चुनाव आयोग का सुको में शपथ-पत्र, कहा- SIR पर ज्ञानेश कुमार के SIR निर्णय सर्वसम्मत
चुनाव आयोग का सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा, कहा- SIR पर ज्ञानेश कुमार ने सर्वसम्मति से लिए फैसले
SIR प्रक्रिया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर उठे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया है. आयोग ने अपने जवाब में कई अहम दावों पर सफाई दी है.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार.
नई दिल्ली,26 अक्टूबर 2026,वोटर लिस्ट की जांच यानी SIR को लेकर उठते सवालों के बीच चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है.आयोग ने शपथपत्र दे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अकेले फैसले लेने के आरोप निरस्त किये हैं.आयोग का कहना है कि SIR से जुड़े तीनों आदेश सभी सदस्यों की सहमति से जारी हुए थे.साथ ही,फॉर्म 6 में बदलाव के आरोपों पर भी स्पष्टीकरण है. आयोग ने यह भी बताया कि फाइल पर किसी अधिकारी की टिप्पणी या सुझाव आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता.
चुनाव आयोग के अनुसार,जून 2025,अक्टूबर 2025 और मई 2026 में SIR को लेकर जारी तीनों आदेश आयोग ने सर्वसम्मति से लिए थे.शपथपत्र ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों का है.
आयोग ने कहा कि फाइल पर चर्चा में किसी आयुक्त की टिप्पणी,सवाल या सुझाव आयोग का फैसला नहीं माना जा सकता.फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त,फिर दूसरे आयुक्त और आखिर में मुख्य चुनाव आयुक्त के पास जाती है.जरूरी मामलों में इलेक्ट्रॉनिक तरीके से मंजूरी ली जाती है.बाद में इसे फाइल पर अंकित किया जाता है.
इस बीच,आयोग ने 28 जुलाई के एक आदेश का भी उल्लेख किया.उसके अनुसार,कार्यविभाजन से जुड़ा यह आदेश प्रतिनियुक्ति पर तैनात एक अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था.अगले ही दिन दोनों चुनाव आयुक्तों ने इस पर कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा.आयोग ने कहा कि 30 जुलाई को दोनों आयुक्तों के संयुक्त निर्देश के बाद यह आदेश लागू नहीं हुआ.
फॉर्म 6 में बदलाव पर क्या कहा
वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने को इस्तेमाल होने वाले Form 6 को लेकर भी आयोग ने सफाई दी है कि Form 6 में कोई संशोधन नहीं है.इस फॉर्म में बदलाव का अधिकार केंद्र सरकार को है.SIR को इस्तेमाल घोषणापत्र इससे अलग अभिलेख है.
हालांकि,आयोग ने माना कि ऑनलाइन आवेदन में इसे जैसे दिखाया जा रहा था,उससे फॉर्म में बदलाव का भ्रम हो सकता था.ऑनलाइन आवेदन में Form 6 और घोषणापत्र को अलग-अलग दिखाने की व्यवस्था है, जैसा कागजी फॉर्म में होता है.
वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने-हटाने पर भी सफाई
आयोग ने बताया कि जिन मतदाताओं का पुराना रिकॉर्ड मौजूदा सूची से नहीं मिल पाया है,उन्हें सामान्यत: सुनवाई को दफ्तर बुलाने की जरूरत नहीं होगी.बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) उनके घर जाकर अभिलेख जुटाएंगे. सुनवाई केवल विशेष मामलों में होगी और प्राथमिकता ऑनलाइन सुनवाई को दी जाएगी.
ECINet (ईसीआईनेट) सिस्टम पर आयोग ने कहा कि निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) के आदेश बिना वोटर लिस्ट में कोई नाम न जोड़ा जाता है,न हटाया जाता है.इस प्रक्रिया की जांच को IIT और IISc के विशेषज्ञों की समिति भी है.
CEC को हटाने की मांग पर आयोग का जवाब
मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर रोक लगाने को याचिका पर आयोग ने कहा कि ऐसी मांग स्वीकार नहीं हो सकती.आयोग के अनुसार,मुख्य चुनाव आयुक्त हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट जज हटाने जैसी है.
इसके अलावा,आयोग ने यह भी कहा कि उसने अपनी कोई आंतरिक फाइल या नोट मीडिया को जारी नहीं किया था.दशहरा छुट्टियों के कारण अभी संक्षिप्त जवाब दिया गया है.आयोग ने मामले में विस्तृत बिंदुवार जवाब देने की अनुमति भी मांगी है.
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञान कुमार के कामकाज और ECI के कुछ फैसलों की वैधता को चुनौती देती रिट याचिका पर आयोग ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद, मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ने SIR के फैसले एकतरफा लेने के आरोप निरस्त किये।
शपथ-पत्र राकेश कुमार सिंह की रिट याचिका पर दिया गया, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने ECI, CEC और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया था। याचिका ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट पर की गई थी,जिसमें आरोप था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों के बावजूद,SIR प्रक्रिया के 14 महत्वपूर्ण निर्णय ECI के नाम पर हुए थे। ये आरोप निरस्त करते हुए ECI ने कहा कि SIR से संबंधित तीनों आदेश – 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 – आयोग के सर्वसम्मत निर्णय थे।
चुनाव उपायुक्त भानु प्रकाश येतुरु प्रस्तुत शपथ-पत्र में है कि ये निर्णय CEC और दोनों चुनाव आयुक्तों ने सर्वसम्मति से स्वीकारे। आयोग ने तर्क दिया कि याचिका पूर्णत: अखबारी रिपोर्ट पर आधारित है और याचिकाकर्ता ने प्रतिवादियों से इन तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। इसलिए,याचिका सुनवाई योग्य नहीं है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने कभी भी किसी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया में जारी नहीं किया और न ही ऐसा करने की अनुमति दी।
आंतरिक नोट आयोग के फैसले नहीं होते
ECI ने स्पष्ट किया कि किसी फाइल पर काम करते CEC या चुनाव आयुक्तों के नोट, सवाल, सुझाव या टिप्पणियां स्वयं में आयोग के निर्णय नहीं होते। निर्णय प्रक्रिया बताते हुए आयोग ने कहा कि फाइलें सामान्यत: पहले एक चुनाव आयुक्त के पास जाती हैं,फिर दूसरे चुनाव आयुक्त के पास और अंत में CEC के पास पहुंचती हैं। ECI ने दावा किया कि संबंधित फैसले ‘मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023’ की धारा 18 के कानूनी ढांचे के अनुरूप हैं। इस कानून के अनुसार, ECI के फैसले जहाँ तक संभव हो,सर्वसम्मति से होने चाहिए; और यदि ऐसा न हो,तो बहुमत से लिए जाने चाहिए।
फॉर्म 6 में कोई संशोधन नहीं
आयोग ने इससे इनकार किया कि उसने अपने SIR (सघन मतदाता सूची पुनरीक्षण) आदेशों से ‘फॉर्म 6’ में कोई संशोधन किया। आयोग का कहना है कि ‘मतदाता पंजीकरण नियम, 1960’ (Registration of Electors Rules, 1960) में निर्धारित फॉर्म केवल केंद्र सरकार ही संशोधित कर सकती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि SIR प्रक्रिया में मांगी जाने वाली घोषणा (Declaration) एक अलग अभिलेख है, और इसे ‘फॉर्म 6’ में संशोधन नहीं माना जा सकता। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब ‘इंडियन एक्सप्रेस’ ने रिपोर्ट दी कि दो चुनाव आयुक्तों ने उन बदलावों पर आपत्ति जताई थी, जिनमें आवेदकों को खुद को,या अपने माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी को पिछली सघन मतदाता सूचियों (intensive electoral rolls) से जोड़ने वाले विवरण देने को कहा गया। ECI ने माना कि ऑनलाइन आवेदन प्लेटफॉर्म पर जैसे यह घोषणा प्रदर्शित की गई थी, उससे ऐसा लग सकता था कि ‘फॉर्म 6’ में संशोधन किया गया। इस समस्या को दूर करने को आयोग ने कहा कि 21 अक्टूबर 2026 से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया को दो अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाएगा: ‘फॉर्म 6’ और ‘SIR घोषणा’। यह व्यवस्था उसी प्रक्रिया के अनुरूप होगी जो फिजिकल (कागजी) आवेदनों में अपनाई जाती है। आयोग ने दोहराया कि यह घोषणा इसलिए लाई गई ताकि आवेदकों का मिलान पिछली मतदाता सूचियों से आसानी से हो सके। इन बदलावों को कानूनी रूप से निर्धारित फॉर्म में संशोधन नहीं माना जा सकता।
Case Title : Rakesh Kumar Singh v. Union of India, Shailendra Mani Tripathi v. Union of India

