर यूजर्स को सजा मिल रही है, जबकि एक्शन उन लोगों पर हो जो पेपर लीक की जानकारी फैला रहे हैं.
उन्होंने यह भी कहा कि इस बैन का ज्यादा मतलब नहीं बनता, क्योंकि जो लोग पेपर लीक करना चाहते हैं, वे दूसरे ऐप्स का भी इस्तेमाल कर सकते हैं.
इस पूरे बयान से साफ है कि पावेल दुरोव भारत सरकार के इस फैसले से खुश नहीं हैं. उनका कहना है कि पेपर लीक करने वाले लोग दूसरे प्लेटफॉर्म का भी सहारा ले सकते हैं.
जानिए पेपर लीक के मामले सामने आने के बाद टेलीग्राम ने क्या एक्शन लिया था
NEET UG पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद टेलीग्राम ने भारत सरकार के साथ पूरा सहयोग किया था. कंपनी ने ऐसे कई चैनल और ग्रुप हटाए थे जो पेपर लीक से जुड़ी जानकारी शेयर कर रहे थे.
पिछले कुछ हफ्तों में इस एक्शन की मदद से कई ऐसे ग्रुप भी सामने आए थे जो फर्जी पेपर लीक रैकेट चला रहे थे.
जानिए NTA ने यह कदम क्यों उठाया
NTA के मुताबिक टेलीग्राम को करीब एक महीने तक मॉनिटर किया गया. इस दौरान पता चला कि टेलीग्राम पर अभी भी Paper Leak NEET जैसे चैनल बनाए जा रहे थे, जिससे स्टूडेंट्स के बीच डर का माहौल बन रहा था.
साथ ही एग्जाम के समय कई पेपर लीक माफिया टेलीग्राम पर एक्टिव रहते हैं और अपने रैकेट चलाते हैं. एजेंसी को आशंका थी कि पेपर लीक की कोशिश हो सकती है, इसलिए NTA को यह कदम उठाना पड़ा.

