कॉकरोच गुण्डागर्दी का पुलिस कर रही हिसाब,CJP बता रही थी भाजपाई गुंडे

पहले भाजपा के गुंडे बताया… एक्शन होने लगा तो क्यों बवाल कर रहे कॉकरोच?

नई दिल्ली 27 जुलाई  , 2026, जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में हुई हिंसा को लेकर दिल्ली, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और असम में पुलिस एक्शन तेज हो गया है. दिल्ली पुलिस का दावा है कि उसके पास 100 से अधिक CCTV और वीडियो फुटेज हैं, जिनके आधार पर हिंसा में शामिल लोगों की पहचान हो रही है. दूसरी ओर CJP ने आरोप लगाया है कि सरकार आंदोलन खत्म कराने में हुए समझौते का पालन नहीं कर रही और प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई जारी है. संगठन ने धमकी दी है कि FIR वापस नहीं हुईं और गिरफ्तार लोगों को रिहा नहीं किया गया तो दोबारा आंदोलन शुरू होगा.

छात्र आंदोलन के नाम पर जो लोग गुंडई कर हिंसा फैला रहे थे, उनका एक एक करके हिसाब हो रहा है. ताबड़तोड़ एक्शन हो रहा है. पहचान हो चुकी है. धरपकड़ चल रही है. चाहे दिल्ली हो, बिहार हो, बंगाल हो… ऐसे लोग अब बचेंगे नहीं, जिन्होंने छात्र आंदोलन में घुसकर उत्पात मचाया, हुड़दंग किया, हिंसा फैलाई. पुलिस पर हमला किया, जवानों को पीटा, उन पर पत्थर चलाए, सिर फोड़े…

छात्र आंदोलन के नाम पर जो लोग गुंडई करते हिंसा फैला रहे थे, उनका एक एक करके हिसाब हो रहा है.

ऐसे लोग सोच रहे थे कि ये छात्र आंदोलन के नाम पर बच जाएंगे, इन पर कोई हाथ नहीं डालेगा, लेकिन ये लोग भूल गए कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं.आज नहीं तो कल इनके गले तक कानून के हाथ पहुंच जाएंगे. यही  हो रहा है, लेकिन जब ये हो रहा है तो इंडी और कॉकरोच पार्टी तिलमिला गए हैं. पहले ये कह रहे थे कि जिन्होंने प्रोटेस्ट में हिंसा की, वो बीजेपी के गुंडे हैं, लेकिन एक्शन होने लगा है तो ये बवाल करने लगे कि ऐसा क्यों हो रहा है.
हिंसा फैलाने वालों का इलाज हो रहा
कॉकरोच पार्टी तो फिर से प्रोटेस्ट की धमकी दे रही है. उधर इंडी वाले इसी को लेकर संसद में माहौल बना रहे हैं. जबकि छात्र आंदोलन में क्रिमिनल्स तक घुस गए थे. छात्र आंदोलन की आड़ लेकर पूरे देश में आग लगाने की तैयारी थी. इसीलिए सिर्फ दिल्ली के जंतर मंतर पर ही नहीं, देश के अलग अलग हिस्सों में प्रोटेस्ट के नाम पर हिंसा हुई. लेकिन अब इन हिंसकों का इलाज हो रहा है।

कोलकाता में छात्र आंदोलन के नाम पर जो प्रोटेस्ट हुआ था, उसमें वही पैटर्न दिखा कि पीएम के खिलाफ भद्दी-भद्दी बातें कहो, पब्लिक प्रॉपर्टी तोड़ो, पुलिस पर हमले करो. मीडिया पर हमले करो. ये सब करने वालों पर अब पुलिस ताबड़तोड़ एक्शन ले रही है. मीडिया पर हमले को भड़काने के आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर कोलकाता की सड़कों पर नंगे पांव परेड कराई गई. पुलिस इनसे पूछताछ कर रही है. कोलकाता में हंगामा और बवालियों को गिरफ्तार किया जा रहा है. बाकी और आरोपितों की भी धर पकड़ जारी है.

कॉकरोच पार्टी के प्रोटेस्ट के दौरान मीडिया पर हमले की कई तस्वीरें आई थी. मीडिया को जानबूझ के निशाना बनाया गया. कई पत्रकारों पर जानलेवा हमले हुए. महिला रिपोर्टर्स से बदसलूकी की गई, महिला पत्रकारों को भीड़ ने बुरी तरह से घेर के अटैक किया. दिल्ली बिहार और बंगाल तीनों जगह ऐसा देखने को मिला. इसके विरोध में कोलकाता में मीडियाकर्मियों ने विरोध मार्च निकाला. कोलकाता में पत्रकारों ने मार्च निकाला और कहा कि मीडिया पर हमले बंद होने चाहिए.

इधर बिहार में भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा और बवाल करने वालों पर एक्शन हो रहा है. बिहार में CJP के समर्थन में हुए प्रोटेस्ट में भयंकर हंगामा हुआ था. पुलिस के साथ टकराव हुआ था. पुलिस पर पथराव भी किया गया था. इसके बाद पुलिस ने हंगामा करने वालों को ट्रेस किया और उनकी तस्वीरें चौराहों पर चिपका दी हैं. इसमें छात्रों और उनके परिवार वालों से अपील की गई है कि शांति के साथ प्रदर्शन करेंगे. नहीं तो हंगामा करने वालों पर एक्शन लिया जाएगा.

बिहार पुलिस ने हंगामा करने वाले डेढ़ सौ से ज्यादा लोगों की फोटो जारी की है. इतना ही नहीं, जैसे-जैसे इन लोगों की शिनाख्त हो रही है, और लोकेशन का पता चल रहा है. सभी को पूछताछ के लिए पुलिस ले जा रही है. अगर इन लोगों ने कुछ नहीं किया होगा तो आराम से छूट जाएंगे. लेकिन अगर किसी ने भी हंगामा, पत्थरबाजी या बवाल किया होगा तो वो धरा जाएगा.

भारत में लोगों को भड़का रहा था पाकिस्तान!
इसी तरह से पेपरलीक पर महाराष्ट्र में भी प्रोटेस्ट हुआ था. महाराष्ट्र में भी जमकर हंगामा दिखा था. पुलिस के साथ भिड़ंत की तस्वीरें सामने आई थीं. अब महाराष्ट्र की साइबर सेल की इस प्रोटेस्ट पर बड़ा अनावरण किया है कि CJP प्रोटेस्ट में पाकिस्तान-मलेशिया से सोशल मीडिया अकाउंट चले थे. साइबर सेल ने 500 से ज्यादा सोशल मीडिया अकाउंट ट्रेस किये. इससे देश में माहौल खराब करने की कोशिश में पाकिस्तान का रोल सामने आया. पता चला कि इंस्टाग्राम, फेसबुक, X से भारत में लोगों को पाकिस्तान भड़का रहा था.

असम में भी कॉकरोच पार्टी के सपोर्ट में विरोध प्रदर्शन हुए थे. प्रोटेस्ट SFI ने आयोजित किया था. इसमें भीड़ को उकसाने वाले नारे लगे. इसी पर गुवाहाटी पुलिस ने SFI के 6 लोग पकड़े हैं । असम पुलिस के अनुसार, प्रोटेस्ट में शांति भंग की आशंका थी. भीड़ भड़काने की कोशिश हो रही थी. गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ हो रही है. पुलिस को विदेशी फंडिंग की भी आशंका है. विदेशी फंडिंग के एंगल से भी जांच हो रही है.

वैसे तो जांच में पता चलेगा कि विदेशी फंडिंग हुई थी या नहीं. लेकिन याद करिए ये वही पुरानी टूलकिट की तरह लग रहा है, और अब तो इस में ग्रेटा थनबर्ग भी शामिल हो गई हैं. वही ग्रेटा थनबर्ग जो भारत के खिलाफ विदेशों में माहौल बनाने में आगे रहती हैं.
पेपरलीक और छात्रों के नाम हुए प्रदर्शन की एक ही डिमांड थी कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हो. लेकिन इस प्रोटेस्ट की लाइन और लेंग्थ शुरू से ही अलग दिख रही थी. प्रोटेस्ट में पीएम मोदी को अपशब्द कहे गए. पोस्टर बैनर के साथ ऐसे-ऐसे बयान दिए गए जो कोई भी एक्सेप्ट नहीं कर सकता. इन सब पर अब दिल्ली पुलिस का एक्शन हो रहा है.
दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस दिया है. PM मोदी और केंद्र सरकार विरोधी अभद्र पोस्ट्स हटाए गए हैं. दिल्ली पुलिस ने ऐसी सैकड़ों अभद्र पोस्ट्स चिह्नित किये. AI से बनीं अपमानजनक पोस्ट्स जांच परिधि में हैं. दिल्ली पुलिस ने IT एक्ट में नोटिस जारी किया है.
यानी जो लोग ये सोच रहे थे कि वो सोशल मीडिया पर किसी के बारे में कुछ भी अपशब्द कहेंगे और कोई एक्शन नहीं होगा तो गलत था. दिल्ली पुलिस लगातार सोशल मीडिया की निगरानी कर रही है.

ये कैसा प्रोटेस्ट?
पूरे देश ने देखा है कि जंतर मंतर पर कैसी-कैसी बातें कहीं गई. शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट ऐसे होता है कि आप किसी को गालियां दे दो, भद्दे-भद्दे इशारे किए जाएं. GenZ के नाम पर इसे जस्टिफाई भी किया जा रहा है. लेकिन क्या ऐसा  करने वालों को परिवार वाले इसे स्वीकारेंगे.
प्रोटेस्ट का मतलब ये नहीं है कि हिंसा हो, गालियां दो, लेकिन कॉकरोच पार्टी इसे भी जस्टिफाई कर रही हैं. कॉकरोच पार्टी प्रवक्ता सौरव दास ने कहा है कि ‘सोशल मीडिया पर चल रहे मजाक से किसी को क्या दिक्कत है. जो आपके लिए ऑफेंसिव है शायद हमारे लिए ऑफेंसिव नहीं है. पुलिस को छूट दी गई तो वो इसे सेंसरशिप टूल जैसे यूज करेगी. सरकार इन सब की बजाय हमारी मांग पर ध्यान दे. बच्चे फिलहाल चले गए हैं लेकिन वापस आने में टाइम नहीं लगेगा.’
यानी किसी को गालियां और उसके बारे में अभद्र कमेंट  कॉकरोच पार्टी के लिए सिर्फ मजाक है. अब ये लोग कह रहे हैं कि एक्शन क्यों हो रहा है. कॉकरोच पार्टी ने तो सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर एक्शन होता रहा तो फिर से आंदोलन होगा. सीजेपी ने कहा, ‘हमारे साथ हुए समझौते को तोड़ा जा रहा है. बिहार-बंगाल में सैकड़ों छात्र गिरफ्तार हुए हैं. सभी प्रदर्शनकारियों को हम लीगल मदद देंगे. 28 जुलाई तक सभी FIR वापस ली जाएं और सभी प्रदर्शनकारी छोड़े जाए. आगे किसी भी प्रदर्शनकारी पर FIR ना हो. ऐसा नहीं होने पर हम फिर प्रदर्शन करेंगे.’

यही कॉकरोच पार्टी वाले कह रहे थे कि जो भी हिंसा कर रहा है वो हमारा समर्थक नहीं है. और वो हिंसा की निंदा करते हैं. अभिजीत दीपके ने तो यहां तक कह दिया था कि जो भी हिंसा या हंगामा हो रहा है वो बीजेपी और संघ के लोग कर रहे हैं. कॉकरोच पार्टी वाले फिर से आंदोलन की धमकी दे रहे हैं और वो भी सिर्फ इसलिए कि पुलिस उन प्रदर्शनकारियों पर एक्शन ले रही है. जिन्होंने हिंसा हंगामा और गुंडई की थी.

जंतर मंतर पर जो कुछ भी हुआ, उसकी पूरी डीटेल दिल्ली पुलिस के पास है. दिल्ली पुलिस के पास 100 ऐसे वीडियो हैं, जिसमें हिंसा की पूरी तस्वीर दिख रही है. दिल्ली पुलिस का दावा है कि 20 और 22 जुलाई को हुई हिंसा से जुड़े करीब 100 CCTV वीडियो जांच का हिस्सा हैं. पुलिस के अनुसार, इन वीडियो में प्रदर्शनकारियों की कई गतिविधियां रिकॉर्ड हुई हैं. फुटेज में भीड़ को सुरक्षा घेरा तोड़ते, पुलिस पर हमला करते, पथराव करते और सरकारी व निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हुए देखा जा सकता है.

2873 लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड मिले
और ये हिंसा, गुंडई छात्रों ने तो की नहीं है. छात्रों के आंदोलन के नाम पर जो बवाल हुआ, उस पर दिल्ली पुलिस ने डीटेल जारी की है. जिसके बारे में जानकर आप हैरान रह जाएंगे. प्रदर्शन स्थल पर 2873 लोगों के आपराधिक रिकॉर्ड मिले हैं. इसमें से 989 लोगों का गंभीर अपराध का इतिहास रहा है. 101 लोग हत्या के मामलों में शामिल रहे हैं. 62 लोगों पर हत्या की कोशिश के मामले दर्ज हैं. 284 लोग डकैती या लूट के मामलों में शामिल रहे हैं. 61 लोगों पर रेप के मामले दर्ज हैं. 6 लोग POCSO एक्ट के मामलों में आरोपित रहे हैं. 25 लोग महिलाओं से छेड़छाड़ के मामलों में शामिल रहे हैं. 229 लोगों का आर्म्स एक्ट में आपराधिक रिकॉर्ड है. 135 लोग झपटमारी के मामलों में शामिल रहे हैं. 19 लोगों पर अपहरण के मामले दर्ज हैं. 67 लोग नशीले पदार्थों और NDPS एक्ट से जुड़े मामलों में शामिल रहे हैं.

इस डीटेल से साफ है कि प्रोटेस्ट साइट और उसके आसपास मौजूद लोगों में सिर्फ छात्र ही नहीं थे. बल्कि आदतन अपराधी भी थे जिन पर हत्या, रेप, डकैती जैसे गंभीर मुकदमें हैं. क्या इन पर एक्शन का भी कॉकरोच या इंडी गठबंधन विरोध करेगा.

CJP spokesperson Saurav Das says We do not accept Supreme Court stance government must release all protesters
‘सुप्रीम कोर्ट हमें मंजूर नहीं’: सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास बोले- सभी प्रदर्शनकारी रिहा करे सरकार

सीजेपी ने छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में एफआईआर वापस लेने और हिरासत में लिए लोगों की रिहाई पर सरकार से लिखित आश्वासन की अपेक्षा जताई है। पार्टी का कहना है कि अगर वादे समय पर पूरे नहीं हुए तो आंदोलन फिर हो सकता है। वहीं, सीजेपी प्रवक्ता सौरव दास ने सुप्रीम कोर्ट निर्देश मानने से इनकार कर दिया है।

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रवक्ता सौरव दास ने आज कहा कि उन्हें प्रदर्शनकारियों पर दर्ज एफआईआर वापसी और हिरासत में लिए या गिरफ्तार लोगों की रिहाई पर आज लिखित गारंटी की उम्मीद थी। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट कहा, ”हमारी मांग थी कि सभी प्रदर्शनकारी छोड़े जाएगें। केंद्र सरकार ने इस पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में सहमति भी जताई थी। अगर सुप्रीम कोर्ट कहता है कि जिन पर पहले एफआईआर हैं, उन्हें मत छोड़िए तो ये हमें मंजूर नहीं है।”

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को निर्देश दिया था कि नीट-यूजी 2026 पेपर लीक के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन में गिरफ्तार या हिरासत में लिए गए 18 वर्ष से कम आयु के छात्र रिहा किये जाए, बशर्ते उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड न हो।

सीजेपी की केंद्र सरकार को चेतावनी
सीजेपी प्रवक्ता ने कहा, “अगर सुप्रीम कोर्ट युवाओं के हित में है तो हम ऐसे आदेशों या फैसलों का स्वागत करते हैं। दूसरी ओर, हम लंबे समय से जमीनी स्तर पर सक्रिय हैं और हमारी कुछ मांगें हैं, जिन्हें पूरा किया जाना सबसे महत्वपूर्ण है। हमारी प्रमुख मांगों में से एक यह थी कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सभी एफआईआर वापस ली जाएं और सरकार भविष्य में किसी भी प्रदर्शनकारी के खिलाफ कोई प्रतिशोधात्मक कार्रवाई न करे। हमें उम्मीद थी कि आज इस संबंध में लिखित गारंटी जारी हो जाएगी और हिरासत में या गिरफ्तार सभी लोग छोड़ दिये जाएगें।”

सीजेपी ने देशभर में प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर वापस लेने को मंगलवार तक की समयसीमा तय की थी। सौरव दास ने कहा कि अगर उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो युवा फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। सुप्रीम कोर्ट जो भी कहे, वह हमारी मांगों के ‘अतिरिक्त’ होना चाहिए। पहले हमारी मांगें पूरी की जाएं, उसके बाद सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों या उससे मिलने वाली किसी भी राहत का पालन करे।”

सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे क्या निर्देश?
सीजेपी के जंतर-मंतर पर 37 दिन प्रदर्शन बाद सरकार ने उनकी मांगें मान ली। धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षा मंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया। सरकार ने आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिजनों को उचित मुआवजा और प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर वापस लेने पर भी सहमति जताई थी।

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि फिलहाल छात्रों पर कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। अदालत ने प्रदर्शन से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित रखने का आदेश देकर कहा कि उसके सामने रखे गए आरोपों की प्रथमदृष्टया स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी।

शीर्ष अदालत ने क्यों दिए ये निर्देश?
अदालत ने सभी राज्यों को निर्देश दिए कि छात्र प्रदर्शनों में गिरफ्तार या हिरासत में लिए 18 वर्ष से कम आयु के ऐसे बच्चे रिहा किये जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।” सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि छात्र प्रदर्शनों से जुड़े मामलों में गिरफ्तार ऐसे लोग भी छोडे जाए, जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। हालांकि, अदालत ने कानून के अनुसार जांच जारी रखने की अनुमति दी।

ये निर्देश भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने जंतर-मंतर और दिल्ली के अन्य स्थानों से शुरू  तथा बाद में महाराष्ट्र, बिहार, गुजरात, असम, पश्चिम बंगाल और केरल तक फैले छात्र प्रदर्शनों में पुलिस के अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप की याचिकाओं पर दिये है।

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