हरेला से उत्तराखंड में शुरु एक करोड पौधारोपण में से 13 लाख से अधिक हासिल
उत्तराखंड में हरेला पर पहले ही दिन रोप डाले 10 लाख पौधे, जानिए प्रदेशभर में क्या रही स्थिति?
उत्तराखंड में हरेला पर्व पर तय लक्ष्य से ज्यादा हुआ पौधारोपण, हर वर्ग के लोगों ने निभाई पर्यावरण बचाने में भूमिका,जानिए कहां कितना हुआ पौधारोपण?
उत्तराखंड में हरेला पर्व
देहरादून 16 जुलाई 2026 : उत्तराखंड में हरेला पर्व के पहले दिन तय किए गए लक्ष्य से कहीं ज्यादा पौधारोपण हुआ. प्रदेशभर में 10 लाख पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन दोपहर करीब 1 बजे तक ही 10 लाख के इस लक्ष्य को पूरा कर लिया गया. हालांकि, पूरे 1 महीने चलने वाले इस पर्व में करीब एक करोड़ पौधे लगाने का निर्णय लिया गया है, जिसको लेकर पहले दिन की शुरुआत काफी बेहतर मानी जा रही है.
उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी के प्रतीक हरेला पर्व की शुरुआत इस बार रिकॉर्ड पौधारोपण के साथ हुई. राज्य सरकार ने पहले दिन 10 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन लोगों की व्यापक भागीदारी और विभिन्न विभागों की सक्रियता के चलते यह लक्ष्य दोपहर तक ही पार कर लिया गया. वन विभाग के मुताबिक, दोपहर करीब एक बजे तक 10 लाख से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके थे. जबकि, दो बजे तक यह संख्या 11 लाख के पार पहुंच गई.
हरेला पर्व पर तय लक्ष्य से ज्यादा हुआ पौधारोपण
एक महीने में एक करोड़ पौधे लगाने का है लक्ष्य:
इस साल हरेला अभियान में पूरे प्रदेश में एक महीने के भीतर एक करोड़ पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है. अभियान का नोडल विभाग वन विभाग है. जबकि, विभिन्न सरकारी विभागों, स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संस्थाओं, विद्यालयों, सामाजिक संगठनों और आम लोगों को भी इसमें जोड़ा गया है. पहले दिन मिले उत्साहजनक परिणामों ने वन विभाग का मनोबल बढ़ा दिया है.
हरेला पर्व के अवसर पर पूरे उत्तराखंड में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किए गए. कुमाऊं मंडल का मुख्य कार्यक्रम अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर क्षेत्र में आयोजित हुआ, जहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने खुद पौधारोपण कर अभियान का संदेश दिया. वहीं, गढ़वाल मंडल का मुख्य कार्यक्रम देहरादून में आयोजित हुआ, जिसकी अगुवाई वन मंत्री सुबोध उनियाल ने की. दोनों कार्यक्रमों में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों ने काफी संख्या में भाग लिया.
सुबह सात बजे से ही प्रदेशभर में पौधारोपण शुरू हो गया था, लेकिन लगभग 11 बजे के बाद अभियान ने तेज गति पकड़ ली. सरकारी विभागों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों, विद्यालयों और सामाजिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी के कारण लक्ष्य निर्धारित समय से काफी पहले ही पूरा हो गया. इसे राज्य में चल रहे एक माह के हरेला अभियान की बेहद सकारात्मक शुरुआत माना जा रहा है.
भारतीय किसान यूनियन (सर्व ) देहरादून ने हरेला महोत्सव पर DAV इंटर कॉलेज देहरादून में पौधारोपण किया गया जिसमें जिला अध्यक्ष सागर कपिल, कोषाध्यक्ष सुनील कुमार. संगठन मंत्री सरदार गुरप्रीत सिंह , महासचिव कल्पेंद्र, उपाध्यक्ष हेमंत. सहसचिव इमरान , अरविंद , मीडिया प्रभारी सौरभ कुमार,जिला संयुक्त सचिव वेदपाल एवं अन्य सदस्यों ने भाग लेकर इस महोत्सव को खूबसूरत रूप दिया।
प्रदेशभर में पौधारोपण की स्थिति: जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो देहरादून में लगभग एक लाख पौधे लगाए गए. उत्तरकाशी में 75 हजार, चमोली में 85 हजार, टिहरी में 70 हजार, पौड़ी में 90 हजार, रुद्रप्रयाग में 40 हजार और हरिद्वार में लगभग 35 हजार पौधों का रोपण किया गया. कुमाऊं क्षेत्र में नैनीताल जिले ने 1 लाख 40 हजार पौधों के साथ सबसे ज्यादा योगदान दिया.
हरेला पर पौधारोपण की स्थिति
इसके अलावा उधम सिंह नगर में 1 लाख 20 हजार, पिथौरागढ़ में 1 लाख 30 हजार, अल्मोड़ा में 80 हजार, बागेश्वर में 70 हजार और चंपावत में लगभग 80 हजार पौधे लगाए गए. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि पूरे प्रदेश में अभियान को व्यापक जनसमर्थन मिला. हर जगह पौधों को रोपने के लिए छात्रों से लेकर युवा वर्ग काफी उत्साहित नजर आए.

देहरादून में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वन मंत्री सुबोध उनियाल ने केवल नए पौधे लगाने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि पिछले कुछ सालों में लगाए गए पौधों का भी निरीक्षण किया. उन्होंने सालों 2024 और 2025 के हरेला अभियान के दौरान लगाए गए पौधों की वृद्धि और उनकी स्थिति का जायजा लिया. निरीक्षण के बाद उन्होंने पौधों की बेहतर ग्रोथ पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि केवल पौधारोपण करना ही उद्देश्य नहीं है. बल्कि, लगाए गए पौधों का संरक्षण और उनकी देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण है.
“वन विभाग निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप कार्य कर रहा है. इस बार भी एक करोड़ पौधारोपण का लक्ष्य पूरा करने के लिए सभी स्तरों पर व्यापक तैयारियां की गई हैं. पिछले सालों में लगाए गए पौधों की अच्छी वृद्धि इस बात का प्रमाण है कि विभाग केवल संख्या बढ़ाने पर नहीं, बल्कि पौधों के संरक्षण और उनके जीवित रहने पर भी समान रूप से ध्यान दे रहा है. पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ना ही सरकार की प्राथमिकता है.”– सुबोध उनियाल, वन मंत्री, उत्तराखंड
पेड़ कटान के विरोध में ‘ब्लैक हरेला अभियान’ चलाने वालों को वन मंत्री की दो टूक: वहीं, वन मंत्री सुबोध उनियाल ने देहरादून-ऋषिकेश हाईवे पर सात मोड़ पर पेड़ कटान का विरोध और ‘ब्लैक हरेला अभियान’ चलाए जाने पर भी प्रतिक्रिया दी.
देहरादून में रिकॉर्ड पौधारोपण
डेल्टा डिफेंस एकेडमी,200 बीघा कॉलोनी,रायपुर ने वृक्षारोपण कर मनाया हरेला पर्व

पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से डेल्टा डिफेंस एकेडमी, देहरादून द्वारा आज एक भव्य वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हरेला पर्व पर विचार रखते हुए कांग्रेस प्रदेश महामंत्री महेंद्र सिंह नेगी गुरुजी ने कहा कि हरेला पर्व लोक संस्कृति एवं प्रकृति का पर्याय है उत्तराखंड की संस्कृति में हमेशा ही पर्यावरण संरक्षण का सममिश्रण रहा है। कार्यक्रम में एकेडमी के निदेशक कुलवीर सिंह ,फोरेस्टर सरदार सिंह चौहान, हरीश गैरोला रेंजर अधिकारी,बी. डी. जोशी उपरेंजर अधिकारी,किद्दूवाला, शिक्षकों, स्टाफ तथा विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और परिसर एवं आसपास के क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए।
इस अवसर पर उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में ही सहायक नहीं हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने का आधार भी हैं। विद्यार्थियों को अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनकी नियमित देखभाल करने का संकल्प भी दिलाया गया।
एकेडमी के निदेशक ने अपने संबोधन में कहा कि डेल्टा डिफेंस एकेडमी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ सामाजिक एवं पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के प्रति भी सदैव सजग रहती है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से प्रकृति संरक्षण के लिए निरंतर योगदान देने का आह्वान किया।
कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने लगाए गए पौधों की देखभाल करने का संकल्प लिया तथा पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुँचाने का संकल्प दोहराया। यह कार्यक्रम उत्साह एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
कार्यक्रम में सर्वश्री आरएस बिष्ट , वसंत पंत, डीएस नेगी, चंदन सिंह रावत, एसएस पटवाल, आर पी सुंदरियाल, जवाहर सिंह पवार आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे

क्या है हरेला? बता दें कि देवभूमि उत्तराखंड में ऋतुओं के अनुसार कई तीज त्योहार मनाए जाते हैं. ये त्योहार यहां की संस्कृति और परंपराओं को जीवंत रखे हुए हैं. हरेला का शाब्दिक अर्थ हरियाली होता है. हरेला प्रकृति से जुड़ा उत्तराखंड का पारंपरिक लोकपर्व है, जिसे प्रकृति, हरियाली और पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है.
देहरादून में हरेला कार्यक्रम
पिछले कुछ सालों में राज्य सरकार ने इसे जनभागीदारी वाले बड़े पर्यावरणीय अभियान का स्वरूप दिया है. इस बार पहले ही दिन निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा पौधारोपण होना, इस बात का संकेत माना जा रहा है कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों में जागरूकता लगातार बढ़ रही है. वहीं, अब वन विभाग की नजर अगले एक महीने में एक करोड़ पौधे लगाने के लक्ष्य को सफलतापूर्वक पूरा करने और लगाए गए पौधों के बेहतर संरक्षण पर रहेगी.
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