हाको की टिप्पणी सुन SIR को चुनौती याचिका वापस ली हल्द्वानी के शादाब आलम ने
उत्तराखंड एसआईआर को लेकर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई, जानिए आज क्या हुआ
हल्द्वानी के शादाब आलम ने नैनीताल हाईकोर्ट में विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर याचिका दायर की थी, जिस पर आज सुनवाई हुई.
नैनीताल 15 सितंबर 2026: उत्तराखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (special intensive review) के दौरान मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. सुनवाई के बाद नैनीताल हाईकोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया.
एक ही व्यक्ति ने फॉर्म-7 से 6 हजार आपत्तियां लगाई: दरअसल, हल्द्वानी निवासी शादाब आलम ने नैनीताल हाईकोर्ट में special intensive review यानी एसआईआर को लेकर एक याचिका दायर की थी. याचिकाकर्ता शादाब आलम ने हाईकोर्ट को बताया कि एक ही व्यक्ति ने फॉर्म-7 से छह हजार मतदाताओं के नाम हटाने के लिए आपत्तियां लगाई हैं.
वर्षों से रह रहे मूल निवासियों के नाम भी सूची से गायब: याचिकाकर्ता का कहना था कि वर्षों से रह रहे मूल निवासियों के नाम भी सूची से गायब कर दिए गए हैं, जबकि कई फर्जी या बाहरी लोगों के नाम शामिल हैं. याचिका में ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच करने और गलत आपत्तियां दर्ज कराने वालों व लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी.
हाईकोर्ट ने की याचिका निस्तारित: इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में हुई. सुनवाई में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि एसआईआर से जुड़ा मामला फिलहाल देश की सुप्रीम कोर्ट में लंबित है. अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद ही इस विषय पर आगे कोई कार्रवाई संभव हो सकेगी. हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के पश्चात दोबारा हाईकोर्ट आने की स्वतंत्रता मांगते हुए अपनी याचिका वापस ले ली, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए मामले का निस्तारण कर दिया.
सुप्रीम कोर्ट में 25 अगस्त को SIR पर क्या हुआ था?
38 लाख अपीलें लंबित, सिर्फ 2% का निपटारा… बंगाल SIR पर SC ने ECI से मांगा जवाब
पश्चिम बंगाल SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से SIR अपीलों की संख्या, लंबित मामलों और उनके निपटारे को लेकर व्यापक रिपोर्ट मांगी है.
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान TMC सांसद और वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कोर्ट में आरोप लगाया कि SIR की आड़ में बहुत लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए. उनका यह भी आरोप है कि SIR में एक विशेष वर्ग के लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए.
कल्याण बनर्जी ने कहा कि कई विधानसभा सीटों पर उम्मीदवारों में जितना जीत-हार का अंतर था, उससे ज्यादा नाम मतदाता सूची से हटाए गए. उनका दावा है कि SIR से जुड़ा पूरा डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया है.
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी इस पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि मई तक 38 लाख अपीलें लंबित थी लेकिन इनके निपटारे का काम बहुत ही धीमी गति से हो रहा है. कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि नगर पालिका चुनाव होने वाले हैं, ऐसे में अगर यही स्थिति रही तो लोग वोट देने से वंचित रह जाएंगे.
CJI जस्टिस सूर्यकांत ने भी इसपर चिंता जताई है और कहा है कि संसदीय चुनाव से पहले इन सभी अपीलों का निपटारा हो जाना चाहिए.
38 लाख से ज्यादा लंबित अपीलें
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने अदालत में बताया कि करीब 38.10 लाख अपीलें लंबित हैं. जबकि अब तक सिर्फ 83 हजार अपीलों का निपटारा हुआ है. उन्होंने इस पर चिंता जताते हुए बताया कि यह कुल अपीलों का लगभग 2 फीसदी है. उनका कहना है कि लगभग सात लाख लोगों ने मतदाता सूची से अपना नाम हटाए जाने के खिलाफ अपील दायर की है. वहीं, बड़ी संख्या में ऐसी अपीलें भी हैं जो दूसरों का नाम हटाने या शामिल करने को लेकर है.
जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं उनकी अपीलों को प्राथमिकता देनी चाहिए. जस्टिस बागची का कहना है कि इनकी अपीलों को प्राथमिकता देनी चाहिए क्योंकि नाम हटने से व्यक्ति मताधिकार से वंचित हो जाता है.
SC ने ECI से मांगा डेटा
CJI जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि संसदीय चुनावों से पहले इन अपीलों का निपटारा हो जाना चाहिए. कोर्ट ने SIR अपीलों की संख्या, लंबित मामलों और उनके निपटारे को लेकर चुनाव आयोग से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से यह भी सवाल किया है कि मतदाता सूची को अपडेट करने और अपीलों के निपटारे के लिए क्या उठा रहा है.


