श्रीराम मंदिर सीईओ
दिल्ली में चुना जाएगा राम मंदिर का सीईओ, 18 जुलाई तक आवेदन, क्या होगी योग्यता
‘अयोध्या में निवास, 20 साल का अनुभव और मैनेजमेंट…’ राम मंदिर की सीईओ के लिए क्या-क्या योग्यताएं?
राम मंदिर के कुशल मैनेजमेंट के लिए सीईओ की जल्द ही नियुक्ति होगी. शनिवार को दिल्ली में चयन समिति की बैठक के बाद राम मंदिर के सीईओ पद की पात्रता और योग्यताएं तय की गई हैं. इस पद के लिए 18 जुलाई 2026 तक आवेदन भेजे जा सकते हैं. सीईओ बनने के लिए उम्मीदवार का हिंदू होना अनिवार्य है, साथ ही एडमिनिस्ट्रेशन या फाइनेंस में 20 साल का लंबा अनुभव होना जरूरी है. शुरुआत में यह नियुक्ति 3 साल के लिए होगी और चयनित सीईओ को अयोध्या में ही रहना होगा.
दान चोरी के बाद प्रभु श्री रामलला के मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में कई बदलाव किए जा रहे हैं. चंपत राय से लेकर अनिल मिश्रा तक का इस्तीफा, कृष्ण मोहन का अंतरिम महा-सचिव चुना जाना- ये सभी फैसले 6 जुलाई को लिए गए थे. इसी दिन एक फैसला ये भी लिया गया था कि राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ के चयन के लिए एक हाई लेवल की चयन समिति का गठन किया गया. आज यानी शनिवार को इसी समिति का दिल्ली में बैठक आयोजित हुआ था. इसमें सीईओ पद के लिए जरूरी अर्हताएं जारी किया गया. जैसे कि राम मंदिर ट्रस्ट के सीईओ पद के लिए कौन आवेदन कर सकता है, क्या एजुकेशनल बैकग्रांउड होनी चाहिए.
राम मंदिर ट्रस्ट के लिए जल्द ही सीईओ चुना जाएगा.
सूत्रों से मिली ताजा और एक्सक्लूसिव जानकारी के अनुसार,इस पद के चयन के लिए दिल्ली में बैठक आयोजित की गई.इस बैठक में सीईओ पद के लिए आवश्यक नियमों,शर्तों और कड़ी योग्यताओं (Eligibility Criteria) का निर्धारण कर दिया गया है.राम मंदिर का प्रशासनिक ‘बॉस’ बनने को आवेदन की आखिरी तारीख भी तय हो चुकी है.
18 जुलाई तक कर सकते हैं आवेदन
राम मंदिर ट्रस्ट की नवगठित तीन सदस्यीय चयन समिति की दिल्ली में बैठक हुई. इस जिम्मेदारी से भरे पद के लिए इच्छुक और योग्य उम्मीदवार 18 जुलाई 2026 तक अपना आवेदन भेज सकते हैं. 18 जुलाई के बाद आने वाले आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा।
सीईओ बनने के लिए योग्यताएं?
राम मंदिर का मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनना कोई आसान बात नहीं है. यह पद सीधे तौर पर करोड़ों सनातन से जुड़ा है, तो किसी भी प्रकार से कोताही नहीं बरती जा सकती है. इस जिम्मेदारी के तहत मंदिर की सुरक्षा, वीआईपी मूवमेंट और भारी-भरकम वित्तीय बजट के प्रबंधन से जुड़ा है, इसलिए चयन समिति ने कठोर पात्रता मानक तय किए हैं:-
हिंदू होना अनिवार्य: इस पद के लिए पहली और सबसे महत्वपूर्ण शर्त यह है कि आवेदक का हिंदू धर्म से होना अनिवार्य है।
शैक्षणिक योग्यता: उम्मीदवार का किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम से कम ग्रेजुएट होना जरूरी है. उच्च शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों को प्राथमिकता मिल सकती है.
20 साल का प्रशासनिक/फाइनेंसियल अनुभव: आवेदक के पास प्रशासनिक या फाइनेंस क्षेत्र में काम करने का कम से कम 20 वर्ष का एक लंबा और बेदाग अनुभव होना चाहिए. आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) या कारपोरेट जगत के शीर्ष पदों से सेवानिवृत्त अधिकारी इस श्रेणी में फिट बैठ सकते हैं.
टेंपल मैनेजमेंट का अनुभव: उम्मीदवार के पास बड़े मंदिरों के प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव होना चाहिए, ताकि वह त्योहारों और विशेष अवसरों पर अयोध्या में उमड़ने वाली लाखों-करोड़ों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को कुशलतापूर्वक और बिना किसी अव्यवस्था के मैनेज कर सके.
तीन साल तक अयोध्या में ही रहना होगा
चयन समिति ने साफ कर दिया है कि यह नियुक्ति केवल तीन साल के कार्यकाल के लिए ही होगी. कार्य प्रदर्शन के आधार पर भविष्य में इस कार्यकाल को आगे बढ़ाया जा सकता है.इसके साथ ही,चयन प्रक्रिया पूरी होने पर नियुक्त होने वाले सीईओ को अनिवार्य रूप से अयोध्या में ही स्थायी निवास करना होगा, ताकि वे मंदिर की 24 घंटे की गतिविधियों पर अपनी सीधी नजर रख सकें.
सीईओ के काम के दबाव और उनकी सहायता को एक और विशेष अधिकार दिया गया है.राम मंदिर के नवनियुक्त सीईओ अपनी सहायता और प्रशासनिक कार्यों को सुगम बनाने को खुद एक सचिव (Secretary) नियुक्त कर सकेंगे।
राम मंदिर के CEO की क्या होंगी शक्तियां? कौन करेगा तय, सरकार की क्या भूमिका
राम मंदिर के CEO की क्या होंगी शक्तियां? कौन करेगा तय, सरकार की क्या भूमिका, नृपेंद्र मिश्रा ने सब बताया
अयोध्या राम मंदिर के पहले चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) की शक्तियों और अधिकारों को लेकर राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बड़ा खुलासा किया है. रविवार को उन्होंने स्पष्ट किया कि नए सीईओ की जिम्मेदारियां पूरी तरह से मंदिर ट्रस्ट तय करेगा और उनके कामकाज में सरकार का कोई भी दखल नहीं होगा. सीईओ का मुख्य काम वित्तीय व्यवस्थाओं की देखरेख करना और भक्तों का ट्रस्ट पर अटूट विश्वास बनाए रखना होगा. 6 जुलाई को सीईओ के चयन के लिए 3 सदस्यीय पैनल गठित कर दिया गया है. जानिए नृपेंद्र मिश्रा ने क्या बड़े खुलासे किए.
Ram Mandir New CEO Work and Power: राम मंदिर दान चोरी के बाद अयोध्या लगातार खबरों में है. दान चोरी, फिर एसआईटी की गठन, आरोपियों के खिलाफ एफआईआर, गिरफ्तारी, चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा. चोरी के पैसों की रिकवरी, राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक, चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे का स्वीकार होना, कृष्ण मोहन का अंतरिम महामंत्री चुना जाना. प्राण प्रतिष्ठा के बाद से पहली बार राम मंदिर प्रशासन बदलाव के दौर से गुजर रहा है. अब राम मंदिर के लिए सीईओ के चयन की प्रक्रिया तेज कर दी गई. सीईओ चुनने वाली कमेटी ने शनिवार को दिल्ली में आयोजित एक बैठक के बाद राम मंदिर के सीईओ के सारी अर्हताएं जारी कर दी थी. अब रविवार को राम मंदिर कंस्ट्रक्शन कमिटी के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने पहले चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) की जिम्मेदारियां और पावर को लेकर जानकारी दी.
राम मंदिर का पहला सीईओ कैसे करेगा काम? सरकार, ट्रस्ट या स्वतंत्र होगा?
राम मंदिर का पहला सीईओ जल्द ही चुन लिया जाएगा. सवाल उठने लगे हैं कि इतने बवाल के बाद भी ट्रस्ट का दबदबा बरकरार रह पाएगा? या मंदिर में आने वाले सीईओ के सारी दे दी जाएगी, आखिर सीईओ किसके अंडर में काम करेंगे. क्या सीईओ केंद्र या राज्य सरकार के अधीन होगा? उसकी पावर कहां से तय की जाएगी? इन सभी सवालों के जवाब आपको मिल जाएंगे. राम मंदिर कंस्ट्रक्शन कमिटी के चेयरमैन नृपेंद्र मिश्रा ने इसे लेकर मीडिया से बात की है.
सीईओ कैसे काम करेगा?
अयोध्या में मीडिया से बात करते हुए मिश्रा ने कहा, ‘नए सीईओ फाइनेंशियल व्यवस्थाओं की भी देखरेख करेंगे. राम मंदिर ट्रस्ट या सीईओ के कामकाज में कोई सरकारी दखल यानी कि सरकार दखल नहीं करेगी.’ उन्होंने ये भी बताया कि, ‘एक तरह से देखा जाए तो सीईओ ट्रस्ट के असिस्टेंट के तौर पर काम करेंगे, जिसमें सरकार का कोई दखल नहीं होगा.’ उन्होंने बताया कि ट्रस्ट को सीईओ की पोस्ट के लिए सही कैंडिडेट रिकमेंड करने के लिए तीन मेंबर का पैनल बनाया गया है.
ट्रस्ट सबकुछ तय करेगा?
मिश्रा ने बताया कि यह ट्रस्ट पर निर्भर करता है कि वह तय करे कि सीईओ के पास कितने अधिकार होंगे. अपने स्टाफ का इंतजाम करने के लिए कौन जिम्मेदार होगा, जबकि सब कुछ ट्रस्ट के दायरे में रहेगा.
तीन सदस्य वाली कमेटी चुनेगी सीईओ
6 जुलाई को ट्रस्ट ने सीईओ पद के लिए एक कमेटी का ऐलान किया था. इस कमेटी में जस्टिस (रिटायर्ड) प्रमोद कोहली, लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) विष्णुकांत चतुर्वेदी और एनआईटी रायपुर के पूर्व चेयरपर्सन सुरेश हवारे हैं. बीते शनिवार को इसी कमेटी ने दिल्ली में आयोजित बैठक के बाद राम मंदिर के सीईओ चयन को लेकर कई घोषणाएं किए. इसमें अर्हता से लेकर फॉर्म भेजनी की अंतिम तारीख तक बताए गए थे.
क्या नृपेंद्र मिश्रा भी सीईओ चुनने वाली कमेटी में शामिल होंगे?
मिश्रा ने कहा कि वह सीईओ के नामों की सिफारिश करने वाली समिति की बैठकों में शामिल नहीं होंगे. उन्होंने दावा किया कि अयोध्या में राम मंदिर आने वाले भक्तों से कोई शिकायत नहीं मिली है, और कहा कि उन्हें ज़्यादातर पॉजिटिव अनुभव ही मिले हैं. उन्होंने कहा, ‘अगर आप अंगद टीला और सुग्रीव किला के पास भक्तों से उनकी भावनाओं के बारे में पूछेंगे, तो मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि भगवान राम, मंदिर की व्यवस्था या यहां हो रही पूजा में उनकी आस्था को लेकर कोई शिकायत नहीं है.’
ट्रस्ट से मेरा कोई लेना देना नहीं
ट्रस्ट में संभावित बदलावों के बारे में मिश्रा ने कहा, ‘मेरी मौजूदगी में कोई फ़ैसला नहीं लिया गया. वह 6 जुलाई को ट्रस्ट की मीटिंग में शामिल नहीं हुए थे.’ जब उनसे पूछा गया कि क्या वह 22 जुलाई को होने वाली मीटिंग में शामिल होंगे, तो मिश्रा ने कहा, ‘मीटिंग 22 जुलाई को है, लेकिन मुझे एजेंडा नहीं पता. अगर मामला कंस्ट्रक्शन से जुड़ा है, तो मुझे मौजूद रहना होगा. कृपया समझें, हम बिना वोटिंग राइट्स के एक्स-ऑफिशियो डायरेक्टर हैं. हम जरूरी विषयों पर अपने विचार देते हैं. एजेंडा पता चलने के बाद, मैं तय करूंगा कि शामिल होना है या नहीं
