Gen Z आंदोलनों ने 5 देशों में गिराईं सरकारें, हाथ क्या आया? बाबाजी का ठुल्लू
Gen Z आंदोलनों ने एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के 5 देशों में गिराईं सरकारें, फिर भी हाथ कुछ नहीं आया,आज कैसी हैं उन देशों की दशा?
Gen Z यानी युवाओं ने बांग्लादेश, नेपाल, श्रीलंका, केन्या, मेडागास्कर और पेरू में युवाओं ने अपनी ताकत से सरकारों को झुकने पर मजबूर कर दिया. लेकिन तख्तापलट बाद के हालात आज भी बहुत चुनौतीपूर्ण हैं. नेपाल में पूर्व रैपर बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने पर भी हंगामा है. वहां कस्टम ड्यूटी, गोरखा भर्तियों और पार्टी के अंदरूनी विवादों पर अब भी बवाल है. वहीं बांग्लादेश में सरकार बदलने के बाद भी पुरानी राजनीतिक ताकतें ही हावी दिखती हैं.
दुनियाभर में जब Gen Z यानी युवाओं ने सड़कों पर उतरकर भारी विरोध प्रदर्शन शुरू किया तो सत्ता के बड़े-बड़े सिंहासन हिल गए. बांग्लादेश से लेकर केन्या और नेपाल तक, युवाओं की जिद ने पुरानी और भ्रष्ट सरकारें उखाड़ फेंकी. इन आंदोलनों ने ये तो सिद्ध किया कि इंटरनेट और सोशल मीडिया की ताकत से कोई भी तानाशाह या सुस्त शासन बदला जा सकता है. लेकिन असली सवाल ये है कि सरकार बदलने से उन देशों में क्या हुआ? क्या युवाओं को उनके अधिकार मिले, या पुरानी राजनीति ने नए चेहरे पहनकर फिर सब कुछ कब्जा लिया?
जेन जी आंदोलन का इंपैक्ट
नेपाल: संसद में रैपर की एंट्री लेकिन बवाल जारी
नेपाल में युवाओं ने भ्रष्टाचार, खराब शासन और सोशल मीडिया पर बैन के खिलाफ खुलकर मोर्चा संभाला था. नेताओं की आपसी खींचतान से तंग युवाओं ने ‘Gen Z रिवोल्यूशन’ कर पुरानी सरकार उखाड़ फेंकी. चुनाव बाद 35 वर्षीय पूर्व रैपर बालेन शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने. युवाओं ने अपना प्रतिनिधि सत्ता तक तो पहुंचाया, लेकिन नई सरकार की राह में नई मुसीबतें खड़ी हो गई हैं.
देश में हाल के दिनों में विरोध-प्रदर्शनों का सिलसिला फिर तेज हो गया है. पोखरा में पूर्व गोरखा सैनिक भारतीय सेना की ‘अग्निपथ योजना’ में बंद पड़ी भर्तियां शुरू कराने की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. इसके अलावा, भारत सीमा पर नई कस्टम ड्यूटी लागू करने पर स्थानीय व्यापारियों और लोगों ने इतना बवाल किया कि बालेन शाह को झुकना पड़ा और अपना फैसला वापस लेना पड़ा.
इतना ही नहीं,बालेन शाह की सबसे बड़ी सिरदर्दी उनकी अपनी ही पार्टी ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) के भीतर से है.पार्टी के कई सांसद और वरिष्ठ नेता उनके एकतरफा फैसले लेने से नाराज हैं और उन पर मनमर्जी सरकार चलाने का आरोप लगा रहे हैं.
बांग्लादेश: क्रांति बाद चुनावी राजनीतिक संघर्ष
बांग्लादेश में जुलाई 2024 का Gen Z आंदोलन सबसे हिंसक प्रदर्शनों में से एक माना जाता है. सरकारी नौकरियों में कोटा सिस्टम और भ्रष्टाचार के विरुद्ध छात्रों का गुस्सा ऐसा भड़का कि शेख हसीना देश छोड़ भागी .
सरकार गिरने पर नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी, जिसमें छात्र नेता सलाहकार बने. लेकिन सरकार बदलने के बाद की राह आसान नहीं रही. देश में दोबारा हुए चुनाव में BNP कब्जा बनी और नई युवा राजनीतिक ताकत बैलेट बॉक्स पर पिछड़ गई. आज बांग्लादेश में कानून व्यवस्था और आर्थिक सुधारों की चुनौतियां बनी हुई हैं.
श्रीलंका: ‘अरागलया’ के बाद मिला आर्थिक संतुलन
श्रीलंका में 2022 का ‘अरागलया’ Gen Z और सामान्य जन का संयुक्त आक्रोश था. देश में लगे लंबे बिजली कट, पेट्रोल-डीजल की कमी और आसमान छूती महंगाई से परेशान लोगों ने राष्ट्रपति भवन कब्जा लिया था. परिणाम ये कि राजपक्षे परिवार को सत्ता छोड़नी पड़ी.
तख्तापलट बाद देश की बागडोर नई सरकार और फिर चुनाव से नए नेतृत्व के हाथों आई. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से मिले बेलआउट पैकेज और कड़े आर्थिक फैसलों से श्रीलंका की अर्थव्यवस्था धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है. हालांकि, महंगाई पूरी तरह घटी नहीं है, लेकिन बुनियादी चीजों को लंबी लाइनें अब खत्म हो चुकी हैं.
केन्या: टैक्स बिल तो वापस, पर लड़ाई जारी
केन्या में युवाओं ने किसी एक नेता के बिना, पूरी तरह सोशल मीडिया से विरोध की लहर खड़ी की थी. सरकार के भारी टैक्स वाले ‘फाइनेंस बिल’ के खिलाफ Gen Z सड़कों पर उतर आये और संसद भवन में घुस गये.
युवाओं के भारी दबाव में राष्ट्रपति विलियम रुटो को झुकना पड़ा और टैक्स बिल वापस लेना पड़ा. सरकार ने कैबिनेट में भी बड़े बदलाव किए. लेकिन केन्या में सरकार पूरी तरह नहीं बदली, युवाओं ने सरकार को नीतियां बदलने पर मजबूर किया. आज भी केन्या के युवा लगातार मानवाधिकारों और पुलिस बर्बरता के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं.
मेडागास्कर: तख्तापलट बाद मिलिट्री कंट्रोल
अफ्रीकी द्वीप मेडागास्कर में भी खराब बिजली व्यवस्था, भुखमरी और भ्रष्टाचार विरोध में Gen Z ने बड़ा आंदोलन खड़ा किया. युवाओं के लगातार प्रदर्शनों ने सरकार पूरी तरह रोक दी थी.
हालांकि, यहां का नतीजा थोड़ा अलग रहा. राष्ट्रपति के पद और देश छोडने के बाद वहां की सेना और अंतरिम काउंसिल ने व्यवस्था संभाली. युवाओं ने जिस लोकतंत्र और बेहतर जीवन की उम्मीद में आंदोलन किया था, वो अभी भी राजनीतिक अस्थिरता और सैन्य प्रभाव में फंसा हुआ है.
पेरू: लगातार बदलते राष्ट्रपति, अनिश्चितता
दक्षिण अमेरिकी देश पेरू में युवा पिछले कुछ वर्षों से लगातार सड़क पर हैं. सरकार में व्याप्त भ्रष्टाचार और राष्ट्रपति के लगातार बदले जाने से तंग आकर Gen Z ने वहां बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किए.
पेरू में युवाओं के दबाव से कई नेताओं को इस्तीफा देना पड़ा और आपातकाल तक लगाना पड़ा लेकिन वहां की समस्या ये है कि पुरानी संसद और राजनीतिक पार्टियां आपस में उलझी हुई हैं. युवाओं ने सत्ता परिवर्तन तो कराया लेकिन राजनीतिक स्थिरता अभी भी पेरू के लिए एक दूर का सपना बनी है.
जेन Z आंदोलन का नतीजा क्या रहा?
Gen Z के इन आंदोलनों ने ये साफ कर दिया है कि युवाओं के पास सरकारों को घुटनों पर लाने की ताकत है. लेकिन ज्यादातर देशों में तख्तापलट बाद पुरानी राजनीति ही किसी न किसी रूप में वापस आ गई. आंदोलन से सरकार गिराना तो आसान रहा लेकिन एक नया और पारदर्शी सिस्टम बनाना युवाओं के हाथ में नहीं है

