श्रद्धा के शव के टुकडे केस प्रॉपर्टी,हत्यारा आफताब कर रहा MA की तैयारी
35 टुकड़ों में कटी श्रद्धा वालकर को 4 साल बाद भी मुखाग्नि का इंतजार, केस प्रॉपर्टी बन मालखाने में सड़ रहे अवशेष
नई दिल्ली 12 जुलाई 2026। चार साल बीतने के बाद भी श्रद्धा वालकर हत्याकांड का ट्रायल अधूरा है और उसके अवशेष केस प्रॉपर्टी बनकर अदालत में फंसे हैं. इस कारण परिवार आज तक उसका अंतिम संस्कार नहीं कर सका. इस धक्के में श्रद्धा के पिता का भी निधन हो चुका है. अब आरोपित आफताब के परीक्षा का बहाना बनाकर सुनवाई टालने पर पीड़ित पक्ष की वकील सीमा कुशवाहा ने अप्रसन्नता जताई है और मामला दिल्ली हाईकोर्ट ले जाने का फैसला किया है.
न्याय की धीमी गति
मौत के बाद भी एक बेटी को चैन की नींद सोने नहीं दिया. चार साल बीत गए, श्रद्धा वालकर के कटे हुए अंग आज भी अदालती फाइलों और मालखाने के चक्कर काट रहे हैं. शरीर के वो 35 टुकड़े जो कभी किसी जल्लाद की पशुता का शिकार हुए थे, आज केस प्रॉपर्टी बनकर बंद कमरों में पड़े हैं. एक अभागा पिता अपनी ही बेटी की अस्थियों को मुखाग्नि देने की आस लिए सिस्टम से लड़ते-लड़ते खुद दुनिया से विदा हो गया, लेकिन श्रद्धा की आत्मा आज भी अपने अंतिम संस्कार के अधिकारों को अदालतों के चक्कर काट रही है. कोर्ट में ट्रायल चल रहा है.
आफताब की परीक्षा के बहाने टली सुनवाई
इस मामले में ताजा विवाद साकेत जिला अदालत की सुनवाई के दौरान सामने आया. दरअसल, अदालत ने केस के स्पीडी ट्रायल के लिए 20 जुलाई से 27 जुलाई तक रोजाना (डे-टू-डे) सुनवाई तय की थी, लेकिन ऐन वक्त पर आरोपी आफताब पूनावाला ने कोर्ट के सामने एक नया बहाना रख दिया. आफताब ने अदालत को बताया कि 20 जुलाई को तिहाड़ जेल स्थित इग्नू परीक्षा केंद्र पर उसकी एमए (समाजशास्त्र) की परीक्षा है. इसके बाद अदालत ने 20 जुलाई को होने वाली सुनवाई को टाल दिया और अगली तारीख 21 जुलाई तय कर दी. पीड़ित पक्ष की वकील सीमा समृद्धि कुशवाहा ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब परीक्षा की तारीखें बहुत पहले से तय होती हैं तो आरोपी ने यह बात कोर्ट को पहले क्यों नहीं बताई?
टूट गई पिता की सांसें
वकील सीमा कुशवाहा ने बताया कि इस वीभत्स हत्याकांड को 4 साल हो चुके हैं और पिछले 3 साल से इसका ट्रायल चल रहा है. इस लंबी देरी का सबसे दर्दनाक पक्ष यह है कि श्रद्धा के अवशेष अभी भी ‘केस प्रॉपर्टी’ के रूप में अदालत और पुलिस के पास जमा हैं. कानूनी प्रक्रियाओं से परिवार अपनी बेटी का अंतिम संस्कार तक नहीं कर पाया है. बेटी को खोने के गहरे सदमे और इंसाफ के लिए दर-दर भटकने की वजह से श्रद्धा के पिता भी अंदर से पूरी तरह टूट चुके थे. इसी गहरे मानसिक आघात के कारण फरवरी 2025 में हार्ट अटैक से उनका भी निधन हो चुका है.
हाईकोर्ट जाएगा पीड़ित पक्ष
पीड़ित पक्ष का साफ तौर पर आरोप है कि आरोपित आफताब पूनावाला और उसके वकील किसी न किसी बहाने हर बार सुनवाई को टालने की कोशिश कर रहा है ताकि मामला लंबा खींचा जा सके. बार-बार तारीख आगे बढ़ने और लोअर कोर्ट में हो रही देरी से परेशान होकर अब पीड़ित पक्ष ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है. वकील सीमा समृद्धि कुशवाहा के अनुसार इस मामले के तेजी से निपटारे और जल्द सुनवाई को अब वे दिल्ली हाईकोर्ट का रुख करने की तैयारी में हैं ताकि श्रद्धा की आत्मा को न्याय और उसके शारीरिक अवशेषों को सम्मान मिल सके।
श्रद्धा मर्डर केस: डेंटल चेकअप तो कभी एग्जाम, कैसे ट्रायल में देरी कर रहा है आरोपी आफताब
11 जुलाई को हमने दिल्ली की एक अदालत की आफताब को दी गई एक चौंकाने वाली रियायत का खुलासा किया, जिसमें उसे निर्धारित सुनवाई में अनुपस्थित रहने की अनुमति दी गई, ताकि वह तिहाड़ जेल से समाजशास्त्र में एमए की परीक्षा दे ।
श्रद्धा वालकर मर्डर केस का मुख्य आरोपित आफताब पूनावाला किसी न किसी बहाने से ट्रायल से बचने की कोशिश में है. दरअसल, आफताब के एग्जाम की वजह से कोर्ट की सुनवाई ही टाल दी गई है. हालांकि, ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब आफताब को रियायत मिली हो. कभी डेंटल चेकअप तो कभी एग्जाम को आफताब को कोर्ट से रियायतें मिलती रही हैं. हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा के मामले में अदालतें शुरू से राहत देती रही हैं.
श्रद्धा मर्डर केस का आरोपित इग्नू से सोशियोलॉजी पढ़ रहा है. 20 जुलाई को उसका एग्जाम है और इस एग्जाम को 20 जुलाई को होने वाली कोर्ट की सुनवाई टाल दी गई है. इस खबर के सामने आते ही लोगों ने सवाल उठाया कि देश के सबसे जघन्य हत्याकांड में से एक के मुख्य आरोपी को उसकी पढ़ाई के लिए के अदालती कार्यवाही में बदलाव की अनुमति क्यों दी जानी चाहिए?
एग्जाम के लिए टाली गई कोर्ट की सुनवाई
11 जुलाई को NDTV ने दिल्ली की एक अदालत द्वारा आफताब को दी गई एक चौंकाने वाली रियायत का खुलासा किया, जिसमें उसे निर्धारित सुनवाई में अनुपस्थित रहने की अनुमति दी गई, ताकि वह तिहाड़ जेल से समाजशास्त्र में एमए की परीक्षा दे सके.
सुप्रीम कोर्ट के वकील आशीष कुमार सिन्हा ने कहा कि परीक्षा के मामले में भारतीय अदालतें शुरू से ही राहत देती रही हैं . यहां तक कि किसी मामले के दोषी को भी ऐसी छूट दी जाती रही है. ये तो सिर्फ अभी आरोपी है. ठीक वैसे ही जैसे अनुच्छेद 21 के तहत जीने के अधिकार में सजायाफ्ता या विचाराधीन कैदी को पढ़ाई करने या परिवार में कोई अप्रत्याशित घटना होने पर राहत दी जाती है.
NDTV की एक जांच में अदालती रिकॉर्ड की जांच की गई और मामले से परिचित सूत्रों से बात की गई. इससे पता चला कि यह पहली बार नहीं है, जब आफताब के लिए मुकदमे में देरी हुई है या उसमें बदलाव किया गया है. 10 महीने पहले आफताब द्वारा डेंटिस्ट से परामर्श के लिए समय मांगे जाने पर कोर्ट की कार्यवाही स्थगित कर दी गई थी. यही नहीं, एक बार और अदालत ने एक निर्धारित मनोरोग परामर्श से संबंधित अनुरोध को भी स्वीकार कर लिया था.
श्रद्धा वालकर मर्डर केस
श्रद्धा वालकर मर्डर केस में 10 नवंबर, 2022 को एफआईआर दर्ज की गई थी.
मई 2023 में आरोप तय किए गए थे. तब से अब तक 215 से ज्यादा सुनवाई हो चुकी हैं.
इसके बाद भी अभियोजन पक्ष अभी भी सबूत पेश कर रहा है.
मामले में 13,000 से ज़्यादा पन्नों की चार्जशीट है.
क्यों धीमी हो रही कोर्ट की कार्यवाही?
ऐसी जानकारी भी मिली है, जिससे पता चलता है कि अदालती कार्यवाही इतनी धीमी क्यों रही है.
क्रॉस-एग्जामिनेशन (जिरह) इसकी एक बड़ी वजह है.
सूत्रों का कहना है कि बचाव पक्ष की पूछताछ अक्सर कई सुनवाईयों तक खिंच जाती है.
अभियोजन पक्ष के एक गवाह, जो एक हेड कांस्टेबल हैं, की जिरह पहले ही आठ अलग-अलग सुनवाईयों में हो चुकी है, और यह प्रक्रिया अभी भी जारी है.
बड़े केस के रिकॉर्ड से रिफेंसेस की पुष्टि करने में भी अदालत का काफी समय लगता है. इसी वजह से यह मुकदमा बेहद धीमी गति से आगे बढ़ रहा है.
न्याय का इंतजार कर रहा श्रद्धा का परिवार
इन सबके बीच आफताब अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई जारी रखे हुए है, परीक्षाओं और मेडिकल अपॉइंटमेंट के लिए रियायतें प्राप्त कर रहा है, जबकि श्रद्धा का परिवार लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहा है.
अब तक नहीं हो सका श्रद्धा का अंतिम संस्कार
श्रद्धा के पिता विकास वालकर का फरवरी 2025 में निधन हो गया था. मुकदमे की सुनवाई के दौरान श्रद्धा की दादी का भी निधन हो गया. श्रद्धा का अंतिम संस्कार अभी तक नहीं किया जा सका है।


