इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम वैश्विक अनुभव और वैज्ञानिक अध्ययन समर्थित: सरकार
इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को वैश्विक अनुभव और वैज्ञानिक अध्ययन का समर्थन: सरकार
एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होने के दावे मंत्रालय ने किये निरस्त
नई दिल्ली पांच जुलाई 2026 : केंद्र सरकार ने शुक्रवार को देश के E20 इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के बारे में सोशल मीडिया पर फैल रही गलत जानकारी का विस्तार से जवाब दिया. इसमें ज्यादा पानी की खपत और इंजन के नुकसान से लेकर इंश्योरेंस निरस्त होने और पर्यावरण को नुकसान जैसे दावै निरस्त किये गये हैं.
पेट्रोलियम और नेचुरल गैस मंत्रालय ने 10 पॉइंट की सफाई में कहा कि यह प्रोग्राम, जिसमें पेट्रोल में 20 परसेंट तक इथेनॉल होता है, साइंटिफिक स्टडीज, इंटरनेशनल अनुभव और रेगुलेटरी सुरक्षा उपायों से सपोर्टेड है. एक लीटर इथेनॉल बनाने में 10,000 लीटर पानी खर्च होने के दावै निरस्त करते हुए मंत्रालय ने कहा कि सिर्फ नेशनल फूड सिक्योरिटी की जरूरते पूरा करने के बाद बचा हुआ सरप्लस चावल ही इथेनॉल बनाने में प्रयुक्त होता है.
इसमें यह भी कहा गया है कि इथेनॉल डिस्टिलरी हर लीटर इथेनॉल के लिए लगभग 3-5 लीटर प्रोसेस्ड पानी इस्तेमाल करती है और पानी को रीसायकल करने के लिए जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम तेजी से चला रही है.मंत्रालय ने यह भी कहा कि मक्का, जो अब प्रोग्राम के तहत सप्लाई होने वाले इथेनॉल का 40 परसेंट से ज्यादा है, को धान के मुकाबले काफी कम सिंचाई की जरूरत होती है और इसे ज़्यादा मिनिमम सपोर्ट प्राइस देकर बढ़ावा दिया जा रहा है.
सरकार ने यह बात भी निरस्त कर दी कि E20 एक अनटेस्टेड फ्यूल है, और कहा कि इथेनॉल-ब्लेंडेड फ्यूल का उपयोग अंतराष्ट्रीय स्तर पर दशकों से हो रहा है. अमेरिका, ब्राजील, कनाडा, थाईलैंड, जापान और कई यूरोपियन देशों ने अलग-अलग लेवल पर इथेनॉल ब्लेंडिंग अपनायी है.
गाड़ियों की परफॉर्मेंस को लेकर चिंतायें दूर करते हुए मंत्रालय ने कहा कि ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) के ट्रायल्स में जिसमें पैसेंजर कारों में लगभग 40,000 किलोमीटर और टू-व्हीलर्स में 20,000 किलोमीटर की दूरी तय की गई, ड्राइविंग या फ्यूल एफिशिएंसी पर कोई खास बुरा असर नहीं पाया गया, माइलेज में सिर्फ मामूली बदलाव हुए.
इसमें यह भी कहा गया है कि E20 के लिए कैलिब्रेट की गई गाड़ियों को इथेनॉल की ज़्यादा ऑक्टेन रेटिंग से फ़ायदा हो सकता है. E20 से इंजन को नुकसान पहुँचने या पार्ट्स में जंग लगने के आरोपों पर मंत्रालय ने ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया की इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ पेट्रोलियम और सोसाइटी ऑफ़ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स के साथ मिलकर की गई स्टडीज का जिक्र किया.
स्टडीज में मेटल और प्लास्टिक पार्ट्स की चलाने की क्षमता या कम्पैटिबिलिटी से जुड़ी कोई दिक्कत नहीं मिली, हालाँकि पुरानी गाड़ियों में कुछ रबर पार्ट्स को पहले बदलने की जरूरत पड़ सकती है. मिनिस्ट्री ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि E20 फ़्यूल के इस्तेमाल से गाड़ी की वारंटी या इंश्योरेंस कवरेज खत्म हो सकता है, और कहा कि ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स और इंश्योरेंस कंपनियों ने साफ किया है कि E20 के लिए डिजाइन या मंजूर की गई गाड़ियाँ लागू वारंटी और इंश्योरेंस शर्तों के तहत आती रहेंगी.
वायरल सोशल मीडिया पोस्ट्स का जवाब देते हुए जिसमें कहा गया था कि चींटियाँ और मधुमक्खियाँ E20 फ्यूल की तरफ इसलिए अट्रैक्ट होती हैं क्योंकि उसमें शुगर होती है, मिनिस्ट्री ने कहा कि फ्यूल-ग्रेड इथेनॉल डिस्टिलेशन से गुजरता है जिससे बची हुई शुगर निकल जाती है और इसमें डीनेचुरेंट्स होते हैं जो कीड़ों को दूर भगाते हैं. इसने यह भी कहा कि पेट्रोल की हाइड्रोकार्बन गंध ब्लेंडेड फ्यूल में ज़्यादा होती है.
सरकार ने उन दावों से भी इनकार किया कि उसने सुप्रीम कोर्ट के सामने E20 प्रोग्राम को एक एक्सपेरिमेंट बताया था, और कहा कि कोर्ट की कार्रवाई ब्लेंडिंग प्रोग्राम की खूबियों के बजाय इथेनॉल खरीद को कंट्रोल करने वाले कॉन्ट्रैक्ट के नियमों से जुड़ी थी. इसने अटॉर्नी जनरल के ऑफिस द्वारा जारी एक क्लैरिफिकेशन का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि मीडिया रिपोर्ट्स जो कुछ और कह रही थी, वे गलत थीं.
मंत्रालय ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि E20 पानी को गाड़ी के फ्यूल टैंक में जाने देता है, और कहा कि मॉडर्न गाड़ियां और फ्यूल रिटेल इंफ्रास्ट्रक्चर पानी को अंदर जाने से रोकने के लिए सेफगार्ड से लैस हैं. इसी तरह, इसने वायरल वीडियो को, जिसमें गन्ने के रस को पेट्रोल में मिलाते हुए दिखाया गया है, मनगढ़ंत बताया, और कहा कि फ्यूल इथेनॉल इंडस्ट्रियल प्रोसेस से बनाया जाता है और तय क्वालिटी स्पेसिफिकेशन्स के हिसाब से ब्लेंड किया जाता है.
एनवायरनमेंट से जुड़ी चिंताओं पर सरकार ने कहा कि इथेनॉल प्लांट्स को कानूनी एनवायरनमेंटल क्लीयरेंस की जरूरत होती है, उन्हें ग्राउंडवॉटर रेगुलेशन का पालन करना होता है और उन्हें जीरो लिक्विड डिस्चार्ज सिस्टम ऑपरेट करना होता है. इसने आगे कहा कि इस प्रोग्राम ने 2014-15 से 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा की फॉरेन एक्सचेंज सेविंग में योगदान दिया है. किसानों को 1.6 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा का पेमेंट तेजी से किया है. कार्बन डाइऑक्साइड एमिशन को लगभग 930 लाख मीट्रिक टन कम किया है और 310 लाख मीट्रिक टन से ज़्यादा क्रूड ऑयल इंपोर्ट को कम किया है.
मंत्रालय के अनुसार भारत ने दिसंबर 2025 में पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का अपना लक्ष्य तय समय से पहले हासिल कर लिया, जबकि 2013-14 में मिश्रण का स्तर लगभग 1.5 प्रतिशत था. इसमें कहा गया है कि स्थापित इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2,000 करोड़ लीटर तक पहुँच गई है, और 2025-26 इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के दौरान खरीद 1,200 करोड़ लीटर से अधिक होने का अनुमान है.

