पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी में सुको ने निरस्त की PIL
पैगंबर मोहम्मद पर कथित टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की PIL, सोशल मीडिया गाइडलाइन पर ये कहासुप्रीम कोर्ट ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के प्रसार को रोकने और सोशल मीडिया गाइडलाइन बनाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी. कोर्ट रूम में क्या कुछ हुआ जानिए.
पैगंबर मोहम्मद पर कथित टिप्पणी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की PIL, सोशल मीडिया गाइडलाइन पर ये कहापैगंबर टिप्पणी विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: सोशल मीडिया गाइडलाइन की मांग वाली PIL खारिज, कही यह अहम बातदिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ एक सोशल मीडिया इंफ्लूएंसर द्वारा कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के प्रसार को रोकने और सोशल मीडिया पर ऐसे कंटेंट के नियमन के लिए दिशा-निर्देश जारी करने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी है. जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान मौखिक रूप से कहा कि ऐसी याचिकाओं का उद्देश्य मामला सनसनीखेज बनाना प्रतीत होता है. अदालत ने स्पष्ट किया कि यह ऐसा मामला नहीं है, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट का अधिकार क्षेत्र लागू हो.
कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वकील ने दलील दी कि एक पॉडकास्ट में की गई कथित टिप्पणियों से एक धार्मिक समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर ऐसे मामलों को नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट संवैधानिक व्यवस्था नहीं है और इस विषय पर अदालत को दिशा-निर्देश तय करने चाहिए.
इस पर जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा कि हम आपकी बात समझते हैं, लेकिन अनुच्छेद 32 के तहत दायर की जाने वाली याचिकाओं का उद्देश्य कुछ और होता है.
वहीं जस्टिस आलोक अराधे ने पूछा कि क्या याचिकाकर्ता को सूचना प्रौद्योगिकी (प्रक्रिया एवं सुरक्षा उपाय) नियम, 2009 की जानकारी नहीं है.
क्या है मामला?
जून में एक पॉडकास्ट के दौरान पैगंबर मोहम्मद और उनके परिवार के संबंध में कथित आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं. इन टिप्पणियों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनके खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में कई एफआईआर दर्ज की गई.
याचिका में केंद्र सरकार, गृह मंत्रालय, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), यूट्यूब, फेसबुक, एक्स (X) और इंफ्लूएंसर को को पक्षकार बनाया गया था.
इसमें धार्मिक पूजनीय व्यक्तियों के खिलाफ कथित अपमानजनक सामग्री के प्रसार को रोकने के लिए दिशा-निर्देश बनाने, सोशल मीडिया पर ऐसे कंटेंट के दुरुपयोग को रोकने तथा कथित आपत्तिजनक वीडियो और पोस्ट को हटाने के निर्देश देने की मांग की गई थी. गौरतलब है कि इससे पहले भी सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर जल्द सुनवाई से इनकार करते हुए कहा था कि याचिकाकर्ता उपलब्ध आपराधिक और अन्य वैधानिक उपायों का सहारा ले सकता है.
पैगंबर मोहम्मद पर आपत्तिजनक टिप्पणियों का मामला पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, जानें अदालत ने क्या कहा
6 जुलाई 2026। सुप्रीम कोर्ट में पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले को लेकर याचिका दायर की गई है. कोर्ट ने इस पर जल्द सुनवाई से इनकार किया है और कहा है कि पहले प्राधिकरण में जाकर शिकायत दर्ज करवाएं.
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में पैगंबर मोहम्मद पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गई है. कोर्ट ने इस मामले में जल्द सुनवाई से इनकार किया है. कोर्ट ने कहा कि अदालत आने के बजाय याचिकाकर्ता को प्राधिकरण के पास शिकायत दर्ज करानी चाहिए. पहले कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए.अदालत तभी दखल देगी जब प्राधिकरण कानून के मुताबिक कार्रवाई नहीं करता. बता दें कि पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग की गई थी. याचिकाकर्ता की ओर से वकील ने कहा कि ये मामला देश के सांप्रदायिक सौहार्द को प्रभावित कर सकता है.
इस पर जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि पहले कानून के तहत उपलब्ध प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए. उन्होंने पूछा कि क्या आपने मामला दर्ज कराया है, पुलिस मौजूद है. हमारी व्यवस्था पर भरोसा रखिए. जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट सबसे बड़ी कोर्ट है और उसकी भूमिका निगरानी की है. यदि हर मामला सीधे शीर्ष अदालत में लाया जाएगा तो निचली संस्थाओं की भूमिका प्रभावित होगी.
उन्होंने यह भी कहा कि यह गंभीर मामला है और वह व्यक्तिगत रूप से ऐसे मुद्दों के प्रति संवेदनशील हैं, लेकिन निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन आवश्यक है. यदि संबंधित प्राधिकरण कार्रवाई नहीं करते तब सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया जा सकता है. साथ ही जस्टिस अमानुल्लाह ने कहा कि संवेदनशील मामलों में अनावश्यक सनसनी से बचना चाहिए और यदि किसी व्यक्ति ने कानून का

