भोजशाला सिद्ध हुआ मंदिर, मुस्लिमों का मानने से इंकार,नमाज भी पढेंगें,सुको भी जायेंगें
मुस्लिम पक्ष को मिल सकती है जमीन, देवी की मूर्ति UK से वापस लाने का निर्देश… भोजशाला पर आए फैसले की 10 बड़ी बातें
मध्य प्रदेश के धार जिले में भोजशाला परिसर को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है जिसमें परिसर को देवी वाग्देवी का मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र माना गया है। अदालत ने मुस्लिम पक्ष की याचिकाएं निरस्त कर ASI की रिपोर्ट पर विश्वास किया।
धार भोजशाला परिसर को मध्य प्रदेश के हाईकोर्ट ने मंदिर बताया है
नई दिल्ली,15 मई 2026,मध्य प्रदेश के धार जिले में मौजूद भोजशाला परिसर पर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला परिसर हिंदू मंदिर माना है. कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की याचिकायें निरस्त कर दी । फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट के आधार पर हुआ है, जिस पर अदालत ने भरोसा जताया है.
भोजशाला मामले में अदालती निर्णय ने परिसर को देवी वाग्देवी मंदिर मान्यता दी है. मामले की संवेदनशीलता देख पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी हाई अलर्ट पर हैं. हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि मुस्लिम समुदाय चाहे तो धार जिले में नमाज को सरकार से अलग जमीन मांग सकता है.
भोजशाला-कमल मौला मस्जिद परिसर को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी डिवीजन बेंच ने ASI की रिपोर्ट को आधार मान साफ किया कि परिसर मूल रूप से देवी सरस्वती का मंदिर है.अदालत ने माना कि 11वीं सदी के इस स्मारक में संस्कृत शिक्षण केंद्र और मां वाग्देवी के मंदिर था.
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी
1. हाईकोर्ट ने फैसल में महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं. ASI की सर्वे रिपोर्ट पर भरोसा जता हाईकोर्ट ने भोजशाला परिसर को देवी वाग्देवी सरस्वती का मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र मानते हुए कहा कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और ASI की वैज्ञानिक जांच से सिद्ध है कि भोजशाला मूलत: राजा भोज के समय का संस्कृत अध्ययन केंद्र था.
2. हाईकोर्ट ने कहा कि पुरातत्व विज्ञान है और अदालत वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर निकाले गए निष्कर्षों पर सुरक्षित रूप से भरोसा कर सकती है. कोर्ट ने कहा कि उसने उपलब्ध ऐतिहासिक सामग्री, सर्वे रिपोर्ट और सभी पक्षों के तर्कों पर विचार किया है.
3. अदालत ने कहा कि हर सरकार का संवैधानिक दायित्व है कि वह प्राचीन स्मारकों, ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली संरचनाओं तथा धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित करे.
4. हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी केवल संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि तीर्थयात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना भी उनकी संवैधानिक जिम्मेदारी है.
5. हाईकोर्ट बेंच ने निर्णय में कहा कि विवादित स्थल पर हिंदू पूजा की निरंतरता कभी समाप्त नहीं हुई. अदालत ने माना कि ऐतिहासिक दस्तावेजों और साहित्य से स्थापित होता है कि विवादित क्षेत्र का मूल चरित्र भोजशाला था, जो परमार वंश के राजा भोज से जुड़ा संस्कृत शिक्षा केंद्र था.
6. हाईकोर्ट ने कहा कि विवादित भोजशाला-कमाल मौला मस्जिद परिसर एक संरक्षित स्मारक है, जिसे 18 मार्च 1904 से संरक्षित स्मारक का दर्जा प्राप्त है.
7. हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि इस क्षेत्र का धार्मिक चरित्र भोजशाला और देवी वाग्देवी सरस्वती मंदिर के रूप में स्थापित होता है.
8. हाईकोर्ट ने वर्ष 2003 में ASI के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें हिंदू पक्ष के पूजा अधिकारों पर प्रतिबंध लगा मुस्लिमों को शुक्रवार की नमाज की अनुमति दी गई थी. कोर्ट ने कहा कि 2003 का आदेश हिंदू पक्ष के अधिकारों को सीमित करता था, इसलिए उसे निरस्त किया जाता है.
फैसले को भोजशाला विवाद में एक बड़ा मोड़ माना जा रहा है. लंबे समय से हिंदू पक्ष दावा करता रहा है कि भोजशाला देवी सरस्वती का मंदिर और प्राचीन संस्कृत विश्वविद्यालय था, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है. ASI की हालिया सर्वे रिपोर्ट में भी परिसर के भीतर मंदिरनुमा अवशेष, मूर्तिकला और स्थापत्य संबंधी कई संकेत मिलने का उल्लेख था.
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि वैज्ञानिक और पुरातात्विक निष्कर्षों को दृष्टिविगत नहीं किया जा सकता. अदालत ने दोहराया कि देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का संरक्षण संवैधानिक भावना है और सरकारों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और ASI को भोजशाला परिसर के प्रबंधन और व्यवस्था पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है. पूरे परिसर का प्रशासन और प्रबंधन ASI ही करेगा.
‘ वहां नमाज पढ़ना जारी रखेंगे…’, धार शहर काजी बोले- भोजशाला के फैसले को SC में चुनौती देगा मुस्लिम पक्ष
धार भोजशाला विवाद पर MP हाई कोर्ट का बड़ा फैसला. ASI रिपोर्ट के आधार पर परिसर को मंदिर घोषित किया गया. अब शहर काजी वकार सादिक ने निर्णय पक्षपातपूर्ण बता सुप्रीम कोर्ट जाने की कही है।
शहर काजी वकार सादिक ने कहा- यह कलाम मौला मस्जिद है।
अदालत ने कहा कि ‘मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी’ मस्जिद निर्माण को आवेदन करे, तो राज्य सरकार जिले में अलग जमीन आवंटन पर विचार कर सकती है.
मुस्लिम पक्ष बोला- ASI की रिपोर्ट एकपक्षीय है
हाई कोर्ट के इस फैसले पर धार के शहर काजी वकार सादिक ने कड़ी आपत्ति जता कहा कि फैसला उन्हें स्वीकार्य नहीं है । वे इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे.
शहर काजी के मुख्य तर्क
काजी ने आरोप लगाया कि ASI की रिपोर्ट ‘बायस्ड’ (पक्षपातपूर्ण) है. सर्वेक्षण में मिले कई साक्ष्यों से आंख मूंदी गई और रिपोर्ट सिर्फ एक पक्ष को फायदा पहुंचाने को तैयार की गई.
नमाज का अधिकार
शहर काजी ने तर्क दिया कि 2003 का आदेश नमाज ‘कंटिन्यू’ करने को था, न कि शुरू करने को. यहां सैकड़ों सालों से नमाज हो रही है और वे नमाज पढ़ना जारी रखेंगें.
उन्होंने सवाल उठाया कि धारा 144 (या 163) लागू होने के बावजूद हिंदू पक्ष ने आतिशबाजी और नारेबाजी कैसे की ? पुलिस प्रशासन सिर्फ एक समुदाय के लिए कानून लागू कर रहा है.
ऐतिहासिक दस्तावेज
काजी ने दावा किया कि 1935 के गजट नोटिफिकेशन और मराठा स्टेट के रिकॉर्ड में भी इसे मस्जिद बताया गया है और आसपास की 12 किलोमीटर जमीन वक्फ बोर्ड संपत्ति है.
हिंदू पक्ष ने दी ‘केविएट’
भोजशाला परिसर को ‘वाग्देवी मंदिर’ घोषित किए जाने के ऐतिहासिक फैसले के बाद हिंदू पक्षकारों ने कानूनी मोर्चा संभाल लिया है. मुस्लिम पक्ष के फैसले को चुनौती देने की घोषणा के बीच हिंदू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में केविएट दी है. केविएट का मतलब कोर्ट को सूचित करना कि धार भोजशाला मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्णय को अगर कोई सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे तो केविएट से उनका पक्ष भी सुना जाए. कोर्ट कोई भी निर्णय लेने से पहले केविएटकार को भी सुने.
सुरक्षा के कड़े प्रबंध
फैसले की संवेदनशीलता देख धार जिले में सुरक्षा के अभूतपूर्व व्यवस्था की गई हैं. परिसर के आसपास 1,200 पुलिसकर्मी लगे हैं. नमाज और फैसले के समय के टकराव देख पूरा क्षेत्र बैरिकेड्स से सील किया गया था.
धार कलेक्टर राजीव रंजन मीणा ने साफ किया है कि सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट करने वालों पर NSA जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी.
धार भोजशाला के निर्णय पर BJP विधायक का बयान
इस मामले में भोपाल की हुजूर सीट से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा, कि ”सत्य कभी पराजित नहीं हो सकता. यह आज फिर से सिद्ध हुआ है. भारत के सनातन हिंदू धर्म पर लगातार आक्रमण हुए, मुगलों ने मंदिरों पर आक्रमणकारियों ने मंदिर तोड़े, वेद पुराण जलाए, लाखों हिंदुओं का रक्त बहाया गया, लेकिन अपने धर्म के लिए, अपने हिंदुस्तान के लिए, अपनी संस्कृति के लिए हिंदू फिर भी लड़ता रहा.
उन्होंने कहा कि धार भोजशाला को भी सनातनियों ने लंबी लड़ाई लड़ी है. न्यायालय पर हमारा विश्वास बना रहा कि यहां सत्य जीतेगा और आज इसी की जीत हुई है. मैं सनातन के लिए लड़ने वाले करोडों बलिदानी हिंदुओं को नमन करता हूं. यह सनातन की जीत है. हम आशा करते हैं कि मुसलमान भी सत्य स्वीकार करेंगे और जहां-जहां हिंदुओं के स्मृति चिन्ह है, जिन-जिन मंदिरों को मुगल लुटेरों ने तोड़ा है. उन्हे वापस कर हिंदुओं की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाएंगे.
क्या है भोजशाला विवाद?
यह विवाद राजा भोज निर्मित 11वीं सदी की भोजशाला को लेकर है. हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का मंदिर और संस्कृत विश्वविद्यालय मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद कहता है. ASI ने अपने सर्वेक्षण में पाया था कि मस्जिद का निर्माण मंदिर के अवशेषों और खंभों का पुन: उपयोग करके किया गया है।
नमाज नहीं, लंदन से आएगी वाग्देवी की मूर्ति, भोजशाला परिसर मंदिर है, एमपी हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
धार भोजशाल पर एमपी हाईकोर्ट की इंदौर बेंच का फैसला आ गया है। फैसले के बाद धार में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। वहीं, इंदौर हाईकोर्ट के बाहर भी काफी गहमागहमी है। हाईकोर्ट ने हिंदू पक्ष की याचिका को मान लिया है। साथ ही कहा है कि भोजशाला मंदिर है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने धार की कमाल मौला मस्जिद या भोजशाला विवाद में फैसला सुना दिया है। हिंदू पक्ष की मांग मंजूर करते हुए कोर्ट ने माना कि एएसआई की रिपोर्ट के आधार पर भोजशाला मंदिर है।इसके बाद धार और इंदौर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। फैसले पर हिंदू पक्ष ने खुशी जताई है। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि हम इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे।
Bhojshala Mandir Hai
भोजशाला वाग्देवी का मंदिर है
हिंदू पक्ष ने जाहिर की खुशी
वहीं, इस फैसले पर हिंदू फ्रंट ऑफ जस्टिस के विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले पर खुशी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि कोर्ट ने हिंदू पक्ष को पूजा करने की मंजूरी दी है। साथ ही उन्होंने कहा कि कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को कहा है कि मुस्लिम पक्ष चाहे तो सरकार उन्हें अलग से मस्जिद को जमीन दे सकती है।
हिंदू पक्ष की मांग मंजूर
जस्टिस विजय कुमार शुक्ला ने फैसले में हिंदू पक्ष की मांग मंजूर कर ली है। साथ ही हिंदू पक्ष को पूजा-पाठ की अनुमति दे दी है। पूरा भोजशाला परिसर हिंदुओं का होगा। वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कहा है कि हम फैसला स्वीकार नहीं करते ।

ये थे दोनों के पक्ष के दावे
दरअसल, भोजशाला के धार्मिक स्वरूप को लेकर लंबे समय से विवाद था। हिंदू पक्ष भोजशाला को मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौलाना मस्जिद बताता था। इसे लेकर हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर हुई थीं जिन पर लंबे समय से सुनवाई चल रही थीं। सभी पक्षों को 12 मई तक सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया ।
2024 में एएसआई ने की थी सर्वे की शुरुआत
वर्ष 2024 में हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) को भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद एएसआई ने करीब 98 दिनों तक परिसर और आसपास के क्षेत्र में विस्तृत सर्वे किया था। सर्वे के दौरान जीपीआर तकनीक, कार्बन डेटिंग, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी सहित कई आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया। परिसर में खुदाई कर मिट्टी के नमूने भी लिए गए थे। एएसआई ने अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की थी जिसके आधार पर दोनों पक्षों की लगातार सुनवाई हुई।
कलेक्टर की सौहार्द बनाए रखने की अपील
वहीं, धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने नागरिकों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की है। किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी या अफवाह फैलाने वालों पर कठोर कार्रवाई होगी।
इसके साथ ही धार पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा ने भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की है। पुलिस प्रशासन ने भोजशाला परिसर सहित पूरे शहर में अतिरिक्त पुलिस बल लगाया है। 1500 पुलिसकर्मी सुरक्षा व्यवस्था में लगे। इसके अलावा संवेदनशील इलाकों में पुलिस की विशेष निगरानी रही।
ये है टाइमलाइन
भोजशाला पर दोनों पक्ष अपना दावा ठोक रहे थे। सात अप्रैल 2003 को मामले में बड़ा फैसला आया कि हिंदू यहां हर मंगलवार को पूजा करेंगे। वहीं, मुस्लिम हर शुक्रवार को नमाज अदा करेंगे। शेष दिन यह पर्यटकों के लिए रहेगा। वे एक रुपए शुल्क देकर परिसर में जा सकते हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत में 1935 की उस प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बहस हुई, जिसके तहत तत्कालीन धार रियासत ने मुस्लिम समुदाय को परिसर में नमाज़ की अनुमति दी थी.
मुस्लिम पक्ष की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में रहा है और धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है.
वहीं हिंदू पक्ष ने शिलालेखों, स्थापत्य अवशेषों, ऐतिहासिक दस्तावेज़ों और वसंत पंचमी पर पूजा की परंपरा का हवाला देते हुए इसे मंदिर बताया.
मामले में जैन पक्ष भी अदालत पहुंचा और जैन याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि परिसर की स्थापत्य शैली राजस्थान के दिलवाड़ा जैन मंदिरों से मिलती है.
2022-23 में हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस ने इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर मांग की कि पूरे परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करवा हिंदू पक्ष को पूजा की अनुमति दी जाए। याचिका पर सुनवाई बाद 11 मार्च 2024 को हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने एएसआई को निर्देश दिए कि वह ज्ञानवापी की तरह भोजशाला परिसर का वैज्ञानिक सर्वे करें।
1935 से अब तक क्या-क्या हुआ
भोजशाला
• 1935
तत्कालीन धार रियासत ने प्रशासनिक व्यवस्था में मुस्लिम समुदाय को परिसर में नमाज़ की अनुमति दी. मौजूदा सुनवाई में इस व्यवस्था की वैधता पर भी बहस हुई.
• 1995
भोजशाला को लेकर दोनों पक्षों में विवाद के बाद प्रशासन ने मंगलवार को पूजा और शुक्रवार को नमाज़ व्यवस्था लागू की.
• 1997
तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में कुछ समय को लोगों की एंट्री पर रोक लगी और मंगलवार की पूजा पर भी प्रतिबंध लगाया गया.
बाद में हिंदूओं को वसंत पंचमी पर पूजा और मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को तय समय में नमाज़ की अनुमति दी गई.
• 1998
भारतीय पुरातत्व सर्वे ने परिसर में लोगों के प्रवेश पर अगले आदेश तक रोक लगा दी.
• 2003
मंगलवार को पूजा की अनुमति फिर से शुरू हुई. एएसआई की मौजूदा व्यवस्था में हिंदू समुदाय को मंगलवार और वसंत पंचमी पर पूजा तथा मुस्लिम समुदाय को शुक्रवार को नमाज़ की अनुमति दी जाने लगी. परिसर पर्यटकों को भी खोला गया.
• 2013
वसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ने पर धार में तनाव की स्थिति बनी. पुलिस को अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी.
• 2016
ऐसी ही स्थिति दोबारा बनी जब वसंत पंचमी शुक्रवार को पड़ी. इलाके में तनाव और सुरक्षा बंदोबस्त फिर बढ़ाए गए थे.
• 2022
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस और अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला के धार्मिक स्वरूप का निर्धारण और हिंदूओं को व्यापक पूजा अधिकार देने की मांग की गई.
• 2024
हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया.
• 2026
सुप्रीम कोर्ट ने वसंत पंचमी पर हिंदू पक्ष को पूरे दिन पूजा की अनुमति दी. इसके बाद अप्रैल और मई में हाईकोर्ट में लगातार सुनवाई हुई, जिसमें 1935 की व्यवस्था, एएसआई सर्वे रिपोर्ट और धार्मिक दावों पर बहस हुई. हाईकोर्ट ने 12 मई को सुनवाई पूरी होने पर फैसला सुरक्षित रख लिया.
भोजशाला को लेकर प्रशासनिक और सांप्रदायिक तनाव का इतिहास भी है. 2003, 2013 और 2016 में वसंत पंचमी और शुक्रवार एक ही दिन पड़ने पर धार में तनाव बढा और दोनों पक्षों में हिंसा भी हुई.तब स्थानीय प्रशासन को अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी थी.
22 मार्च 2024 को एएसआई की टीम ने भोजशाला परिसर में खुदाई और सर्वे शुरू किया।
मुस्लिम पक्ष ने अप्रैल 2024 में इसे रोकने की मांग की। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे से रोकने से मना कर दिया। साथ ही बिना सर्वे के स्मारक के धार्मिक स्वरूप में बदलाव नहीं किया जा सकता है।
15 जुलाई 2024 को एएसआई ने 2100 पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंप दी।
6 अप्रैल से शुरू हुई थी नियमित सुनवाई
6 अप्रैल 2026 से मामले की नियमित सुनवाई शुरू हुई थी जो 24 दिन चली। 12 मई को अंतिम सुनवाई बाद हाईकोर्ट पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया। हिंदू और मुस्लिम पक्षों ने दलीलें दी थीं। मुस्लिम वकील वरिष्ठ कांग्रेस नेता और वकील सलमान खुर्शीद थे।
उल्लेखनीय है कि सुनवाई में हिंदू पक्ष ने मजबूती से मंदिर होने के प्रमाण दिये जिन्हे मुस्लिम नकारते रहे हैं। मुस्लिमों ने एएसआई की सर्वे रिपोर्ट भी तथ्यहीन कही। सभी दलीलें सुन हाईकोर्ट ने मामले में 12 मई तक आखिरी सुनवाई की थी।

