मानहानि: राहुल गांधी ने शिवराजसिंह चौहान के बेटे से मांगी माफी
Rahul gandhi expresses regret in kartikey chouhan defamation case mp high court
शिवराज के बेटे के मानहानि केस में राहुल गांधी ने कोर्ट में जताया खेद
लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बेटे कार्तिकेय चौहान के मानहानि केस में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में लिखित खेद जताया है। पनामा पेपर्स बयान से जुड़े इस मामले में 25 जून को हाई कोर्ट में बड़ी सुनवाई है।
जबलपुर 24 जून 2026। लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय चौहान में मानहानि केस की सुनवाई मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में हुई। राहुल ने लिखित आवेदन में अपने पुराने बयान पर खेद जताया है। उन्होंने कहा- बयान कार्तिकेय के संदर्भ में नहीं था। उसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए।
सुनवाई जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ में हुई। कोर्ट ने राहुल गांधी के आवेदन पर कार्तिकेय सिंह चौहान से जवाब मांगा है। कोर्ट शिकायतकर्ता का पक्ष आने के बाद ही आगे का निर्णय लेगा। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को होगी। समझौते की संभावना बढ़ गई है।
राहुल गांधी बोले- कन्फ्यूजन में कार्तिकेय का नाम लिया
हाईकोर्ट में पेश आवेदन में राहुल गांधी ने कहा-उनका बयान शिकायतकर्ता के संबंध में नहीं था। भाषण में गलती से कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम आ गया था। विवादित बयान के अगले दिन राहुल गांधी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वे छत्तीसगढ़ के तत्कालीन CM रमन सिंह के बेटे अभिषेक का नाम लेना चाहते थे, लेकिन कन्फ्यूजन में कार्तिकेय का नाम ले लिया।
राहुल गांधी ने कहा था- पनामा पेपर्स में कार्तिकेय का नाम
चुनावी रैली में राहुल गांधी ने आरोप लगाया था कि पनामा पेपर्स लीक मामले में शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान का नाम शामिल है। पाकिस्तान के पूर्व पीएम नवाज शरीफ का नाम पनामा पेपर्स में आने पर उन्हें जेल हुई थी, लेकिन मध्य प्रदेश में कोई कार्रवाई नहीं हुई।

2018 के झाबुआ चुनावी भाषण से जुड़ा मामला
यह मामला 2018 के झाबुआ विधानसभा चुनाव प्रचार में राहुल गांधी के एक भाषण से जुड़ा है। कार्तिकेय सिंह चौहान का आरोप है कि कांग्रेस अध्यक्ष रहते राहुल गांधी ने चुनावी सभा में पनामा पेपर्स लीक प्रकरण का जिक्र करते हुए उनका नाम लिया था। शिकायत के अनुसार इससे उनकी प्रतिष्ठा और छवि को नुकसान पहुंचा।
एमपी-एमएलए कोर्ट में दायर हुआ था परिवाद
कार्तिकेय सिंह चौहान ने इसी में भोपाल की एमपी-एमएलए कोर्ट में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि का परिवाद दायर किया था। शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता संकल्प कोचर ने पैरवी की। सुनवाई बाद अदालत ने राहुल गांधी को व्यक्तिगत उपस्थिति को समन जारी किए थे।
समन को हाईकोर्ट में दी चुनौती

एमपी-एमएलए कोर्ट से समन और लंबित कार्यवाही को चुनौती दे राहुल गांधी मध्यप्रदेश High Court गये और निचली अदालत की कार्यवाही पर सवाल उठाए। साथ ही 25 जून की सुनवाई में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट की मांग भी की गई थी।
क्या है पनामा पेपर्स लीक
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने एक पुराने मानहानि मामले में बड़ा कदम उठाया है। राहुल गांधी ने अपने बयान पर लिखित में खेद व्यक्त करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में आवेदन दिया है। मामले में हाईकोर्ट की जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल की एकलपीठ गुरुवार को महत्वपूर्ण सुनवाई करेगी।
यह पूरा मामला केंद्रीय मंत्री और एमपी के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के बेटे कार्तिकेय सिंह चौहान के दायर मानहानि के परिवाद से संबद्ध है।
क्या है पूरा मामला? (क्यों हुआ था मुकदमा)
विवाद साल 2018 का है। झाबुआ की चुनावी सभा में राहुल गांधी ने ‘पनामा पेपर्स लीक’ प्रकरण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री के बेटे का नाम लिया था।
कार्तिकेय सिंह चौहान ने भोपाल की विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में परिवाद दायर कर कहा था कि इस बयान से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को गहरी क्षति पहुंची है।एमपी-एमएलए कोर्ट ने मामले पर संज्ञान ले राहुल गांधी को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने कौ समन किया था।
राहुल गांधी ने आवेदन में क्या कहा?
निचली अदालत के समन पर राहुल गांधी ने हाईकोर्ट चले गये। बुधवार सुनवाई में राहुल गांधी की ओर से अदालत में लिखित माफी दी गई ।
जताया खेद, बोले बयान उनसे संबंधित नहीं था
राहुल गांधी के आवेदन में कहा गया है कि उन्हें अपने उस बयान पर खेद है, यह स्पष्टीकरण भी दिया कि उनका वह बयान शिकायतकर्ता (कार्तिकेय चौहान) के संबंध में नहीं था।
आज की सुनवाई पर टिकी नजरें
एमपी-एमएलए कोर्ट में 25 जून को राहुल गांधी की व्यक्तिगत पेशी होनी थी, जिससे छूट पाने को उन्होंने हाईकोर्ट में अंतरिम आवेदन लगाया था। इस पर आंशिक सुनवाई के बाद कोर्ट ने विस्तृत सुनवाई को आज (गुरुवार) की तारीख तय की। शिकायतकर्ता की ओर से पैरवी अधिवक्ता संकल्प कोचर कर रहे हैं। कोर्ट के फैसले पर राजनीतिक और कानूनी गलियारों की निगाहें टिकी हैं।
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इसके पहले राहुल गांधी ने भोपाल MP-MLA कोर्ट के समन को हाईकोर्ट में चुनौती दी. मामला कार्तिकेय चौहान के मानहानि केस से जुड़ा है,जो 2018 के चुनावी बयान पर आधारित है.राहुल का कहना है कि बिना उनका पक्ष सुने मुकदमा किया गया.
राहुल गांधी की याचिका में मुख्य आपत्ति यह है कि उनके खिलाफ दर्ज मामले में अदालत ने उनका पक्ष सुने बिना ही संज्ञान ले समन जारी कर दिया. उन्होंने पूरी प्रक्रिया को चुनौती दी. मामला सिर्फ व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक बयानबाजी में भी महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है.
क्या है पूरा मामला
यह विवाद साल 2018 का है, जब राहुल गांधी ने चुनावी सभा में पनामा पेपर्स लीक का जिक्र करते हुए कार्तिकेय चौहान का नाम लिया था. इसी को आधार बनाकर कार्तिकेय चौहान ने भोपाल की MP-MLA कोर्ट में मानहानि मुकदमा किया था. मानहानि मामलों में अदालत पहले शिकायत पर संज्ञान लेती है और फिर आरोपित को समन जारी करती है. इसी प्रक्रिया में राहुल गांधी को भी समन भेजा गया था.
राहुल गांधी की आपत्ति क्या है
राहुल गांधी की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि निचली अदालत ने उनका पक्ष सुने बिना ही मुकदमा लिख लिया. उनका तर्क है कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है. उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक भाषणों को संदर्भ से काटकर आपराधिक मानहानि में बदलना लोकतांत्रिक विमर्श को खतरा हो सकता है.
राजनीतिक और कानूनी महत्व
देशभर में राहुल गांधी के खिलाफ कई मानहानि मामले अलग-अलग राज्यों में चल रहे हैं, जिनमें 2018 के राजनीतिक बयान प्रमुख आधार रहे हैं. ऐसे मामलों में अदालतें यह भी देखती हैं कि बयान व्यक्तिगत था या सार्वजनिक राजनीतिक टिप्पणी. यही बिंदु इस केस में भी निर्णायक भूमिका निभा सकता है. यह मामला सिर्फ एक व्यक्तिगत विवाद नहीं है, बल्कि यह तय करेगा कि चुनावी मंच से दिए गए बयान किस हद तक कानूनी जांच के दायरे में आते हैं. हाईकोर्ट का फैसला भविष्य में राजनीतिक भाषणों और मानहानि कानून के बीच संतुलन तय करने में महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है.

