सुप्रीम कोर्ट से उत्तराखंड हाईकोर्ट हल्द्वानी शिफ्ट करने का रास्ता साफ़
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड हाईकोर्ट को हल्द्वानी शिफ्ट करने का रास्ता साफ़ किया
नई दिल्ली 15 जुलाई 2026। सुप्रीम कोर्ट की मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तराखंड हाईकोर्ट को नैनीताल से शिफ्टिंग करने के मामले में एक बड़ा और निर्णायक फैसला सुनाया है. शीर्ष अदालत ने हाईकोर्ट के 4 मई 2024 के आदेश को पूरी तरह से निरस्त (सेट असाइड) कर दिया है, जिसमें हाईकोर्ट शिफ्टिंग करने के लिए एक जनमत संग्रह (रेफरेंडम) कराने की बात कही गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायिक स्तर पर इस तरह के जनमत संग्रह के आदेश पारित करना हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है.
सुप्रीम कोर्ट ने आज उत्तराखंड हाईकोर्ट के 2024 के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें हाईकोर्ट को नैनीताल से हल्द्वानी शिफ्ट करने को राज्य सरकार की ओर से वैकल्पिक ज़मीन देने के प्रस्ताव को ठुकरा दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ये मामले प्रशासनिक स्तर पर तय किए जाने चाहिए, न कि न्यायिक स्तर पर।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने आदेश दिया कि हल्द्वानी में हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग के लिए अलॉट की गई ज़मीन का कब्ज़ा जल्द से जल्द हाई कोर्ट को सौंप दिया जाए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि ज़मीन ट्रांसफर करने के बारे में 8 हफ़्ते के अंदर नोटिफिकेशन जारी किया जाना चाहिए।
सुनवाई में , जब यह बताया गया कि राज्य सरकार ने हल्द्वानी में हाईकोर्ट की नई बिल्डिंग बनाने को ज़मीन अलॉट की है तो बेंच ने कहा कि ज़मीन का कब्ज़ा “जैसी है, जहाँ है” (as is, where is) के आधार पर 6 हफ़्ते में हाई कोर्ट को सौंप दिया जाए।
जब यह बताया गया कि संबंधित ज़मीन से कुछ पेड़ हटाने होंगे तो CJI ने कहा कि ज़मीन का कब्ज़ा पेड़ों के साथ ही दिया जा सकता है।
यह अपील उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने दायर की थी, जिसमें उत्तराखंड हाईकोर्ट के 8 मई, 2024 के आदेश को चुनौती दी गई। उस आदेश में हाई कोर्ट ने हल्द्वानी के गोलापार में हाईकोर्ट बनाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव को यह कहते हुए ठुकरा दिया कि 26 हेक्टेयर ज़मीन में से लगभग 75% हिस्सा वन क्षेत्र है और कोर्ट नहीं चाहता कि इस प्रोजेक्ट के लिए पेड़ काटे जाएँ। इसके बजाय, हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वे एक महीने के भीतर ज़मीन का कोई ज़्यादा उपयुक्त टुकड़ा चुनें।
हाईकोर्ट ने नैनीताल से हाईकोर्ट को दूसरी जगह ले जाने के कई कारण भी बताए, जिनमें ट्रैफ़िक जाम, पर्याप्त मेडिकल सुविधाओं की कमी, खराब कनेक्टिविटी, रहने-सहने का ज़्यादा खर्च, वकीलों को रहने में होने वाली दिक्कतें और दूर-दराज़ के ज़िलों से आने वाले मुक़दमेबाज़ों को होने वाली परेशानियाँ शामिल थीं। कोर्ट ने निर्देश दिया था कि एक ऑनलाइन पोर्टल से वकीलों और सामान्य जनता की राय ली जाए और इस मामले की जाँच को एक कमेटी बनाई जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस विवादित फैसले को खारिज करते हुए कहा कि बुनियादी ढांचे और स्थान परिवर्तन से जुड़े मुद्दों को सुलझाने का एक तय प्रशासनिक तरीका होता है. यह आदेश हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश ऋतु बाहरी व न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ ने जारी किया था. हाईकोर्ट ने तब हल्द्वानी के गौलापार में चिह्नित की गई भूमि को हाईकोर्ट के लिए अनुपयुक्त ठहराया था.
2024 में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी थी और साथ ही प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था।
Case Title: HIGH COURT BAR ASSOCIATION V. STATE OF UTTARAKHAND., DIARY NO. – 22967/2024
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