सहारनपुर कलेक्ट्रेट से हटाया मस्जिद परिसर, कमेटी हार चुकी थी अपील
सपा सांसद इकरा हसन हाउस अरेस्ट
सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद पर आज सुबह प्रशासन ने बुलडोजर चला दिया. सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत के आदेश और अपील निरस्त होने पर मस्जिद को अवैध निर्माण बताते हुए एक्शन लिया गया. इसको भारी पुलिस फोर्स लगी. वहीं, सहारनपुर जाने की कोशिश में कैराना सांसद इकरा हसन अपने आवास पर हाउस अरेस्ट की गई।
निर्माण को लेकर लंबे समय से चल रहा था विवाद.
सहारनपुर/शामली,05 सितंबर 2026,उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में सुबह डीएम परिसर में बना मस्जिद परिसर प्रशासन ने ध्वस्त कर दिया. प्रशासन के अनुसार, सिटी मजिस्ट्रेट अदालत ने निर्माण सरकारी जमीन पर अवैध माना. मस्जिद कमेटी की अपील भी निरस्त हो गई. कार्रवाई में बड़ी संख्या में पुलिस और आरआरएफ लगी. वहीं, इसे लेकर सहारनपुर जाने की कोशिश में कैराना सांसद इकरा हसन उनके आवास पर हाउस अरेस्ट की गई.
सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद पर विवाद चल रहा था. शनिवार सुबह प्रशासन ने निर्माण हटाना शुरू कर दिया. छह बुलडोजर लगे । क्षेत्र में भारी पुलिस बल लगा .
10 फरवरी 2025 को बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने मस्जिद को अवैध बताते हुए जिलाधिकारी से शिकायत की थी. मस्जिद परिसर के कमरों और डाकघर से किराया वसूले जाने का आरोप लगाया गया. इसके बाद डीएम ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए. मजिस्ट्रेट की जांच में मस्जिद अवैध पाई गई.
जिसके बाद 24 मार्च, 2025 को प्रशासन ने नगर मजिस्ट्रेट कोर्ट में याचिका दायर की. 16 जुलाई, 2026 को कोर्ट ने मस्जिद को अवैध माना और उसे हटाने के साथ 6.41 करोड़ रुपए की हर्जाना वसूलने का आदेश दिया, कब्जेदारों को 30 दिन का समय दिया.
20 जुलाई को मस्जिद पक्ष ने मजिस्ट्रेट के आदेश के खिलाफ जिला कोर्ट में याचिका दाखिल की. 2 सितंबर को जिला जज सतेंद्र कुमार की कोर्ट ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए मस्जिद पक्ष की याचिका निरस्त कर दी.
प्रशासन का कहना है कि सिटी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में मस्जिद निर्माण अवैध सिद्ध हुआ. अधिकारियों के अनुसार, निर्माण सरकारी जमीन पर था. आदेश के खिलाफ मस्जिद कमेटी ने जिलाधिकारी कोर्ट में अपील की, लेकिन वहां अपील निरस्त हुई और सिटी मजिस्ट्रेट का मूल आदेश यथावत रहा.
बता दें कि कोर्ट के आदेश पर कार्रवाई की जा रही है। प्रशासन की ओर से मस्जिद को अवैध बताया गया था। इसके बाद पर बुलडोजर एक्शन शुरू हुआ है। इस दौरान मौके पर पुलिस बल तैनात रहा और बुलडोजर की मदद से निर्माण को हटाया गया। जानकारी के अनुसार कलेक्ट्रेट परिसर में यह मस्जिद करीब 70 साल पुरानी बताई जा रही थी। सिटी मजिस्ट्रेट की ओर से इसे अवैध निर्माण बताया गया था। इसके बाद प्रशासन ने मस्जिद को हटाने की कार्रवाई की। प्रशासन की निगरानी में बुलडोजर चलाकर मस्जिद के निर्माण को ध्वस्त किया गया।
कलेक्ट्रेट परिसर में लंबे समय से मौजूद इस निर्माण को लेकर प्रशासन की ओर से कार्रवाई की गई है। बताया जा रहा है कि सहारनपुर के कलक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को आज सुबह 5 बजे ढहा दिया गया है।
मस्जिद पर शनिवार को हुई कार्रवाई के पीछे क़रीब डेढ़ साल से चल रहा कानूनी विवाद है.जिला जज सत्येंद्र कुमार की अदालत ने दो सितंबर 2026 को मस्जिद पक्ष की अपील निरस्त करते हुए सिटी मजिस्ट्रेट कुलदीप सिंह के 16 जुलाई 2026 का आदेश यथावत रखा था.
ज़िला अदालत ने विवादित भूमि को सरकारी भूमि माना. मस्जिद पक्ष ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश पर 20 जुलाई को अपील की थी । अदालत में 17 तारीख़ों पर सुनवाई हुई.
सिटी मजिस्ट्रेट अदालत ने जुलाई में मस्जिद को सरकारी जमीन पर अवैध निर्माण मान बेदखली आदेश दिया था.
आदेश में 30 दिन में परिसर ख़ाली करने के निर्देश के साथ 6 करोड़ 41 लाख 65 हजार 565 रुपये की क्षतिपूर्ति भी निर्धारित की गई थी.
मस्जिद पक्ष ने अदालत में इसे वक़्फ संपत्ति बताया था.
पक्ष ने मस्जिद के करीब 150 वर्ष पुरानी होने का दावा भी किया था, लेकिन अदालत में इस दावे के समर्थन में ठोस साक्ष्य नहीं दिए गये.
कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद पर विवाद की शुरुआत बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी की शिकायत से हुई थी. 24 मार्च 2025 को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में उत्तर प्रदेश लोक परिसर अधिनियम में मुकदमा आया .लंबी सुनवाई बाद 16 जुलाई 2026 को सिटी मजिस्ट्रेट ने मस्जिद अवैध घोषित करते हुए बेदखली और ध्वस्तीकरण आदेश दिया था.
मस्जिद पक्ष ने आदेश को ज़िला अदालत में चुनौती दी. डेढ़ महीने सुनवाई बाद ज़िला जज अदालत ने दो सितंबर को अपील निरस्त की और सिटी मजिस्ट्रेट का आदेश यथावत रखा. मस्जिद कमेटी ने कोर्ट में 1 जनवरी 1911 का बिजली बिल दिखाया कि कलक्ट्रेट से पहले ही यहां मस्जिद थी। जबकि प्रशासन ने सबूत रखा कि सहारनपुर में पहली बार बिजली ही 1912 में आई थी। मुसलमानों का दावा है कि कलक्ट्रेट परिसर के अंदर मौजूद मस्जिद 70 साल से भी ज्यादा पुरानी है।
रात से ही पुलिस लगी , अफवाहों पर नजर
कार्रवाई से पहले सहारनपुर में सुरक्षा व्यवस्था कठोर हो गई. प्रशासन ने बताया कि त्योहारों में अतिरिक्त पुलिस बल के साथ पांच कंपनी पीएसी, आरआरएफ लगी है. मिश्रित आबादी में लगातार पैदल पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च हो रहा है.
सहारनपुर मंडल के डीआईजी अभिषेक सिंह ने कहा कि प्रशासन ने कार्रवाई से पहले सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी की हैं. नोटिस और अपील समेत निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर ही ध्वस्तीकरण हुआ है.

डीआईजी ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने पर भी चेताया है कि कोई मामले को लेकर अफवाह फैलाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी. ध्वस्तीकरण में कलेक्ट्रेट परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था रही . बुलडोजर से मस्जिद के निर्माण हटाया गया और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी सतर्क रहे.
कार्रवाई में कैराना सांसद इकरा हसन को उनके आवास पर हाउस अरेस्ट किया गया. वह सहारनपुर जाने की तैयारी में थीं. तभी उनके आवास बड़ी संख्या में पुलिस बल पहुंचा और उन्हें बाहर जाने से रोका गया.
हाउस अरेस्ट पर इकरा हसन ने कहा कि वह सहारनपुर कलेक्ट्रेट मस्जिद मामले पर अधिकारियों से मिलना कर क्षेत्रीय जनता की आवाज प्रशासन में रखना चाहती थीं. उनका आरोप है कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोकने को घर पर ही नजरबंद कर दिया गया.

सांसद ने सवाल उठाया कि क्या किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि का अपनी जनता के विषय पर अधिकारियों से मिलना भी अपराध है? उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि जन आवाज उठाने को चुने जाते हैं। उन्हें रोककर आवाज को दबायी नहीं जा सकती. सहारनपुर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर रखी है. कलेक्ट्रेट परिसर में ध्वस्तीकरण कार्रवाई के साथ-साथ इलाकों में पुलिस सक्रियता बढ़ी है.

कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने देर रात लाइव आकर मस्जिद प्रकरण पर अपनी बात रखी. उनके दामाद शायान मसूद ने भी लाइव घटनाक्रम की जानकारी दी.
मुस्लिम नेताओं में बेचैनी रही. रात में सपा विधायक आशु मलिक, एमएलसी शाहनवाज़ खान समेत कई नेता कलेक्ट्रेट पहुंचने निकले, लेकिन उन्हें परिसर के गेट के बाहर ही रोक दिया गया. कलेक्ट्रेट के पांच गेट बंद कर पुलिस बल लगा दिया गया. स्थिति देख रैपिड एक्शन फ़ोर्स भी लगाई गई.

मलबा शहर से दूर दफनाने की प्रक्रिया
मस्जिद में कल मुस्लिमों ने नमाज़ पढ़ी थी, वह आज मलबा बन गई और उसके अवशेष सहारनपुर शहर से 10 किलोमीटर दूर नगर निगम के वाहनों से डालकर दफ़नाया जा रहा है.



