‘आस्था बदलते ही SC श्रेणी समाप्त…’, सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त की पुनर्विचार याचिका,पूर्व आदेश यथावत

‘आस्था बदलते ही SC श्रेणी समाप्त…’, सुप्रीम कोर्ट ने निरस्त की पुनर्विचार याचिका,पूर्व आदेश यथावत

‘आस्था बदला तो समाप्त हो जाएगी SC श्रेणी…’,

नई दिल्ली 27 जुलाई 2026। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर पुनर्विचार से मना करते हुए कहा कि हिंदू, सिख या बौद्ध पंथ छोड़ने पर SC श्रेणी समाप्त हो जाती है.

SC श्रेणी पर सुप्रीम कोर्ट ने यथावत रखा पुराना फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने SC श्रेणी समाप्त होने वाले फैसले पर पुनर्विचार याचिका निरस्त  की. अदालत ने मार्च 2026 का निर्णय यथावत रखा है. उस निर्णय में कहा गया था कि अगर कोई व्यक्ति अनुसूचित जाति (SC) से होने के बावजूद हिंदू, सिख या बौद्ध आस्था छोड़कर ईसाई या किसी अन्य आस्था अपना लेता है, तो उसकी SC श्रेणी समाप्त हो जाती है.

जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस मनमोहन की बेंच ने कहा कि पुनर्विचार याचिका और 24 मार्च 2026 के फैसले का अध्ययन करने के बाद उन्हें कोई ऐसी कानूनी गलती नहीं मिली, जिसके आधार पर पुराने फैसले में बदलाव किया जाए. कोर्ट ने इस मामले में खुली सुनवाई की मांग भी निरस्त कर दी.

मार्च 2026 के निर्णय में क्या कहा गया था?
सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2026 के निर्णय में कहा था कि हिंदू, सिख या बौद्ध आस्था छोड़कर किसी अन्य आस्था को अपनाने पर व्यक्ति की SC श्रेणी तुरंत समाप्त हो जाती है. ऐसा व्यक्ति SC समुदाय को मिलने वाले आरक्षण, संवैधानिक लाभ और SC/ST अत्याचार निवारण कानून में मिलने वाली सुरक्षा का दावा नहीं कर सकता. संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 में SC श्रेणी सिर्फ हिंदू, सिख और बौद्ध आस्था मानने वालों के लिए है.

क्या दोबारा SC श्रेणी मिल सकता है?
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया था कि अगर कोई व्यक्ति बाद में फिर से दोबारा लौटकर हिंदू, सिख या बौद्ध आस्था अपना लेता है, तो कुछ शर्तों के पूरा होने पर उसकी SC श्रेणी यथावत हो सकती है. लेकिन इसके लिए उसे यह सिद्ध करना होगा कि वह जन्म से अधिसूचित अनुसूचित जाति का सदस्य था. उसने वास्तव में हिंदू, सिख या बौद्ध आस्था में वापसी की है और पहले अपनाई आस्था पूरी तरह छोड़ दिया है. उसकी मूल जाति के समुदाय ने उसे फिर से स्वीकार कर लिया है. कोर्ट ने कहा था कि इनमें से कोई भी शर्त पूरी न होने पर SC श्रेणी वापस नहीं दिया जा सकता.

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