नंदा की चौकी पुल एप्रोच धंसाव: प्रारंभिक जांच में कंसल्टेंट और IIT रूड़की दोषी

देहरादून पुल धंसाव मामला: IIT और कंसल्टेंट की बड़ी चूक, जांच रिपोर्ट में खुले कई राज
नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड धंसाव मामले की जांच रिपोर्ट सौंप दी गई है, जिसमें डिजाइन में सुरक्षा उपायों की कमी पाई गई है। जांच में मुख्य जिम्मेदारी कंसल्टेंट और आईआईटी बीएचयू की तय की गई है, साथ ही लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों पर भी सवाल उठे हैं।
पुल के डिजाइन में सुरक्षा उपायों की कमी मिली।

मुख्य जिम्मेदारी कंसल्टेंट और आईआईटी बीएचयू की तय।

लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल।

देहरादून 01 अगस्त 2026 । नंदा की चौकी के पुल की एप्रोच रोड पर धंसाव मामले की जांच क्षेत्रीय मुख्य अभियंता दयानंद ने पूरी कर दी है। इसके साथ ही जांच रिपोर्ट शनिवार को उच्चाधिकारियों के सुपुर्द कर दी गई है। जांच रिपोर्ट में क्या-क्या दर्ज किया गया है, इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। लेकिन, सूत्रों के हवाले से जो बातें बाहर आई हैं, उसके अनुसार पुल की सुरक्षा के आवश्यक इंतजाम डिजाइन से गायब पाए गए।
पुराने पांवटा साहिब राजमार्ग पर टौंस नदी स्थित नंदा की चौकी का पुल 15 सितंबर 2025 की मध्य रात्रि को अतिवृष्टि के दौरान क्षतिग्रस्त हो गया था। लंबी कसरत के बाद इसका संचालन 12 जुलाई 2026 की सुबह तब शुरू किया गया, जब टौंस नदी की अस्थाई पुलिया तेज बहाव में ढह गई थी। कुछ दिन तो सब ठीक रहा, मगर 28 जुलाई की सुबह करीब पांच बजे पुल की एप्रोच रोड धंस गई। हालांकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सख्ती के बाद 12 घंटे में एप्रोच रोड का धंसाव दूर कर यातायात बहाल कर दिया गया था।
लेकिन, इस धंसाव के कारणों की पड़ताल और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्षेत्रीय मुख्य अभियंता को जांच सौंप दी गई थी।

जांच में उन्होंने पाया कि टौंस नदी का बहाव एकतरफा एप्रोच रोड की दिशा में होने से यह स्थिति पैदा हुई। इसके लिए काफी हद तक अस्थाई पुलिया के अवशेष भाग को न हटाया जाना और नदी क्षेत्र में बनी एक गौशाला को माना गया।
बताया जा रहा है कि जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि नदी की धारा पूर्व से ही असमान्य रूप से परिवर्तित थी। ऐसे में पुल के डिजाइन में इसको लेकर सुरक्षा के कोई प्राविधान नहीं किए गए थे। कंसलटेंट के डिजाइन को जब आइआइटी बीएचयू को परीक्षण के लिए भेजा गया तो वहां से भी इस दिशा में कोई सुझाव नहीं दिए गए और इसे उपयुक्त बता दिया गया। लिहाजा, प्रमुख रूप से कंसल्टेंट और आइआइटी की जिम्मेदारी तय की गई है।

अफसरों पर भी तय हो सकती है जिम्मेदारी
जांच रिपोर्ट सौंप दिए जाने के बाद यह कहा जाने लगा है कि पुल के डिजाइन को लेकर लोनिवि के जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका को दरकिनार नहीं किया जा सकता। क्योंकि, किसी भी डिजाइन पर अंतिम निर्णय अधीक्षण अभियंता या अन्य अहम अभियंताओं जैसे अफसरों का होता है। उन्हें तय करना होता है कि सुरक्षा के क्या-क्या इंतजाम डिजाइन में शामिल होने चाहिए। यह निर्णय अकेले कंसल्टेंट पर नहीं छोड़ा जा सकता।

जिस अतिवृष्टि से पुल टूटा, उसी को डिजाइन में जगह नहीं
यह बात किसी से छिपी नहीं है कि बीते मानसून में पुल किस तरह नदी के अत्यधिक तेज बहाव की भेंट चढ़ गया है। ऐसे में पुल के पुनर्निर्माण में इस दिशा में अतिरिक्त प्राविधान करने की जरूरत थी। लेकिन, जांच रिपोर्ट में इन्हीं उपायों का अभाव अधिकारियों की दूरदर्शिता को कठघरे में खड़ा करता है।
सुरक्षा दीवार आगे करने पर भी सवाल
इस दौरान एक बात यह भी निकलर आई कि टौंस नदी पर पुल क्षेत्र में बनाई गई पुरानी दीवार पीछे थी, जो नदी की वास्तविक चौड़ाई के हिसाब से थी। वहीं, पुल के पुनर्निर्माण के दौरान सुरक्षा दीवार को कई मीटर आगे कर दिया गया। इससे नदी की वास्तविक चौड़ाई भी प्रभावित हुई।

बताया जा रहा है कि नई दीवार के पीछे रास्तेनुमा जगह रह गई है जिसका प्रयोग आसपास के निर्माणों के लिए कराया जा सकता है। यदि ऐसा है तो यह भी गंभीर स्थिति होगी क्योंकि, नदी के कैचमेंट में इस तरह के परिवर्तन भविष्य में भी भारी पड़ सकते हैं।

कांग्रेस का आरोप:दो सड़कें, दो बड़े गड्ढे और एक ही परिवार से जुड़ी दो ठेकेदार फर्म?

नंदा की चौकी पुल एप्रोच रोड और मालदेवता सड़क टूटने को लेकर कांग्रेस ने सवाल खड़े किये हैं,
राजधानी देहरादून में मानसून की बारिश में सड़क टूटने और पुल की एप्रोच रोड धंसने की घटनाओं में दो बातें समान हैं. पहली- दोनों ही सड़कें मौसम की पहली बरसात भी नहीं झेल पाईं, और दूसरी- इन दोनों सड़कों को बनाने की जिम्मेदारी वैसे-वैसे तो अलग-अलग कंपनियों के पास है, लेकिन उन दोनों कंपनियों के डायरेक्टर के तार भाजपा से जुडते है. दोनों बातों को लेकर विपक्ष हमलावर है. कांग्रेस का सीधा आरोप है कि कंपनी के डायरेक्टर भाजपा महिला नेता के पति हैं.
28 जुलाई को देहरादून नंदा की चौकी पुल की एप्रोच रोड धंसी थी. पुल 16 करोड़ में बना था और 16 दिनों में ही उसकी ऐसी हालात हो गई. इस घटना के एक दिन बाद ही मालदेवता की सड़क पर बड़ा गड्डा बन गया, वो सड़क भी एक बरसात नहीं झेल पाई. दोनों परियोजनाओं के विभाग और कार्यदायी एजेंसियां अलग-अलग हैं. कंपनियां भी अलग-अलग है. लेकिन दोनों कंपनियों के साझेदारों का संबंध एक ही परिवार से जुड़ रहा है.

दो बड़े गड्ढे और एक ही भाजपा परिवार से जुड़ी दो ठेकेदार फर्म?
पहली घटना जानिए: देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में नंदा की चौकी पर बीते साल सितंबर 2025 में पुल बह गया था. यहां नए पुल का निर्माण करीब 16 करोड़ रुपए का लागत से किया गया. जिस दिन इस पुल का उद्घाटन हुआ, उसके ठीक 16 दिनों बाद ही यानी 28 जुलाई 2026 को नए पुल की एप्रोच रोड पर अचानक एक बेहद गहरा गड्ढा बन गया. इसलिए पुल की गुणवत्ता पर सवाल खड़ेे होना लाजिमी है. हालांकि, संबंधित विभाग ने 12 घंटे के अंदर ही एप्रोच रोड को सही कर पुल को चालू कर दिया था. पुल की जिम्मेदारी उत्तराखंड लोक निर्माण विभाग (PWD) के पास है. कार्यदायी एजेंसी PWD 9th Circle Dehradun है.

दोनों मामलों की जानकारी.
नंदा की चौकी पुल एप्रोच रोड:-

विभाग – लोक निर्माण विभाग (PWD)
कार्यदायी एजेंसी- PWD, 9th Circle Dehradun
परियोजना- पुल के पिलर, स्ट्रेंथनिंग, एप्रोच रोड व अन्य कार्य
लागत- लगभग 16 करोड़ रुपये
कार्य अवधि – दिसंबर 2025 से जून 2026
ठेकेदार फर्म- M/s Himalaya Construction
फर्म में साझेदार- रुचि भट्ट- 25 प्रतिशत (बाकी दो और हिस्सेदार हैं जिनकी 50 और 25 प्रतिशत हिस्सेदारी है).

दूसरी घटना: दूसरी घटना मालदेवता से सोंग बांध सड़क की है. यह सड़क भी 29 जुलाई 2026 को आई बारिश में एक तरह से खत्म हो गई. इस सड़क में बड़ा सा गड्ढा बन गया था. यह सड़क मई 2025 में बनी और एक बारिश नहीं झेल पाई.

मालदेवता की सड़क का हाल.
मालदेवता से सोंग बांध सड़क:-

विभाग- सिंचाई विभाग
कार्यदायी एजेंसी- PIU Song Dam
परियोजना- द्वारा ब्रिज से सोंग बांध तक 10 किलोमीटर डबल लेन सड़क निर्माण
लागत- लगभग 52 करोड़ रुपये
कार्य अवधि- जुलाई 2024 से मई 2025
ठेकेदार फर्म- M/s Doon Associate
फर्म में साझेदारी- अरविंद कुमार भट्ट- 50 प्रतिशत (बाकी दो और हिस्सेदार हैं जिनकी 30 और 20 प्रतिशत हिस्सेदारी है).
भाजपा कनेक्शन वाली समानता: पहली कंपनी Himalaya Construction, ने नंदा की चौकी पुल बनाया , उसमें भाजपा महिला मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष रुचि भट्ट 25 प्रतिशत की हिस्सेदार हैं.  दूसरी Doon Associate फर्म ने मालदेवता सोंग बांध सड़क बनाई है, उसमें अरविंद कुमार भट्ट की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत की है. अरविंद कुमार भट्ट, रुची भट्ट के पति हैं. दोनों कंपनियों में दोनों के आवासीय पते भी समान हैं.

अब विपक्ष इसे भ्रष्टाचार से जोड़ रही है. दोनों मामले सोशल मीडिया पर भी चर्चित है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व प्रदेश अध्यक्ष करण माहरा ने सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए बयान जारी किया है कि

उत्तराखंड में भाजपा भ्रष्टाचार के कीर्तिमान स्थापित करने में आगे बढ़ रही है. जीरो टारलेस का दावा करने वाली सरकार ने आज नया कारनामा कर दिया है. नंदा की चौकी पर 16 करोड़ की लागत से बना पुल जिसकी एप्रोज रोड धंस गई थी, उसमें उत्तराखंड भाजपा महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष के पति अरविंद भट्ट का नाम आ रहा है. दूसरा मालदेवता से सोंग बांध तक जो सड़क बनी है, उसकी हालत आपने देखी होगी. 52 करोड़ रुपए इस सड़क में लगा. इस रोड को भी जिस कंपनी ने बनाया है, उसमें भी बड़े हिस्सेदार अरविंद भट्ट है.
– करन माहरा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष उत्तराखंड कांग्रेस 

नंदा की चौकी पुल का हाल.

रुचि भट्ट की चुप्पी, भाजपा का जवाब: मामले पर भाजपा प्रवक्ता कमलेश रमन का कहना है कि,

नंदा की चौकी पुल पर घटना के तुरंत बाद सरकार ने यातायात बहाल कराया और जांच के आदेश दिए. मुख्यमंत्री स्वयं स्पष्ट कर चुके हैं कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी सामने आती है तो दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.
– कमलेश रमन, भाजपा प्रवक्ता –

भाजपा प्रवक्ता ने विपक्ष के आरोपों पर कहा कि किसी भी व्यक्ति को काम करने का अधिकार है. यदि किसी निर्माण में गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी या अनियमितता पाई जाती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होगी.

सरकार और विभाग क्या कह रहे हैं? ईटीवी भारत ने दोनों मामलों में संबंधित विभागों और अधिकारियों से भी जवाब लिया. लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज पांडे ने बताया कि नंदा की चौकी पुल एप्रोच रोड धंसने की घटना के तुरंत बाद जांच के आदेश दिए गए थे और रिपोर्ट जल्द प्राप्त होने की उम्मीद है.

कौन इसके लिए जिम्मेदारी, क्यों ये सब हुआ. मैने उस दिन सुबह ही मुख्य अभियंता देहादून को ये टास्क दिया था. उनसे कहा था कि वो खुद साइट पर जाए और शुरुआती जांच रिपोर्ट मुझे दे कि इसका कारण क्या लग रहा है. आगे क्या हो सकता है और कौन इसका जिम्मेदार है. जैसे ही हमे वो मालूम चलेगा हम उस पर भी कार्रवाई शुरू कर देंगे.
-पंकज पांडे, सचिव, लोक निर्माण विभाग-

वहीं, सिंचाई विभाग के PIU सोंग बांध के एजीएम प्रताप सिंह बिष्ट ने बताया कि मालदेवता-सोंग बांध सड़क धंसने की घटना के बाद भी जांच समिति गठित कर दी गई है, जो एक सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी.

10 किमी लंबी सड़क का निर्माण किया जा रहा है. इस सड़क पर अभी काम चल ही रहा है. 29 जुलाई को जो भारी बारिश आई थी, उसकी वजह से किमी 6 के सेक्शन एक में पहाड़ी से मलबा आया और नाली चोक हो गई. उसी वजह से एक जगह पानी एकत्र हो गया और दो जगहों पर पॉटहोल हो गया था.
-प्रताप सिंह बिष्ट, एजीएम, PIU सोंग बांध, सिंचाई विभाग-

फिलहाल दोनों मामलों की जांच जारी है और विभागीय रिपोर्ट का इंतजार है, लेकिन इतना जरूर है कि दो अलग-अलग विभागों की दो अलग-अलग परियोजनाओं में एक जैसे सड़क धंसने के मामले और दोनों निर्माण कंपनियों से एक ही परिवार के जुड़े होने का तथ्य अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है.

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