सपा में कलह,चुस्की ले रही भाजपा
War between BJP MLA Ramveer and SP MP Ruchi Veera both level allegation regarding each other victories
UP: ‘हम 30 साल से कर रहे मेहनत…’, भाजपा विधायक और सपा सांसद में छिड़ी जुबानी जंग, एक-दूसरे की जीत पर आरोप
सपा की अंदरूनी कलह में भाजपा ने एंट्री की है। मुरादाबाद की कुंदरकी विधानसभा सीट से भाजपा विधायक रामवीर ने कहा कि सांसद ने पैसे के बल पर पाया टिकट और जीता चुनाव। वहीं, सपा सांसद ने पलटवार करते हुए कहा कि जनता जानती है भाजपा ने कैसे जीता कुंदरकी का चुनाव, इस बार मिलेगा जवाब।सपा की अंदरूनी कलह में भाजपा में एंट्री के बाद अब कुंदरकी से भाजपा विधायक रामवीर और सपा सांसद रुचि वीरा में जुबानी जंग छिड़ गई है। दोनों एक दूसरे की जीत पर आरोप लगा रहे हैं और अगले चुनाव में एक-दूसरे को आटे-दाल का भाव पता चलने का दावा कर रहे हैं। विधायक रामवीर ने बयान दिया है कि सांसद राजघराने से आती हैं।
पैसे के दम पर उन्हें 15 दिन में टिकट मिल गया और चुनाव भी जीत गईं। वहीं कमाल अख्तर और रुचि वीरा के विवाद पर उन्होंने कहा कि कमाल अख्तर सपा के पुराने नेता हैं। जब वह राज्य सभा गए थे, तब रुचि वीरा ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वह सांसद बनेंगी।
पिछला चुनाव उन्होंने किसी तरह जीत लिया, इस बार मेरिट के आधार पर चुनाव होगा तो आटे-दाल का भाव पता चल जाएगा। रामवीर ने कहा कि वह 30 साल से कुंदरकी क्षेत्र में मेहनत कर रहे हैं, इसका परिणाम जनता ने उन्हें उपचुनाव में दिया।
‘मैं अचानक सांसद नहीं बनी हूं’
इस पर पलटवार करते हुए रुचि वीरा ने कहा कि भाजपा विधायकों को उनकी लोकप्रियता से जलन होती है। सांसद ने कहा कि मैं अचानक सांसद नहीं बनी हूं, इससे पहले दो बार जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हूं। अपने ससुर के विषय में कहा कि वह विधायक और मंत्री रह चुके हैं।
‘सभी छह सीटों पर सपा के प्रत्याशी जीतेंगे’
राजनीति में कोई भी एक-एक सीढ़ी चढ़कर ही आगे बढ़ता है। जनता जानती है कि कुंदरकी का उपचुनाव खुली लूट का परिणाम है। प्रशासनिक मशीनरी के बल पर भाजपा ने चुनाव जीता। 2027 के चुनाव में इन्हें जवाब मिल जाएगा। सभी छह सीटों पर सपा के प्रत्याशी जीतेंगे।
दो दिन पहले नगर विधायक ने भी फेसबुक पर कसा था तंज
दो दिन पहले भाजपा के नगर विधायक रितेश गुप्ता ने भी फेसबुक पर पोस्ट कर तंज कसा था। उन्होंने लिखा था कि मुरादाबाद का झगड़ा सपा की असली तस्वीर उजागर कर गया। बिना सांसद रुचि वीरा को बताए पीडीए बैठक आयोजित करने पर अखिलेश यादव को लखनऊ में आपसी कलह निपटानी पड़ी।
नेताओं में जमकर हुई तू-तू-मैं-मैं और चीफ व्हिप पद से इस्तीफा दिलवाना दरअसल सपा की बेहद कमजोर स्थिति और बेबसी को दिखाता है। इस पर सपा सांसद ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा को सपा में इतनी दिलचस्पी क्यों है। उन्हें अपनी पार्टी और स्थिति देखनी चाहिए। सांसद ने कहा कि वह भाजपा विधायकों की तरह 500-700 वोट से चुनाव नहीं जीती हैं। सपा में तांक-झांक करना बंद करें।
सपा के चीफ व्हिप कमाल अख्तर ने अचानक क्यों दिया इस्तीफा, जानिए Inside Story
यूपी विधानसभा में सपा के चीफ व्हिप और कांठ विधायक कमाल अख्तर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. माना जा रहा है कि सांसद रुचि वीरा की नाराजगी, पीडीए पंचायत विवाद और संगठन के भीतर बढ़ती खींचतान के बाद यह फैसला लिया गया.
समाजवादी पार्टी के चीफ व्हिप कमाल अख्तर ने अपने पद से दिया इस्तीफा. (Photo: X/@KamalAkhtar)
समाजवादी पार्टी में अंदरूनी खींचतान के बीच यूपी विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक (Chief Whip) और मुरादाबाद जिले की कांठ सीट से विधायक कमाल अख्तर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने उनका इस्तीफा स्वीकार भी कर लिया है. कमाल अख्तर का अचानक इस्तीफा देना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. दरअसल, हाल ही में मुरादाबाद में आयोजित पीडीए पंचायत के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आए थे.
मुरादाबाद से सपा सांसद रुचि वीरा इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुई थीं. इसके बाद उन्होंने पार्टी संगठन के कामकाज को लेकर नाराजगी जताई थी. सूत्रों के मुताबिक, रुचि वीरा ने अखिलेश यादव से शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि जिला संगठन एकतरफा तरीके से काम कर रहा है और उनके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है. हालांकि, रुचि वीरा ने सीधे तौर पर कमाल अख्तर का नाम नहीं लिया था, लेकिन पार्टी के भीतर यह माना जा रहा था कि उनका इशारा उन्हीं की तरफ था.
कहा जा रहा है कि लगातार बढ़ते विवाद और संगठन पर उठ रहे सवालों के बीच कमाल अख्तर ने जिला संगठन पर दबाव कम करने और विवाद शांत करने के लिए मुख्य सचेतक पद से इस्तीफा दिया. राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि रुचि वीरा को आजम खान खेमे के करीबी नेताओं में माना जाता है. ऐसे में उनके नाराज होने को पार्टी नेतृत्व गंभीरता से देख रहा था. कमाल अख्तर को लंबे समय से आजम खान विरोधी गुट का नेता माना जाता रहा है, जिससे दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक दूरी बनी रही.
सूत्रों का यह भी कहना है कि कमाल अख्तर खुद भी मुख्य सचेतक का पद छोड़ना चाहते थे. पार्टी के भीतर इस पद को लेकर एक ‘राजनीतिक टोटका’ भी चर्चा में रहता है कि जो नेता इस पद पर रहता है, वह अगला विधानसभा चुनाव हार जाता है. हालांकि, माना जा रहा है कि रुचि वीरा की नाराजगी और संगठनात्मक विवाद के बाद उनके इस्तीफे का फैसला तेज हुआ. कमाल अख्तर के इस्तीफे के बाद माना जा रहा है कि मुरादाबाद मंडल में समाजवादी पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी कुछ हद तक कम हो सकती है. इससे पहले सुभासपा प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने भी रुचि वीरा की नाराजगी को मुद्दा बनाते हुए दावा किया था कि समाजवादी पार्टी में टूट की स्थिति बन सकती है.
रूचि वीरा की राजनीतिक यात्रा:
रूचि वीरा साल 2012 में पहली बार विधायक बनी थी. इसके बाद अगले विधानसभा चुनाव यानी 2017 में समाजवादी पार्टी ने फिर से टिकट दिया लेकिन उनके खिलाफ खड़ी भारतीय जनता पार्टी की सूची ने उन्हे हरा दिया. अगले विधानसभा चुनाव यानी 2022 से पहले समाजवादी पार्टी और रूचि वीरा की राहें अलग हो गईं और वे बहुजन समाज पार्टी से 2022 में चुनाव लड़ लेकिन वहां से भी हारी. बसपा में नाकामी मिलने के बाद रूचि वीरा एक बार फिर सपा में आ गईं और लोकसभा चुनाव की रेस में एसटी हसन जैसे कद्दावर नेता के सामने खड़ी हो गईं.
राजघराने से संबंध रखती हैं रूचि वीरा:
रूचि वीरा राजघराने से संबंध रखती हैं. कहा जाता है कि रूचि वीरा राजा ज्वाला प्रसाद के घराने हैं. राजा ज्वाला प्रसाद को लेकर कहा जाता है कि वो उत्तर प्रदेश के पहले भारतीय चीफ इंजीनियर थे. उन्होंने थॉमसन सिविल इंजीनियरिंग कॉलेज, रूड़की से इंजीनियरिंग की शिक्षा साल 1900 में हासिल की थी, जिसे अब IIT रुड़की के नाम से जाना जाता है. विकीपीडिया के मुताबिक साल 1932 में ज्वाला प्रसाद को ब्रिटिश सरकार ने राजा की उपाधि दी थी. राजा ज्वाला प्रसाद बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर की जिम्मेदारी भी निभा चुके हैं. रूचि वीरा बिजनौर के अंदर स्कूल-कॉलेज के लिए भी पहचानी जाती हैं. कहा जाता है कि रूचि वीरा बिजनौर के कई महत्वपूर्ण कॉलेजों की भी मालकिन हैं. हालांकि हम इस बात की पुष्टि नहीं करते हैं कि वो खुद इन कॉलेज की मालकिन हैं या उनके परिवार का कोई और सदस्य. कुछ स्कूल कॉलेज के नाम नीचे लिखे हुए हैं.
➤ RBD (रानी भाग्यवती देवी) महिला विद्यालय
➤ RJP (राजा ज्वाला प्रसाद) इंटर कॉलेज
➤ KPS (कुंवरानी प्रेमा सत्यवीरा) कन्या इंटर कॉलेज
➤ DDPS (दयावंती धर्म पब्लिक स्कूल)
➤ Veera College of Engineering
