नागा बाबाओं का बसाया हुआ है देहरादून का नागाघेर गांव

“नागाघेर” सैकड़ों साल पुरानी हवेली है यहां नागा बाबाओं की।

रानीपोखरी ग्रामसभा में वैसे तो बहुत से उपगांव है किंतु नागाघेर विशेष रूप से ऐतिहासिक और विशेष है। यहां आज से पचास-साठ साल पहले तक नागा साधु रहा करते थे। पुराने बुजुर्ग बताते हैं कि यह पूरा गांव पहले नागाओं की ही संपत्ति थी और गांव में आकर बसे लोग उनकी हवेली, बगीचों और खेतों में काम कर उनको लगान दिया करते थे।

जमींदारी कानून लागू होने पर जो किसान जिस खेत पर काश्त करते थे, वह उनको ही प्रदान कर दी गई। चित्र में दिखाई दे रही हवेली आज भी सैकड़ों साल बाद शान से खड़ी है। आसपास के भवन थोड़ा रखरखाव के अभाव में खंडहर अवश्य हो गए हैं किंतु पुराने बुजर्गो की स्मृतियां आज भी नागा घेर के गौरवशाली इतिहास को संजोए हुए है।

अकाल, आपदा या किसी बाहरी आक्रमण आदि जैसी विपत्ति के समय सभी ग्रामीण हवेली पर अखाड़े में ही शरण लेते थे।

इस हवेली के पास एक बगीचा है जिसमें सैकड़ों साल पुराने आम के पेड़ हैं, इसमें एक प्राचीन मंदिर और एक जलाशय भी है, जो पूर्व में कुंवा होता था, उस कुंवे में दूर दूर के गांव से लोग पानी की किल्लत होने पर पानी लेने आया करते थे।

नागाघेर में सैनिक बस्तों रोड पर होली पर जो होलिका दहन होता है, उसकी अग्नि भी दशकों पहले नागा साधु घोड़ो पर दलबल के साथ जाकर जौलीग्रांट क्षेत्र से जीतकर लाए थे।

नागाघेर जाने वाली सड़क आज भी नागा अखाड़े के ही स्वामित्व में हैं। वहां हाईवे से थोड़ा ऊपर बगीचे के किनारे किनारे बनी पत्थरों की चार दीवारी उस दौर के मेहनत कश ग्रामीणों और समृद्ध कला की गवाही देती है।

काफी वर्षों से महापंचायती निर्वाणी नागा अखाड़ा की इस संपत्ति की देख रेख नागाघेर के ही खत्री परिवार द्वारा की जाती है। अखाड़े की संपति वैसे रानीपोखरी चौक से नीचे दोनाली वाले तिराहे पर भी है, जहां कई हेक्टेयर बगीचे में ट्यूबवेल भी लगा है। उस ट्यूबवेल से लगभग तिहाई रानीपोखरी पानी पीता है।

इस गांव में अधिकतर हिन्दू परिवार ही रहते हैं और विभिन्न जातियों ब्राह्मण, क्षत्रिय, दलित आदि सब मिलजुलकर एक दूसरे में सुख दुख में परिवार की तरह रहते हैं।

मुख्य रूप से यहां रावत, बिष्ट, नेगी, भट्ट, जायसवाल(कर्णवाल), शर्मा, वर्मा,कुकरेती, खत्री आदि उपनाम के ग्रामीण ज्यादा हैं। (किसी का उपनाम रह गया हो तो नाराज़ न होना)।

रानीपोखरी की अधिकतर मुख्य चीज़ें जैसे हाट बाजार, विद्युत वितरण केंद्र, पेट्रोल पंप , गैस एजेंसी आदि नागाघेर में ही है और नकारात्मक चीजों में कहूँ तो बहुत साल से दारू का ठेका भी यहीं है।

एक समय इसके पास चूना भट्ठा भी होता था, कोई जाखन पुल के आसपास जाता था तो बोला जाता था कि “भट्टे” पर जा रहा। हालांकि भट्टे पर जाने का मतलब चूना लेने नहीं बल्कि क्वार्टर लेने जा रहा होता था।😊

शांतिनगर तो बाद में बसा तो पूर्व में यहाँ एक “वीनस” सीमेंट फैक्टरी भी थी सड़क के किनारे ही, जिसमें इस समय “ली ग्रैंड” स्कूल है। उसे भी नागा घेर में ही माना जाता था।

सरकारी अस्पताल भी समझो नागाघेर में ही है।

रानीपोखरी ग्रामसभा के वार्ड 12 और 13 नागाघेर में आते हैं।इस गांव का नाम नागाघेर क्यों है, यह शायद ही अब लिखने की जरूरत पड़े।

 

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