चार साल में आयेंगीं 35 करोड़ नई नौकरियां,

Jobs Junction35 Crore New Jobs Will Be Created Over The Next 4 Years A Report Says Textile And Logistics Sectors Will Highest Job Openings
4 साल में आएंगी 35 Cr नई नौकरियां, रिपोर्ट में बताया कहां-कितनी जॉब्स, स्टूडेंट्स को लेने होंगे बड़े फैसले
Job Trends 2030: आने वाले चार साल में जॉब मार्केट में कई बड़े बदलाव आने की उम्मीद है। ‘इंडिया डिडैक्टिक्स एसोसिएशन’ (IDA) की एक रिपोर्ट की मानें तो भारत में कई उभरते सेक्टर्स और इंडस्ट्रीज 2030 तक 35 करोड़ से ज्यादा नई नौकरियां आ सकती हैं। वहीं सिर्फ डिग्री रोजगार की गांरटी नहीं रह जाएगी। स्टूडेंट्स को किताबी ज्ञान के अलावा, प्रैक्टिकल नॉलेज और वेल स्किल्ड होना होगा।

बेहतर करियर का सपना देख रहे युवाओं के लिए अच्छी खबर है। एक रिपोर्ट में आने वाले 4 सालों में जॉब मार्केट में बड़े बदलाव की संभावना जताई है। भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेंटर में 2030 तक 35 करोड़ से ज्यादा नई नौकरियां आने का अनुमान लगाया गया है। ऑटोमेटिव, लॉजिस्टिक्स, टेलीकॉम, क्लीन एनर्जी, टेक्सटाइल और वाटर मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में स्किल्स की मांग सबसे तेजी से बढ़ रही है।

‘इंडिया डिडैक्टिक्स एसोसिएशन’ (IDA) की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक कई इंडस्ट्रीज में 35 करोड़ नई नौकरियां आएंगी। (फोटो सोर्स- Magnific)

‘इंडिया डिडैक्टिक्स एसोसिएशन’ (IDA) ने एक बयान में कहा कि रोजगार की संभावनाओं में इस भारी उछाल के साथ-साथ तेजी से स्किलिंग, प्रैक्टिकल टेस्ट और इंडस्ट्रीज व शिक्षा जगत के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत है। ऑटोमोटिव क्षेत्र में 2030 तक 20-25 लाख प्रत्यक्ष नौकरियां जुड़ने की उम्मीद है। लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को उसी वर्ष तक 47 लाख और कुशल कामगारों की जरूरत होगी, जबकि टेलीकॉम क्षेत्र में 10 लाख नए जॉब रोल्स शामिल होने की संभावना है।

वहीं भारत के स्वच्छ ऊर्जा (क्लीन एनर्जी) की ओर बदलाव से 2030 तक 44 लाख से अधिक पूर्णकालिक (फुल-टाइम) नौकरियां पैदा होने की संभावना है। इसके अलावा, कपड़ा और परिधान (टेक्सटाइल और अपैरल) उद्योग में अगले तीन वर्षों के भीतर लगभग 2 करोड़ नई नौकरियां आने की उम्मीद है।

2030 तक जॉब मार्केट: कहां-कितनी नौकरियों का अनुमान
संभावित नई नौकरियों की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े के आधार पर टॉप 5 अलग-अलग सेक्टर में अनुमानित नौकरियां इस प्रकार हो हैं-

सेक्टर नई नौकरियां
टेक्सटाइल और अपैरल 2 करोड़
लॉजिस्टिक्स 47 लाख
क्लीन एनर्जी 44 लाख
ऑटोमोटिव और ईवी 20 लाख-25 लाख
टेलीकॉम 10 लाख

एसोसिएशन ने कहा कि क्योंकि बड़ी इंडस्ट्रीज के लीडर्स और शिक्षाविद इस चुनौती और अवसर दोनों को समझ रहे हैं, इसलिए भारत की शिक्षा और स्किल डेवलेपमेंट सिस्टम को नियोक्ताओं की बदलती जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में तेजी आ रही है।

सिर्फ डिग्री नहीं, स्किल्स भी जरूरी है
पीएम मोदी से लेकर यूजीसी के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार और कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि तेजी से बदल रहे जॉब मार्केट में अब सिर्फ डिग्री लेने से काम नहीं चलेगा। केवल डिग्री रोजगार की गारंटी नहीं है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि एजुकेशन सिस्टम अब योग्यता से हटकर स्किल्स पर ज्यादा शिफ्ट हो गया है। इसलिए स्टूडेंट्स को सिर्फ थ्योरी रटने के बजाय किसी न किसी प्रैक्टिकल स्किल में महारत हासिल करने पर फोकस करना चाहिए।

स्टूडेंट्स को सलाह दी जाती है कि वे कॉलेज या कोई संस्थान चुनते समय यह जरूर देखें कि वहां का इंडस्ट्री एक्सपोजर कैसा है। अपनी पढ़ाई के दौरान किताबी ज्ञान के अलावा इंटर्नशिप और लाइव प्रोजेक्ट्स के जरिए इंडस्ट्री की असल दुनिया को समझें और एक्सपीरियंस हासिल करें। आने वाले दिनों में जॉब मार्केट उन स्टूडेंट्स का स्वागत करने के लिए तैयार है, जो खुद को बदलती टेक्नोलॉजी के साथ अपडेट रखेंगे।

Universities And Colleges Must Look Beyond Awarding Degrees 2047 Viksit Bharat Depends On Today Education System
कॉलेजों का काम सिर्फ डिग्री देना नहीं, देश को असफलताओं से सीखने वाले Gen Z युवाओं की जरूरत- UGC पूर्व अध्यक्ष
UGC के पूर्व अध्यक्ष और NEP 2020 समीक्षा समिति के अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार का मानना है कि 2047 का विकसित भारत आज के एजुकेशन सिस्टम पर टिका है। क्योंकि तब आज के स्टूडेंट्स देश के विकास के लिए अहम फैसले ले रहे होंगे। वे देश का फाइनेंशियल सिस्टम संभालने वाले कॉस्ट अकाउंटेंट हो सकते हैं, या फिर वैज्ञानिक, शिक्षक या अन्य प्रोफेशनल्स हो सकते हैं।

यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों का काम सिर्फ डिग्री देने तक सीमित नहीं है, उन्हें इससे आगे बढ़कर सोचना होगा… यह कहना है UGC के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार का। उनका कहना है आज के स्टूडेंट 2047 में बड़े फैसले ले रहे होंगे और उनके फैसले इस बात निर्भर करेंगे कि आज का एजुकेशन सिस्टम कैसा है।
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पूर्व यूजीसी चेयरमैन प्रो. एम. जगदीश कुमार की फाइल फोटो। (फोटो सोर्स- X/mamidala90)

कॉलेजों का काम सिर्फ डिग्री देना नहीं
IIM-कलकत्ता के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष और यूजीसी (UGC) के पूर्व चेयरमैन एम. जगदीश कुमार हाल ही में ‘इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया’ (ICMAI) के नए उत्तीर्ण छात्रों को संबोधित कर रहे थे। यह कार्यक्रम ‘विकसित भारत के लिए जनरेशन-जी (Gen Z) को तैयार करना’ (Shaping Gen Z for Viksit Bharat ) विषय पर आयोजित किया गया था। इस प्रोग्राम के दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को केवल डिग्री देने वाले संस्थानों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘भारत का भविष्य आप जैसे युवाओं के हाथों में है, जिनकी संख्या लगभग 40 करोड़ है। देश और दुनिया भर में बहुत कुछ हो रहा है, लेकिन हमारे देश के करोड़ों ‘Gen Z’ युवा अभी अपनी पढ़ाई में लगे हैं, स्टार्टअप शुरू कर रहे हैं, नई तकनीकें विकसित कर रहे हैं और हमारे देश की अर्थव्यवस्था को बेहद मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं।’

देश के असफलताओं से सीखने वाले युवाओं की जरूरत है
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की समीक्षा समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर एम. जगदीश कुमार ने कहा कि जब भारत 2047 तक पहुंचेगा, तब आज के छात्र लगभग 40-45 साल के होंगे। वे उद्यमी (entrepreneurs) हो सकते हैं, देश की वित्तीय व्यवस्था संभालने वाले कॉस्ट अकाउंटेंट हो सकते हैं, या फिर वैज्ञानिक, शिक्षक या अन्य पेशेवर हो हैं।

उन्होंने कहा कि यूजीसी के पूर्व चेयरमैन और आईआईटी (IIT) में प्रोफेसर रहने के अपने अनुभव से उन्होंने सीखा है कि किसी भी नीति की सफलता या विफलता संस्थानों की क्षमता पर निर्भर करती है। किसी संस्थान की सफलता के लिए नेतृत्व की गुणवत्ता और बदलती व्यवस्था के अनुसार खुद को ढालने की फैकल्टी सदस्यों की क्षमता बहुत जरूरी है।

प्रो. जगदीश कुमार का मानना है कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्र सिर्फ एक डिग्री लेकर ही नहीं, बल्कि अपने प्रैक्टिकल वर्क का एक पोर्टफोलियो लेकर ग्रेजुएट हों। इसमें कोई डिजाइन, प्रोजेक्ट, ओपन सोर्स में योगदान या समुदाय के साथ किया गया कोई काम शामिल हो सकता है।

उन्होंने कहा, ‘जब छात्र सामने आकर कहते हैं कि ‘मैंने यह सोचा, इसे डिजाइन किया, बनाया और टेस्ट किया; मैं असफल भी हुआ, लेकिन उस असफलता से मैंने सीखा और फिर खुद में सुधार किया’, तो ऐसे ही क्रिएटिव और इनोवेटिव स्टूडेंट्स की हमारे देश को तलाश है।’

 

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hindi NewseducationJobs JunctionFestive Gift For Freshers Job Seekers A Report Said Hiring Has Surged By 75 Percent With The Highest Number Of Vacancies In Delhi
नौकरी तलाश रहे फ्रेशर्स के लिए त्योहारों पर बड़ा गिफ्ट, अचानक 75% बढ़ी हायरिंग, सबसे ज्यादा वैकेंसी दिल्ली में
High Job Trends for Freshers: अगर आप ग्रेजुएट और जॉब तलाश रहे हैं, तो आपके यह लिए यह अच्छा मौका हो सकता है। क्योंकि एक रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में फेस्टिव-सीजन के दौरान फ्रेशर्स के लिए हायरिंग इटेंट 75% तक बढ़ी गई है। यह 2026 के शुरुआती महीनों के मुकाबले काफी ज्यादा है। 50% हायरिंग ट्रेंड के साथ दिल्ली सबसे ऊपर है।
Authored by: अमन कुमार
Updated: 24 Oct 2026, 5:30 pm IST|नवभारतटाइम्स.कॉम

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Jobs for Freshers on Festive Season: नौकरी तलाश रहे युवाओं को त्योहारों पर वो बड़ा गिफ्ट मिल सकता है, जिसका उन्हें बेसब्री से इंतजार है-एक अच्छी जॉब। दिवाली से पहले फ्रेशर्स की डिमांड में काफी तेजी से बढ़ रही है। एक ताजा रिपोर्ट बताती है कि भारत में 2026 के पहले 6 महीनों के मुकाबले फ्रेशर्स की हायरिंग इंटेंट बढ़कर 75% पहुंच गई है।
High Job Trends for Freshers
सांकेतिक तस्वीर। (फोटो सोर्स- Pexels)

दरअसल, टीमलीज एडटेक ने हाल में भारत में 2026 के जॉब ट्रेंड को लेकर ‘करियर आउटलुक रिपोर्ट (HY2 2026)’ जारी की है। इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत में आगामी त्योहारों के सीजन की वजह से डिजिटल एडवर्टीजमेंट, मार्केटिंग और एड-टेक सेक्टर में फ्रेशर्स की डिमांड तेजी से बढ़ी है।

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फ्रेशर्स की हायरिंग 75% बढ़ी
2026 के ही शुरुआती महीनों के मुकाबले अब त्योहारों से ठीक पहले ग्रेजुएट फ्रेशर्स की हायरिंग में तगड़ा इजाफा हुआ है। रिपोर्ट बताती है कि भारत में सभी फील्ड्स को मिलाकर फ्रेशर्स की हायरिंग इंटेंट बढ़कर 75% तक पहुंच गई है, जो साल के शुरुआत 6 महीनों में 73% तक ही पहुंच पाई थी।

सबसे ज्यादा इन क्षेत्रों में दिखा उछाल
त्योहारों से ठीक पहले जिन क्षेत्रों में फ्रेशर्स के लिए जॉब के मौके बढ़े हैं, उनमें मार्केटिंग और एडवरटाइजिंग सेक्टर सबसे ऊपर है। जो ऑनलाइन कैंपेन, डेटा और विज्ञापन प्लेटफॉर्म के साथ काम कर सकें। इससे युवा प्रोफेशनल्स के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।

जॉब ट्रेंड देखें तो, मार्केटिंग और विज्ञापन क्षेत्र के 59% नियोक्ता 2026 की दूसरी छमाही (साल के सेकेंड हाफ में) में फ्रेशर्स को काम पर रखने का प्लान बना रहे हैं। यह आंकड़ा साल की पहली छमाही में दर्ज किए गए 62% से थोड़ा कम है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, विशेष एंट्री-लेवल (शुरुआती स्तर के) पदों की मांग यह दर्शाती है कि डिजिटल विज्ञापन प्लेटफॉर्म, कैंपेन के प्रदर्शन और ऑडियंस एंगेजमेंट (दर्शकों की भागीदारी) की व्यावहारिक जानकारी रखने वाले प्रोफेशनल्स की कितनी अहमियत है।

इन पदों पर ज्यादा हायरिंग
रिपोर्ट में बताया गया है कि ‘प्रोग्रामेटिक एडवरटाइजिंग एसोसिएट’ और ‘डिजिटल मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव’ – ये दोनों पद देश भर में फ्रेशर्स के लिए टॉप पांच पदों में शामिल हैं। इससे पता चलता है कि नियोक्ता ऐसे एंट्री-लेवल उम्मीदवारों को काम पर रखने में रुचि रखते हैं, जिन्हें डिजिटल विज्ञापन की समझ है।

जॉब ट्रेंड से पता चलता है कि वर्तमान में डिडिटल विज्ञापन, कैंपेन ऑप्टिमाइजेशन, ऑडियंस टार्गेटिंग, मीडिया प्लानिंग, सर्च इंजन मार्केटिंग, सोशल मीडिया मार्केटिंग, एड परफॉर्मेंस एनालिटिक्स और डेटा एनालिसिस जैसे जॉब्स रोल्स की ज्यादा डिमांड है।

सबसे ज्यादा वैकेंसी दिल्ली में
करियर आउटलुक रिपोर्ट के मुताबिक, इन दिनों सबसे ज्यादा हायरिंग इंटेंट के मामले में दिल्ली सबसे ऊपर है। इसके बाद मुंबई में फ्रेशर्स को अच्छे मौके मिल रहे हैं। दिल्ली में ‘प्रोग्रामेटिक एडवरटाइजिंग एसोसिएट’ (Programmatic Advertising Associate) का पद फ्रेशर्स के लिए सबसे ज्यादा मांग वाला रोल बनकर उभरा है, जिसमें 50% नियोक्ता भर्ती करने की योजना बना रहे हैं।

वहीं, मुंबई में ‘डिजिटल मार्केटिंग एग्जीक्यूटिव’ (Digital Marketing Executive) का पद सबसे आगे है, जिसके लिए 48% नियोक्ता भर्ती करने की योजना बना रहे हैं। बता दें कि यह रिपोर्ट मई और जुलाई 2026 के बीच भारत के विभिन्न इंडस्ट्रीज और शहरों की 1,097 कंपनियों से मिले आंकड़ों पर आधारित है।

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