अंकिता हत्याकांड:दिल्ली HC से राहत,सोशल मीडिया से हटेंगें दुष्यंत गौतम के सभी वीडियो

अंकिता हत्याकांड: दुष्यंत गौतम को बड़ी राहत, दिल्ली HC ने सोशल मीडिया से सभी वीडियो हटाने को कहा
दुष्यंत गौतम ने याचिका दायर कर मांग की थी कि अंकिता भंडारी मामले से उनका नाम जोड़े जाने वाले कंटेंट को हटाया जाए.
नई दिल्ली 07 जनवरी 2026 : दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तराखंड में 2022 के चर्चित अंकिता भंडारी मामले में सोशल मीडिया पर चल रहे भाजपा नेता दुष्यंत गौतम के नाम वाले कंटेंट को 24 घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया है.हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया आरोपों को मानहानि का मामला मानते हुए कांग्रेस, आम आदमी पार्टी (AAP) समेत अन्य सोशल मीडिया हैंडल्स को दुष्यंत कुमार गौतम से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट 24 घंटे में हटाने को कहा है। हाई कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अगर आगे भी दुष्यंत गौतम का नाम इस मामले से जोड़कर उछाला गया तो संबंधित पक्षों को इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

हाई कोर्ट का आया आदेश
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कांग्रेस, आप और अन्य प्रतिवादियों को अंकिता भंडारी हत्याकांड में दुष्यंत गौतम को कथित वीआईपी बताए जाने से संबंधित किसी भी प्रकार की सामग्री को प्रकाशित या प्रसारित करने से रोक दिया है। साथ ही, कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से ऐसे सभी पोस्ट और वीडियो तत्काल हटाने के निर्देश दिए हैं। हाई कोर्ट ने कहा कि इस मामले में बैलेंस ऑफ कन्वीनियंस वादी के पक्ष में है, जिससे उन्हें अंतरिम राहत दी जा रही है।

जस्टिस मिनी पुष्करणा की बेंच ने कहा कि अगर दुष्यंत गौतम के नाम वाले वीडियो और कंटेंट 24 घंटे के भीतर नहीं हटाए जाते हैं तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म खुद उसे हटा दें. कोर्ट ने कहा कि अगर ऐसे ही कंटेंट दोबारा अपलोड किए जाते हैं तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इसकी सूचना याचिकाकर्ता को दें ताकि वे जरुरी कदम उठा सकें.

सुनवाई में दुष्यंत गौतम के वकील गौरव भाटिया ने कहा कि वीडियो डालकर याचिकाकर्ता का नाम बदनाम करने की कोशिश की जा रही है. बदनाम करने में राजनीतिक दलों के अकाउंट भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि अंकिता भंडारी मामले में याचिकाकर्ता का कभी भी नाम सामने नहीं आया. इस मामले में ट्रायल कोर्ट फैसला भी सुना चुकी है. भाटिया ने कहा कि याचिकाकर्ता पिछले पांच सालों से राजनीति कर रहे हैं और उन्हें इस वीडियो  से काफी बदनामी झेलनी पड़ रही है. अब तक हुई बदनामी की भरपाई नहीं की जा सकती है.

दुष्यंत गौतम ने याचिका दायर कर मांग की थी कि अंकिता भंडारी मामले से उनका नाम जोड़े जाने वाले कंटेंट हटाया जाए. दुष्यंत गौतम ने याचिका में कहा था कि 24 दिसंबर 2025 को सोशल मीडिया पर उनकी मानहानि करने वाला वीडियो अपलोड किया गया जो वायरल हो गया. इस वीडियो में झूठे तरीके से एक नैरेटिव तैयार किया गया और दुष्यंत गौतम को उस घटना से जोड़कर बदनाम करने की कोशिश की गई। याचिका में कहा गया था कि इस मामले की जांच के दौरान जांच एजेंसियों ने कभी भी उनका नाम नहीं लिया.

याचिका में कहा गया था कि अंकिता भंडारी मामले में जो अभियान चलाया जा रहा है वो फेक न्यूज की श्रेणी में आता है. इस अभियान के जरिये राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश की जा रही है।

हाई कोर्ट की कठोर टिप्पणी
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि बिना किसी ठोस आधार के किसी व्यक्ति का नाम गंभीर आपराधिक मामले से जोड़ना उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे मामले मानहानि की परिधि में आते हैं। हाई कोर्ट ने संकेत दिया कि आदेश की अवहेलना करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

दिल्ली हाई कोर्ट में रखा पक्ष
भाजपा नेता दुष्यंत कुमार ने इस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट में अपना पक्ष जोरदार तरीके से रखा। उनकी तरफ से सीनियर एडवोकेट गौरव भाटिया, एडवोकेट राघव अवस्थी और सिमरन बरार पेश हुए। मामले को उठाते हुए गौरव भाटिया ने कहा कि एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी ने, जिसके लाखों फॉलोअर्स हैं, हमारी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया है। इसके लिए मैंने 2 करोड़ रुपया क्षतिपूर्ति मांगी  है। साथ ही, कुछ अंतरिम राहत मांगी है। गौरव भाटिया ने वादी की पहचान को बताते हुए कहा कि दुष्यंत गौतम करीब पांच दशकों से राजनीति में सक्रिय हैं। वह पूर्व सांसद और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं।

गौरव भाटिया ने वादी पर लगाए जा रहे आरोपों का जिक्र कोर्ट में किया। उन्होंने कहा कि हमारे क्लाइंट पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। एक युवा लड़की को वीआईपी सर्विस देने को कहा जाना और मना करने पर वादी एवं अन्य लोगों द्वारा हत्या किए जाने की बात कही जा रही है। वह हमें रेपिस्ट कह रहे हैं। सीनियर वकील ने कहा कि उर्मिला नाम की महिला का ऐसे आरोप लगाना एक बात है। एक राष्ट्रीय पार्टी का मामले में प्रेस कॉन्फ्रेंस और बिना किसी सबूत के वादी का नाम मामले से जोड़ना मानहानि का मामला बनता है।

इंस्टाग्राम रील की चर्चा
कोर्ट में एक इंस्टाग्राम रील की ओर ध्यान दिलाते हुए सीनियर वकील गौरव भाटिया ने कहा कि यह सामग्री अभी भी वहीं है। लाखों लोगों ने देखा, हजारों लोगों ने शेयर किया है। प्रतिवादी नंबर 1 उर्मिला के खिलाफ 9 आपराधिक मामले दर्ज हैं। प्रतिवादी-3 कांग्रेस पार्टी है। उन्होंने कहा कि 10 हजार फॉलोअर्स वाला एक व्यक्ति भी नुकसान पहुंचा सकता है। लेकिन, नुकसान वैसा नहीं होता जैसा एक राष्ट्रीय राजनीतिक पार्टी करती है जिसके लाखों फॉलोअर्स और अपनी सोशल मीडिया एवं कानूनी टीम होती है।

सीनियर वकील ने कहा कि यह सोशल मीडिया की दुनिया है, एक घंटे के अंदर लाखों व्यूज हो जाते हैं। कांग्रेस एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रही है और फिर उस प्रेस कॉन्फ्रेंस को अपने फेसबुक और यूट्यूब चैनलों पर शेयर कर रही है। उनके इंस्टाग्राम पर ही 11.4 मिलियन फॉलोअर्स हैं। वहां वीडियो मौजूद हैं। यह बिना किसी आधार या प्रमाण के हमारी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहा है। अगर उनके पास कोई प्रमाण होता तो वे अधिकारियों के पास शिकायत लिखा सकते थे।

कोर्ट ने किया सवाल
कोर्ट ने भाजपा नेता से सवाल किया कि क्या आपका नाम अंकिता भंडारी मामले में किसी पुलिस केस में नहीं आया है? इस पर सीनियर वकील ने कहा कि किसी भी केस में हमारा नाम नहीं है। यह हमारी छवि खराब करके राजनीतिक फायदा उठाने के अलावा और कुछ नहीं है। हमने कांग्रेस की ओर से पोस्ट की गई सभी रील्स और सोशल मीडिया की एक सूची दी है। इनको कोर्ट से हटाने की मांग दुष्यंत गौतम की ओर से की गई।

वकील ने कोर्ट से कहा कि हमारी प्रार्थना है कि इसे और इंटरनेट पर प्रॉक्सी हैंडल के जरिए पोस्ट किए गए ऐसे किसी भी दूसरे मटेरियल को तुरंत हटाया जाए। इसके अलावा आपा के भी पोस्ट का जिक्र उन्होंने किया। कोर्ट ने इन्हें 24 घंटे के भीतर सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटाने का आदेश दिया है। याचिका में कांग्रेस, आम आदमी पार्टी समेत कुल 12 लोग और संगठन प्रतिवादी बनाये गये थे।

बता दें कि अंकिता भंडारी मामले में ताजा वीडियो को लेकर उत्तराखंड पुलिस ने उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के खिलाफ दुष्प्रचार का आरोप लगाते हुए कई एफआईआर दर्ज किया है.

बता दें कि सितंबर 2022 में उत्तराखंड के एक रिजॉर्ट में 19 वर्षीया रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की हत्या हो गई थी. आरोप है कि अंकिता भंडारी पर रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य ने एक मेहमान के साथ यौन संबंध बनाने को दबाव बनाया गया। पुलकित आर्य का पिता पूर्व भाजपा नेता था. अंकिता भंडारी का शव एक नहर से मिला था. ट्रायल कोर्ट ने पुलकित आर्य और दो अन्य को इस मामले में आजीवन कारावास सुनाया था.

भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की कथित पत्नी उर्मिला सनावर पत्नी ने आरोप लगाया कि अंकिता भंडारी पर भाजपा के बड़े नेता के साथ यौन संबंध बनाने का दबाव था. सनावर के वीडियो क्लिप में कहा गया है कि सुरेश राठौर ने ये सुना था कि भाजपा का वो बड़ा नेता दुष्यंत गौतम थे. बाद में राठौर ने कहा कि वो वीडियो क्लिप एआई से तैयार किया गया था जो भाजपा को बदनाम करने को जारी किया गया.

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