कार्पोरेट जिहाद ‘बच्चा चाहिए तो पत्नी मेरे पास भेज दो…’, TCS नासिक पीड़ित ने बताई शैतानी बातें
नासिक के एक बीपीओ (TCS) कर्मचारी ने अपने साथियों पर धर्मांतरण के लिए प्रताड़ित करने का संगीन आरोप लगाया है. पीड़ित का कहना है कि उसे जबरन नमाज पढ़ने, कलमा बोलने और नॉनवेज खाने के लिए मजबूर किया गया. हद तो तब हो गई जब आरोपियों ने संतान न होने पर उसकी पत्नी को लेकर बेहद अश्लील और हैवानियत भरी टिप्पणी की. इस मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है.
नासिक की कंपनी में धर्मांतरण का खौफनाक खेल
दिव्येश सिंह
नासिक, 16 अप्रैल 2026, नासिक की प्रसिद्ध एमएनसी कंपनी (TCS BPO) के गलियारों से भयावह खबरों की एक और कडी. इसे सिर्फ एक दफ्तर का विवाद मत कहिए, यह सीधे – सीधे मानव अस्मिता और उसके विश्वास पर हमला है. एक पीड़ित कर्मचारी का विशिष्ठ बयान आत्मा छलनी करने वाली आपबीती है. पीड़ित का आरोप है कि उसके टीम लीडर्स ने उसे जबरन नमाज पढ़ने, कलमा बोलने और टोपी पहनने पर मजबूर किया. लेकिन शैतानियत तब पार हो गई जब पीड़ित की निजी जिंदगी का मजाक उड़ा आरोपित टीम लीडर ने सबके सामने कहा कि ‘इलाज से भी तुम्हारी पत्नी मां नहीं बन पाई, बच्चा चाहिए तो अपनी पत्नी मेरे पास भेजो.’
- पीड़ित के अनुसार यह मानसिक प्रताड़ना साल 2022 में शुरू हुई. जब उसने कंपनी जॉइन की।उसके टीम लीडर तौसीफ अत्तारी और साथी दानिश शेख ने उसे टारगेट पर ले लिया. टीम लीडर तौसीफ के पास ताकत थी । उसके निर्देश पीड़ित की मजबूरी थी . तौसीफ अक्सर अपना और दानिश का काम भी पीड़ित पर लादता ताकि वह थकान और काम के बोझ से दबा रहे. पीड़ित एक सीधा-साधा रामदास स्वामी भक्त है और नियम से रुद्राक्ष माला पहनता है. बस उसकी यही धार्मिक पहचान तौसीफ और दानिश की आंखों में चुभने लगी.
कंपनी में ही अधीनस्थ हिंदुओं को नीचा दिखाने को धार्मिक मजहबी बहस होती. काम के बीच में तौसीफ और दानिश उसे घेर कर हिंदू देवी-देवताओं का मजाक उड़ाते. वे सवाल करते कि ‘ तुम्हारे हिंदू धर्म में वाकई भगवान हैं? क्या कभी देखा है? भगवान जैसा कुछ नहीं होता, सिर्फ अल्लाह ही सच है.’
वे हिंदू मान्यताओं को किस्से-कहानियां बता महाराष्ट्र की आन-बान-शान रहे महापुरुषों तक के लिए घटिया शब्द इस्तेमाल करते. वे देवी-देवताओं के स्वरूप को लेकर ऐसी अश्लील बातें करते थे, जिन्हें सुनना किसी भी भक्त के लिए असहनीय था.
‘अपनी पत्नी मेरे पास भेज दो’- टीम लीडर
टॉर्चर सिर्फ जुबानी नहीं था, डराना-धमकाना भी प्रताड़ना का हिस्सा था. पीड़ित कट्टर शाकाहारी है, लेकिन तौसीफ और दानिश उसे रात की शिफ्ट बाद जबरन होटल ले जाते. वहां उसे डरा और दबाव डालकर नॉन-वेज खाने पर मजबूर करते. वह मना करता, तो उसके संस्कारों का मजाक उड़ाते. साल 2023 की ईद पर तौसीफ उसे अपने घर ले गया और जबरन उसे मजहबी टोपी पहनाई. जबरन नमाज पढ़वा फोटो खींचकर कंपनी के आधिकारिक ग्रुप में डाला ताकि मानसिक तौर पर पूरी तरह टूट जाए.
शैतानियत तब और बढी जब इन लोगों ने पीड़ित की निजी जिंदगी के घाव कुरेदने शुरू किये. पीड़ित और उसकी पत्नी के घर शादी के कई साल बाद भी संतान नहीं हुई थी. इस दुख का मजाक उड़ा तौसीफ और दानिश का कहा किसी भी सभ्य समाज को कलंक है. उन्होंने कहा कि ‘इतना इलाज कराने पर भी तुम्हारी पत्नी मां नहीं बन पाई तो अपनी पत्नी को मेरे पास भेज दो.’ यह सुनते ही पीड़ित के धैर्य का बांध टूट गया और कंपनी में भारी हंगामा हुआ. तौसीफ ने आपा खो पीड़ित पर टेबल फैन उठाकर फेंक दिया और उसे जान से मारने की धमकी दी.
पीड़ित के अनुसार तौसीफ, दानिश, शाहरुख और रजा मेमन का पूरा गुट सिर्फ उसे नहीं, बल्कि कंपनी की महिला कर्मचारियों को भी गंदी नजरों से नहीं बख्शता था. ये महिला सहकर्मियों के चरित्र पर भद्दे कमेंट्स करते.पीड़ित के पिता को पैरालिसिस का अटैक आया, तब भी इन लोगों ने उसकी लाचारी का सौदा किया और कहा कि वह इस्लाम कबूल कर ले, तो उसका बाप ठीक हो जाएगा. पीड़ित ने उनकी जी-हजूरी बंद कर दी, तो तौसीफ ने हेड ऑफिस में उसके खिलाफ झूठी रिपोर्ट्स भेजनी शुरू कर दीं ताकि उसे नौकरी से निकलवा सके.
साल 2022 से शुरू हुआ यह सिलसिला 23 मार्च 2026 तक जारी रहा. चार साल तक उस कर्मचारी ने कंपनी की चारदीवारी में जो नर्क झेला, उसका वर्णन रोंगटे खड़े कर देता है. तौसीफ अत्तारी, दानिश और उनके साथियों ने पहले तो पीड़ित से मेल-जोल बढ़ाकर करीबी बनाई, लेकिन जल्द ही उनका असली और खौफनाक चेहरा सामने आ गया. इस बीच उसे न केवल जबरन कलमा पढ़ने पर मजबूर किया, बल्कि उसकी आस्था के प्रतीक रुद्राक्ष की माला उतारने का भी भारी दबाव बनाया.
हर मोड़ पर पीड़ित का धर्म बदलने का सोस-समझा षड्यंत्र रचा गया. उद्देश्य उसे मानसिक रूप से इतना लाचार कर देना था कि वह टूटकर हार मान ले और कनवर्जन को तैयार हो जाए. पीड़ित ने इस कनवर्जन खेल और जबरन नॉन-वेज खिलाने का विरोध किया, तो उसे कंपनी में जानबूझकर निशाना बनाया जाने लगा. वे छोटी-छोटी बातों पर उससे झगड़ा करते और उसे उकसाने की कोशिश करते थे.
हालांकि, अत्याचार की भी एक हद होती है और आखिरकार पीड़ित ने अपनी खामोशी तोड़कर कानून का दरवाजा खटखटाया. अब उसने संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई की मांग कर शिकायत लिखाई है. पूरा मामला चीख-चीख कर गवाही दे रहा है कि कैसे कॉरपोरेट जगत की चमचमाती चकाचौंध के पीछे कनवर्जन और नफरत का घिनौना खेल खेला जा रहा था.
(इनपुट- प्रवीण ठाकरे)

