ब्रह्माक्षत्रिय समुदाय से हैं कैप्टन स्मित मच्छर, हाथी, घोड़ा, तेतर, पोपट, बिच्छी..उपनाम भी हैं प्रचलन में
क्या है ‘स्मित मच्छर’ की जाति! मच्छर, हाथी, घोड़े, पोपट… क्यों रखे जाते हैं ऐसे सरनेम?
मुंबई 04 अक्टूबर 2026। फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 के 174 लोगों की जान बचाने वाले स्मित मच्छर की दुनियाभर में चर्चा हो रही है. सब की जुबान पर उनका ही नाम है. लेकिन उनके सरनेम को लेकर भी लोगों के मन में काफी उत्सुकता है. हर कोई जानना चाहता है कि आखिर ‘मच्छर’ सरनेम का मतलब क्या है. क्या सच में यही सरनेम है?
दुनियाभर में पिछले 2 दिनों से एक ही इंसान की चर्चा हो रही है, जिनका नाम है कैप्टन स्मित मच्छर. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तक हर किसी ने स्मित मच्छर की जमकर तारीफ की है. फ्लाईदुबई की फ्लाइट FZ1073 के 174 लोगों की जान बचाने वाले स्मित से पीएम मोदी ने वीडियोकॉल पर बातचीत की है. कैप्टन स्मित की बहादुरी के साथ-साथ इंटरनेट पर उनके सरनेम को लेकर भी लोगों के बीच खूब उत्सुकता नजर आ रही है. शुरुआत में इंटरनेट पर उनका नाम ‘स्मित मच्छार’ कहा गया लेकिन असल में उनका नाम स्मित मच्छर है. चलिए बताते हैं आपको इस ‘मच्छर’ सरनेम को लेकर क्या रहस्य है
क्या है ‘स्मित मच्छर’ की जाति!
ये सरनेम सुनकर अगर आपको थोड़ा अजीब लग रहा है तो आपको बता दें कि स्मित गुजरात से ताल्लुक रखते हैं. यहां मच्छर, हाथी, घोड़ा, तेतर जैसे कई सरनेम प्रचलन में हैं. गुजरात में ऐसे समुदाय कम हैं, लेकिन हैं. ये सरनेम गुजराती समुदायों जैसे नागर ब्राह्मण, ब्रह्मक्षत्रिय और लोहाना में पाए जाते हैं. समाजशास्त्रियों के अनुसार इनमें घोड़ा, मनकड़ (खटमल), मनकोड़ी (बड़ी चींटी, जैसे बढ़ई चींटी), पोपट (तोता), बिच्छी (बिच्छू), सियार, तेतर (तीतर) और हाथी जैसे नाम शामिल हैं. कैप्टन स्मित की बात करें तो वो गुजराती ब्रह्माक्षत्रिय समुदाय से हैं. वे इसकी हलारी शाखा से ताल्लुक रखते हैं. ऐसी पौराणिक मान्यता है कि यह नागर ब्राह्मणों और क्षत्रियों का मिश्रण हैं.
स्मित मच्छार अपनी पत्नी सोनल के साथ..
एयर इंडिया के पूर्व डायरेक्टर (ऑपरेशंस) का नाम कप्तान मनोज हाथी है. कप्तान हाथी कहते हैं, ‘मजाक अपने-आप बन जाता था. मैं बोइंग 747 पर टाइप-रेटेड था. साथी लोग कप्तान हाथी के जंबो जेट उड़ाने का मजाक नहीं रोक पाते थे. उस समय एयर इंडिया में कप्तान वाघ भी थे और होमी घोड़ा नाम के एक पारसी इनफ्लाइट सुपरवाइजर भी.’ वह बताते हैं कि वेस्ट में मेरे सरनेम पर ज्यादा ध्यान नहीं जाता. असल में यह उन भारतीय सरनेम में से एक है जिन्हें बोलना आसान है. ब्रिटेन में लोग मेरे नाम को रुडयार्ड किपलिंग की ‘द जंगल बुक’ के कर्नल हाथी से जोड़ते थे, इसलिए उन्हें याद रखना आसान लगता था. भारत में कुछ लोग पूछते थे, ‘आपका सरनेम हाथी कैसे है जब आप इतने पतले हो?’ अब वजन बढ़ने के बाद वे कहते हैं कि नाम के अनुरूप हो गए हो.’
समाजशास्त्रियों की मानें तो ‘मच्छर’ सरनेम मुख्य रूप से दो बड़े समुदायों लोहाना और नागर ब्राह्मण में देखने को मिलता है. इनमें से लोहाना समुदाय का मूल संबंध कच्छ तथा पाकिस्तान के सिंध क्षेत्र से रहा है, जो व्यापार के सिलसिले में 19वीं सदी के दौरान मुंबई और आसपास के इलाकों में आकर बस गया. पाकिस्तान के कराची में आज भी एक मशहूर ‘मच्छर कॉलोनी’ है. हालांकि पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट का दावा है कि इस सरनेम का कनेक्शन ‘मच्छर’ से नहीं बल्कि मछुआरा समुदाय से है. समुद्र के किनारे बसने वाली ‘मछुआरा’ समुदाय के होने की वजह से ये ‘मच्छर’ कहलाए.
भूपेंद्र पटेल ने भारतीय पायलट स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की.
अहमदाबाद की ब्रह्मक्षत्रिय समुदाय की सदस्य भारती बिच्छी ने कहा कि ऐसे सरनेम बहुत ही कम हैं. वो अपने सरनेम के बारे में कहती हैं कि हमारे पूर्वजों ने बताया था कि हमारे पुरखे कीड़े-मकोड़ों के काटने का इलाज करने में माहिर थे, जिसमें बिच्छू का काटना भी शामिल था. इसलिए कीड़े को समुदाय से जोड़ दिया गया. जानवरों और कीड़ों के अलावा हमारे यहां भूत और जोगी जैसे सरनेम भी हैं.’
गुजराती लेखिका और अमेरिका में पढ़ी समाजशास्त्री विनोदिनी नीलकंठ ने गुजराती सरनेमों के बारे में खूब प्रमाणिक काम किया है. उनकी 1942 की किताब ‘गुजराती अटको नो इतिहास (गुजराती सरनेम का इतिहास)’ अभी भी इस विषय पर सबसे महत्वपूर्ण काम मानी जाती है. वे सरनेमों के बारे में लिखते हुए बताती हैं कि जो समूह किसी खास जानवर का सम्मान करते हैं या उसके सकारात्मक गुणों से अपनी पहचान जोड़ते हैं. उन्होंने ऐसे सरनेमों के बारे में लिखते हुए बताया कि कैसे किसी व्यक्ति की पहचान या उसकी दिखावट ही आगे चलकर पूरे परिवार की पहचान बन गई.

