विपक्ष के बल्लेबाज Y S कुरैशी की मिट्टीपलीद, कंवल सिब्बल,कंचन गुप्ता,खेमका ने लगाई क्लास

Former Cec Sy Quraishi Hit On Trolling Kanwal Sibal Responds Damaging Your Own Reputation

‘तो मैं खुद को सौभाग्यशाली समझूं?’: पूर्व CEC एसवाई कुरैशी के सवाल पर पूर्व विदेश सचिव ने दिया मुंहतोड़ जवाब

चुनाव आयोग और एसआईआर प्रक्रिया पर विदेश में दिए इंटरव्यू को लेकर पूर्व सीईसी शाहबुद्दीन याक़ूब कुरैशी और पूर्व विदेश सचिव में तीखी बहस हुई है। कंवल सिब्बल ने कुरैशी से कहा है कि भारत ने उन्हें बहुत प्रतिष्ठा दी ही उसके प्रति आभारी रहें।
नई दिल्ली 24 अक्टूबर 2026: पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त शाहबुद्दीन याकूब (एस वाई) कुरैशी ने विदेश में जाकर दो-दो इंटरव्यू में जैसे चुनाव आयोग और उसकी एसआईआर प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, उससे काफी विवाद हो रहा है। इसके लिए उन्हें पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने घेरा तो कुरैशी ने कई देशों में भारत के राजदूत रह चुके जेएनयू चांसलर की तुलना दो रुपये के ट्रोल से कर दी। इस पर दोनों में सोशल मीडिया पर खूब कहासुनी हुई।

‘पूर्व विदेश सचिव के ट्रोल करने पर भाग्यशाली समझूं?’

भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने डॉक्टर शाहबुद्दीन याक़ूब कुरैशी के इंटरव्यू पर सवाल उठाए थे। उन्होंने लंदन के एक पत्रकार को दिए इंटरव्यू पर कहा था कि इससे उनकी मंशा पता चलती है। बाद में कुरैशी ने जर्मनी में सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर ध्रुव राठी को भी वही सब कुछ कहा । संविधान के अनुच्छेद 370 और सीईसी ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति तक पर टिप्पणी की। बाद में उन्होंने खुद से सवाल पूछने वालों में कंवल सिब्बल को देखकर उन्हें टैग करते हुए उनकी तुलना दो रुपये के ट्रोल से कर दी।

Former CEC SY Quraishi hit on trolling Kanwal Sibal responds damaging your own reputation

 

‘आप अपनी ही प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा रहे’

इस पर कंवल सिब्बल ने उन पर पलटवार करते हुए कहा है कि वह उन्हें ट्रोल नहीं कर रहे हैं, बल्कि ऐसा करके वे अपनी खुद की प्रतिष्ठा को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। सिब्बल ने कहा, ‘सीईसी के खिलाफ आप आक्रामक रुख अपनाए हैं। यह व्यक्तिगत लगता है। आप क्या हित साधना चाहते हैं यह आपका मामला है। लेकिन, जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है तो अपने आप से निश्चित फैसले पर मत पहुंचिए और न ही उसे फैलाइए।’

 

‘भारत ने आपको बहुत कुछ दिया, उसका आभारी रहिए’

कंवल सिब्बल ने एसवाई कुरैशी से कहा है, ‘आपको ज्यादा जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। भारत ने आपको जीवन में बेहतरीन अवसर और प्रतिष्ठा दी है। एसवाई कुरैशी उसके प्रति आभारी रहें।’

बता दें कि हरियाणा कैडर के चर्चित रिटायर्ड आईएएस अशोक खेमका भी एसवाई कुरैशी के बयानों पर कड़ी आपत्ति जता चुके हैं और उनके विदेश में दिए इस तरह के इंटरव्यू पर सवाल कर चुके हैं।

Former Cec S Y Quraishi Made It Easier For Bangladeshi Muslims To Get Their Names Major Claim By Kanchan Gupta Advisor To The Goi

एस.वाई. कुरैशी ने बांग्लादेशी मुसलमानों के लिए नाम जुड़वाना आसान बना दिया था, भारत सरकार के सलाहकार कंचन गुप्ता का  बड़ा दावा
एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी लगातार सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर हैं। एस वाई कुरैशी ने फॉर्म 6 में बदलाव पर भी सवाल उठा इसे कानूनी रूप से गलत बताया। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर एकतरफा फैसला लेने का आरोप लगाया है।

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी इन दिनों मुख्य रूप से मतदाता सूची की एसआईआर प्रक्रिया पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया और बयानों से चर्चा में हैं। उन्होंने मीडिया इंटरव्यू में वर्तमान में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि आयोग के फैसलों में अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियां किनारे कर एकतरफा फैसले लिए हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि एसआईआर में 13 करोड़ नाम काटे गए जिनमें केवल 150 बांग्लादेशी थे। वहीं, अब एस.वाई कुरैशी के बयान पर सरकार से भी तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गई हैं।
S Y Quraishi and Kanchan Gupta
भारत सरकार के सलाहकार कंचन गुप्ता और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई कुरैशी

इसी क्रम में भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने एस. वाई. कुरैशी के बयान पर करारा जवाब दिया है। उन्होंने एक्स हैंडल पर पोस्ट किया कि झूठे और शर्मनाक एस.वाई. कुरैशी से यह पूछा जाना चाहिए था कि मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) रहते उन्होंने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का नियम कैसे बदल बांग्लादेशी मुसलमानों का नाम जुड़वाना आसान बना दिया और एक बार नाम जुड़ जाने के बाद, उन्हें हटाना लगभग असंभव कर दिया।

फॉर्म-6 में बदलाव पर भी जताई थी आपत्ति
एस वाई कुरैशी ने चुनाव आयोग के वोटर लिस्ट से हटाए लोगों से दोबारा फॉर्म-6 भरवाने के निर्देश की भी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 केवल नए मतदाताओं के लिए होता है, और गलत तरीके से हटाए गए मतदाताओं से इसे जबरन भरवाना और उनसे डिक्लेरेशन लेना कानूनी रूप से गलत है। इसमें 1 साल तक की जेल हो सकती है।

बिलो द बेल्ट हिट करना अशोभनीय, पूर्व CEC एस वाई कुरैशी पर भड़के अशोक खेमका

Ashok Khemka Expressed Concern Regarding Appointment Gyanesh Kumar And Amit Shah Role Relation To Former Cec Sy Quraishi

पूर्व CEC एस वाई कुरैशी ने एक पॉडकास्ट में अमित शाह और ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर गंभीर टिप्पणी की थी। कुरैशी ने ज्ञानेश की नियुक्ति अनुच्छेद 370 हटाने से भी जोड़ी थी । इस पर पूर्व आईएएस अशोक खेमका ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पूर्व CEC का बिलो द बेल्ट हिट करना अशोभनीय है।

हरियाणा सरकार के पूर्व एडिशनल सेक्रेटरी अशोक खेमका ने ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति और अमित शाह को लेकर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि एक पूर्व CEC का ऐसे निचले स्तर के प्रहार शोभा नहीं देते। असहमति संभव है, लेकिन व्यक्तिगत छींटाकशी  अनुचित है । संविधान से अनुच्छेद 370 हटाना गर्व का विषय और राष्ट्रीय उपलब्धि है। राजनीतिक द्वेष के ऊपर संवैधानिक गरिमा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

अमित शाह और ज्ञानेश कुमार पर की थी टिप्पणी

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने एक पॉडकास्ट में एसआईआर और चुनाव आयोग के अधिकारों पर बात करते मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति पर सवाल उठाए। कुरैशी ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को एडिशनल सेक्रेटरी पैनल को भी उपयुक्त नहीं माना गया था। बाद में, उन्हें सचिव पैनल को भी अयोग्य पाया गया। अमित शाह ने उन्हें सहकारिता मंत्रालय में सचिव बना दिया। कुरैशी ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार अमित शाह के बहुत करीबी थे। इन्होंने गृह मंत्रालय में अमित शाह के अधीन काम किया था। कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने की प्रक्रिया में ये मुख्य रणनीतिकारों में से एक थे। इसके अलावा जब राम मंदिर ट्रस्ट का गठन हो रहा था, तो उसे भी इन्होंने ही तैयार किया था।

एसआईआर को लेकर बताया आयोग का कानून

कुरैशी ने पॉडकॉस्ट में कहा कि 2023 में मुख्य चुनाव आयुक्त चयन होना था। नए कानून में, नामों पर विचार करने को सरकार ने तीन लोग बुलाये। इनमें से एक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे। उन्होंने अमित शाह और विपक्ष के नेता को इसमें शामिल किया। इस तरह ज्ञानेश कुमार चुन लिये गये। उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट साफ करना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, इसलिए एसआईआर होती है। कानून में स्पेशल एसआईआर का जिक्र नहीं है। किसी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदा जैसे बाढ़ आती है तो इसकी जरूरत होती है। मगर कंप्यूटराइज्ड सिस्टम में प्राकृतिक आपदा से डेटा प्रभावित नहीं होता है, इसलिए इंटेसिव रीविजन की जरूरत नहीं है।

34 साल में 57 ट्रांसफर झेल चुके हैं अशोक खेमका

एस वाई कुरैशी के इस पॉडकॉस्ट में दावों पर पूर्व आईएएस अशोक खेमका ने आपत्ति जताई। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त का ‘बिलो द बेल्ट’ हिट करना अशोभनीय है। राजनीतिक द्वेष के ऊपर संवैधानिक गरिमा को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। खेमका ने 370 हटाने को लेकर की टिप्पणी पर असंतोष जताते हुए लिखा कि यह राष्ट्रीय उपलब्धि है। बता दें कि 1991 बैच हरियाणा कैडर के आईएएस रहे अशोक खेमका भी तबादलों से काफी चर्चित रहे हैं। 34 साल के करियर में 57 बार उनका ट्रांसफर किया गया।

छह साल पहले मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा से भिड़े थे कुरैशी  

 

एस वाई कुरैशी ने की आलोचना तो मुख्य चुनाव आयुक्त अरोड़ा का जवाब- आपके वक्त भी कार्रवाई नहीं हुई
पूर्व चुनाव आयुक्त एस. वाई कुरैशी ने 8 फरवरी 2020 के अपने लेख में दिल्ली चुनाव में भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और भाजपा सांसद परवेश सिंह वर्मा के बयानों का जिक्र किया था. उन्होंने ऐसे बयानों पर एफआईआर कराने को कहा था.

पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और चुनावआयुक्तसुनील अरोड़ा (फाइल फोटो)

एक अभूतपूर्व घटनाक्रम में चुनाव आयोग और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त के बीच आरोप प्रत्यारोप दिखे. भारत की प्रशासनिक व्यवस्था में ऐसे उदाहरण कम ही दिखे.

चुनाव आयोग ने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई कुरैशी को पत्र लिखकर कहा है कि जब वे चुनाव आयोग के मुखिया थे तब आदर्श आचार संहिता उल्लंघनकर्ता नेताओं पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. चुनाव आयोग ने यह भी कहा है कि CEC (Chief Election Commissioner) रहते एस.वाई कुरैशी ने जन प्रतिनिधित्व कानून में भी कोई कार्रवाई नहीं की.

क्या था विवाद?

विवाद की शुरुआत 8 फरवरी को पूर्व CEC एस.वाई कुरैशी के अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में लिखे लेख से हुई कि दिल्ली विधानसभा चुनाव प्रचार में भड़काऊ भाषण देने वालों पर चुनाव आयोग को FIR करवानी चाहिए थी.

हेट स्पीच पर एक्शन क्यों नहीं

पूर्व CEC एस. वाई कुरैशी के लेख पर चुनाव आयोग ने उन्हें पत्र लिखा और कहा कि जब वो खुद मुख्य चुनाव आयुक्त थे तो ऐसे मामलों में उन्होंने कोई कार्रवाई नहीं की थी.

सुनील अरोड़ा तब देश के मुख्य चुनाव आयुक्त थे. चुनाव आयोग ने एस.वाई कुरैशी को लिखे पत्र में कहा कि चुनाव आयोग 11 फरवरी 2020 से लेकर 20 सालों में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने पर की गई कार्रवाई की सूची जारी कर रहा है. जब आप मुख्य चुनाव आयुक्त थे तब आचार संहिता उल्लंघन के मामलों और उन पर कार्रवाई की सूची भी पत्र के साथ संलग्न है.

चुनी हुई भूल से पाठक गुमराह होंगे

सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर डॉक्टर संदीप सक्सेना के एस.वाई कुरैशी को लिखे पत्र में कहा गया , ” कृपया इस सूची पर नजर डालें, इसमें शामिल सूची से पता चलेगा कि तब आयोग ने जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 और आईपीसी की धारा 153 में कोई एक्शन नहीं लिया था. विडंबना है कि कुछ चुनिंदा भूल (Selective Amnesia) से पाठक कैसे गुमराह हो सकते हैं.”

कुरैशी को भेजे जवाब में वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त संदीप सक्सेना ने उन सभी चुनाव आचार संहिता उल्लंघन मामलों का जिक्र किया जो कुरैशी के सामने आए थे. इसके अनुसार इनमें 9 नोटिस जारी हुए थे, जिसमें 2 मामलों में चेतावनी थी, 5 मामलों में एडवाइजरी जारी कर सलाह दी गई थी, जबकि 2 मामले बंद कर दिए गए थे.

दिल्ली चुनाव में विवादित बयान

कुरैशी ने 8 फरवरी 2020 को अपने लेख में दिल्ली चुनाव में भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और भाजपा सांसद परवेश सिंह वर्मा के बयानों का जिक्र किया . दिल्ली विधानसभा चुनाव में 27 जनवरी को अनुराग ठाकुर ने देश के गद्दारों को…गोली मारो…जैसा नारा दिया था, जबकि 28 जनवरी को परवेश वर्मा ने कहा था कि यदि शाहीन बाग में NRC और CAA के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहता है तो दिल्ली में कश्मीर जैसी स्थिति पैदा होगी.

इस बयानबाजी में एस.वाई कुरैशी ने कहा था कि जनप्रतिनिधित्व कानून की धारा 123 और 125 में एफआईआर क्यों नहीं कराई.

डॉ. एस. वाई. कुरैशी कौन हैं
डॉ. एस. वाई. कुरैशी 30 जुलाई 2010 से 10 जून 2012 तक भारत के 17वें मुख्य चुनाव आयुक्त और इस पद पर पहले मुस्लिम हैं। वह 1971 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस (IAS) अधिकारी हैं।

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