स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में MBBS प्रवेश,5 महिलाओं पर मुक़दमा

  1.  उत्तराखंड में फेक डॉक्यूमेंट्स के सहारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे से MBBS एडमिशन, 5 महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज

देहरादून में 5 महिलाओं के खिलाफ स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के फर्जी दस्तावेज बनाने के मामले में मुकदमा दर्ज किया गया.
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे के फेक डॉक्यूमेंट्स से MBBS में एडमिशन

देहरादून (उत्तराखंड) 14 सितंबर 2026: स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे का लाभ लेने के लिए संदिग्ध दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र तैयार कराने का मामला सामने आया है. इन प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल एमबीबीएस प्रवेश में कोटे का लाभ लेने के लिए किए जाने का आरोप है. मामले में जिलाधिकारी के आदेश के बाद जारी प्रमाणपत्रों और उनके लिए लगाए गए दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है. इसी जांच के दौरान 31 जुलाई 2026 से जुड़े कुछ आवेदन और दस्तावेज जांच के दायरे में आए हैं. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर राजस्व विभाग की ओर से देहरादून के रायपुर और क्लेमेंटटाउन थाने में कुल पांच महिलाओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है.

रायपुर में तीन महिलाओं पर मुकदमा: रायपुर थाने में राजस्व उपनिरीक्षक कंडोली जगदीश कुमार की तहरीर पर कुमारी खुशी, कुमारी परी और कुमारी स्वाति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. आरोप है कि तीनों ने कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रमाणपत्र के लिए आवेदन किया था. जिलाधिकारी के आदेश के बाद प्रशासन की ओर से कोटे से संबंधित प्रमाणपत्रों और आवेदनों के साथ लगाए गए दस्तावेजों का सत्यापन कराया जा रहा है. इसी प्रक्रिया के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई.

क्लेमेंटटाउन में दो महिलाओं पर मुकदमा: क्लेमेंटटाउन थाने में राजस्व उपनिरीक्षक भारूवाला डिंपल की ओर से उषा देवी और तृप्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है. शिकायत में दोनों के मामलों में कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रमाणपत्र बनवाने का आरोप लगाया गया है.

बता दें कि देहरदून निवासी प्रदीप बहुगुणा ने संदेहास्पद स्वतंत्रता सेनानी आश्रित प्रमाणपत्रों की खुद जांच करते हुए तथ्यों के साथ जिलाधिकारी को शिकायत दी थी. इसके बाद डजिलाधिकारी की तरफ से  अपर जिलाधिकारी और परगनाधिकारी स्तर से जांच कराई गई. जांच में सामने आया कि दस्तावेजों के आधार पर दर्ज पते में अभ्यर्थियों की मौजूदगी नहीं पाई गई. साथ ही एक ही एड्रेस पर कई अभ्यर्थी अलग-अलग पहचान के साथ दर्ज हैं. इससे साफ हुआ कि एमबीबीएस में प्रवेश पाने के लिए कुछ अभ्यर्थियों ने स्वतंत्रता सेनानी कोटे का लाभ उठाने के लिए फर्जी प्रमाण पत्रों का सहारा लिया है.

तथ्यों के साथ जिलाधिकारी तक पहुंची शिकायत, जांच कमेटी गठित

स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर दिए जा रहे लाभों में अनियमितता. पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा के बेटे प्रदीप बहुगुणा की है शिकायत.

उत्तराखंड में स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर धांधलेबाजी का खेल जारी है. ये सब तब है जब 1 साल पहले ही ऐसे मामलों का खुलासा होने के बाद मुख्यमंत्री ने खुद एसआईटी जांच के आदेश दिए थे. हैरानी की बात ये है कि सरकारी सिस्टम में ही फर्जी दस्तावेजों को स्वीकृति मिल रही है और फिर अधिकारियों की नाक के नीचे ही फर्जीवाड़ा करने वाले अभ्यर्थी इसका लाभ भी ले रहे हैं.

स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को मिलने वाला लाभ भी फर्जीवाड़े से अछूता नहीं रह गया है. स्थिति यह है कि अब स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर फर्जी दस्तावेज बनाकर सरकारी सिस्टम में मिलने वाले लाभ को भी जालसाज डकार रहे हैं. स्थिति यह है कि ऐसे हालातों का पता भी तब चल रहा है, जब स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित खुद इसका संज्ञान ले रहे हैं.

उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों पर डाका डालने का मामला तो पिछले कई सालों से चर्चाओं में भी रहा है और इसके कारण जांच के बाद कई लोगों को जेल भी जाना पड़ा है. लेकिन अब ताजा मामला स्टेट कोटा फ्रीडम फाइटर में एमबीबीएस में सीट पाने वालों के प्रमाण से शिक्षा व्यवस्था में फर्जीवाड़ा करने वालों की पैठ से जुड़ा हुआ है. इसमें स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रित होने का फर्जी दस्तावेज तैयार कर इसके नाम पर आरक्षण का लाभ लेने की कोशिश की जा रही है.

स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर धड़ल्ले से आश्रित प्रमाणपत्र
हैरत की बात यह है कि यह सब तब सामने आया है जब खुद स्वतंत्रता सेनानी के आश्रित ने इस पूरे प्रकरण को समझकर इसकी शिकायत की है.

प्रसिद्ध पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा के बेटे प्रदीप बहुगुणा ने इस मामले में जिलाधिकारी कार्यालय से लेकर चिकित्सा शिक्षा विभाग तक को 3 सितंबर भी चिट्ठी लिखी है. लेटर में डोमिसाइल सर्टिफिकेट की भी जांच करवाने को कहा गया है. खास बात यह है कि जांच के लिए लिखे गए इस पत्र में पांच अभ्यर्थियों के नाम समेत उनके प्रमाण पत्रों से जुड़े नंबर्स भी साझा किए गए हैं. विशेष यह है कि इस शिकायत के बाद जाकर सरकारी सिस्टम में बैठे अधिकारियों को यह पता चल पाया है कि इस तरह की कोई गड़बड़ी सरकारी सिस्टम में हो चुकी है।

प्रदीप बहुगुणा ने डीएम को दिया शिकायती पत्र (PHOTO- डीएम ऑफिस)
प्रदीप बहुगुणा कहते हैं कि,

मामले पर हमने देहरादून के जिलाधिकारी आशीष चौहान से भी बात की तो उन्होंने कहा कि,

पूरा मामला: यह पूरा मामला फिलहाल एमबीबीएस की सरकारी सीट के कोटे से जुड़ा हुआ है. इसमें स्वतंत्रता सेनानी के आश्रितों को 2 प्रतिशत का आरक्षण दिया जाता है और इसी का लाभ उठाने के लिए कुछ लोगों ने गलत तरीके से उत्तराखंड में दस्तावेजों को बनवाने का काम किया और उसके बाद सरकारी सीट को पाने की कोशिश की है.

मामले में मेडिकल एजुकेशन के निदेशक आशुतोष सायना ने 8 सितंबर को देहरादून जिलाधिकारी को चिट्ठी लिखकर मामले की गंभीरता को बताने की कोशिश की है. उन्होंने लिखा है कि,

मेडिकल एजुकेशन के निदेशक आशुतोष सायना ने लिखी चिट्ठी (PHOTO- डीएम ऑफिस)

चौंकाने वाली बात यह है कि करीब 1 साल पहले ही स्वतंत्रता सेनानी संगठन ने मेडिकल की सीटों में फर्जीवाड़ा होने और अवैध तरीके से कुछ लोगों द्वारा इन सीटों में आरक्षण का लाभ लिए जाने की शिकायत की थी. इसके बाद इस मामले की जांच के मुख्यमंत्री ने भी आदेश दिए थे. उस दौरान ऐसे मामलों की एसआईटी जांच के आदेश हुए थे. बड़ी बात यह है कि 1 साल बाद फिर इसी तरह का मामला सामने आया है और अब इस पर जिलाधिकारी ने जांच के आदेश देते हुए कमेटी का भी गठन कर दिया हैl

 

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