दुनिया का सबसे ज़्यादा हिंसक देश और समाज कौन सा है ?

“दुनिया का सबसे हिंसक या खतरनाक देश” कौन सा है, इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि हम इसे किस सूचकांक (Index) और पैमाने से माप रहे हैं:
​1. ग्लोबल पीस इंडेक्स (Global Peace Index – GPI)
​अंतरराष्ट्रीय शोध संस्थान Institute for Economics & Peace (IEP) द्वारा जारी की जाने वाली ग्लोबल पीस इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध, आतंकवाद और आंतरिक संघर्षों के आधार पर सबसे कम शांतिपूर्ण (यानी सबसे हिंसक/अशांत) देश हैं:
​यमन / सूडान / अफगानिस्तान (तालिबान शासन, गृहयुद्ध और मानवीय संकट के कारण)
​सीरिया (लंबे समय से जारी गृहयुद्ध और अस्थिरता के कारण)
​दक्षिण सूडान (जातीय हिंसा और राजनीतिक उथल-पुथल)
​डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और सोमालिया
​2. मर्डर रेट / क्राइम रेट (Homicide Rate)
​अगर प्रति व्यक्ति हत्या की दर (Violent Crime/Homicides) के आधार पर देखा जाए, तो मध्य और दक्षिण अमेरिकी देश सबसे आगे रहते हैं:
​हैती (Haiti)
​वेनेजुएला (Venezuela)
​जमैका और होंडुरास
​3. ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स (Global Terrorism Index)
​आतंकवादी घटनाओं और हिंसा से प्रभावित देशों में हाल के आंकड़ों के अनुसार अफगानिस्तान, पाकिस्तान, सूडान और बुरकिना फासो शीर्ष प्रभावित देशों में शामिल हैं।
​निष्कर्ष:
यदि युद्ध और बड़े पैमाने पर हिंसा/अस्थिरता की बात करें, तो सूडान, यमन और अफगानिस्तान को दुनिया के सबसे हिंसक व असुरक्षित देशों में गिना जाता है।

ग्लोबल पीस इंडेक्स (GPI 2026) की हालिया रिपोर्ट और उसमें भारत की स्थिति का विवरण:
​ग्लोबल पीस इंडेक्स (GPI 2026) के मुख्य बिंदु
​यह इंडेक्स Institute for Economics & Peace (IEP) द्वारा जारी किया जाता है, जिसमें 163 देशों को सुरक्षा, आंतरिक व बाहरी संघर्ष और सैन्यीकरण के आधार पर मापा जाता है।
​1. सबसे शांत देश (Top 5)
​आइसलैंड (लगातार सबसे शांतिपूर्ण देश)
​न्यूजीलैंड
​स्विट्जरलैंड
​स्लोवेनिया
​आयरलैंड
​2. सबसे कम शांत / अशांत देश (Bottom 5)
​रूस (चालू युद्ध और वैश्विक तनावों के कारण सबसे निचले स्थान पर)
​सूडान
​डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC)
​यूक्रेन
​इजराइल
​भारत और दक्षिण एशिया की स्थिति
​भारत की रैंकिंग: भारत 163 देशों में 127वें स्थान पर है। (2025 में भारत 115वें स्थान पर था)।
​गिरावट का कारण: सीमावर्ती क्षेत्रों में सैन्यीकरण और भू-राजनीतिक तनावों के कारण रैंकिंग पर असर पड़ा है।
​दक्षिण एशियाई पड़ोसियों का प्रदर्शन:
​भूटान: 16वां स्थान (दक्षिण एशिया में सबसे शांत)
​श्रीलंका: 67वां स्थान
​नेपाल: 111वां स्थान
​बांग्लादेश: 117वां स्थान
​भारत: 127वां स्थान
​पाकिस्तान: 152वां स्थान
​अफगानिस्तान: 157वां स्थान

“दुनिया में सबसे हिंसक समाज” की अवधारणा को मानवशास्त्र (Anthropology), इतिहास और समाजशास्त्र में अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखा जाता है:
​1. मानवशास्त्रीय अध्ययन (Anthropological Evidence)
​मानवशास्त्रियों और शोधकर्ताओं (जैसे स्टीवन पिंकर) के अनुसार, संगठित राज्य और कानून-व्यवस्था के अभाव वाले प्राचीन कबीलाई समाजों में प्रति व्यक्ति हिंसा और हत्या की दर आधुनिक समाजों की तुलना में काफी अधिक पाई गई है:
​वाओरानी (Waorani Tribe – अमेज़न): ईक्वाडोर के वर्षावनों में रहने वाले इस कबीले को ऐतिहासिक अध्ययनों में अत्यधिक हिंसक माना गया है। 20वीं सदी के मध्य तक इनकी लगभग 54% वयस्क पुरुष मौतें आपसी संघर्ष या हत्या के कारण होती थीं।
​यानोमामी (Yanomami Tribe): अमेज़न के जंगलों में रहने वाले इस समुदाय में अंतर-समूह युद्ध और प्रतिशोध (blood feuds) की परंपरा बहुत गहरी रही है, जहाँ लगभग एक-तिहाई पुरुषों की मृत्यु हिंसा में होती थी।
​प्रागैतिहासिक शिकारी-संग्रहकर्ता समाज: पुरातात्विक अवशेषों से पता चलता है कि संगठित राज्यों से पहले के समाजों में युद्धों और व्यक्तिगत हिंसा में मारे जाने वाले लोगों का प्रतिशत (कुल आबादी के अनुपात में) आधुनिक विश्व युद्धों से भी अधिक था।
​2. इतिहास के सबसे क्रूर साम्राज्य और समाज (Historic Civilizations)
​संगठित इतिहास की बात करें तो कुछ समाजों की पहचान उनके अत्यधिक हिंसक और आक्रामक व्यवहार से जुड़ी रही:
​एज़्टेक साम्राज्य (Aztec Empire): अपने धार्मिक अनुष्ठानों के तहत बड़े पैमाने पर नरबलि (Human Sacrifice) देने के लिए जाना जाता था।
​असीरियाई साम्राज्य (Assyrians): प्राचीन मेसोपोटामिया का यह साम्राज्य अपने दुश्मनों को खौफनाक सजाएं देने, अंग-भंग करने और मनोवैज्ञानिक डर फैलाने की रणनीतियों के लिए जाना जाता था।
​मंगोल साम्राज्य: 13वीं सदी में चंगेज़ खान और उसके बाद के शासकों के अभियानों के दौरान बड़े पैमाने पर नगरों का विनाश और सामूहिक नरसंहार हुआ।
​20वीं सदी के अधिनायकवादी शासन: नाज़ी जर्मनी (होलोकॉस्ट) और स्टालिनवादी सोवियत संघ के दौरान राज्य द्वारा नियोजित हिंसा ने इतिहास के सबसे बड़े नरसंहारों को जन्म दिया।
​3. आधुनिक समय का सामाजिक दृष्टिकोण (Modern Sociological Context)
​आज के दौर में समाजशास्त्री किसी समाज में हिंसा को नापने के लिए संगठित अपराध (Gangs/Cartels), प्रति 1 लाख आबादी पर हत्या दर (Homicide Rate) और गृहयुद्ध का विश्लेषण करते हैं:
​गैंग हिंसा से प्रभावित समाज: हैती, होंडुरास और वेनेजुएला जैसे क्षेत्रों में जब राज्य की सत्ता कमजोर हुई, तो गिरोहबंद हिंसा और कानूनविहीनता ने समाज को अत्यधिक असुरक्षित बना दिया।
​निष्कर्ष: यदि प्रति व्यक्ति मृत्यु दर के पैमाने पर देखा जाए, तो प्राचीन कबीलाई/राज्य-विहीन समाज सबसे अधिक हिंसक रहे हैं। वहीं यदि सामूहिक विनाश और नरसंहार की मात्रा के आधार पर मापा जाए, तो 20वीं सदी के तानाशाही साम्राज्य और आधुनिक युद्ध-ग्रस्त समाज आगे आते हैं।

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के संज्ञानात्मक मनोवैज्ञानिक (Cognitive Psychologist) स्टीवन पिंकर (Steven Pinker) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक “द बेटर एंजेल्स ऑफ अवर नेचर: व्हाई वायलेंस हैज़ डिक्लाइंड” (2011) में एक क्रांतिकारी सिद्धांत पेश किया।
​उनका मुख्य तर्क यह है कि आधुनिक दुनिया ऐतिहासिक रूप से मानव इतिहास का सबसे शांत और सबसे कम हिंसक दौर है। यद्यपि हमें मीडिया और खबरों के कारण ऐसा प्रतीत होता है कि दुनिया में हिंसा बढ़ रही है, लेकिन आबादी के अनुपात (per capita) में देखा जाए तो युद्ध, हत्या, दासता और क्रूर सजाओं में ऐतिहासिक रूप से भारी गिरावट आई है।

1. हमारे भीतर की “5 मुख्य शक्तियां” (The Better Angels)
​पिंकर के अनुसार, मनुष्य में हिंसा करने के प्रवृत्तियों के साथ-साथ कुछ ऐसी मानसिक और सामाजिक क्षमताएं भी हैं जो हिंसा को रोकती हैं। इन्हें उन्होंने “बेटर एंजेल्स” (हमारे भीतर के देवदूत) कहा है:
​सहानुभूति (Empathy): दूसरों के दर्द और दृष्टिकोण को समझने की क्षमता, जिसका विस्तार आधुनिक काल में केवल अपने कबीले तक सीमित न रहकर पूरे विश्व की मानवता तक हुआ है।
​आत्म-नियंत्रण (Self-Control): आवेगों (impulses) को रोकने और उनके परिणामों के बारे में सोचने की क्षमता।
​नैतिक भावना (Moral Sense): नियमों, अधिकारों और न्याय की सामाजिक व्यवस्था बनाना।
​सद्बुद्धि व तर्क (Reason/Rationality): हिंसा के चक्र को तर्क और बौद्धिकता के माध्यम से निरर्थक समझना।
​2. हिंसा घटने के 5 ऐतिहासिक ऐतिहासिक ऐतिहासिक कारण (Historical Drivers)
​पिंकर ने उन 5 प्रमुख ऐतिहासिक क्रांतियों/परिवर्तनों को चिह्नित किया जिन्होंने हिंसा में बड़ी गिरावट लाई:

 

3. पिंकर के सिद्धांत की प्रमुख आलोचनाएँ
​यद्यपि यह सिद्धांत बहुत लोकप्रिय हुआ, लेकिन कई इतिहासकारों और समाजशास्त्रियों ने इस पर सवाल भी उठाए:
​भविष्य की अनिश्चितता: आलोचकों का मानना है कि परमाणु हथियारों और जलवायु परिवर्तन के इस दौर में हिंसा भले ही बार-बार न हो रही हो, लेकिन यदि एक बार बड़ा युद्ध हुआ तो विनाश का पैमाना ऐतिहासिक रूप से सबसे बड़ा होगा।
​पश्चिमी दृष्टिकोण (Western-Centric): कुछ शोधकर्ताओं का तर्क है कि पिंकर का अध्ययन मुख्य रूप से पश्चिमी यूरोप और उत्तर अमेरिका के आंकड़ों पर अत्यधिक निर्भर है।
​निष्कर्ष: पिंकर का सिद्धांत हमें यह याद दिलाता है कि कानून-व्यवस्था, व्यापार, शिक्षा और मानवाधिकारों की मजबूत व्यवस्था ने समय के साथ दुनिया को पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित बनाया है।

दुनिया के सबसे गुस्सैल देशों की लिस्ट हुई जारी, टॉप 5 में 3 मुस्लिम देश

World Anger Hotspot: देशों के इमोशंस के आधार पर उनकी रैंकिंग निकालने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था गैलप ने गुस्सैल देशों की रैंकिंग निकाली है।

World anger hotspot country know where is India

आपने सबसे ज्यादा खुश रहने वाले, सबसे ज्यादा दुखी रहने वाले सबसे अमीर-गरीब देशों की लिस्ट के बारे में सुना होगा लेकिन क्या कभी आपने सबसे ज्यादा गुस्सा करने वाले देशों की लिस्ट के बारे में सुना है. जी हां, सबसे ज्यादा गुस्सैल देश। देशों के इमोशंस के आधार पर उनकी रैंकिंग निकालने वाली अंतर्राष्ट्रीय संस्था गैलप ने ऐसी ही एक रैंकिंग तैयार की है। जिसमें दुनिया के लगभग सभी देशों को रखा गया है।

कौन सा देश सबसे ज्यादा गुस्सैल
गैलप ने 100 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में लोगों की भावनात्मक स्थिति का पता लगाने के लिए वैश्विक शोद किया है। ये देखने के लिए कि उस देश के लोग दूसरे देशों की तुलना में कैसे हैं। इसके मुताबिक मुस्लिम बहुल उत्तरी साइप्रस सबसे ज्यादा गुस्सैल देश है। इसे आधिकारिक रूप से उत्तर साइप्रस तुर्की गणराज्य कहा जाता है। उत्तरी साइप्रस में 49 प्रतिशत लोगों का कहना है कि वो वर्तमान वैश्विक परिदृश्य और सामाजिक हालातों को देखते हुए सबसे गुस्से में हैं, वहीं 49 प्रतिशत लोग ऐसा नहीं मानते।

टॉप 5 में कौन से देश
इसके बाद मुस्लिम देश इराक दूसरे नंबर पर है। तीसरे नंबर पर ईसाई बहुल अर्मेनिया है, चौथे नंबर पर मुस्लिम देश जॉर्डन और पांचवे नंबर पर अफ्रीकी देश कांगो गणराज्य है।

भारत कितना गुस्सैल है?
इस रैंकिंग के मुताबिक भारत के 31 प्रतिशत लोगों का कहना है कि देश राजनीति, सामाजिक, आर्थिक बदलावों को देखते हुए गुस्से में है तो वहीं 65 प्रतिशत लोगों का कहना है कि देश में कोई गुस्सा नहीं है। वहीं पाकिस्तान की बात करें तो 36 प्रतिशत लोग मानते हैं कि देश के लोगों में गुस्सा है नाराजगी है वहीं 64 प्रतिशत लोगों का मानना है कि यहां पर कोई नाराजगी नहीं है।

सबसे कम नाराजगी कहां
गैलप की इस रिपोर्ट के मुताबिक सबसे कम नाराजगी वाले देशों में पहले नंबर पर वियतनाम है, यहां के 5 प्रतिशत लोगों का मानना है कि देश गुस्से में है, वहीं 95 प्रतिशत लोगों का कहना है कि यहां के लोगों में कोई गुस्सा नहीं है। वहीं दूसरे नंबर पर फिनलैंड, तीसरे पर एस्टोनिया, चौथे पर पुर्तगाल, पांचवे पर मैक्सिको था।

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